12/03/2026
हिंदी माध्यम के बच्चों के लिए सिविल सेवा (UPSC) की तैयारी के कुछ मूलभूत नियम
हर साल हिंदी माध्यम से भी कई बच्चे सफलता प्राप्त कर रहे हैं। इस बार 50 से ज्यादा चयन हुए हैं, लेकिन पहले 100 में अभी भी हिंदी माध्यम के केवल 1–2 बच्चे ही दिखाई देते हैं। यदि छात्र और अभिभावक कुछ महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान दें, तो परिणाम और बेहतर हो सकते हैं—
1️⃣ तैयारी के लिए बच्चे को ग्रेजुएशन के बाद ही दिल्ली जैसे स्थानों पर भेजें।
2️⃣ ग्रेजुएशन किसी अच्छी यूनिवर्सिटी से ही कराएं।
3️⃣ हाईस्कूल और इंटर तक साइंस के साथ-साथ मानविकी विषयों पर भी फोकस रखें।
4️⃣ ग्रेजुएशन में वही विषय दिलाएं जो आगे UPSC की तैयारी में लेना है।
5️⃣ यदि बच्चे को दिल्ली भेज रहे हैं तो उस पर सख्त निगरानी रखें या किसी बड़े के साथ रखें।
6️⃣ YouTube पर बहुत कंटेंट है, लेकिन UPSC लेवल का कंटेंट सीमित है, इसलिए सोच-समझकर उपयोग करें।
7️⃣ बच्चों को समझाएं कि UPSC में कोई शॉर्टकट नहीं होता—सही दिशा में लगातार मेहनत ही सफलता दिलाती है।
8️⃣ कोचिंग/इंस्टीट्यूट के टेस्ट रिजल्ट पर लगातार ध्यान दें और आवश्यकता हो तो अभिभावक को भी रिपोर्ट भेजने को कहें।
9️⃣ बच्चे को कम से कम 3 साल और अधिकतम 5 साल का समय दें। यदि जरूरत हो तो Plan-B पहले से तैयार रखें।
🔟 बच्चे को लगातार प्रोत्साहित करें, लेकिन अनावश्यक दबाव न बनाएं।
1️⃣1️⃣ रीडिंग और राइटिंग प्रैक्टिस पर विशेष ध्यान दें, और अखबार को परीक्षा के स्तर के अनुसार पढ़ने की आदत डालें।
यदि अभिभावक और छात्र इन बातों पर संतुलित रूप से ध्यान दें तो सफलता की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि सीटें कम और प्रतियोगी बहुत ज्यादा होते हैं, इसलिए कभी-कभी अच्छे छात्र भी चयन से वंचित रह जाते हैं।
लेकिन यदि पढ़ाई गंभीरता से की गई हो और अच्छा अकादमिक करियर हो, तो असफलता के बाद भी जीवन में धन, सम्मान और अवसरों की कमी नहीं रहती—बस अर्जित ज्ञान और अनुभव का सही उपयोग करना आना चाहिए।
साभार- डॉ वी के त्रिवेदी सर
सुधांशु देव पाण्डेय