आज मैं आपसे एक ऐसे विषय पर बात करने आया हूँ, जो हमारे जीवन की दिशा तय करता है—“संगति का असर होता है।”
कहा जाता है, "जैसी संगत, वैसी रंगत।"
यह कोई कहावत मात्र नहीं है, बल्कि जीवन का अनुभव है। हम चाहे जितने भी बुद्धिमान, समझदार या आत्मनिर्भर क्यों न हों, हमारे आसपास के लोग—हमारे विचार, आदतें और निर्णयों को गहराई से प्रभावित करते हैं।
आपने कभी देखा है, एक आम अगर सड़े हुए आमों के बीच रखा हो, तो वह भी जल्दी सड़ जाता है।
ठीक वैसे ही, अगर हम नकारात्मक सोच वाले, आलसी या हतोत्साहित करने वाले लोगों की संगति में रहते हैं, तो हम चाहें या न चाहें, उनका प्रभाव हमारे मन और व्यक्तित्व पर पड़ता है।
लेकिन अच्छी संगति, प्रेरणादायक संगति—जैसे शिक्षक, मार्गदर्शक, सकारात्मक सोच वाले मित्र—हमारे भीतर छिपी ऊर्जा को जाग्रत कर देते हैं। वे हमें हमारे लक्ष्य की याद दिलाते हैं, गिरने पर उठाते हैं और सफल होने पर नम्र बनाए रखते हैं।
संगति हमें तोड़ भी सकती है, और जोड़ भी सकती है।
संगति हमें गिरा भी सकती है, और ऊँचाइयों तक पहुँचा भी सकती है।
इसलिए मैं आप सबसे यही कहना चाहता हूँ—
अपना लक्ष्य ऊँचा रखो, लेकिन अपनी संगति को और भी ऊँचा चुनो।
जिनके साथ बैठने से आपके विचार उड़ान भरने लगें, वही आपकी असली संगति है।
मैं संत कबीर दास जी के शब्द दोहराना चाहूँगा:-
"संगत कीजै साधु की, हरे और की व्याधि।
संगत कीजै कंचन की, कंचन दे उजास।।"
इसका अर्थ है कि जैसे सोने की संगति से और धातुएँ भी चमक उठती हैं, वैसे ही अच्छे लोगों की संगति से जीवन में उजाला आ जाता है।
आइए, हम सब मिलकर अपने जीवन में सकारात्मक संगति को अपनाएँ और दूसरों के लिए भी एक प्रेरणास्रोत बनें।
Anoop Singh Negi
पेशे से शिक्षक... ❣️ Lecturer (Political Science)
सरकारी विद्यालयों में हर माह के अंतिम शनिवार को प्रतिभा दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर बच्चों के बीच में विभिन्न प्रतियोगिताएं की जाती हैं।
21 मई 2022 को प्रतिभा दिवस मातृ दिवस के रूप में मनाया गया और बच्चों के साथ-साथ माताओं ने भी अपना टैलेंट दिखाया।
प्रतिभा दिवस : छुपे सितारों को पहचानने का अवसर:-
हर व्यक्ति के भीतर एक विशेष चमक होती है — एक ऐसी रोशनी, जो उसे भीड़ से अलग बनाती है। यही चमक है — उसकी प्रतिभा।
प्रतिभा दिवस केवल एक उत्सव नहीं है, यह एक ऐसा मंच है जहाँ हर बच्चे, हर युवा, हर व्यक्ति को अपने भीतर छिपी संभावनाओं को व्यक्त करने का अवसर मिलता है।
यह वह दिन है, जब हम पढ़ाई के अंकों से परे जाकर इंसान की रचनात्मकता, सोच, कला, विज्ञान, खेल और व्यक्तित्व का जश्न मनाते हैं।
