रक्तदान से बचाई जा सकती हैं अनगिनत जिंदगियां, हर स्वस्थ व्यक्ति आगे आए : नाज़िश कलीम
विश्व रक्तदाता दिवस पखवाड़े के तहत बेस अस्पताल में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित
स्वैच्छिक रक्तदान को बताया मानवता की सर्वोच्च सेवा, निःशुल्क विधिक सहायता योजनाओं की दी जानकारी
श्रीनगर। उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल एवं माननीय जिला जज/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, पौड़ी गढ़वाल के निर्देशानुसार तथा सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, पौड़ी गढ़वाल एवं सिविल जज (सीनियर डिवीजन) नाज़िश कलीम के निर्देशन में बेस चिकित्सालय श्रीनगर में विश्व रक्तदाता दिवस पखवाड़े के अंतर्गत विधिक जागरूकता एवं साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य आमजन को स्वैच्छिक रक्तदान तथा विधिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना था।
शिविर को संबोधित करते हुए सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण नाज़िश कलीम ने कहा कि स्वैच्छिक एवं नियमित रक्तदान मानवता की सर्वोच्च सेवा है। रक्तदान के माध्यम से न केवल जरूरतमंद मरीजों का जीवन बचाया जा सकता है, बल्कि समाज में सहयोग, संवेदनशीलता और परोपकार की भावना को भी मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने स्वस्थ एवं पात्र व्यक्तियों से समय-समय पर स्वैच्छिक रक्तदान करने की अपील करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को इस पुण्य कार्य में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करनी चाहिए।
कार्यक्रम में ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. दीपा हटवाल तथा पूर्व प्रभारी डॉ. सतीश कुमार ने स्वैच्छिक रक्तदान के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रक्तदान एक महादान है, जिससे किसी जरूरतमंद व्यक्ति को नया जीवन मिल सकता है। उन्होंने बताया कि नियमित रक्तदान से रक्त की उपलब्धता बनी रहती है और आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराया जा सकता है। उन्होंने रक्तदान के क्षेत्र में कार्य कर रही विभिन्न सामाजिक संस्थाओं एवं स्वयंसेवकों का आभार भी व्यक्त किया तथा ब्लड बैंक द्वारा प्रदान की जा रही सेवाओं की विस्तृत जानकारी दी।
शिविर के दौरान उपस्थित लोगों को निःशुल्क विधिक सहायता, लोक अदालतों की उपयोगिता, नालसा हेल्पलाइन नंबर 15100 तथा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्रदान की गई। साथ ही उच्चतम न्यायालय में आगामी 21, 22 एवं 23 अगस्त 2026 को आयोजित होने वाले “समाधान समारोह (विशेष लोक अदालत) 2026” के संबंध में भी विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम में अधिकाधिक लोगों से इस विशेष लोक अदालत का लाभ उठाने और इसके व्यापक प्रचार-प्रसार में सहयोग करने की अपील की गई।
इस अवसर पर बेस चिकित्सालय श्रीनगर के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश रावत, राजकीय उप जिला चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. विमल गुसाईं, विभागाध्यक्ष डॉ. ए.एन. पाण्डेय, श्रीनगर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमेश जोशी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के रिटेनर अधिवक्ता गजेन्द्र सिंह नेगी, अधिकार मित्र मानव सिंह बिष्ट, रोशनी रतूड़ी, नर्सिंग ऑफिसर्स सहित बड़ी संख्या में अधिकारी, कर्मचारी एवं आमजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम के माध्यम से रक्तदान और विधिक साक्षरता के प्रति जागरूकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण संदेश दिया गया।
✍️✍️ मनमोहन
VCSG Government Medical College, Srinagar Uttarakhand
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13/06/2026
समाचार पत्रों के माध्यम से..
