Knowledge of 33 district

Knowledge of 33 district knowledge

30/08/2021

हमीर देव चौहान की कहानी।
हमीर देव – राजस्थान की कहानी।
उस समय अलाउद्दीन बादशाह दिल्ली की गद्दी पर बैठा था। बादशाह का एक प्रिय सरदार मुहम्मद शाह था। बादशाह की मुहम्मद शाह पर बड़ी कृपा थी और इस वजह से वह बादशाह का चेहरा बन गया था। एक दिन मुहम्मद शाह ने हँसी में बात करते हुए ऐसी बात कह दी कि बादशाह गुस्से से लाल हो गया। उसने मुहम्मद शाह को फाँसी देने का आदेश दिया। बादशाह का आदेश सुनकर मुहम्मद शाह का जीवन सूख गया।

वह किसी तरह दिल्ली से भाग निकला। उसने अपनी जान बचाने के लिए कई राजाओं से प्रार्थना की, लेकिन किसी ने उसे आश्रय देना स्वीकार नहीं किया। सम्राट को नाराज करने की किसी की हिम्मत नहीं हुई। आपदा के कारण मुहम्मद शाह इधर-उधर भटक रहे थे। अंत में वह रणथंभौर के चौहान राजा हमीर के दरबार में गया। उसने राजा से उसकी जान बचाने की प्रार्थना की। राजा ने कहा – ‘राजपूत का पहला धर्म शरणार्थी की रक्षा करना है। तुम यहीं मेरे साथ रहो। जब तक मेरे जिस्म में जान है, कोइ तुम्हारा बाल भी बांका नहीं कर सकता।

मुहम्मद शाह रणथंभौर में रहने लगे। जब बादशाह अलाउद्दीन को इस बात का पता चला तो उसने राजा हमीर को सन्देश भेजा- ‘मुहम्मद शाह मेरा भगोड़ा है। उसे मौत की सजा सुनाई गई है। आप इसे तुरंत मेरे पास भेजें। ‘

राजा हमीर ने उत्तर भेजा – मोहम्मद शाह मेरी शरण में आया है और मैंने उसकी रक्षा करने का वचन दिया है, भले ही मुझे सारी दुनिया से लड़ना पड़े, मैं भय और लालच में शरण नहीं छोड़ूंगा। राजा का पत्र पाकर अलाउद्दीन बहुत क्रोधित हुआ। उन्होंने इसे अपमान माना और साथ ही सेना को रणथंभौर पर छापा मारने के लिए कहा। टिड्डियों की तरह, पठानों की एक विशाल सेना ने मार्च किया, रणथंभौर के किले को 10 मील तक घेर लिया, अलाउद्दीन ने फिर से राजा को संदेश भेजा कि वह मोहम्मद शाह को भेज दे।


बादशाह समझ गया कि राजा हमीर बादशाह की विशाल सेना को देखकर डर जाएगा, लेकिन राजा हमीर ने स्पष्ट कर दिया कि वह किसी भी तरह से शरण नहीं छोडेगा। युद्ध शुरू हो गया। सम्राट की सेना बहुत बड़ी थी; लेकिन राजपूत योद्धा मौत के दो हाथ भी करने को तैयार थे। महीनों तक भयंकर युद्ध चलता रहा। दोनों पक्षों के हजारों वीर मारे गए। अंत में एक दिन मुहम्मद शाह ने स्वयं राजा हमीर से कहा – ‘महाराज! तुमने मेरी वजह से बहुत कुछ सहा है। मैं अब आपके नायकों का विनाश नहीं देखता। मुझे राजा के पास जाना है। ‘

राजा हमीर ने कहा – ‘मोहम्मद शाह! ऐसी बात दोबारा मत कहना। जब तक मेरे शरीर में जान है, तुम यहां से बादशाह के पास नहीं जा सकते। राजपूत का कर्तव्य है शरण-रक्षा। मैं प्राण देकर भी अपना कर्तव्य निभाऊंगा। जैसे-जैसे समय बीतता गया राजपूत सेना के सैनिक कम होते गए। रणथंभौर किले में खाने-पीने का सामान कम होने लगा। दूसरी ओर, दिल्ली से आने के बाद अलाउद्दीन की सेना में नई टूकडिया बढ़ती रहीं। अंत में रणथंभौर किले के सभी खाद्य पदार्थ समाप्त हो गए। राजा हमीर ने जौहर व्रत का पालन करने का फैसला किया। राजपूत महिलाएं जलती हुई चिता में कूद गईं और भगवा वस्त्र पहनकर सभी राजपूत किले के द्वार खोलकर चले गए।

वे अपने शत्रुओं से लड़ते हुए मारे गए। मुहम्मद शाह भी राजा हमीर के साथ युद्ध के मैदान में गए और युद्ध में मारे गए। जब विजयी सम्राट अलाउद्दीन रणथंभौर के किले में पहुंचा तो उसे जलती हुई चिता की राख और अंगारे ही मिले। शरणार्थी की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर महापुरुष विश्व में भारत की इस पावन भूमि पर ही जन्में है

महाराणा कुम्भामहाराणा मोकल के बाद उनके ज्येष्ठ पुत्र कुम्भकर्ण(कुम्भा) मेवाड़ की शान गद्दी पर बिराजे। महाराणा कुम्भा मेवा...
12/07/2018

महाराणा कुम्भा

महाराणा मोकल के बाद उनके ज्येष्ठ पुत्र कुम्भकर्ण(कुम्भा) मेवाड़ की शान गद्दी पर बिराजे। महाराणा कुम्भा मेवाड़ के सीसोदियो की राणा शाखा के राजाओं में बड़ा प्रतापी राजा हुआ। वे अपने समय के सबसे प्रबल हिन्दू राजा थे। जिनके विरुद्ध महाराजाधिराज, रायराय(राजराय), राणेरॉय, महाराणा, राजगुरु, दानगुरु, शेलगुरु, परमगुरु, चपगुरु, टोडरमल और हिन्दू सुरताण आदि शिलालेखों में मिलते है। जो उसका राजाओं का शिरोमणि, विद्धवान, दानी और महाप्रतापी होना सूचित करते है।

महाराणा कुम्भा ने राज्यसिंहासन पर बैठते ही सर्वप्रथम अपने पिता को मारने वाला से बदला लेने का निश्चय किया। मंडोर के राव रणमल ने चितौड आकर वहां से 500 सवार साथ लेकर पाई कोटड़ा के पहाड़ो में जाकर भैलो को अपने पक्ष में किया। तदनन्तर महाराणा ने अपने पिता को मारने वालो चाचा व् मेरा तथा उसके पक्षकारों से बदला लेकर अपनी क्रोधग्नि शांत की। उस समय चाचा के पुत्र एका और महपा पंवार ने भाग कर माण्डू के सुल्तान के वहां शरण ली।