प्रतिभा वह बीज है, जो सही माहौल, सही प्रोत्साहन और सही आत्मविश्वास मिलने पर एक विशाल वृक्ष बन सकता है।
प्रतिभा दिवस हमें सिखाता है:
कि हर किसी में कुछ खास है।
कि हर कला, चाहे वह बड़ी हो या छोटी, सम्मान के योग्य है।
कि सच्ची प्रतिभा वही है जो निरंतर अभ्यास और आत्मविश्वास से चमकती है।
यह दिन हमें यह भी याद दिलाता है कि प्रतिभा जन्मजात तो हो सकती है, लेकिन उसे तराशना, संवारना और निखारना हमारी जिम्मेदारी है।
जिस तरह हीरा खदान से सीधे निकलने पर केवल एक पत्थर होता है, लेकिन तराशे जाने पर वह अनमोल बनता है — वैसे ही प्रतिभा को भी अभ्यास और समर्पण से महानता मिलती है।
आइए, प्रतिभा दिवस पर हम संकल्प लें —
कि हम अपनी प्रतिभा को पहचानेंगे, उसका सम्मान करेंगे, और उसे निरंतर निखारेंगे।
कि हम दूसरों की प्रतिभा की भी सराहना करेंगे, और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर देंगे।
कि हम हर दिन को प्रतिभा दिवस मानकर अपने भीतर के कलाकार, खिलाड़ी, वैज्ञानिक, विचारक को आगे लाएंगे।
क्योंकि दुनिया को बदलने के लिए बड़ी भीड़ नहीं चाहिए —
एक चिंगारी, एक प्रतिभा, एक जुनून ही काफी है।
पहलगाम आतंकी हमले पर विकास सर.... 🙏
दोस्तों, जीवन में जब हम ‘शिकायत’ से ज़्यादा ‘शुक्रिया’ कहना सीख जाते हैं, तो चमत्कार होने लगते हैं।
क्योंकि जहाँ कृतज्ञता होती है, वहाँ ऊर्जा होती है, उम्मीद होती है, और एक अद्भुत परिवर्तन की शुरुआत होती है।
तो आज से हर दिन की शुरुआत करें — एक "धन्यवाद" के साथ।
*🙏गतिविधि: आओ धन्यवाद करें! 🙏*
उन सुबहों का, जो हर दिन नई उम्मीदें लेकर आती हैं,
उन राहों का, जो भले ही कठिन हों, पर मंज़िल की ओर ले जाती हैं।
आओ धन्यवाद करें उन लोगों का, जिन्होंने हमारी राह में फूल भी बिछाए और काँटे भी
क्योंकि दोनों ने ही हमें सिखाया — चलना कैसे है।
*आओ धन्यवाद करें🙏*
अपने आप का,
जो हर बार गिरकर भी उठा, और हार मानने से इनकार कर दिया।
क्या आपने कभी गौर किया है कि जब आप किसी को सच्चे दिल से "धन्यवाद" कहते हैं, तो सामने वाले के चेहरे पर एक मुस्कान आ जाती है और जब आप खुद कोई धन्यवाद सुनते हैं, तो मन हल्का और प्रसन्न हो जाता है। यही है — धन्यवाद की शक्ति।
धन्यवाद केवल औपचारिकता नहीं है। यह कृतज्ञता की वह चिंगारी है, जो हमारे भीतर की नकारात्मकता को जला देती है और सकारात्मकता का प्रकाश फैलाती है।
जब हम ‘धन्यवाद’ कहते हैं,हम यह स्वीकार करते हैं कि हम अकेले नहीं हैं। हम यह मानते हैं कि जीवन में बहुत कुछ ऐसा है जो हमें दूसरों के सहयोग, प्रेम और समय से मिला है।
धन्यवाद का अभ्यास करने से क्या बदलता है?
