भूँखा हूँ बेघर हूँ फिर भी खड़ा हूँ तनकर..
गरीबी कब तक मेरा इम्तेहान लेगी..
जुल्मी कहे या जालिम कहे ज़माना मुझको..
मैं बेगुनाह हूँ ये माँ मेरी मान लेगी..
परहेज़ मत रख तू बुजुर्गों की छांव से..
ज़वानी तुझ से भी आखरी सलाम लेगी..
रूह कों ही मिलेगा संवरने का मौका..
ख़ाक -ए- जमीन जब जिस्म थाम लेगी..
Dil jo na kah ska.".
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ऐसा मत कर वैसा मत कर..
उसको कहना छोड़ दिया.
पता नहीं क्या सोचा मैंने..
ये दुख सहना छोड़ दिया..
मेरे कहते रहने पर हम साथ रहे..
और फिर एक दिन..
मैंने कहना छोड़ दिया..
और उसने रहना छोड़ दिया..
जिनके पास उजाले होंगे..
उनके ही मन काले होंगे..
जो ख़ामोशी से जुल्म सह गए..
वो भी इज्जत वाले होंगे..
जो दौलतमंद बने फिरते हैं..
उन्होंने छीने खूब निवाले होंगे..
दिल के बदले दर्द ही मिला है..
फिर भी हम मतवाले होंगे..
02/08/2025
ये दुनिया पुरुषों के लिए बड़ी बेरहम है,
आदर पाने के लिए,
प्रेम पाने के लिए,
अपनी बात रखने के लिए,
परिवार का हिस्सा बनने के लिए
पैसा पास होना चाहिए ।
पैसे के बिना पुरुष का कोई
वजूद नहीं । पैसे से ही पुरुष
को इज्जत, प्यार और अपनी
बात रखने का हक मिलता है।
20/08/2022
थकना भी लाजमी था कुछ काम करते करते..
लेकिन अब थक गया हूँ आराम करते करते..
अँदर सब आ गया है बाहर का भी अँधेरा..
खुद रात हो गया हूँ मैं शाम करते करते..
यह उम्र थी ही ऐसी जैसी गुजार दी है..
बदनाम होते होते बदनाम करते करते..
जिस मोड़ से चले थे पहुँचे है फिर वहीं पर..
मंजिल भी रोई सफर का अँजाम करते करते..
01/08/2022
हुस्न क्या चीज है वक़्त के सामने..
तू कयामत सही, ता-कयामत नही..
अपने पैने नख से अरि के सीने फाड़ा करते हैं..
मिमयाते केवल बकरे हैं शेर दहाड़ा करते हैं..
#अशोकस्तम्भसारनाथ
ऐसा कोई दर्द नही जो सहा नही..
मगर कभी किसी से कुछ कहा नही..
छलक रही है आँख हर पल मेरी..
जख्म ही ऐसा है जो भरा नही..
हजार धोखे दिए हैं उसने मुझको..
मगर भरोसा उससे अभी उठा नही..
ऊपर वाला लेगा हिसाब एक दिन..
तू ये ना सोच कि है कोई सजा नही..
दे उम्र भर साथ राह-ए- ज़िंदगी में..
शख्स ऐसा अभी तक कोई मिला नही..
बता दे मुझे है कौन यहाँ ऐसा..
जो दर्द छिपाकर हँसा नही..
ना हम रहे हम , ना तुम रहे तुम..
कहाँ हुए गुम राकेश कुछ पता नही..
बूढ़ी बूढ़ी आंखों में हमारे लिए वो सपने सजाते हैं.
सब समेट कर अपना उन सपनों पर सब कुछ लुटाते हैं.
खुद को हराकर वो हमे जिताकर बस मुस्कुराते है.
ना कहते कभी, ना जताते, ना रोते कभी, ना बताते हैं.
चुपचाप हालातों से लड़कर हर कदम मुझे आगे बढ़ाते हैं.
पिता जी खुद ख़ामोश रह कर कितना कुछ कर जाते हैं.
16/06/2022
इस एक डर से ख्वाब देखता नही..
मैं जो भी देखता हूँ वो भूलता नही..
किसी मुंडेर पर कोई दिया जला..
फिर उसके बाद क्या हुआ पता नही..
मैं आ रहा था तो रास्ते मे फूल थे..
मैं जा रहा हूँ तो कोई रोकता नही..
तेरी तरफ चले तो उम्र कट गयी..
ये और बात है रास्ता कटा नही..
मैं इन दिनों हूँ खुद से इतना बेखबर..
मैं मर चुका हूँ और मुझे पता नही..
नफा-नुकसान व्यापारी लिख..
तू हर रिश्ता बाज़ारी लिख..
गरीब की चाहत हल्की थी..
अमीरी का महल भारी लिख..
अपनो ने मुझको धोखा दिया..
मैं अपनो का आभारी लिख..
सड़क विवश को पार करा..
मदद करना है बीमारी लिख..
करार कभी नही मिलेगा तुमको..
कदम-कदम पर बेकरारी लिख..
अहसानों के पर्वतों के..
पत्थर भारी-भारी लिख..
दर्द-ए-गम सुनाने वाले..
कभी तो ग़ज़ल सारी लिख..
अपनो की जीत में हारा राकेश..
ये दुनिया किस से हारी लिख..
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