04/03/2026
भूँखा हूँ बेघर हूँ फिर भी खड़ा हूँ तनकर..
गरीबी कब तक मेरा इम्तेहान लेगी..
जुल्मी कहे या जालिम कहे ज़माना मुझको..
मैं बेगुनाह हूँ ये माँ मेरी मान लेगी..
परहेज़ मत रख तू बुजुर्गों की छांव से..
ज़वानी तुझ से भी आखरी सलाम लेगी..
रूह कों ही मिलेगा संवरने का मौका..
ख़ाक -ए- जमीन जब जिस्म थाम लेगी..