मां के दूध का कोई विकल्प नहीं: बोतल से दूध पिलाने से गंभीर रूप से बीमार हुआ नवजात, बेस अस्पताल श्रीनगर ने बचाई जान
शिशु के पैदा होने पर छह माह तक मां का ही दूध पिलाएं।
11 दिन तक जिंदगी और मौत से जूझता रहा मासूम, डॉक्टरों की मेहनत और सही इलाज से लौटी घर की खुशियां
जोशीमठ और गोपेश्वर अस्पताल के बाद बेस अस्पताल में मिला उचित उपचार
श्रीनगर। मां का दूध नवजात शिशु के लिए अमृत समान माना जाता है, लेकिन कई बार जानकारी के अभाव में लिए गए छोटे-से फैसले गंभीर परिणाम दे सकते हैं। ऐसा ही एक मामला चमोली जनपद के जोशीमठ क्षेत्र से सामने आया, जहां एक माह का नवजात शिशु बोतल से दूध पिलाने के कारण गंभीर रूप से बीमार हो गया। हालत इतनी बिगड़ गई कि बच्चे को चमोली के अस्पतालों से होते हुए अंततः हेमवती नंदन बहुगुणा बेस चिकित्सालय श्रीनगर लाना पड़ा। यहां बाल रोग विशेषज्ञों और नर्सिंग स्टाफ की अथक मेहनत से 11 दिनों तक चले उपचार के बाद मासूम पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने माता-पिता के साथ घर लौट सका।
बाल रोग विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अशोक शर्मा ने बताया कि जोशीमठ के कमद गांव निवासी संजय और गौरी देवी का एक माह का शिशु लगातार बीमार चल रहा था। जानकारी के अभाव में बच्चे को मां के दूध के स्थान पर बोतल से दूध पिलाया जाने लगा, जिससे उसे गंभीर संक्रमण और पेचिश की समस्या हो गई। लगातार दस्त होने के कारण उसके शरीर में पानी की भारी कमी हो गई और स्वास्थ्य तेजी से बिगड़ने लगा। उन्होंने बताया कि बच्चे का उपचार पहले जोशीमठ और फिर गोपेश्वर अस्पताल में किया गया, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने बेस चिकित्सालय श्रीनगर से संपर्क कर बच्चे को रेफर किया। जब नवजात श्रीनगर पहुंचा तब उसकी स्थिति बेहद नाजुक थी।
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दिमाग में सूजन, किडनी ने काम करना कम कर दिया था--
डॉ. अशोक शर्मा ने बताया कि बच्चे की किडनी ने काम करना कम कर दिया था, आंतों की कार्यप्रणाली रुक गई थी और पेट फूल गया था। ये सभी स्थितियां शरीर में पानी और आवश्यक लवणों की अत्यधिक कमी (डिहाइड्रेशन) के कारण उत्पन्न हुई थीं। इस स्थिति में शरीर के सभी अंग-तंत्र, विशेष रूप से मस्तिष्क, हृदय, फेफड़े और किडनी की कार्यप्रणालियां प्रभावित होकर विफल होने लगती हैं। ऐसे मामलों में समय रहते गहन एवं जटिल उपचार तथा लगातार निगरानी (क्लोज मॉनिटरिंग) की जाए, तभी मरीज का जीवन बचाया जा सकता है। डा शर्मा ने बताया कि वह स्वास्थ्य जागरूकता एवं सामाजिक स्वास्थ्य शिक्षा के माध्यम से लोगों के स्वास्थ्य में सुधार लाने के मिशन पर कार्य कर रहे हैं। विशेष रूप से स्तनपान (ब्रेस्टफीडिंग) को बढ़ावा देना उनका प्रमुख लक्ष्य है।
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समन्वय और टीमवर्क से मिली सफलता-
चिकित्सक डॉ. सर्वजीत कौर ने बताया कि गोपेश्वर अस्पताल की चिकित्सक डॉ. मीनाक्षी ने समय रहते बच्चे की स्थिति की जानकारी साझा कर समन्वय स्थापित किया, जिससे बेस अस्पताल की टीम उपचार के लिए पहले से तैयार हो सकी। इसी का परिणाम रहा कि बच्चे को समय पर सही उपचार मिल पाया। उपचार में डॉ. मेहरा विरोथिया, डॉ. दानीश सहित नर्सिंग स्टाफ नेहा रावत, बीना, अनिल, धीरा पुंडीर, अनिता और बीना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
स्तनपान है नवजात के लिए सबसे सुरक्षित और सर्वोत्तम आहार--
डॉ. अशोक शर्मा ने कहा कि नवजात शिशु के लिए मां का दूध सबसे सुरक्षित, पौष्टिक और संपूर्ण आहार है। इससे बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, संक्रमण का खतरा कम होता है तथा उसके शारीरिक और मानसिक विकास में मदद मिलती है। शिशु के पैदा होने पर छह माह तक मां का ही दूध पिलाएं।
उन्होंने कहा कि यदि किसी कारणवश मां का दूध पर्याप्त मात्रा में नहीं बन रहा हो या स्तनपान कराने में कोई समस्या हो तो परिवार को स्वयं निर्णय लेने के बजाय चिकित्सक या विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। सुनी-सुनाई बातों या गलत जानकारी के आधार पर नवजात को बोतल से दूध पिलाना कई बार गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।
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समाज के लिए सीख--
चिकित्सकों ने इस घटना को पूरे समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश बताते हुए कहा कि नवजात शिशुओं की देखभाल में लापरवाही या गलत जानकारी जानलेवा साबित हो सकती है। समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना, स्तनपान को प्राथमिकता देना और स्वास्थ्य सेवाओं का सही उपयोग करना हर माता-पिता की जिम्मेदारी है।