*🙏बहुत कुछ! 🙏*
सोच बदलती है – समस्याएँ छोटी लगने लगती हैं और समाधान पर ध्यान जाता है।
रिश्ते मजबूत होते हैं – जब आप किसी को धन्यवाद कहते हैं, तो आप उसके योगदान को मान्यता देते हैं।
स्वास्थ्य बेहतर होता है – रिसर्च से पता चला है कि कृतज्ञ लोग मानसिक और शारीरिक रूप से ज़्यादा स्वस्थ रहते हैं।
अंदर एक ऊर्जा जगती है – जो जीवन को एक उत्सव बना देती है। धन्यवाद की सबसे बड़ी शक्ति यह है कि यह हमें वर्तमान में जीना सिखाता है। जब हम बीते कल के लिए आभार जताते हैं, और आज की छोटी-छोटी बातों के लिए शुक्रिया अदा करते हैं — तो जीवन सुंदर दिखने लगता है।
धन्यवाद करें — सूरज की पहली किरण का, जो हर दिन नई शुरुआत देती है।
धन्यवाद करें — उस गलती का, जिससे हमने कुछ सीखा।
धन्यवाद करें — खुद का, कि हम हर परिस्थिति में डटे रहे।
ध्यान रखें,जिसे धन्यवाद कहना आता है, उसे जीवन से शिकायत करने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
तो आइए,हर दिन की शुरुआत करें एक नए संकल्प के साथ —"मैं हर उस चीज़ का धन्यवाद करूंगा, जिसने मुझे आज का मैं बनाया।"
mark spitz की इस कहानी में छुपा है सफल होने का रहस्य। Motivational stories
मार्क स्पिट्ज का नाम आज भी ओलंपिक इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाता है। लेकिन उनकी सफलता केवल किस्मत का खेल नहीं थी, बल्कि दृढ़ संकल्प, अथक परिश्रम और बलिदान की गाथा है।
बचपन से ही बड़ा सपना:
मार्क स्पिट्ज का जन्म 1950 में हुआ। बचपन से ही उन्होंने तैराकी में रुचि दिखाई। जब बाकी बच्चे खेल-कूद में व्यस्त होते, तब मार्क स्विमिंग पूल में घंटों अभ्यास करते। मात्र 10 वर्ष की उम्र में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपना पहला पदक जीता।
हर दिन एक चुनौती:
मार्क हर दिन सुबह 5 बजे उठते, और 6 से 8 घंटे तक पानी में रहते। उनके दिन का हर पल तैराकी को समर्पित था। उन्होंने अपने शारीरिक आराम, सामाजिक जीवन और मनोरंजन की कीमत पर यह अनुशासन स्वीकार किया।
1972 म्यूनिख ओलंपिक – इतिहास रचा:
इस कड़ी मेहनत और समर्पण का फल उन्हें 1972 में मिला, जब उन्होंने एक ही ओलंपिक में 7 स्वर्ण पदक जीतकर विश्व रिकॉर्ड बनाया। ये सभी पदक विश्व रिकॉर्ड टाइम में जीते गए, जो आज भी एक दुर्लभ उपलब्धि मानी जाती है।
सफलता की कीमत:
मार्क स्पिट्ज ने अपनी किशोरावस्था का आनंद नहीं लिया। उन्होंने सामाजिक जीवन, छुट्टियाँ और कई सुखों का त्याग किया। यह थी उनकी सफलता की कीमत।
प्रेरणा:
उनकी कहानी हमें यह सिखाती है कि
"सपनों को सच करना है, तो आराम से समझौता करना पड़ेगा। सफलता बिना कीमत के नहीं मिलती – उसकी कीमत होती है अनुशासन, परिश्रम और त्याग।"
प्राणायाम एक प्राकृतिक ब्रेन बूस्टर है – बिना किसी दवा या खर्च के।
अगर इसे दिन में सिर्फ 10-15 मिनट भी नियमित किया जाए, तो बेहतरीन मेमोरी और फोकस एक स्वाभाविक परिणाम बन जाता है।
बेहतरीन मेमोरी और फोकस में प्राणायाम की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण और वैज्ञानिक रूप से सिद्ध है। यह न केवल हमारी शारीरिक सेहत को बेहतर बनाता है, बल्कि मस्तिष्क की कार्यक्षमता को भी गहराई से प्रभावित करता है।
1. मस्तिष्क को अधिक ऑक्सीजन मिलती है:
प्राणायाम यानी श्वास पर नियंत्रण, जब हम गहरी और नियंत्रित साँसें लेते हैं, तो शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ती है।
ऑक्सीजन मस्तिष्क का भोजन है। जितनी अच्छी ऑक्सीजन, उतना अच्छा सोचने, समझने और याद रखने की क्षमता।