कुम्भलगढ़ का किला

इससे रणमल का प्रभाव मेवाड़ में बढ़ गया और महाराणा का कृपापात्र हो गया। ततपश्चात रणमल अपने अपने पक्ष के राठौड़ो को अच्छे अच्छे पदों पर नियुक्त कर महाराणा के दरबार में अपना प्रभाव दिन दिन बढ़ाता गया। राणमल ने कपट से महाराणा मोकल के भाई राघवदेव को मरवा डाला। इस घटना से महाराणा कुम्भा के दिल में रणमल के प्रति सन्देह उतपन्न हो गया। इस माना जाता है कि महाराणा मोकल के मारे जाने पर सिरोही के स्वामी ने सीमा से मिले हुए मेवाड़ के कुछ गांव दबा लिए, जिस पर महाराणा ने दौड़िये नरसिंह के अध्यक्षता में फ़ौज भेजकर आबू तथा उसके निकट का कुछ प्रदेश बल पूर्वक छीन कर अपने अधीन कर लिया।

कुम्भलगढ़ किले का मुख्य द्वार

महाराणा कुम्भा ने विस्. 1494(ई. सन 1437) में मालवे(माण्डू) के सुल्तान महमूद द्वारा महपा पंवार को सुपुर्द नहीं करने के कारण मालवे पर 1 लाख सवार ओर 1400 हाथी की सेना के साथ चढ़ाई की तथा सारंगपुर के पास दोनों सेनाओं के बीच घमासान युद्ध हुआ। जिसमें महमूद हारकर भाग गया। वीर विनोद के अनुसार सुल्तान भाग कर माण्डू के किले में जाकर रहा और उसने महपा पंवार को वहां से जाने के लिए कहा जिसके बाद महपा पंवार गुजरात की तरफ चला गया। इस पर महाराणा कुम्भा ने माण्डू का किला जा घेरा और सुल्तान महमूद को कैदी बनाकर चितौड ले आया। फिर छह महीने कैद रखने के पश्चात बिना किसी दंड लिए सुल्तान को छोड़ दिया। अपने शत्रु से कुछ नही लेकर इसके विपरीत उसे भेंट देकर स्वतंत्र कर देने के लिये, अबुल फजल में महाराणा कुम्भा की बड़ी प्रशंसा का उल्लेख मिलता है। इस विजय के उपलक्ष्य में महाराणा ने चित्तौड़ पर विशाल कीर्तिस्तम्भ बनवाया, जो अभी तक विद्दमान है।

महाराणा कुम्भा बड़े दयालु थे क्योंकि जब महपा पंवार और चाचा का पुत्र एका उनके पैरों में आ गिरे और अपना अपराध क्षमा करने की प्रार्थना की तो महाराणा ने दया करके शरण में आये अपराधियो का अपराध क्षमा कर दिया।

कुम्भलगढ़ किले की विशालकाय ऊँची दीवारे

महाराणा कुम्भा ने सारंगपुर, नागौर, गागरोन, अजमेर, मण्डोर, बड़ी, खाटू, चाटसू आदि तक उनको आक्रमण कर जीता। और अपने राज्य का निरन्तर विस्तार किया। आबू को विजय कर अपने राज्य का अंग बनाया। बूंदी को भी जीता तथा माण्डू के शासक महमूद का मान मर्दन किया। कुम्भा ने सारा हाड़ौती प्रदेश विजय कर अपने राज्य में मिलाया। महाराणा कुम्भा ने मालवे तथा गुजरात के सुलतानों की संयुक्त सेना को परास्त किया। उन्होंने दिल्ली के सुल्तान का कुछ प्रदेश, राजपूताने का अधिकांश क्षेत्र तथा मालवे एवं गुजरात के राज्यो का कुछ भाग छीनकर अपने राज्य में मिला लिया था। दिल्ली और गुजरात के राज्यो की भूमि पर महाराणा के प्रबल पराक्रम के साथ आक्रमण करने के कारण वहाँ के सुल्तानों ने छत्र भेंट कर महाराणा कुम्भा को हिन्दू सुरत्राण का विरुद(उपादि) प्रदान किया था।

महाराणा कुम्भा केवल युद्ध प्रिय ही नहीं थे अपितु कला एवं साहित्य के भी वे बहुत बड़े प्रेमी थे। मेवाड़ में उन्होंने कुम्भलगढ़ सहित कई छोटे बड़े 84 किलो में से 32 किलो का निर्माण करवाया, अनेक मंदिर तथा जलाशय बनवाये, एकलिंगजी के मंदिर का जीर्णोद्धार कराया, और अनेक साहित्यकारों को प्रोत्साहित किया। महाराणा कुम्भा जैसे वीर और युद्धकुशल थे, वैसे ही पूर्ण विद्यानुरागी, स्वयं वेद, स्मृति, मीमांसा, उपनिषद, व्याकरण आदि में प्रवीण थे। वह स्वयं बड़े विद्वान और विद्वानों का सम्मान कटने वाले थे। विस्. 1525(ई. सन 1468) में उनके राज्य लोभी दुष्ट पुत्र ऊदा(उदयसिंह) ने महाराणा कुम्भा की कुम्भलगढ़ में मामादेव मंदिर के निकट कटार से अचानक वार कर हत्या कर दी।

महाराणा कुम्भा के ग्यारह पुत्र- 1.ऊदा(उदयसिंह) 2.रायमल 3.नगराज 4.गोपालसिंह 5.आसकरण 6.अमरसिंह 7. गोविन्ददास 8. जैतसिंह 9. महरावण 10. क्षेत्रसिंह और 11. अचलदास थे।

महाराणा कुम्भा कुम्भा द्वारा निर्मित प्रमुख दुर्ग और किले

कुम्भलगढ़ दुर्ग: विश्व की दूसरी सबसे लंबी दिवार

राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित कुम्भलगढ़ दुर्ग कि दीवार जो कि 36 किलोमीटर लम्बी तथा 15 फीट चौड़ी है। इस दुर्ग का निर्माण महाराणा कुम्भा ने करवाया था। यह दुर्ग समुद्रतल से करीब 1100 मीटर कि ऊचाईं पर स्थित है। इसका निर्माण सम्राट अशोक के दूसरे पुत्र सम्प्रति के बनाए दुर्ग के अवशेषो पर किया गया था। इस दुर्ग के पूर्ण निर्माण में 15 साल (1443-1458) लगे थे। दुर्ग का निर्माण पूर्ण होने पर महाराणा कुम्भ ने सिक्के बनवाये थे जिन पर दुर्ग और इसका नाम अंकित था।

दुर्ग कई घाटियों व पहाड़ियों को मिला कर बनाया गया है जिससे यह प्राकृतिक सुरक्षात्मक आधार पाकर अजेय रहा। इस दुर्ग में ऊँचे स्थानों पर महल,मंदिर व आवासीय इमारते बनायीं गई और समतल भूमि का उपयोग कृषि कार्य के लिए किया गया वही ढलान वाले भागो का उपयोग जलाशयों के लिए कर इस दुर्ग को यथासंभव स्वाबलंबी बनाया गया। इस दुर्ग के अंदर 360 से ज्यादा मंदिर हैं जिनमे से 300 प्राचीन जैन मंदिर तथा बाकि हिन्दू मंदिर हैं।