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भावुक हुए माता-पिता, जताया आभार
बच्चे के स्वस्थ होने पर उसके पिता संजय और माता गौरी देवी ने बेस चिकित्सालय श्रीनगर के चिकित्सकों और स्टाफ का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बच्चे की बिगड़ती हालत देखकर पूरा परिवार घबरा गया था और उम्मीदें टूटने लगी थीं, लेकिन बेस अस्पताल के डॉक्टरों ने दिन-रात मेहनत कर उनके मासूम को नया जीवन दिया है।
उन्होंने कहा कि अस्पताल से स्वस्थ होकर बच्चे के घर लौटने से उनके परिवार की खुशियां वापस आ गई हैं और वे इसके लिए पूरी चिकित्सा टीम के सदैव ऋणी रहेंगे।
12/06/2026
रक्तदान में नहीं होना चाहिए कोई भेदभाव, सामाजिक समरसता का बने माध्यम : डॉ. आशुतोष सयाना
बोले, ब्लड़ सेंटर को मिलेगा ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग का स्वरूप
विश्व रक्तदाता दिवस पखवाड़े के तहत रक्तवीरों और संस्थाओं का सम्मान, सभी को दिलाई रक्तदान की शपथ
पोस्टर, स्लोगन में एमबीबीएस छात्रों ने दिखाई प्रतिभा
मेडिकल कॉलेज के बेस चिकित्सालय में रक्तदान जागरूक्ता पखवाड़े की शुरुआत
श्रीनगर। आगामी 14 जून को मनाए जाने वाले विश्व रक्तदाता दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित रक्तदाता पखवाड़े के तहत हेमवती नंदन बहुगुणा बेस चिकित्सालय में रक्तदाता जागरूकता दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में रक्तदान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली विभिन्न संस्थाओं एवं रक्तदाताओं को सम्मानित किया गया। साथ ही आमजन, चिकित्सकों, अधिकारियों और कर्मचारियों से नियमित रक्तदान के लिए आगे आने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने कहा कि रक्तदान मानवता की सेवा का सबसे बड़ा माध्यम है और इसमें किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि रक्तदान सामाजिक समरसता का ऐसा उदाहरण है, जहां जाति, धर्म, वर्ग और क्षेत्र से ऊपर उठकर केवल मानव जीवन को बचाने का संकल्प दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि बेस चिकित्सालय का ब्लड सेंटर आज पूरे गढ़वाल क्षेत्र में जरूरतमंद मरीजों के लिए जीवनदायिनी भूमिका निभा रहा है, जिसके पीछे रक्तवीरों और स्वयंसेवी संस्थाओं का महत्वपूर्ण योगदान है।
डॉ. सयाना ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा और सेवाओं को और अधिक सशक्त बनाने के लिए ब्लड सेंटर को भविष्य में ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे इस क्षेत्र में शोध, प्रशिक्षण और चिकित्सा सेवाओं को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने लगातार रक्तदान अभियानों में सहयोग देने वाली स्वयंसेवी संस्थाओं, छात्र संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों और स्थानीय नागरिकों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर उन्होंने सभी उपस्थित लोगों को नियमित रक्तदान करने की शपथ भी दिलाई।
वित्त नियंत्रक प्रशांत कुमार शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि "ब्लड" केवल एक शब्द नहीं, बल्कि मानवता, साहस और सेवा का प्रतीक है। उन्होंने ब्लड शब्द के प्रत्येक अक्षर का अर्थ बताते हुए कहा कि ‘बी’ बहादुरी, ‘एल’ जीवन की सुरक्षा, ‘ओ’ जीवनदायी ऑक्सीजन का प्रदाता, दूसरा ‘ओ’ किसी को नया जीवन देने का अवसर तथा ‘डी’ दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि रक्तदान ऐसा महादान है जो किसी जरूरतमंद व्यक्ति को नया जीवन प्रदान कर सकता है।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश रावत ने रक्तदान से अस्पतालों और मरीजों को होने वाले लाभों की जानकारी देते हुए अधिक से अधिक लोगों से इस अभियान से जुड़ने की अपील की। ब्लड सेंटर की प्रभारी डॉ. दीपा हटवाल ने अस्पताल में रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों और रक्तदान के स्वास्थ्य लाभों पर विस्तार से प्रकाश डाला। वहीं ब्लड सेंटर के पूर्व प्रभारी डॉ. सतीश कुमार ने ब्लड सेंटर की कार्यप्रणाली और उपलब्धियों की जानकारी साझा की। इस मौके पर ब्लड़ सेंटर द्वारा प्राचार्य एवं वित्त नियंत्रक के हाथों संत निरंकारी मंडल से हरी लाल शाह, रोटरी क्लब संजय रावत, ऋत्विक कंपनी, एनएमओ से डॉ सुरेंद्र नेगी, डॉ. अमन भारद्वाज, व्यापार सभा वासुदेव कंडारी, हिमांशु