13/07/2026
कल के DBM INSIGHT SERIES में हमारे साथ थे PRAVEEN THAKUR जी। आप हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला से आते हैं।
👨🏼🎓 आपकी शैक्षणिक यात्रा सरस्वती विद्या मंदिर और नवोदय विद्यालय से NIT Hamirpur, IIT Kharagpur और IIT Delhi तक रहा।
आपने कल हम सभी को राजनीति, नेतृत्व, स्वयंसेवक जैसे विषयों को आसान शब्दों में बताया।
➡️आपने बताया नेतृत्व करने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी होता है समाज या जिनका हम नेतृत्व कर रहे है उनसे जुड़ाव रखना।
➡️ अगर हम वास्तव में समाज में कोई भी बदलाव चाहते है तो राजनीति एक सशक्त माध्यम हैं।
➡️आपने बताया संघ एक विशाल वृक्ष की भांति अपने छांव में व्यक्ति निर्माण और चरित्र निर्माण करके हमारे समाज को बेहतर बनाने में सहयोग कर रहा हैं।
➡️ हम आज जो भी है हम अपने समाज के ही प्रतिबिंब है, अगर हम समाज में वास्तव में बदलाव चाहते है तो हमें स्वयं व्यक्तिगत स्तर पर बदलाव करना होगा।
🫵🏼मुख्य बिंदु: अनुभव का कोई विकल्प नहीं होता है।
जय हिंद।🇮🇳
05/07/2026
कल के DBM INSIGHT SERIES में हमारे साथ जुड़े थे DR, PARIKSH*T PAREEK जी।
आपकी शैक्षणिक यात्रा राजस्थान के टेक्निकल यूनिवर्सिटी से B-TECH , M- TECH ( IIT DELHI )और NANYANG TECHNOLIGICAL UNIVERSITY ( SINGAPORE) से Ph.d तक रही। आपको विश्व प्रसिद्ध Los Alamos Laboratory (USA) में शोध का भी अनुभव रहा ।
आपने अपने जीवन यात्रा साझा किया साथ ही कई मुद्दों पर हम सभी का मार्गदर्शन किया । आपने बताया नए पीढ़ि के बच्चों में जिज्ञासा का होना नवाचार के लिए बहुत आवश्यक है । किताबों में लिखे को आंख बंद करके विश्वाश नहीं करने बल्कि प्रश्न करके उसे समझने का प्रयास करना चाहिए। आपने शोध ( research) को बच्चों के बीच बड़े ही आसान शब्दों में समझाया।
आपने बताया कि हम जो करना चाहते है वो सिर्फ और सिर्फ हमारी जिम्मेदारी है , और हमें उसे पूरा करने के लिए कुछ भी बहाना करने से बचना चाहिए और प्रयास निरंतर जारी रखना चाहिए। साथ ही अगर हम जीवन में लक्ष्य चुनते है तो हमें पहले ही ये निर्धारित करना चाहिए कि हम इसके पीछे कितना समय व्यय कर सकते है । विफलता से घबराना नहीं चाहिए । हम सभी को अपने जीवन में अपना passion का पता करना चाहिए, और ये होगा अलग अलग कार्यों को करने से ।
और अंत में आपने हम सभी के विकसित भारत की सपने को साकार करने के लिए एक बहुत ही सरल और गहरा मंत्र दिया - ‘‘ वर्तमान में हम जो भी कार्य कर रहे है सिर्फ उसे पूर्णतः ईमानदारी से करे तो स्वतः ही विकसित भारत का सपना निश्चित समय में साकार हो जाएगा ''।
जय हिंद।
30/06/2026
पिछले रविवार [28 जून 2026] को DBM Insight Series में हमारे बीच धर्मदास सिंह जी थे।
धर्मदास जी मूलतः *ग्वालियर (मध्य प्रदेश)* से हैं। उन्होंने *17 वर्षों तक विवेकानन्द केन्द्र* में *जीवनव्रती प्रचारक* के रूप में कार्य करते हुए भारत के विभिन्न क्षेत्रों में सेवा का कार्य किया है।
उन्होंने अपने बचपन के अनुभव बताते हुए युवाओं को शिक्षा के साथ - साथ समाज से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया पढ़ाई के साथ - साथ समाजिक कार्यों से जुड़ना भी शिक्षा का ही अंग है।
बचपन में संघ की शाखा और विवेकानंद केंद्र के संस्कार वर्गों में जाना हुआ। फिर सामाजिक कार्यों से जुड़े और धीरे - धीरे विवेकानंद केंद्र के पूर्णकालिक कार्यकर्त्ता बन गए।
स्वामी विवेकानंद जी के विचारों ने आपके जीवन पर गहरी छाप छोड़ी। उन्होंने सत्र में बताया कि कैसे विवेकानंद जी की राष्ट्र भक्ति विदेश जाने के बाद और बढ़ गई तथा भारत का कण - कण उनके लिए चन्दन बन गया था।
दक्षिण भारत में समुद्र तट के जिस स्थान पर विवेकानंद जी ने तीन दिनों तक ध्यान किया था उसी स्थान पर माननीय एकनाथ राणाडे जी के नेतृत्व में पूरे भारतवासियों के सहयोग से जीवंत शिला स्मारक बनाया गया। विवेकानंद शिला स्मारक की स्थापना के बाद माननीय एकनाथ जी ने विवेकानंद केंद्र की स्थापना की जिसका उद्देश्य राष्ट्र भक्ति, सेवाभाव और त्याग से प्रेरित युवा पीढ़ी तैयार करना है जो भारत माता को विश्व गुरु के पद पर आसीन करने में अपनी भूमिका निभाएंगे।
अंत में आपने युवाओं को तीन प्रश्नों पर विचार करने के लिए कहा -
1️⃣ मैं कौन हूँ?
