10/02/2026
मध्य प्रदेश के नीमच में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता कंचन बाई मेघवाल जी द्वारा दिखाया गया साहस, मातृत्व, कर्तव्य और महिला सशक्तिकरण का सर्वोच्च उदाहरण है। मधुमक्खियों के हमले के बीच 20 मासूम बच्चों को सुरक्षित बचाने के लिए उन्होंने चटाइयों और तिरपाल से बच्चों को ढकते हुए माँ की तरह उनका संरक्षण किया और स्वयं सैकड़ों डंक सहन किए।
उनका यह त्याग दर्शाता है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता समाज की संवेदनशील संरक्षक होती हैं, जो संकट की घड़ी में अपने दायित्व को सर्वोपरि रखती हैं। कंचन बाई जी का यह बलिदान प्रत्येक महिला की करुणा, साहस और अदम्य शक्ति को उजागर करता है।
उनका यह प्रेरणादायी बलिदान महिला सशक्तिकरण और मातृत्व की प्रेरक मिसाल बनकर सदैव स्मरणीय रहेगा।
20/10/2023
अगर चली है तो चल यूँ कि पात भी न हिले
ख़लल न लाए सबा तू फ़राग़ में गुल के
13/12/2022
जय भीम साथियों,
बाबा साहेब की लिखी पुस्तकें गरीब बच्चो को निशुल्क घर घर पहुंचने में हमारी मदद करने हेतु नीचे दिए गए लिंक या क्यूआर कोड पर अपना सहयोग देवे....
आपकी एक छोटी सी मदद बाबा साहेब के मिशन शिक्षा एक अधिकार में बहुत मददगार साबित होगी
कॉमेंट में स्क्रीनशॉट डालना मत भूलिएगा दोस्तो
जय भीम जय भारत
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16/08/2022
धन्यवाद साथियों, कैंडल मार्च में पहुंचने पर व अपना सहयोग देने के लिए
ऐसी घटनाएं रोज देखने को मिलती है कभी किसी दलित को घोड़ी से उतार दिया जाता है तो कभी किसी को पानी पीने के लिए पीट-पीटकर मार दिया जाता है, यह सारी घटनाएं कोई आम बात नहीं है हम लोग आए दिन अखबार में फेसबुक पर सोशल मीडिया के माध्यम से देखते रहते हैं,
जातिवाद का अंत शिक्षित और संगठित होकर ही किया जा सकता है
हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष किसी जाति विशेष या किसी धर्म विशेष के साथ नहीं है हमारी लड़ाई ऐसी घटिया मानसिकता और घिनौनी सोच के साथ हैं।
अगर कोई व्यक्ति शिक्षित होकर भी ऐसी घटनाओं को अंजाम देता है तो उसकी सजा सामान्य सजा से कहीं बढ़कर होनी चाहिए
जय हिंद जय भारत जय भीम।।
04/09/2021
साथ तो सब ने छोड़ा है राह ए मंज़िल में मगर...
ए गरीबी तू इतनी वफादार कैसे निकली...।।।😢🙏
27/07/2021
पेट तो मांग कर भी भरा जा सकता है😰😰
लेकिन
स्वाभिमान का बोझ उठाना बहुत मुश्किल काम है साहब।।🙏🙏
27/07/2021
"आज़ाद" वतन की माटी ले चिर निद्रा जब सोया होगा,
अम्बर में एक सितारा तब टूटा होगा,खोया होगा,
जिसके पत्तो की छांव तले,दे दिए प्राण उस नाहर ने,
चरखे-गुलाब का पता नही,वो पेड़ बहुत रोया होगा,