अग्रवाल, देवेन्द्र मणि मिश्रा, ग्राम सभा रूमधार के खुशीराम भट्ट के अमर उजाला से डॉ. श्रीकृष्ण उनियाल, बेस अस्पताल से मनमोहन सिंह, जामा मजिस्द, आर्ट आफ लिविंग, एसएसबी श्रीनगर, जय हो छात्र संगठन, अलकंनदा रोटरी क्लब से आये प्रतिनिधियों को सम्मानित किया। इस मौके पर एमबीबीएस छात्रों द्वारा पोस्टर, स्लोगन प्रतियोगिता में आर्यन रावत, ईशा, शिवानी ने प्रथम, अदिति माथूर, ओम नौटियाल, इशा रानी, कनिष्क सकलानी ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। इस मौके पर लैब टेक्नीशियन प्रदीप रावत, हरीश, अमितकांत भट्ट, अनूप सती, देवेन्द्र लखेड़ा, चैतन्य, सुमित्रा, रश्मि, दीपक, जयप्रकाश, सुरेन्द्र सिंह, संदीप पंवार, राकेश बुटोला सहित विभिन्न विभागों के संकाय सदस्य डॉ. सचान बट्ट, डॉ. पवन बट्ट, डॉ. पार्थ दत्ता, डॉ. अशोक शर्मा, डॉ. इंदिरा यादव, डॉ. स्वाती, डॉ. शिवानी, डॉ. सुनील, डॉ. मोहित सैनी आदि मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन ओम नौटियाल ने किया।
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05/06/2026
प्रदेशवासियों को बेहतर एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता: कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल
देहरादून। प्रदेश के कैबिनेट मंत्री एवं चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्राचार्यों एवं वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक में प्रतिभाग करते हुए प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों एवं स्वास्थ्य संस्थानों से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की।
बैठक को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को उसके घर के निकट गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक एवं किफायती स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसके लिए चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में निरंतर सुधार और संसाधनों का विस्तार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में सुपर स्पेशियलिटी स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं सभी मेडिकल कॉलेजों में उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जाएगा, जिससे कार्डियोलॉजी, न्यूरो सर्जरी, नेफ्रोलॉजी जैसी उन्नत चिकित्सा सुविधाएं आमजन को सुलभ हो सकेंगी।
बैठक में मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की उपलब्धता, सुपर स्पेशियलिस्ट पदों के सृजन, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की खरीद, पीपीपी मोड पर संचालित परियोजनाओं की प्रगति तथा आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण से संबंधित विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में ट्रॉमा सेंटर, न्यूरो सर्जरी उपकरणों एवं बीएलएस/एएलएस एम्बुलेंस की सुविधा उपलब्ध कराने तथा अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज के विस्तार हेतु आवश्यक व्यवस्थाओं को शीघ्र पूर्ण करने का निर्णय लिया गया।
कैबिनेट मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाने के लिए आवश्यक मानव संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने सेवानिवृत्त चिकित्सकों की संविदा पर नियुक्ति, मेडिकल कॉलेजों में तकनीकी विशेषज्ञों की तैनाती तथा दूरस्थ क्षेत्रों में कार्यरत चिकित्सा कार्मिकों के लिए प्रोत्साहन संबंधी प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश भी दिए।
श्री उनियाल ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का सशक्तीकरण केवल आधारभूत संरचना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आमजन को समय पर बेहतर उपचार उपलब्ध कराने का माध्यम भी है। राज्य सरकार इस दिशा में पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है और भविष्य में भी स्वास्थ्य क्षेत्र को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाते रहेंगे।
बैठक में चिकित्सा शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्य एवं अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
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आयुष्मान भारत योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता: कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल
प्रदेश के कैबिनेट मंत्री एवं चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की अनुवर्ती समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों को योजना का लाभ प्रदेश के प्रत्येक पात्र नागरिक तक प्रभावी रूप से पहुंचाने के निर्देश दिए।
