Abdul Qadir Razvi Manzari

Abdul Qadir Razvi Manzari teach your children Qur'an and the Qur'an will teach them everything

12/12/2025

یہ لازم نہیں کہ ہم ایک دوسرے کو خوش کریں
یہی کافی ہوگا کہ ہم ایک دوسرے کو تکلیف نہ دیں

11/12/2025

وَاِنَّ اللّٰهَ بِكُمْ لَرَءُوْفٌ رَّحِیْمٌ (القرآن)

और यकी़न जानो अल्लाह तुम पर बहुत शफीक़, बहुत मेहरबान है।

रज़वी मंज़री۔۔۔

30/09/2025

ہماری بربادیوں پر مسکراؤ نا چمن والوں
گزرنی ایک دن سر سے تمہارے بھی
قیامت ہے
ان شاء اللہ عزوجل

21/09/2025

⚠️इश्क़-ए-रसूल ﷺ कोई जुर्म नहीं, ये ईमान की जान है।❣️

ज़माना लाख कोशिश करे, मुक़दमे दर्ज करे, ज़ुबानें बंद करे, मगर दिलों से "मुह़म्मद रसूलुल्लाह ﷺ से मुह़ब्बत" कभी ख़त्म नहीं की जा सकती।
हम बार-बार ऐलान करते रहेंगे:

"उन्हें जाना, उन्हें माना, न रखा ग़ैर से काम💞
लिल्लाहिल्ह़म्द! मैं दुनिया से मुसलमान गया"

अ़ब्दुल क़ादिर रज़वी मंज़री۔۔۔
21/09/25 ई.

17/09/2025

I love Muhammad ﷺ♥️ लिखना

अगर जुर्म है तो ये जुर्म हम करोड़ों बार करेंगे।

16/09/2025

❤️ मियाँ–बीवी का रिश्ता 💝

अल्लाह तआ़ला ने क़ुरआन-ए-पाक में फ़रमाया:

"هُنَّ لِبَاسٌ لَّكُمْ وَأَنتُمْ لِبَاسٌ لَّهُنَّ"
(अल–बक़रह: 187)

यानि: बीवियाँ तुम्हारे लिए लिबास हैं और तुम उनके लिए लिबास हो।

💞 जैसे लिबास इंसान को ढाँपता, ज़ीनत बख़्शता और सर्दी–गर्मी से बचाता है, वैसे ही मियाँ–बीवी एक दूसरे का सहारा और सुकून का ज़रिया हैं।

लिहाज़ा इस रिश्ते की अहमियत को समझें हज़ारों आपसी मसाइल इंशा अल्लाह ख़ुद ब ख़ुद हल हो जाएंगे।

अ़ब्दुल क़ादिर रज़वी मंज़री۔۔۔
16/09/25 ई.

25/08/2025

*🌙 रबीउल अव्वल का चाँद मुबारक हो 🌙*

🌹अमन का पैग़ाम लेकर माहे रबीउ़ल अव्वल आया🌹
🌟दिलों में इश्क़-ए अह़मद ﷺ का उजाला फैलाया🌟

अलह़मदुलिल्लाह! वह महीना आ गया जिसमें कायनात के लिए सबसे बड़ी रह़मत नाज़िल हुई।
रबीउ़ल अव्वल का चाँद हमें यह याद दिलाता है कि असली खुशी ह़ज़रत रसूल ए खु़दा ﷺ की सीरत को अपनाने और उनकी ग़ुलामी को ज़िन्दगी का मक़सद बनाने में है।

✨ अल्लाह तआला हमें इस महीने को नेक आमाल, मोहब्बते रसूल ﷺ और इत़्तिबाए सुन्नत से मुनव्वर करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए।

अ़ब्दुल क़ादिर रज़वी मंज़री
मरकज़ ए अहले सुन्नत बरैली शरीफ़

23/08/2025

ग़रीब की लड़की के न जाइज़ भाइयों अभी 3 दिन बाक़ी हैं अपनी अपनी बाजी की शादी कर दो, अगले महीने मत रोना 😢

कि काश इन पैसों से किसी ग़रीब की शादी हो जाती। 😅🤪🤣

हामिदी मस्जिद जामियातुर्रज़ा बरैली शरीफ़
18/08/2025

हामिदी मस्जिद जामियातुर्रज़ा बरैली शरीफ़

18/08/2025

🌹 *मसलक-ए-आला हज़रत की पाबंदी* 🌹

आज के इस फ़ितनों से भरे दौर में बहुत से लोग दीनी लिबादा ओढ़कर गुमराह कर रहे हैं। ऐसे माहौ़ल में अगर कोई चीज़ ह़क़ और सलामती की ज़मानत है तो वह सिर्फ़ मसलक ए अहले सुन्नत है जिसकी पहचान अब मसलक-ए-आला हज़रत ही से है।

इसीलिए पीरो मुर्शिद ह़ज़रत ताजुश्शरिया अलैहिर्रह़मा ने अपने आख़िरी दौर में एक अमानत और नस़ीह़त के तौर पर फरमाया था:

✨ *मसलक-ए-आला हज़रत पर क़ायम रहो,*✨
✨ *ज़िंदगी दी गई है इसी के लिए।* ✨

यानी बर्रे स़गी़र मैं मौजूदा हालात में हमारी ज़िंदगी का मक़स़द, हमारी दीनदारी की पहचान, हमारी कामयाबी और हमारी नजात—सब कुछ इसी मसलक-ए-हक़ मसलक ए अहले सुन्नत की पाबंदी में है।

🖊️ अ़ब्दुल क़ादिर रज़वी मंज़री
18/08/25 ई.

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