इस दुर्ग के भीतर एक औरगढ़ है जिसे कटारगढ़ के नाम से जाना जाता है यह गढ़ सात विशाल द्वारों व सुद्रढ़ प्राचीरों से सुरक्षित है। इस गढ़ के शीर्ष भाग में बादल महल है व कुम्भा महल सबसे ऊपर है। महाराणा प्रताप की जन्म स्थली कुम्भलगढ़ एक तरह से मेवाड़ की संकटकालीन राजधानी रहा है। महाराणा कुम्भा से लेकर महाराणा राज सिंह के समय तक मेवाड़ पर हुए आक्रमणों के समय राजपरिवार इसी दुर्ग में रहा। यहीं पर पृथ्वीराज और महाराणा सांगा का बचपन बीता था। महाराणा उदय सिंह को भी पन्ना धाय ने इसी दुर्ग में छिपा कर पालन पोषण किया था। हल्दी घाटी के युद्ध में हार के बाद महाराणा प्रताप भी काफी समय तक इसी दुर्ग में रहे।

12/07/2018

ये है देश की पहली शापित नदी, जानिय पूरा सच

मऊ, ग्वालियर, भिंड, मुरैना, जालौन, कानपुर देहात, राजस्थान के कोटा तक चंबल 900 किमी क्षेत्र में यह नदी बहती है।बीहड़ के बीचो बीच एक सुन्दर और देश की स्वच्छ चंबल नदी बहती है।

कानपुर। बीहड़ का नाम सुनते ही अच्छे-अच्छों के रौंगटे खड़े हो जाते हैं। लेकिन यह बीहड़ कैसे बना, इसकी अहम कहानी है। मऊ, ग्वालियर, भिंड, मुरैना, जालौन, कानपुर देहात, राजस्थान के कोटा तक चंबल 900 किमी क्षेत्र में यह नदी बहती है।बीहड़ के बीचो बीच एक सुन्दर और देश की स्वच्छ चंबल नदी बहती है। यह भारत की इकलौती नदी है जो प्रदूषण से मुक्त है, पर इसके जल को न तो इंसान, पी सकते हैं और न ही जानवर। चंबल को शापित नदी के नाम से जाना जाता है। इस नदी के बारे में पुराण में भी लिखा गया है, चंबल की जिक्र महाभारत काल में है। मुरैना के पास इसी नदी के तट पर शकुनी ने जुएं में पांडवों को पराजित कर द्रौपदी का चीरहरण किया था। तभी क्रोधित होकर द्रौपदी ने नदी को शाप दिया था।
पंडित प्रोफेसर बलराम तिवारी ने बताया कि महाभारत में इस नदी का उल्लेख हुआ है। शकुनी द्वारा जुए में द्रौपदी को जीत कर उसका चीर हरण करने की घटना भी इसी इलाके में हुई और तब द्रौपदी ने शाप दिया कि जो इस नदी के जल का इस्तेमाल करेगा उसका अनिष्ट होगा। बहरहाल इन दंतकथाओं का नतीजा ये हुआ कि इस नदी के किनारे आबादी कम ही बसी और इसी वज़ह से ये आज इतनी साफ सुथरी है। पाठा और चंबल के डकैतों के जानकार दिनेश निगम के मुताबिक चंबल घाटी में डकैतों का करियर ज्यादा नहीम रहा, इसकी एक वजह यह नदी है। क्योंकि इस नदी के अलावा बीहड़ में पीने के पानी की भारी समस्या है। इसी के चलके डकैत पुलिस के शिकंजे में फंस जाते हैं। फूलन देवी ने बेमई कांड के बाद कई दिनों तक बिना पानी के गुजारे थे, प्यास के चलते ही उसने सरेंडर करने का मन बनाया था।
जनापाव से निगली कानपुर तक फैली
यह दक्षिणी पठार से निकलने वाली नदी है। मध्यप्रदेश में मऊ के निकट समुद्रतल से 616 मीटर ऊंची जनापाव पहाड़ी से चम्बल नदी निकली है। उत्तर पूर्व की ओर मध्य प्रदेश के धार, उज्जैन, रतलाम, मंदसौर जिलों में बहती हुई चौरासीगढ़ के निकट चम्बल राजस्थान की सीमा में प्रवेश करती है। यह राजस्थान के कोटा, सवाईमाधोपुर तथा धौलपुर जिलों में अनुमानित 210 किलोमीटर बहती है। कोटा में गांधी सागर, राणा प्रताप सागर और जवाहर सागर बांध इसी नदी पर निर्मित हुए हैं। इस नदी की कुल लम्बाई 966 किलोमीटर हैं। अंत में चम्बल उत्तर प्रदेश के इटावा, जालौन और कानपुर देहात जिले में आकर यमुना मे समाहित हो जाती है।
देखें वीडियो-

नहीं पी सका पानी, मारा गया पहला बागी
धौलपुर के वत्स गोत्रीय सामंत चंड महासेन जो चंबल के बीहड़ का पहला डाकू था। जो अपने अधिकार छीन लिए जाने परबगावत कर डाकू बन गया था। वह राजा भोज के राज्य के कारोबारियों को गुजरात से लौटते वक्त चंबल के घाटों पर रोक कर लूटता था। चंड ने बीहड़ों में छोटे-छोटे किले बनवाए,इनमें उसकी सेना के ठिकाने रहते थे। अपने अधिकार को छीन लेने के जुनून ने चंड महासेन को निर्दयी हत्यारा बना दिया था। राजा भोज ने उसे पकड़ने कई सैनिक अभियान चलाए,लेकिन बीहड़ों की कठिनाई की वजह से चंड का कुछ नहीं बिगड़ा। आखिरकार राजा भोज ने दिल्ली से आकर चंबल क्षेत्र में बसे तोमरों से चंड के आतंक से छुटकारा दिलाने का आग्रह किया। उसके बदले में तोमरों के शासक वज्रट तोमर को चंबल क्षेत्र में कर वसूली का अधिकार देने की पेशकश की। बीहड़ों के आदी हो चुके तोमर सैनिकों ने चंड को पंद्रह दिनों तक बीहड़ में घेर लिया। पानी नहीं होने के चलते उसके सभी साथी प्यास के चलते दम तोड़ दिया और तोमर सैनिकों ने गैंग के सरगना को मार गिराया था।
फूलन ने भी इसी के चलते किया सरेंडर
कानपुर देहात के बेहमई गांव में ठाकुरों को मौत के घाट उतारने के बाद फूलनदेवी चंबल की घाटियों में छिप गई थी। फूलन को गिरफ्तार करने के लिए यूपी, एमपी और राजस्थान की पुलिस ने चंबल के बीहड़ों को घेर लिया और तालाबों व कुओं के पानी में जहर मिला। फूलन को बीहड़ में रसद और पानी पहुंचाने वाले पुलिस के हत्थे लग चुके थे। भीषण गर्मी के चलते फूलन और उसके गैंग के डकैत प्यास के चलते टूट चुके थे। कुछ डकैतों ने चंबल का पानी पिया जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। फूलन के पास पेट भरने के लिए बीहड़ में सामान तो मौजूद था लेकिन सूख रहे गले को तर करने के लिए पानी नहीं था। आखिरकार जल से जंग हार गई और उसने अपने आपको पुलिस के हवाले कर दिया।

