14/04/2025
परिषदीय विद्यालय अब स्वयं को लगातार साबित कर रहे हैं। चाहे वो सरकार, समाज, समुदाय द्वारा उपलब्ध संसाधनों को बेहतर संयोजन के साथ जमीन पर उतार कर उत्कृष्ट विद्यालय बनाना हो या फिर शैक्षिक दृष्टि से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना। दिन प्रतिदिन उपलब्धियां बढ़ रहीं हैं। उपलबधियो की इस कडी मे प्राथमिक कांपा के नाम एक और कड़ी जुड़ गयी जब विद्यालय के 70 सीट के सापेक्ष कुल 9 छात्रों ने जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय कक्षा 6 की प्रवेश परीक्षा मे सफलता प्राप्त की। ये विद्यालय राज्य सरकार द्वारा संचालित नवोदय विद्यालय की भांति पूरी तरह निशुल्क और आवासीय विद्यालय है। इससे पूर्व में भी 5 बच्चे चयनित हो चुके हैं। व्यक्तिगत रूप से लगता है कि ये सफलता बच्चों के पूरे जीवन को बदलने में सहायक सिद्ध हो सकती है क्योंकि वहां बच्चों के लिए पढ़ाई और खेल जैसे शैक्षिक गतिविधियों के अलावा कोई काम नहीं रहेगा।
उत्कृष्ट शिक्षक, पुस्तकालय, कम्प्यूटर लैब, जैसी सुविधाएं बच्चों के लिए वरदान सिद्ध होगी।
खास बात ये है कि पूर्व और वर्तमान में चयनित ज्यादातर छात्रों ने विद्यालय की पढाई से ही ये सफलता अर्जित की है।
फिर भी कुछ अभिभावक अभी गली कूंचो में चल रहे प्राईवेट स्कूलों की श्रेष्ठता के दिखावा की झूठी मानसिकता से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं जहां गाँव के ही अप्रशिक्षित अकुशल शिक्षकों द्वारा शिक्षण कार्य किया जाता है।
सरकारी परिषदीय विद्यालयों में पढाना समाज में सामाजिक दृष्टि से हीनता की भावना समझते हैं। जबकि यही विद्यालय तमाम फीस के नाम पर आर्थिक सामाजिक और मानसिक शोषण करते हैं। बच्चों को रटंत विद्या पर ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार बोलते देख असली शिक्षा समझते हैं। जबकि यदि बच्चे को क्यों क्या कैसे समझ में आ जाए तो रटने की जरुरत ही नहीं है।
हम केवल भविष्य के पढे लिखे नागरिक नहीं तैयार करते बल्कि देश समाज गाँव के लिए उत्कृष्ट नागरिक तैयार करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं।
14/04/2025