2. एकाग्रता (Focus) बढ़ती है:
नियमित प्राणायाम से मन की चंचलता कम होती है।
जैसे-जैसे श्वास शांत होती है, वैसे-वैसे विचारों की गति नियंत्रित होती है। इससे मन वर्तमान में टिकता है – जो कि ध्यान और फोकस की पहली शर्त है।
3. स्ट्रेस हार्मोन Cortisol कम होता है:
तनाव और चिंता याददाश्त को कमजोर कर देते हैं।
प्राणायाम, खासकर अनुलोम-विलोम और भ्रामरी, शरीर में तनाव के हार्मोन को कम करके दिमाग को शांत और स्थिर बनाते हैं।
4. दिमाग की न्यूरो-प्लास्टिसिटी में सुधार:
कुछ रिसर्च बताती हैं कि प्राणायाम नियमित करने से मस्तिष्क में नई चीजें सीखने और याद रखने की क्षमता बढ़ती है। यह लॉन्ग टर्म मेमोरी को मज़बूत बनाता है।
5. नींद में सुधार – बेहतर फोकस का आधार:
प्राणायाम से नींद गहरी होती है, और अच्छी नींद सीधे तौर पर ध्यान और याददाश्त को बेहतर बनाती है।
6. ध्यान और प्राणायाम का संयोजन:
अगर प्राणायाम के बाद 5-10 मिनट ध्यान (मेडिटेशन) भी करें, तो यह स्मृति, कल्पना और रचनात्मकता को और भी बेहतर करता है।
नियमित अभ्यास से मिलने वाले लाभ:
छात्र जल्दी याद कर पाते हैं
Concepts लंबे समय तक याद रहते हैं
परीक्षाओं में फोकस बना रहता है
आत्मविश्वास बढ़ता है
प्राणायाम एक प्राकृतिक ब्रेन बूस्टर है – बिना किसी दवा या खर्च के।
अगर इसे दिन में सिर्फ 10-15 मिनट भी नियमित किया जाए, तो बेहतरीन मेमोरी और फोकस एक स्वाभाविक परिणाम बन जाता है।
Bullying और Peer Pressure
प्रिय विद्यार्थियों,
आज मैं आपसे दो ऐसे विषयों पर बात करना चाहता हूँ, जो स्कूल और कॉलेज जीवन में अक्सर अनदेखे रह जाते हैं, लेकिन हमारे व्यक्तित्व और आत्मसम्मान पर गहरा प्रभाव डालते हैं – Bullying (धौंसपट्टी) और Peer Pressure (साथियों का दबाव)।
Bullying क्या है?
जब कोई विद्यार्थी बार-बार दूसरों को डराता है, ताने मारता है, मज़ाक उड़ाता है या मानसिक/शारीरिक रूप से चोट पहुँचाता है, तो वह Bullying कहलाता है। यह मज़ाक नहीं होता – यह किसी के आत्मविश्वास को तोड़ने वाला ज़हर होता है। कई बार यह इतनी गंभीर हो जाती है कि पीड़ित विद्यार्थी खुद को अकेला, कमजोर और असहाय महसूस करने लगता है।
यदि आप कभी इसका शिकार हुए हैं – तो याद रखो, आपकी चुप्पी उस Bully की ताकत बनती है। आवाज़ उठाओ – अपने शिक्षक, माता-पिता या किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करो।
अगर आप अनजाने में किसी और को परेशान कर रहे हैं – तो तुरंत रुक जाओ। यह ताकत नहीं, बल्कि कमजोरी की निशानी है।
Peer Pressure क्या है?
कई बार हम वह सब करने लगते हैं जो हमारे दोस्त करते हैं – सिर्फ इसलिए कि हमें “कूल” दिखना है या ग्रुप में स्वीकार किया जाना है।
चाहे वह गलत फैशन हो, ग़लत बोलचाल, नकल करना, या यहां तक कि किसी गलत आदत की शुरुआत – ये सब peer pressure के कारण हो सकता है।
लेकिन याद रखो – सच्चा दोस्त वो होता है जो तुम्हारे सही फैसलों का सम्मान करे, ना कि तुम्हें मजबूर करे।
हर किसी की सोच, क्षमता और लक्ष्य अलग होता है। अपने आप से तुलना मत करो – और दूसरों को खुश करने के लिए अपनी पहचान मत खोओ।
प्रिय विद्यार्थियों,
Bullying से लड़ो – खुद के लिए और दूसरों के लिए।
Peer pressure से बाहर निकलो – और खुद पर भरोसा करना सीखो।
खुद की पहचान बनाओ, भीड़ में खो मत जाओ।
क्योंकि अंत में वही विद्यार्थी आगे बढ़ता है – जो खुद पर विश्वास करता है, और अपने रास्ते पर ईमानदारी से चलता है।
******************
बोलो बच्चों!