30/12/2016

अनपढ़ जाट पढ़ा जैसा, पढ़ा जाट खुदा जैसा”
यह घटना सन् 1270-1280 के बीच की है । दिल्ली में बादशाह
बलबन का राज्य था । उसके दरबार में एक अमीर दरबारी था ।जिसके
तीन बेटे
थे । उसके पास उन्नीस घोड़े भी थे । मरने से पहले वह वसीयत
लिख
गया था कि इन घोड़ों का आधा हिस्सा... बड़े बेटे को,
चौथाई
हिस्सा मंझले को और पांचवां हिस्सा सबसे छोटे बेटे को बांट
दिया जाये
।
बेटे उन 19 घोड़ों का इस तरह बंटवारा कर ही नहीं पाये और
बादशाह के
दरबार में इस समस्या को सुलझाने के लिए अपील की ।
बादशाह
ने
अपने सब दरबारियों से सलाह ली पर उनमें से कोई भी इसे हल
नहीं कर
सका ।
उस समय प्रसिद्ध कवि अमीर खुसरो बादशाह
का दरबारी कवि था ।
उसने जाटों की भाषा को समझाने के लिए एक पुस्तक
भी बादशाह के
कहने पर लिखी थी जिसका नाम “खलिक बारी” था ।
खुसरो ने
कहा कि मैंने जाटों के इलाक़े में खूब घूम कर देखा है और
पंचायती फैसले
भी सुने हैं और सर्वखाप पंचायत का कोई पंच ही इसको हल कर
सकता है ।
नवाब के लोगों ने इन्कार किया कि यह
फैसला तो हो ही नहीं सकता..!
परन्तु कवि अमीर खुसरो के कहने पर बादशाह बलबन ने सर्वखाप
पंचायत में अपने एक खास आदमी को चिट्ठी देकर गांव-अवार
(जिला- भरतपुर) राजस्थान भेजा (इसी गांव में शुरू से सर्वखाप पंचायत
का मुख्यालय चला आ रहा है और आज भी मौजूद है) ।
चिट्ठी पाकर पंचायत ने प्रधान पंच चौधरी रामसहाय सूबेदार
को दिल्ली भेजने
का फैसला किया। चौधरी साहब अपने घोड़े पर सवार होकर
बादशाह के
दरबार में दिल्ली पहुंच गये और बादशाह ने अपने सारे
दरबारी बाहर के
मैदान में इकट्ठे कर लिये । वहीं पर 19 घोड़ों को भी लाइन में
बंधवा दिया ।
चौधरी रामसहाय ने अपना परिचय देकर कहना शुरू किया -
“शायद
इतना तो आपको पता ही होगा कि हमारे यहां राजा और
प्रजा का सम्बंध बाप-बेटे का होता है और
प्रजा की सम्पत्ति पर
राजा का भी हक
होता है । इस नाते मैं जो अपना घोड़ा साथ लाया हूं, उस पर
भी राजा का हक बनता है । इसलिये मैं यह
अपना घोड़ा आपको भेंट
करता हूं और इन 19 घोड़ों के साथ मिला देना चाहता हूं, इसके
बाद मैं
बंटवारे के बारे में अपना फैसला सुनाऊंगा ।”
बादशाह बलबन ने इसकी इजाजत दे दी और चौधरी साहब ने
अपना घोड़ा उन 19 घोड़ों वाली कतार के आखिर में बांध
दिया, इस तरह
कुल बीस घोड़े हो गये ।
अब चौधरी ने उन घोड़ों का बंटवारा इस तरह कर दिया-
- आधा हिस्सा (20 ¸ 2 = 10) यानि दस घोड़े उस अमीर के बड़े
बेटे
को दे दिये ।
- चौथाई हिस्सा (20 ¸ 4 = 5) यानि पांच घोडे मंझले बेटे
को दे
दिये ।
- पांचवां हिस्सा (20 ¸ 5 = 4) यानि चार घोडे छोटे बेटे को दे
दिये ।
इस प्रकार उन्नीस (10 + 5 + 4 = 19)
घोड़ों का बंटवारा हो गया ।
बीसवां घोड़ा चौधरी रामसहाय का ही था जो बच गया ।
बंटवारा करके
चौधरी ने सबसे कहा - “मेरा अपना घोड़ा तो बच ही गया है,
इजाजत
हो तो इसको मैं ले जाऊं ?”
बादशाह ने हां कह दी और चौधरी साहब का बहुत सम्मान और
तारीफ
की । चौधरी रामसहाय अपना घोड़ा लेकर अपने गांव सौरम
की तरफ कूच
करने ही वाले थे, तभी वहां पर मौजूद कई हजार दर्शक इस पंच के
फैसले
से गदगद होकर नाचने लगे और कवि अमीर खुसरो ने जोर से
कहा -
“अनपढ़ जाट पढ़ा जैसा, पढ़ा जाट खुदा जैसा”।
सारी भीड़ इसी पंक्ति को दोहराने लगी । तभी से यह
कहावत
हरियाणा,
पंजाब, राजस्थान व उत्तरप्रदेश तंथा दूसरी जगहों पर फैल गई ।
यहां यह बताना भी जरूरी है कि 19 घोड़ों के बंटवारे के समय
विदेशी यात्री और इतिहासकार इब्नबतूता भी वहीं दिल्ली दरबार में
मौजूद था । यह वृत्तांत सर्वखाप पंचायत के अभिलेखागार में
मौजूद है। धन्यवाद।

12/12/2016

1974 में, रोमेनिया. मूर्स नदी के किनारे एक अल्यूमिनियम का टुकड़ा मिला जो रेत में 35 फीट के अंदर दबा था. इस टुकड़े के साथ जो हड्डी मिली वह मैमोथ के युग की लगती है. यही बात है जो वैज्ञानिक समझ नही पा रहे. का टुकड़ा मिला जो रेत में 35 फीट के अंदर दबा था.
इस टुकड़े के साथ जो हड्डी मिली वह मैमोथ के युग की लगती है. यही बात है जो वैज्ञानिक समझ नही पा रहे. अल्यूमिनियम की खोज 1808 में हुई थी और इतने बड़े टुकड़े को 1884 तक नहीं बनाया गया था.
यदि उन हड्डी के टुकड़ों से उस टुकड़े के उम्र का अंदाज़ा लगाया जाय तो उसकी उम्र ११००० साल होगी. इतने साल पहले मानव ने अल्यूमिनियम की खोज नहीं की थी. इसका मतलब यह हुआ कि पृथ्वी में उस समय एलीयन थे जिनकी तकनीक इतनी विकसित थी. इसका कोई सही जवाब नहीं मिल सका है.
कुल मिला कर, यह एक अनसुलझा सवाल है जिसका जवाब मिलना बाकी है.