2️⃣ जीवन का क्या उद्देश्य है?
3️⃣ मेरा जन्म भारत में क्यों हुआ है?
24/06/2026
इस रविवार दिनांक 21 june 2026 को DBM Insight Series के विशेष सत्र में हमारे बीच ISKCON के सम्माननीय संत सत्य स्वरूप दास जी उपस्थित रहे। विषय था— भक्ति योग, ज्ञान योग एवं कर्म योग।
जीवन में अधिकांश लोग शिक्षा प्राप्त करते हैं, करियर बनाते हैं, सफलता का पीछा करते हैं और समाज द्वारा निर्धारित उपलब्धियों को हासिल करने का प्रयास करते हैं। परंतु कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो इन सबके बीच एक प्रश्न को छोड़ नहीं पाते—
मैं कौन हूँ?
मैं यहाँ क्यों हूँ?
और जीवन का वास्तविक उद्देश्य क्या है?
इन्हीं गहन प्रश्नों के उत्तर खोजने की दिशा में सत्य स्वरूप दास जी ने भक्ति योग, ज्ञान योग एवं कर्म योग के माध्यम से जीवन को समझने का सरल एवं व्यावहारिक मार्ग प्रस्तुत किया।
उन्होंने बताया कि भक्ति योग ईश्वर के प्रति प्रेम, श्रद्धा और समर्पण का मार्ग है, ज्ञान योग आत्मबोध और सत्य की खोज का मार्ग है, जबकि कर्म योग निःस्वार्थ भाव से अपने कर्तव्यों का पालन करने की प्रेरणा देता है।
सत्र के दौरान उन्होंने एक अत्यंत महत्वपूर्ण बात कही कि आध्यात्मिक उन्नति के लिए जीवन का त्याग करना आवश्यक नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति अपने वर्तमान दायित्वों और कार्यक्षेत्र में रहते हुए भी भगवद्गीता के सिद्धांतों को अपनाकर एक सफल, संतुलित और प्रेरणादायक जीवन जी सकता है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि यदि कोई किसान है, तो वह खेती करते हुए भी भगवद्गीता के ज्ञान को अपने जीवन में उतार सकता है। इससे वह न केवल अपने कार्य में उत्कृष्टता प्राप्त कर सकता है, बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकता है। इसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने क्षेत्र में रहते हुए आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाकर अपने जीवन और कार्य को अधिक सार्थक बना सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि हर व्यक्ति मोंक नहीं बन सकता, हर व्यक्ति शिक्षक नहीं बन सकता, परंतु समाज में कुछ लोगों का आध्यात्मिक ज्ञान के संरक्षण और प्रसार के लिए समर्पित होना आवश्यक है। ऐसे ही लोग भक्ति, ज्ञान और कर्म के सिद्धांतों को समाज तक पहुँचाते हैं तथा आने वाली पीढ़ियों को सही दिशा प्रदान करते हैं।
सत्य स्वरूप दास जी ने विशेष रूप से इस बात पर बल दिया कि भक्ति योग, ज्ञान योग और कर्म योग तीन अलग-अलग मार्ग नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं। इन तीनों का अंतिम लक्ष्य व्यक्ति के जीवन को सार्थक बनाना, आत्मिक उन्नति करना तथा मानवता के कल्याण में योगदान देना है।
उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसान हो, छात्र हो, शिक्षक हो, इंजीनियर हो, व्यवसायी हो या किसी अन्य क्षेत्र में कार्यरत हो, यदि वह इन तीनों सिद्धांतों को अपने जीवन के मूल्यों और उद्देश्य का आधार बना ले, तो वह न केवल अपने क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त कर सकता है, बल्कि जनकल्याण, राष्ट्रनिर्माण और मानवता की सेवा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। ऐसे जीवन-दृष्टिकोण से व्यक्ति के भीतर निहित असीमित क्षमताएँ जागृत होती हैं और उसका जीवन स्वयं दूसरों के लिए प्रेरणा बन जाता है।