बैठक को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना देश की सबसे महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य प्रत्येक जरूरतमंद व्यक्ति को गुणवत्तापूर्ण एवं निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि योजना के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि पात्र लाभार्थियों को समयबद्ध और सुगम स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त हों।
कैबिनेट मंत्री ने प्रदेश के सभी सरकारी एवं सूचीबद्ध अस्पतालों में आयुष्मान भारत योजना से संबंधित जानकारी, पात्रता, सुविधाओं एवं हेल्पलाइन नंबरों से युक्त डिस्प्ले बोर्ड अनिवार्य रूप से स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आमजन को योजना की जानकारी उपलब्ध कराना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि उन्हें उपचार उपलब्ध कराना।
श्री उनियाल ने अस्पतालों की नियमित मॉनिटरिंग पर विशेष बल देते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के लिए सतत निगरानी आवश्यक है। उन्होंने सरकारी अस्पतालों में रेफरल व्यवस्था को लेकर प्राप्त शिकायतों का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को गंभीरता से जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
बैठक के दौरान राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के अधिकारियों द्वारा राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत बजट संबंधी चुनौतियों से भी मंत्री को अवगत कराया गया। इस पर श्री उनियाल ने कहा कि प्रदेशवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु सभी संभावित उपाय किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुलभ, पारदर्शी एवं जनहितकारी बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है तथा आयुष्मान भारत योजना को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सभी संबंधित विभागों और संस्थानों को समन्वित प्रयास करने होंगे।
समीक्षा बैठक में राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री अरविन्द सिंह ह्यांकी, अपर सचिव स्वास्थ्य श्री सौरभ गहरवार सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
विश्व पर्यावरण दिवस पर मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में पौधरोपण
पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प
श्रीनगर। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर व्यापक स्तर पर पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मेडिकल कॉलेज के फैकल्टी सदस्य, एमबीबीएस एवं पैरामेडिकल छात्र-छात्राओं के साथ कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।
राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना के दिशा-निर्देशन में कॉलेज परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया। इस दौरान प्रतिभागियों ने पर्यावरण संतुलन बनाए रखने तथा अधिक से अधिक पौधे लगाने का संदेश भी दिया।
कार्यक्रम में गढ़वाल विश्वविद्यालय के उच्च शिखरीय पादप कार्यिकी शोध केंद्र (हैप्रेक) के निदेशक डॉ. विजयकांत पुरोहित ने पौध उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने उनके सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
एनाटॉमी विभाग के एचओडी प्रो. अनिल द्विवेदी एवं कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के डॉ. सुरेंद्र सिंह नेगी के नेतृत्व में छात्रों ने परिसर में पौधरोपण किया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को पौधरोपण एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक होना होगा। उन्होंने कहा कि एक पौधा केवल हरियाली ही नहीं देता, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित भविष्य की नींव भी तैयार करता है।
कार्यक्रम में डॉ. विभाष कुमार, डॉ. अभिनय, एकाउंटेंट सुनील कठैत, प्रदीप नेगी, मुकेश उनियाल, अजय रावत सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।✍️मनमोहन
05/06/2026
भालू से भिड़ गया सरोप सिंह: जबड़ों को पकड़ बचाई जान, शिक्षा मंत्री ने अस्पताल पहुंच बढ़ाया हौसला
बोले, सरोप सिंह ने दिखाई अद्भुत बहादुरी, सरकार घायल के साथ खड़ी है
संघर्ष के बाद घायल व्यक्ति बेस अस्पताल में भर्ती