26/03/2016

भारतीय इतिहास के प्रमुख युद्ध
ई.पू.
३२६ हाईडेस्पीज का युद्ध : सिकंदर और पंजाब के राजा पोरस के बीच जिसमे सिकंदर की विजय हुई |
२६१ कलिंग की लड़ाई : सम्राट अशोक ने कलिंग पर आक्रमण किया था और युद्ध के रक्तपात से विचलित होकर उन्होंने युद्ध न करने की कसम खाई |
ईस्वी
७१२ – सिंध की लड़ाई में मोहम्मद कासिम ने अरबों की सत्ता स्थापित की |
११९१ – तराईन का प्रथम युद्ध – मोहम्मद गौरी और पृथ्वी राज चौहान के बीच हुआ था | चौहान की विजय हुई |
११९२ -तराईन का द्वितीय युद्ध – मोहम्मद गौरी और पृथ्वी राज चौहान के बीच| इसमें मोहम्मद गौरी की विजय हुई |
११९४ -चंदावर का युद्ध – इसमें मुहम्मद गौरी ने कन्नौज के राजा जयचंद को हराया |
१५२६ -पानीपत का प्रथम युद्ध -मुग़ल शासक बाबर और इब्राहीम लोधी के बीच |
१५२७ -खानवा का युद्ध – इसमें बाबर ने राणा सांगा को पराजित किया |
१५२९ -घाघरा का युद्ध -इसमें बाबर ने महमूद लोदी के नेतृत्व में अफगानों को हराया |
१५३९ – चौसा का युद्ध – इसमें शेरशाह सूरी ने हुमायु को हराया |
१५४० – कन्नौज (बिलग्राम का युद्ध) : इसमें फिर से शेरशाह सूरी ने हुमायूँ को हराया व भारत छोड़ने पर मजबूर किया |
१५५६ – पानीपत का द्वितीय युद्ध :अकबर और हेमू के बीच |
१५६५ – तालीकोटा का युद्ध : इस युद्ध से विजयनगर साम्राज्य का अंत हो गया क्यूंकि बीजापुर, बीदर,अहमदनगर व गोलकुंडा की संगठित सेना ने लड़ी थी |
१५७६ – हल्दी घाटी का युद्ध : अकबर और राणा प्रताप के बीच, इसमें राणा प्रताप की हार हुई |
१७५७ – प्लासी का युद्ध : अंग्रेजो और सिराजुद्दौला के बीच, जिसमे अंग्रेजो की विजय हुई और भारत में अंग्रेजी शासन की नीव पड़ी |
१७६० – वांडीवाश का युद्ध : अंग्रेजो और फ्रांसीसियो के बीच, जिसमे फ्रांसीसियो की हार हुई |
१७६१ -पानीपत का तृतीय युद्ध :अहमदशाह अब्दाली और मराठो के बीच | जिसमे फ्रांसीसियों की हार हुई |
१७६४ -बक्सर का युद्ध : अंग्रेजो और शुजाउद्दौला, मीर कासिम एवं शाह आलम द्वितीय की संयुक्त सेना के बीच | अंग्रेजो की विजय हुई | अंग्रेजो को भारत वर्ष में सर्वोच्च शक्ति माना जाने लगा |
१७६७-६९ – प्रथम मैसूर युद्ध : हैदर अली और अंग्रेजो के बीच, जिसमे अंग्रेजो की हार हुई |
१७८०-८४ – द्वितीय मैसूर युद्ध : हैदर अली और अंग्रेजो के बीच, जो अनिर्णित छूटा |
१७९० – तृतीय आंग्ल मैसूर युद्ध : टीपू सुल्तान और अंग्रेजो के बीच लड़ाई संधि के द्वारा समाप्त हुई |
१७९९ – चतुर्थ आंग्ल मैसूर युद्ध : टीपू सुल्तान और अंग्रेजो के बीच , टीपू की हार हुई और मैसूर शक्ति का पतन हुआ |
१८४९ – चिलियान वाला युद्ध : ईस्ट इंडिया कंपनी और सिखों के बीच हुआ था जिसमे सिखों की हार हुई |
१९६२ – भारत चीन सीमा युद्ध : चीनी सेना द्वारा भारत के सीमा क्षेत्रो पर आक्रमण | कुछ दिन तक युद्ध होने के बाद एकपक्षीय युद्ध विराम की घोषणा | भारत को अपनी सीमा के कुछ हिस्सों को छोड़ना पड़ा |
१९६५ – भारत पाक युद्ध : भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध जिसमे पाकिस्तान की हार हुई | फलस्वरूप बांग्लादेश एक स्वतन्त्र देश बना |
१९९९ -कारगिल युद्ध : जम्मू एवं कश्मीर के द्रास और कारगिल क्षेत्रो में पाकिस्तानी घुसपैठियों को लेकर हुए युद्ध में पुनः पाकिस्तान को हार का सामना करना पड़ा और भारतीयों को जीत मिली |