बिल्ली बनी बॉस बनकर बेंच पर बैठी,
बच्चों को बिना बात बेमतलब बुरा कहती।
बोलने वाले बोले – “यह Bullying है भैया, बहादुरी नहीं!”
बबलू बोला बिंदास बनकर –
“मैं मस्ती कर रहा था, मज़ाक था!”
पर मीनू की मासूम मुस्कान,
मूक मन में मर रही थी बार-बार।
फिर आया Peer Pressure का पलड़ा,
पिंकू पहनने लगा पटाखेदार पैंट,
पप्पी, पंकज, पायल ने पसीने में परेड की –
क्योंकि “ग्रुप में फिट बैठना है यार!”
पर बच्चो, सोचो ज़रा,
भीड़ में बनो बंदर या बनो ब्रांड?
Peer Pressure की पलटन में पहचान पिघलती है,
पर जो अपने मन की माने, वही महान निकलती है!
तो अब से बोलो:
**“हम ना बनेंगे Bully के बहकावे वाले बब्बर,
ना दबेंगे दबंग दोस्तों के डबल ढोल पर।
हम बनेंगे वो बच्चे जो बोले बिना डरे –
'ना' का मतलब 'ना' है, और 'मैं' जैसा हूँ, वैसा ही सही है।”
चलो अब सब मिलकर बोलो:
“Bullying को बाय-बाय, Peer Pressure को प्यारा No!
हम हैं खुद के हीरो, और यही है शो!”
धन्यवाद!
Teacher's Life... Enjoying 🥰
अनूप सिंह नेगी
एक प्यारा पुराना लोकगीत... ❣️
अनूप सिंह नेगी
क्या वाकई लोमड़ी "चालाक" है? इस कहानी ने समाज को काफी नुकसान पहुंचाया है। इसे सही करना ही होगा।
अनूप सिंह नेगी
रा. इ. का. हरगड़
क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ लोग मुश्किल हालात में भी मुस्कुराते क्यों हैं? और कुछ लोग सब कुछ होते हुए भी दुखी क्यों रहते हैं?”
सफलता और खुशी… ये दो शब्द सुनने में अलग लगते हैं, लेकिन असल में दोनों एक ही सोच से जुड़ते हैं – आपका नजरिया।
आप कितने अमीर हैं, आपके पास कितनी डिग्रियां हैं, या आप कितनी ऊँचाई पर हैं – ये सब तभी मायने रखते हैं जब आप खुश हैं।
और खुशी कोई बाहर की चीज नहीं, वो आपके भीतर है।
जब आप हर स्थिति में अच्छाई ढूंढना सीख जाते हैं, तब आप असली सफलता की ओर बढ़ते हैं।
अब देखिए – किसी के लिए बारिश एक परेशानी है, और किसी के लिए वही बारिश ठंडी हवा और राहत की सौगात है।
फर्क सिर्फ नजरिए का है।
“आपके पास क्या है, ये खुशी तय नहीं करता…
आप उस चीज़ को कैसे देखते हैं – वही आपकी खुशी और सफलता तय करता है।”
तो आज से एक नई शुरुआत कीजिए।
हर सुबह खुद से कहिए – “मैं खुश हूँ, क्योंकि मैंने खुश रहना चुना है।”
सफलता अपने आप आपके कदम चूमेगी।
“खुशी कोई मंज़िल नहीं, ये तो हर उस कदम का नाम है जो आप सकारात्मक सोच के साथ उठाते हैं।”
अनूप सिंह नेगी
रा. इ. का. हरगड़
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