18/08/2024
तुम जैसे नदी का बहता जल,
मैं ठहरा हुआ किनारा हूं।
तुम जैसे तारों भरा आसमां,
मैं चांद कभी पूरा कभी अधूरा हूं।
तुम जैसे मौसम की शीत हवा,
मैं बादल इक आवारा हूं।
तुम जैसे दीपक का उजाला,
मैं लौ की परछाई का अंधियारा हूं।
इतने दूर हैं,इतने पास हम,
मैं फिर भी सदा तुम्हारा हूं।
❤️ 🌹