26/03/2016

INTERESTING QUE. SCIENCE
प्रश्न अगर चन्द्रतल पर कोई भीषण विस्फोट किया जाये, तो क्या प्रथ्वी पर उसकी आवाज सुनी जा सकती है?
उ० नहीं, क्योंकि ध्वनि का संचरण निर्वात व्योम (Space) में संभव नहीं है
प्रश्न पक्षी जब आकाश में उड़ता है, तो बिना पंख चलाये भी दूर तक उड़ता रहता है , इसका कारण क्या है?
उ० उसकी गति में संवेग होता है
प्रश्न सड़क मोड़ पर एक तरफ कुछ ऊंची बनायीं जाती है, क्यों?
उ० अभिकेन्द्र बल प्राप्त करने के लिए
प्रश्न एक लिफ्ट में एक तराजू के दोनों पलड़ों में बराबर भार के पत्थर पड़े हुए है , लिफ्ट के चालू होने पर क्या प्रभाव होगा ?
उ० कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा
प्रश्न एक वाच ग्लास में आयोडीन का विलयन रखा हुआ है, इसके अंदर आलू का टुकड़ा काटकर रख दिया गया है. आलू के टुकड़े की सतह का रंग कैसा हो जायेगा ?
उ० नीलास्पस्टीकरण: आलू की टुकड़े को काटने पर उसकी सतह पर उपस्थित स्टार्च आयोडीन के विलयन से मिलकर नीला रंग उत्पन्न करता है |
प्रश्न पित्त किससे निकलता है?
उ० यकृत से
प्रश्न होम्योपैथी का संस्थापक कौन था ?
उ० हनीमैन
प्रश्न विटामिन्स की खोज किसने की ?
उ० फंक ने
प्रश्न डी.एन.ए. (D.N.A.) के सामान्य तत्व कौन कौन से हैं?
उ० नाईट्रोजीनस बेस, फास्फेट एवं शुगर
प्रश्न किसी स्वच्छ तालाब का पानी इतना गहरा प्रतीत नहीं होता, जितना की वास्तव में गहरा होता है, क्यों ?
उ० विरल माध्यम से सघन माध्यम में प्रकाश की किरण के आवर्तन के कारण होता है |
प्रश्न मनुष्य में हीमोग्लोबिन के अणु से आक्सीजन के कितने अणु बंध सकते हैं?
उ० चार
प्रश्न: भारहीनता की स्थिति कब होती है ?
उ० प्रभावी गुरुत्वाकर्षण शून्य होने पर
प्रश्न बर्फ पानी पर क्यों तैरती रहती है?
उ० बर्फ का आपेक्षिक घनत्व पानी के आपेक्षिक घनत्व से कम होता है
प्रश्न परखनली शिशु (Test Tube Baby) उत्पन्न करने की तकनीक का विकास किसने किया था ?
उ० राबर्ट एडवर्डस और पेट्रिक स्टेप्टो ने
प्रश्न निर्जलीकरण (Dehydration) में बच्चे के शरीर में साधारणतः किसकी कमी हो जाती है?
उ० पोटैसियम क्लोराईड
प्रश्न एक्यूपंचर विधि* का आविष्कार कहाँ हुआ था ?
उ० चीन में * यदि शारीर के रोगग्रस्त भाग में सुई प्रविष्ट की जाती है, तो किसी पीड़ा का अनुभव नहीं होता है, एक्यूपंचर इसी प्रक्रिया पर आधारित है |
प्रश्न अँधेरे कमरे में वस्तु क्यों नहीं दिखाई देती है?
उ० वास्तु से टकरा कर प्रकाश का परावर्तन नहीं हो पाता है
प्रश्न सिस्मोग्राम द्वारा किसका अध्ययन किया जाता है ?
उ० भूकम्प
प्रश्न चुम्बकीय उत्तर कहाँ पर स्थित है?
उ० ग्रीनलैंड के उत्तरी किनारे पर आर्कटिक महासागर में
प्रश्न समुद्र में ज्वार-भाटा कब आता है?
उ० अमावस्या, पूर्णिमा को
प्रश्न सेकण्ड पेंडुलम का दोलन काल कितना होता है?
उ० 2 सेकण्ड
प्रश्न: विज्ञापनों में प्रयुक्त रंगीन विसर्जन नलियों में कौन सी गैस प्रयोग में लायी जाती है ?
उत्तर: Ne
प्रश्न: मनुष्य के जिगर व मांसपेशियों में संचित ग्लाइकोजेन क्या है?
उत्तर: बहुशर्करा
प्रश्न: शुद्ध जल में ठोस पोटेशियम सायनाइड मिलाने से pH में कैसा परिवर्तन होगा ?
उत्तर: pH में कोई परिवर्तन नहीं होता है
प्रश्न: अग्निशमन यंत्र में एक बोतल में रखे सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ निम्नलिखित में से और क्या रखा जाता है ?
उत्तर: सोडियम बाईकार्बोनेट का शक्तिशाली विलयन
प्रश्न: सीमेंट का जमकर कठोर होने का कारण क्या है?
उत्तर: जल-योजन व जल-अपघटन
प्रश्न: सीमेंट के प्रयोग में बालू का क्या उपयोग होता है?
उत्तर: सीमेंट जल या नमीं का अति सुग्राही है| नमीं के कारण इसमे आंतरिक प्रतिबल उत्पन्न हो जाता है, जिससे इसमे दरार पड जाती है और इसकी क्षमता कम हो जाती है | बालू मिलाने से सीमेंट में आंतरिक प्रतिबल नहीं उत्पन्न होता है, जिससे सीमेंट में दरार नहीं पड़ती |
प्रश्न: काँच क्या है?
उत्तर: काँच अक्रिस्टलीय ठोस के रूप में एक अतिशीतित (supercooled) द्रव है , इसीलिए काँच की कोई क्रिस्टलीय सरंचना नहीं होती और न ही इसका कोई निश्चित गलनांक होता है | इसका संघटन परिवर्तनीय है |
aR2O.bMO.6SiO2
जहाँ R = एक-संयोजक क्षार धातु; जैसे – Na, K आदि |
M = द्वि- संयोजक क्षार धातु; जैसे – Ca, Pb आदि |
a तथा b अणुओं की संख्या
प्रश्न: काँच को नींबू सा पीला रंग प्रदान करने के लिए कौन सा पदार्थ उपयोग में लाया जाता है ?
उत्तर: कैडमियम सल्फाईड
प्रश्न: कौन सी गैस (कोई एक उदहारण दीजिए) को जल के ऊपर इकट्ठा नहीं किया जा सकता ?
उत्तर: SO3
प्रश्न: शुष्क बर्फ क्या होती है ?
उत्तर: ठोस कार्बन-डाई-आक्साईड
प्रश्न: दियासलाई की तीलियों में जलने वाला पदार्थ क्या होता है ?
उत्तर: K2Cr2O7 + S + P
प्रश्न: लैम्पों में प्रकाश उत्पन्न करने के काम में कौन सी गैस उपयोग में लायी जाती है?
उत्तर: ऐसीटलीन

26/03/2016

1. पृथ्वी के अंदर ताप, दबाव तथा रासायनिक क्रियाओं के प्रभाव से आग्नेय व अवसादी चट्टानों के स्वरूप तथा गुणधर्म में परिवर्तन होने से कौनसी चट्टान बनती है।
- कायांतरित चट्टान
2. 10 अक्षांश के बीच की दूरी कितनी है।
- 111.33 किमी
3. अच्छी गुणवत्ता वाला कोयला कौनसा होता है।
- एंथ्रेसाइट कोयला
4. निम्न श्रेणी का कोयला होता है।
- पीट कोयला
5. क्क् देशांतर रेखा को कहा जाता है।
- ग्रीनविच रेखा (प्रधान योम्योतर)
6. सौरमंडल में सबसे अधिक चमकीला तारा कौनसा है।
- साइरस
7. पृथ्वी के घूर्णन का कोणीय वेग कितना है।
- 0.0042 डिग्री प्रति सैकंड
8. चंद्रमा का प्रकाश पृथ्वी तक कितने समय में पहुंचता है।
- 1 मिनट 3 सैकंड
9. सौरमंडल का सबसे छोटा उपग्रह कौनसा है।
- डिमोस
१10. सौरमंडल का सबसे बड़ा उपग्रह कौनसा है।
- गनीमेडे (बृहस्पति का)
11. कौनसा ग्रह है जो अपनी परिक्रमा पूरी करने में सर्वाधिक समय लेता है।
- बृहस्पती ग्रह
12. सौरमंडल का सबसे बड़ा ज्वालामुखी कौनसे ग्रह पर स्थित है।
- मंगल ग्रह
13. लॉर्ड आफ द रिंग्स के नाम से विख्यात ग्रह कौनसा है।
- शनि
14. मंगल ग्रह की प्रथम यात्रा करने वाला अंतरिक्ष यान कौनसा है।
- मैरियन-9
15. किस ग्रह की परिक्रमा अवधि सबसे कम है।
- बुध
16. सबसे अधिक गर्म ग्रह कौनसा है।
- शुक्र
17. कौनसा धूमकेतु है तो ७६ वर्ष में दिखाई देता है।
- हेली
18. एक वर्ष में ग्रहणों की अधिकतम संख्या कितनी हो सकती है।
- सात
19. सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक आने में कितना समय लेता है।
- 8 मिनट 16 सैकंड
20. पृथ्वी की बहन कौनसा ग्रह कहलाता है।
- शुक्र