श्रीनगर। श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र के पैठानी इलाके के खंड मल्ला गांव में गुरुवार को उस समय सनसनी फैल गई, जब मवेशी चराने गए 33 वर्षीय सरोप सिंह पर अचानक भालू ने हमला कर दिया। जंगल के किनारे हुए इस खौफनाक संघर्ष में सरोप सिंह ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए भालू से सीधा मुकाबला कर अपनी जान बचाई। गंभीर रूप से घायल अवस्था में उन्हें राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के बेस अस्पताल लाया गया, जहां सर्जरी विभाग की टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया। फिलहाल उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
शुक्रवार को प्रदेश के शिक्षा मंत्री एवं श्रीनगर विधायक डॉ. धन सिंह रावत जी भी बेस अस्पताल पहुंचे। उन्होंने घायल सरोप सिंह का हालचाल जाना और उनके साहस की सराहना करते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों में जिस बहादुरी से उन्होंने अपनी जान बचाई, वह प्रेरणादायक है। मंत्री ने अस्पताल प्रशासन को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए और हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया।
इस दौरान शिक्षा मंत्री ने आर्थो विभाग में भर्ती पैठानी निवासी वीरेंद्र कंडारी का भी हालचाल जाना और चिकित्सकों से उपचार संबंधी जानकारी ली।
बताया जा रहा है कि सरोप सिंह रोज की तरह घर के पास मवेशियों को चराने गए थे। इसी दौरान झाड़ियों से निकलकर एक भालू ने उन पर अचानक हमला बोल दिया। भालू के हमले से घबराने के बजाय सरोप सिंह ने साहस दिखाते हुए उसका मुकाबला किया। संघर्ष इतना जबरदस्त था कि उन्होंने अपनी जान बचाने के लिए भालू के दोनों जबड़ों को पकड़ लिया। काफी देर तक दोनों के बीच संघर्ष चलता रहा। शोर सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और हल्ला मचाया, जिसके बाद भालू जंगल की ओर भाग गया।
हालांकि इस दौरान भालू ने सरोप सिंह के हाथ और सिर पर गंभीर घाव कर दिए। खून से लथपथ हालत में ग्रामीण उन्हें तत्काल बेस अस्पताल श्रीनगर लेकर पहुंचे, जहां इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कर उनका उपचार शुरू किया गया।
बेस अस्पताल के सर्जरी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. धनंजय डोभाल के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम घायल के इलाज में जुटी हुई है। डॉ. डोभाल ने बताया कि भालू के हमले से मरीज को कई गंभीर चोटें आई हैं। प्राथमिक उपचार और आवश्यक सर्जिकल ट्रीटमेंट कर दिया गया है। संक्रमण और घावों की निगरानी के लिए मरीज को डॉक्टरों की देखरेख में भर्ती रखा गया है।
इस मौके पर प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक डॉ सतीश कुमार, भाजपा वरिष्ठ नेता मातबर रावत, भाजपा मंडल अध्यक्ष विनय घिल्डियाल,आयुष मियां, अंकित रावत सहित अन्य स्टाफ मौजूद था।✍️ मनमोहन
04/06/2026
मरीजों को बेहतर और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं देना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता : मंडलायुक्त आनंद स्वरूप
बेस अस्पताल श्रीनगर का मंडलायुक्त ने किया निरीक्षण, व्यवस्थाएं मिली संतोषजनक
बोले, चारधाम यात्रा के दौरान अस्पताल की जिम्मेदारी बढ़ जाती है
इमरजेंसी, आईसीयू और विभिन्न लैबों का लिया जायज़ा
मानसून और आपदा प्रबंधन को लेकर तैयार रहने के निर्देश
श्रीनगर। गढ़वाल मंडलायुक्त आनंद स्वरूप ने गुरुवार को श्रीनगर स्थित बेस अस्पताल का निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा व्यवस्थाओं तथा चारधाम यात्रा के दौरान मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का विस्तृत जायज़ा लिया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल की व्यवस्थाएं संतोषजनक मिलने पर उन्होंने चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों की सराहना की। मंडलायुक्त ने कहा कि मरीजों को गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा अस्पताल की सभी व्यवस्थाएं हर समय सुचारु एवं सक्रिय रहनी चाहिए।
निरीक्षण के दौरान मंडलायुक्त ने इमरजेंसी वार्ड, आईसीयू, डायलिसिस यूनिट, ब्लड बैंक, माइक्रोबायोलॉजी लैब, बायोकेमिस्ट्री लैब, पैथोलॉजी लैब तथा कैथ लैब सहित विभिन्न विभागों का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने अस्पताल में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, आधुनिक उपकरणों तथा मानव संसाधनों की जानकारी लेते हुए आवश्यक संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने अस्पताल में भर्ती मरीजों से बातचीत कर उनका हालचाल जाना और उन्हें उपलब्ध कराई जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की।
