01/05/2025
आज मैं आपसे एक ऐसे विषय पर बात करने आया हूँ, जो हमारे जीवन की दिशा तय करता है—“संगति का असर होता है।”
कहा जाता है, "जैसी संगत, वैसी रंगत।"
यह कोई कहावत मात्र नहीं है, बल्कि जीवन का अनुभव है। हम चाहे जितने भी बुद्धिमान, समझदार या आत्मनिर्भर क्यों न हों, हमारे आसपास के लोग—हमारे विचार, आदतें और निर्णयों को गहराई से प्रभावित करते हैं।
आपने कभी देखा है, एक आम अगर सड़े हुए आमों के बीच रखा हो, तो वह भी जल्दी सड़ जाता है।
ठीक वैसे ही, अगर हम नकारात्मक सोच वाले, आलसी या हतोत्साहित करने वाले लोगों की संगति में रहते हैं, तो हम चाहें या न चाहें, उनका प्रभाव हमारे मन और व्यक्तित्व पर पड़ता है।
लेकिन अच्छी संगति, प्रेरणादायक संगति—जैसे शिक्षक, मार्गदर्शक, सकारात्मक सोच वाले मित्र—हमारे भीतर छिपी ऊर्जा को जाग्रत कर देते हैं। वे हमें हमारे लक्ष्य की याद दिलाते हैं, गिरने पर उठाते हैं और सफल होने पर नम्र बनाए रखते हैं।
संगति हमें तोड़ भी सकती है, और जोड़ भी सकती है।
संगति हमें गिरा भी सकती है, और ऊँचाइयों तक पहुँचा भी सकती है।
इसलिए मैं आप सबसे यही कहना चाहता हूँ—
अपना लक्ष्य ऊँचा रखो, लेकिन अपनी संगति को और भी ऊँचा चुनो।
जिनके साथ बैठने से आपके विचार उड़ान भरने लगें, वही आपकी असली संगति है।
मैं संत कबीर दास जी के शब्द दोहराना चाहूँगा:-
"संगत कीजै साधु की, हरे और की व्याधि।
संगत कीजै कंचन की, कंचन दे उजास।।"
इसका अर्थ है कि जैसे सोने की संगति से और धातुएँ भी चमक उठती हैं, वैसे ही अच्छे लोगों की संगति से जीवन में उजाला आ जाता है।
आइए, हम सब मिलकर अपने जीवन में सकारात्मक संगति को अपनाएँ और दूसरों के लिए भी एक प्रेरणास्रोत बनें।