यह सत्र केवल योग के विभिन्न मार्गों की चर्चा नहीं था, बल्कि जीवन के उद्देश्य, आत्मबोध और कर्म को आध्यात्मिकता से जोड़ने की एक प्रेरणादायक यात्रा थी।
सत्य स्वरूप दास जी के विचारों ने सभी प्रतिभागियों को यह संदेश दिया कि आध्यात्मिकता का अर्थ संसार छोड़ना नहीं, बल्कि अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए जीवन को उच्च मूल्यों से जोड़ना है।
जय हिन्द! 🇮🇳
24/06/2026
31 मई 2026 को DBM INSIGHT SERIES में हमारे साथ डॉ॰ रोहित चौधरी जी जुड़े थे।
आप की शैक्षणिक यात्रा नवोदय विद्यालय से IIT DELHI तक रहा , साथ ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शोध एंव अध्यापन का अनुभव भी रहा ।
सत्र में आपने अपनी प्रेरणादायक जीवन यात्रा हम सभी के साथ साझा किया।आपकी जीवन यात्रा युवाओं के लिए प्रेरणादायक के साथ-साथ उत्साह से भरने वाला था ।
आपकी जीवन यात्रा यह बताता है कि अगर लक्ष्य प्राप्ति के लिए करी मेहनत और सच्चे मन से निश्चय किया गया हो तो , कठिन से कठिन परिस्थित में भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता हैं।
मुख्य संदेश : अगर हम मन में ठान ले और कड़ी मेहनत करे तो हम अपनी मंजिल तक पहुंच सकते हैं।
जय हिंद।
24/06/2026
24 मई 2026 को DBM INSIGHT SERIES में हमारे साथ मंजूकेश्वर रेड्डी जी जुड़े थे।
आप हैदराबाद से है ।आपने प्रारंभिक शिक्षा सूबे में ही किया , computer science और engineering की शिक्षा Amrita Vishwa Vidyapeetham (coimbatore) से पूरा किया ।
आपने अपनी जीवन यात्रा साझा करते हुए कई विषयों को हमारे समक्ष रखा। जिसमें मुख्य तौर से आपने भारतीय ज्ञान परंपरा (gurukulam system) पर जोर दिया । आपने वर्तमान के समय गुरुकुल की शिक्षा बहुत जरूरी बताया , कि कैसे बढ़ते विज्ञान और प्रौद्योगिकी ( technology) के पढ़ाई के साथ साथ जीवन के विषय में गहरी दर्शन, एक बेहतर जीवन जीना , और अपने मातृभूमि या देश के प्रति कुछ लौटाने का भाव सिर्फ गुरुकुल शिक्षा पद्धति द्वारा ही संभव हैं।
आपने गुरु-शिष्य परंपरा को भी बताया कि कैसे गुरु के सानिध्य में ही हम तृप्ति का अनुभूति कर सकते हैं, और हमारे भीतर कुछ देने का भाव उत्पन हो सकता हैं।
आप वर्तमान समय में ANAADI FOUNDATION के साथ जुड़े हैं । जहां योगा, आयुर्वेद, भारतीय गणित और भारतीय ज्ञान परंपरा को Advance research और technology के माध्यम से future generations के लिए तैयार किया जा रहा है , साथ ही वर्तमान में कार्यरत हैं।
राधे राधे 🙏🏼
18/06/2026
17 मई 2026 को DBM INSIGHT SERIES के सत्र में परमानंद जी के साथ हुआ संवाद सभी के लिए प्रेरणादायक, साथ ही सकारात्मकता से भरने वाला था ।
आप की शिक्षा और शोध यात्रा मध्यप्रदेश के टटम ( छतरपुर) से IIT Bombay , columbia university ( new york ) एवं UAB cancer centre ( USA ) तक रही ।
सत्र में आपने बताया की कैसे कड़ी मेहनत करके हम अपनी जीवन में सफलता प्राप्त कर सकते है । कड़ी मेहनत, लगन, संस्कृति और अध्यात्म से जुड़कर अपने जीवन के लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं ।
आपने स्वार्थ के सकारात्मक पहलू बताया कि कैसे हम अपनी स्वार्थ की सीमा बढ़ा के अपने आस-पास , समाज ,देश और समस्त मानवजाति के विकास के लिए अपने जीवन को लगा सकते हैं।