26/03/2016

भारत मे नदी तंत्र दो प्रकार का है।
1. हिमालयी नदियाँ
*सिँधु
*गंगा
*ब्रम्हपुत्र
2. गैर हिमालयी नदियाँ

*अरब सागर मेँ गिरने वाली नदियाँ

*बंगाल की खाड़ी मेँ गिरने वाली नदियाँ

आज हम "गैर हिमालयी नदियाँ" की Trick पर चर्चा करेँगे। यह Trick भी मैँने स्वयं बनायी है जो आपको कौनसी नदियाँ "बंगाल की खाडी" तथा "अरब सागर" मेँ गिरती है उसका Confusion हमेशा के लिए समाप्त कर देगी।

यह Trick उन सब मुख्य 9 नदियोँ की है जो "अरब सागर" मेँ गिरती है

*Trick-
"सालू की माँ भानमती सोजा"

Fact- की, मती Silent word है

अब मेँ Trick का सन्धि विच्छेद करता हूँ।

सा+लू=
*सा=साबरमती
*लू=लूनी

की=Silent word

माँ-
*माँ=माँडवी
*मा=माही

भा+न+मती=
*भा=भारतपुझा/ पोन्नानी नदी (केरल की सबसे लंबी नदी)
*न=नर्मदा
*मती=Silent word

सो+जा=
*सो=सोम
*जा=जाखम, जवाई

1. साबरमती
2. लूनी
3. माँडवी
4. माही
5. भारतपुझा या पोन्नानी
6. नर्मदा
7. सोम
8. जाखम
9. जवाई

यह सभी 9 नदियाँ "अरब सागर" मेँ जाकर गिरती है और इनके अलावा जो भी "गैर हिमालयी नदियाँ" बची है वह सभी बंगाल की खाड़ी मेँ जाकर गिरती है।

"बंगाल की खाड़ी" मेँ गिरने वाली मुख्य 8 नदियाँ है।
1. स्वर्ण रेखा
2. ब्राह्माणी
3. महानदी
4. गोदावरी
5. कृष्णा
6. पेन्नार
7. कावेरी
8. वैगाई

26/03/2016

FIRST ONE👆

¶प्रथम अन्तरिक्ष पर्यटक
डेनिस टीटो
¶एवरेस्ट शिखर पर पहुँचने वाला पहला व्यक्ति
शेरपा तेनजिंग तथा सर एडमंड हिलेरी
¶उत्तरी ध्रुव पर पहुँचने वाला पहला व्यक्ति
रॉबर्ट पियरी
¶दक्षिणी ध्रुव पर पहुँचने वाला पहला व्यक्ति
एमंडसेन
¶साहित्य के प्रथम नोबेल पुरस्कार विजेता
रेने एफ. ए. सुल्ली प्रुघोम
¶शांति के प्रथम नोबेल पुरस्कार विजेता
जीन एफ. ड्यूनोट एवं फ्रेडरिक पैसी
¶चिकित्सा के प्रथम नोबेल पुरस्कार विजेता
ए.ई. बान बेहरिंग
¶भौतिकी के प्रथम नोबेल पुरस्कार विजेता
डब्ल्यू. ए.रोएंटजन
¶रसायन के प्रथम नोबेल पुरस्कार विजेता
जे.एच. वैंटहॉफ
¶अर्थशास्त्र के प्रथम नोबेल पुरस्कार विजेता
रैगनर फ़्रिश एवं जौन टिनब्रजेन
¶भूमिगत मेट्रो रेलवे प्रारंभकर्ता प्रथम देश
ब्रिटेन
¶बैंक नोट जारीकर्ता प्रथम देश
स्वीडन
¶कागजी मुद्रा जारी करने वाला प्रथम देश
चीन
¶संयुक्त राज्य अमेरिका का प्रथम राष्ट्रपति
जॉर्ज वाशिंगटन
¶ब्रिटेन का प्रथम प्रधान मंत्री
रॉबर्ट वालपोल
¶संयुक्त राष्ट्र संघ का प्रथम महासचिव
त्रिग्वेली (नार्वे)
¶प्रथम फुटबाल विश्व कप जीतने वाला देश
उरुग्वे
¶संविधान निर्माण करने वाला प्रथम देश
संयुक्त राज्य अमेरिका
¶गुटनिरपेक्ष आन्दोलन के प्रथम सम्मलेन का आयोजन स्थल
बेलग्रेड
¶भारत पर आक्रमण करने वाला प्रथम यूरोपियन
सिकंदर
¶चीन पहुँचने वाला प्रथम यूरोपियन
मार्कोपोलो
¶वायुयान से पहली उड़न भरने वाला व्यक्ति
राइट बंधू
¶विश्व के चारो ओर समुद्री यात्रा करने वाला प्रथम व्यक्ति
फर्दीनेंड मैगलन
¶चंद्रमा पर मानव भेजने वाला प्रथम देश
संयुक्त राज्य अमेरिका
¶कृत्रिम उपग्रह को अन्तरिक्ष में प्रक्षेपण करने वाला प्रथम देश
रूस
¶आधुनिक ओलम्पिक खेलो का आयोजन करने वाला प्रथम देश
यूनान
¶प्रथम नगर जिस पर परमाणु बम गिराया गया
हिरोशिमा
¶सर्वाधिक पशुओ वाला देश
भारत
¶भारत आने वाला प्रथम अंग्रेज
रैल्फ फिश
¶चंद्रमा पर उतरने वाला प्रथम व्यक्ति
नील आर्मस्ट्रांग
¶अन्तरिक्ष में पहुँचने वाला प्रथम व्यक्ति
मेजर युरी गागरिन (रूस)
¶अन्तरिक्ष में भेजा जाने वाला प्रथम अन्तरिक्ष शटल
कोलंबिया (अप्रैल, १९९१)
¶मंगल ग्रह पर उतरने वाला प्रथम अन्तरिक्ष यान
वाइकिंग -१
¶इंग्लैंड की प्रथम महिला प्रधानमंत्री
माग्रेंट थ्रेचर
¶किसी मुस्लिम देश की प्रथम महिला प्रधान मंत्री
बेनजीर भुट्टो (पाकिस्तान)
¶विश्व की प्रथम महिला प्रधान मंत्री
एस.भंडारनायके (श्री लंका)
¶विश्व की प्रथम महिला राष्ट्रपति
इसाबेल पैरो (अर्जेंटीना)
¶अन्तरिक्ष में जाने वाली प्रथम महिला
बेलेंतिना तेरेश्कोवा (रूस)
¶एवरेस्ट पर चढ़ने वाली प्रथम महिला
जुंको तेबई (जापान)
¶ब्रिटेन की पहली रानी
जेन
¶संयुक्त राष्ट्र महासभा की प्रथम महिला सभापति
श्रीमती विजय लक्ष्मी

