25/12/2025
बच्चों!
आज क्रिसमस है। पर ये फोटो ध्यान से देखो। नेता लोग किस हिसाब से सामाजिक न्याय कर रहे। इन्हें किसी की पड़ी नहीं है। बस अपनी राजनीतिक रोटी सेंक रहे। देखो ध्यान से जातीय गणित को। ये जाति मन से इन पुरनियों के निकलती ही नहीं। एक व्यक्ति के विरोध को ये सब पूरी जाति का विरोध मान लेते हैं। इसमें एक भी ब्राम्हण नाम नहीं। मतलब इस समूह ने ब्राम्हण को दोषी करार दे दिया है। ऐसे ही कई सारे समूह हैं। कुछ सवर्ण एकता वाले। क्या हम इंसान बनकर नहीं रह सकते। इतना मुश्किल है इंसान बनकर रहना।
जब दूसरे पर उंगली उठाना हो तो जाति तक भूल जाते हैं। और जब अपने पे आ जाए तो जातीय एकता का सहारा लेना। इसी हठधर्मिता का विरोध है। विरोध मोदी शाह और केजरीवाल की पूंजी वादी सोच का है। privetization का है। पर लोग रोटी सेंकने निकल पड़े। एक स्वस्थ लोकतंत्र में बोलने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। ये शायद पढ़े लिखे लोग बेहतर समझ पाते यदि जाति न आती बीच में।बस स्त्रियों की जाति नहीं होती बस प्रकार होते हैं। इसलिए ये बातें वो ज्यादा बेहतर समझ पाती हैं।
सोच विकसित करने का समय आ गया है। नहीं तो हम विश्व जीतने के बाद भी खाली हाथ रह जाएंगे। सवाल करना लाजमी है। काम लीजिये अपने अपने इलाके के चुने हुए सभासद, पालिका अध्यक्ष और विधायक और सांसद से। राजा की तरह शान से जीवन यापन करिये अपने अपने कार्यक्षेत्र में। आप खुद गुलामी चुनते हैं झूठी शान के लिए।
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