जय हिंद।
14/06/2026
आज DBM INSIGHT SERIES के विशेष सत्र में हमारे साथ जुड़े थे पद्म श्री सेठपाल सिंह जी।
आप उत्तरप्रदेश के सहारनपुर जिले से आते हैं।
आपको हाल ही में वर्ष 2022 में कृषि क्षेत्र में विविधीकरण, नवीन कृषि तकनीकी को अपनाकर कृषि उत्पादन (जैसे - सिंघाड़े की खेती तालाबों के बजाय खेतों में सिंघाड़े की खेती )करके छोटे किसानों के लिए स्थाई आय के साधन के तौर पे प्रदर्शित करने और इसे बढ़ावा देने हेतु तत्कालीन राष्ट्रपति द्वारा पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया ।
आपने आज के सत्र में कृषि को इतने सरल भाषा में हम सभी को समझाया , साथ ही युवाओं को कृषि में भाग लेने हेतु आमंत्रित तथा प्रोत्साहित भी किया।
आपने बताया हमें कृषि को उद्यमिता की तरह देखनी चाहिए ।
आपने बताया छोटे किसान विविधीकरण के माध्यम से अपने आय का सृजन कर सकते हैं।
और अंत में आपने FAMILY FARMER का विचार हम सभी को बताया कि कैसे हम अपने परिवार में family doctor रखते है , ऐसे ही हमें FAMILY FARMER भी रखने चाहिए ।जिससे एक तो हमें जैविक खेती किया गया खाना मिलेगा साथ ही किसान को भी अच्छी फसल का लाभ और प्रोत्साहन मिलेगा ।
जय हिंद ।
08/06/2026
10 may 2026 : DBM INSIGHT SERIES के विशेष सत्र में *डॉ. चंद्रभूषण जी* के साथ हुआ संवाद वास्तव में अत्यंत प्रेरणादायक रहा।
मुजफ्फरपुर के एक छोटे से गाँव से शुरू होकर, कठिन परिस्थितियों के बीच पढ़ाई, फिर आगे चलकर IIT Delhi तक पहुँचना और आज AIIMS Delhi में कार्य करते हुए समाज और शोध से जुड़े कार्य करना — यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि *सपने बड़े हों तो रास्ते भी बनते हैं।*
संवाद के दौरान उन्होंने शिक्षा, शोध, आत्मविश्वास, higher studies और समाज-निर्माण जैसे विषयों पर अत्यंत सरल लेकिन गहरी बातें साझा कीं।
उन्होंने यह भी बताया कि *शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि अपने सोच और क्षमता को विकसित करना होना चाहिए।*
✨ *“सीमाएँ जगह में नहीं, सोच में होती हैं।”*
कल के संवाद का यही सबसे बड़ा संदेश रहा।
जय हिंद।
07/06/2026
आज DBM INSIGHT SERIES के विशेष सत्र में हमारे साथ जुड़े थे सत्यजीत पटेल जी ।
आप गुजरात के साबरकांठा जिले के मोहनपुर गांव से आते है ।आपने IIT ROORKEE से ELECTRICAL ENGINEERING का शिक्षा प्राप्त किया है ।
आपने शिक्षा प्राप्त के बाद कोई स्थाई नोकरी न करके आपने अपने जीवन को परमार्थ के भाव से प्रेरित हो कर जनकल्याण में लगा दिया ।
वर्तमान में आप SHIVGANGA PROJECT JHABUA में कार्यरत हैं।
आपने HALMA TRADITION के विषय में भी हम सभी को बताया जिसके तहत हम अपने समाज में किसी भी कार्य को आपसी सहयोग ,विश्वाश और परमार्थ के भाव से करते हैं।
आपने आज सीखाया की जब भी हम किसी गांव अथवा किसी समाज के लिए कुछ करने का भाव करते है - तब हमें न तो उन पर दया का भाव करके उनका स्वाभिमान चिन्ना चाहिए न ही हमें उन्हें भगवान बनाकर उनमें अहंकार भरना चाहिए , हमें तो बस उसके साथ होकर कार्य करना चाहिए। ( उनके साथ involve होकर evolve होना चाहिए )
हमारे गांव में native ज्ञान पहले से ही है हमें तो बस एक मित्र के तरह बस सहयोग करके उन्हें सशक्त करना है ।
हमें गांव-गांव में गुरुकुल न बनाकर गांव को ही गुरुकुल बनाने की आवयश्कता है।
जय हिंद।