15/07/2026
राहुल 74 फीसदी अंक हासिल कर बने कॉलेज टॉपर, अमित रहे दूसरे स्थान पर
- डिप्लोमा इन फार्मेसी प्रथम व द्वितीय वर्ष के परीक्षा परिणाम में चमके पूर्ण मूर्ति कॉलेज ऑफ फार्मेसी के विद्यार्थी
सोनीपत, 15 जुलाई । पूर्ण मूर्ति कॉलेज ऑफ फार्मेसी, कामी रोड के विद्यार्थियों ने हरियाणा स्टेट बोर्ड ऑफ टेक्निकल एजुकेशन की ओर से आयोजित डिप्लोमा इन फार्मेसी (डी .फार्मा.) प्रथम व द्वितीय वर्ष की परीक्षा में शानदार प्रदर्शन कर संस्थान का नाम रोशन किया है। परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद कैंपस में खुशी की लहर है। डिप्लोमा इन फार्मेसी द्वितीय वर्ष में पूर्ण मूर्ति कॉलेज ऑफ फार्मेसी के विद्यार्थी राहुल 74 फीसदी अंक पाकर अपने कॉलेज में पहले स्थान पर रहे। अमित कुमार ने 72.09 फीसदी अंक लेकर दूसरा व सरिता ने 71 फीसदी अंक पाकर तीसरा स्थान पाया। वहीं डिप्लोमा इन फार्मेसी प्रथम वर्ष की परीक्षा में छात्रा अकरा इकबाल खान ने 72 फीसदी अंक हासिल कर कॉलेज में पहले स्थान पर रही। गौरव ने 71.1 फीसदी अंक लेकर दूसरा और साक्षी व सागर दोनों ने 70.1 फीसदी अंक पाकर संयुक्त रूप से तीसरा स्थान प्राप्त किया। परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद पूर्ण मूर्ति विद्यापीठ परिसर में सभी मेधावी विद्यार्थियों का जोरदार स्वागत किया गया।
पूर्ण मूर्ति विद्यापीठ के चेयरमैन डॉ.विजयपाल नैन, सचिव गौतम नैन, कोषाध्यक्ष भोपाल सिंह, प्रबंध निदेशक कपिल भाटिया, एमडी इंजी.संघदीप शाक्य, डायरेक्टर एकेडेमिक्स डा.स्वीटी, कैंपस डायरेक्टर कुलदीप, रजिस्ट्रार कंवलजीत सिंह संधू, पूर्ण मूर्ति कॉलेज ऑफ फार्मेसी की प्राचार्या डा. सुनीता, डा. सुमिता, नीलम व अभिषेक ने प्रथम व द्वितीय वर्ष की परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।
देश व विदेशों में फार्मासिस्ट और फार्मेसी पेशेवरों की लगातार बढ़ रही है मांग: डॉ.विजयपाल नैन
डॉ.विजयपाल नैन ने कहा कि देश व विदेशों में फार्मासिस्ट और फार्मेसी पेशेवरों की मांग लगातार बढ़ रही है। भारत में फार्मास्युटिकल उद्योग का आकार मौजूदा करीब 65 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2030 तक 130 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि डिप्लोमा इन फार्मेसी दो साल का एक संक्षिप्त और अत्यधिक मांग वाला कोर्स है, जो आपको चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में एक मजबूत करियर प्रदान करता है। डी.फार्मा करने के बाद विद्यार्थियों को राज्य फार्मेसी परिषद द्वारा पंजीकृत फार्मासिस्ट का लाइसेंस मिल जाता है, जिससे वे कानूनी रूप से अपनी खुद की दवा की दुकान या थोक व्यापार शुरू कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि सरकारी अस्पतालों, डिस्पेंसरियों और रेलवे आदि में फार्मासिस्ट की नियमित भर्तियां निकलती हैं। इसके अलावा, प्राइवेट अस्पतालों और क्लीनिकों में हमेशा प्रशिक्षित फार्मासिस्ट की मांग रहती है। यदि वे आगे पढ़ना चाहते हैं, तो डी. फार्मा करने के बाद बैचलर ऑफ फार्मेसी (बी.फार्मा) के दूसरे वर्ष (लेटरल एंट्री) में सीधा प्रवेश ले सकते हैं।
फोटो कैप्शन: पूर्ण मूर्ति कॉलेज ऑफ फार्मेसी के टॉपर विद्यार्थी संस्थान के चेयरमैन डा.विजयपाल नैन व प्राचार्या डा.सुनीता के साथ ।