मंडलायुक्त आनंद स्वरूप ने चिकित्सकों को निर्देशित करते हुए कहा कि उपचार में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। प्रत्येक मरीज को बेहतर, त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा सीजन के दौरान अस्पताल की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है, क्योंकि बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं यात्री स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के साथ अस्पताल पहुंचते हैं। ऐसे में सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह सक्रिय एवं सुव्यवस्थित रहनी चाहिए ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
उन्होंने अस्पताल परिसर में साफ-सफाई व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के निर्देश देते हुए कहा कि स्वच्छ वातावरण मरीजों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। निरीक्षण के दौरान चिकित्सकों द्वारा आवश्यक चिकित्सा उपकरणों एवं संसाधनों की मांग रखे जाने पर मंडलायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को खरीद प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए।
आगामी मानसून सीजन एवं संभावित आपदा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मंडलायुक्त ने अस्पताल प्रशासन को आवश्यक चिकित्सा उपकरणों, अतिरिक्त संसाधनों एवं मानव संसाधन की मांग से संबंधित प्रस्ताव शीघ्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आपदा की स्थिति में मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए पहले से सभी तैयारियां सुनिश्चित की जानी चाहिए। साथ ही तकनीकी व्यवस्थाओं को मजबूत बनाने के लिए फिटर एवं विद्युत कर्मियों की आवश्यकता संबंधी प्रस्ताव भी जल्द भेजने को कहा।
मंडलायुक्त ने अस्पताल की सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) व्यवस्था की जानकारी लेते हुए कहा कि अस्पताल को एसटीपी प्रणाली से जोड़ने हेतु आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा निर्माणाधीन क्रिटिकल केयर ब्लॉक के कार्यों की समीक्षा कर उसे समयबद्ध तरीके से पूर्ण कराने की बात कही। उन्होंने कहा कि बेस अस्पताल श्रीनगर क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण चिकित्सा संस्थान है और यहां बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।
इस अवसर पर उपजिलाधिकारी नूपुर वर्मा, प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सतीश कुमार, डॉ. दीपा हटवाल, संदीप पंवार, राजेन्द्र भट्ट सहित अन्य चिकित्सक एवं अधिकारी मौजूद रहे।
✍️मनमोहन..
31/05/2026
गुलदार के हमले में घायल महिला का हालचाल जानने बेस अस्पताल पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री और शिक्षा मंत्री
ओणी गांव की महिला विनीता देवी से मुलाकात कर चिकित्सकों से ली उपचार की जानकारी
श्रीनगर। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल एवं उच्च शिक्षा मंत्री व श्रीनगर विधायक डॉ. धन सिंह रावत ने बेस चिकित्सालय श्रीनगर पहुंचकर गुलदार के हमले में घायल भर्ती महिला का हालचाल जाना। दोनों मंत्रियों ने अस्पताल में भर्ती ओणी गांव निवासी विनीता देवी से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली तथा चिकित्सकों से उपचार संबंधी विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
बताया गया कि विनीता देवी गुलदार के हमले में गंभीर रूप से घायल हो गई थीं, जिन्हें उपचार के लिए बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मंत्रियों ने डॉक्टरों को महिला के बेहतर उपचार के निर्देश देते हुए हर संभव सहायता उपलब्ध कराने को कहा। इस दौरान उन्होंने परिजनों को भी ढांढस बंधाया और भरोसा दिलाया कि सरकार पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है।
इसके बाद स्वास्थ्य मंत्री और शिक्षा मंत्री अस्पताल में भर्ती दीपक उनियाल की माता से भी मिलने पहुंचे। बताया गया कि सीढ़ियों से गिरने के कारण उन्हें चोटें आई थीं और उनका उपचार बेस अस्पताल में चल रहा है। दोनों मंत्रियों ने उनके स्वास्थ्य की जानकारी लेते हुए चिकित्सकों से इलाज की प्रगति के बारे में जानकारी ली तथा शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
इस दौरान अस्पताल प्रशासन और चिकित्सकों को मरीजों के उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही न बरतने तथा बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।
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