26/03/2016

भारत के राष्ट्रीय प्रतीक(चिन्ह) एवं भाषा
India's National Emblem and Language

1. भारत का राष्ट्रीय पशु – टाइगर
बाघ भारत के वन्य जीवन के धन का प्रतीक है।
2. भारत का राष्ट्रीय पक्षी – मयूर
मयूर भारत का राष्ट्रीय पक्षी है यह सौंदर्य अनुग्रह जैसे गुणों का प्रतीक है।
3. भारत का राष्ट्रीय जलचर – गंगा डॉल्फिन
गंगा डॉल्फिन पवित्र के रूप में गंगा की पवित्रता का प्रतिनिधित्व करने के लिए कहा जाता है। क्योकि यह शुद्ध और ताजा पानी में ही जीवित रह सकते हैं।
4. भारत का राष्ट्रीय फल – आम
आम राष्ट्रीय फल है। और अत्यंत ही मीठा होता है। आम की अति प्राचीन काल से भारत में खेती की जाती है। इसकी 100 से अधिक किस्में हैं।
5. भारत का राष्ट्रीय पुष्प – कमल
वैज्ञानिक तौर पर Nelumbo Nucifera के रूप में जाना जाता है। कमल भारत का राष्ट्रीय फूल है और यह एक पवित्र फूल है। धन ज्ञान और आत्मज्ञान भूल का प्रतीक है। यह कीचड़ में खिलकर भी स्वच्छ होता है। जो दिल और मन की पवित्रता का प्रतीक है।
6. भारत का राष्ट्रीय पेड़ – बरगद
भारत का राष्ट्रीय पेड़ बरगद है। यह एक विशाल पेड़ है। जो अपने आस पास के वृक्ष और राहगीर को छाया प्रधान करता और हिन्दुओ में इसे पूजा जाता है।
7. भारत के राष्ट्र पिता – महात्मा गांधी
सबसे पहले सुभाष चंद्र बोस द्वारा “राष्ट्र के पिता” के रूप में 4 जून १,९४४ में रंगून से आजाद हिंद रेडियो पर संबोधित किये गए बाद में भारत सरकार द्वारा मान्यता दी गई।
8. भारतीय राष्ट्रीय ध्वज – तिरंगा
राष्ट्रीय ध्वज क्षैतिज तिरंगा शीर्ष पर गहरा भगवा (केसरी) और नीचे गहरे हरे रंग होता है। मध्य में सफेद जिसपर अशोक चक्र होता है। इसके इसकी लम्बाई चौडाई का अनुपात ३:२ होता है।
9. भारत का राष्ट्रीय खेल – हॉकी
हॉकी में भारत का आठ ओलंपिक स्वर्ण पदक के साथ एक प्रभावशाली रिकॉर्ड है। आधिकारिक तौर पर हॉकी राष्ट्रीय खेल है।
10. भारत का राष्ट्रीय गान – जन – गण – मन…….
जन – गण – मन गीत मूल रूप से बंगाली में रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा रचित है। इसके हिन्दी संस्करण को राष्ट्रीय गान के तौर पर अपनाया गया है।
11. राष्ट्रीय कैलेंडर – शक संवत
राष्ट्रीय कैलेंडर शक युग चैत्र के साथ अपनी पहली महीने के रूप में और 365 दिनों की एक सामान्य वर्ष के आधार पर 22 मार्च 1957 से अपनाया गया यह ग्रेगोरियन कैलेंडर के साथ में प्रयोग किया जाता है।
12. भारत का राष्ट्रीय गीत – वंदे मातरम्
गीत वंदे मातरम् बंकिमचंद्र चटर्जी द्वारा संस्कृत एवं बंगला में 1882 में रचित प्रेरणा किया जो के स्रोत है। इस गीत ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी गीत के पहले दो छंद को भारत गणराज्य के राष्ट्रीय गीत का आधिकारिक दर्जा दिया गया जो संस्कृत में है।
13. भारत के राष्ट्रीय प्रतीक
भारत का राष्ट्रीय प्रतीक सारनाथ में अशोक के बौद्ध शेर राजधानी (अशोक स्तम्भ का उपरी) है। इसमें चार एशियाई शेर एक दूसरे के विपरीत दिशा में चारो दिशाओ की सुरक्षात्मक मुद्रा में है। सारनाथ भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश में बनारस के पास है। भारत के प्रतीक के नीचे आदर्श वाक्य देवनागरी स्क्रिप्ट में “सत्यमेव जयते” उदित हैं – जिसका मतलब “सत्य की सदा ही जीत होती है”
14. भारतीय राष्ट्रीय नदी – गंगा नदी
गंगा भारत की सबसे लंबी नदी है। गंगा नदी पृथ्वी पर सबसे पवित्र नदी के रूप में हिंदुओं द्वारा प्रतिष्ठित है। किसी और नदी के मुकाबले दुनिया में सबसे भारी आबादी गंगा नदी के पास बसी है।
15. भारत की राज भाषा – हिंदी
हिंदी भारत देश की राज भाषा है। और विश्व में दूसरे नंबर की सब से ज्यादा लोगो दुआर बोली जाने वाली भाषा है।
16. भारत का राष्ट्रीय अवतार – भारत माता
भारत माता या भारतअम्बा/ Bhāratāmbā (संस्कृत से हिन्दी भारत अंबा से अम्बा ‘मां’/माता) एक देवी माँ के रूप में भारत के राष्ट्रीय अवतार के रूप में वह आम तौर पर एक नारंगी या केसरिया साड़ी पहने एक औरत को एक झंडा पकड़े और कभी कभी एक शेर के साथ दर्शाया जाता है।
(भारत देश के इन प्रतीक(चिन्ह) और भाषा के बारे में जितना लिखा जाये कम है। हर एक के बारे में लिखने के लिए तो

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