19/08/2021
*सूचना*
1. DSSSB की TGT/PGT तथा अन्य परीक्षाओं में प्रश्नपत्र दो भागो में बटा होता है,किंतु 20 प्रश्न एक बार में खुलते है और उन्हें जमा करने के बाद ही अगले 20 प्रश्न सामने आते है।
जबकि परीक्षा के दो भाग जोकि 100 नंबर के है उन दोनो में अगल अगल 40 अंक न्यूनतम लाने ही होते है।
ऐसे में अभ्यार्थी को यह विकल्प नहीं देना कि वह कौन सा भाग पहले करें सरासर अन्याय है।
2. परीक्षा पूरी हो जाने के बाद दिल्ली सबोर्डिनेट सर्विस सिलेक्शन बोर्ड अपनी ओर से प्रश्नों के उत्तर प्रदान करता है किंतु अभ्यर्थी द्वारा लगाए गए उत्तरों की प्रति नही देता।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि अभ्यर्थी को अपने उत्तर जानने का अधिकार है इस संबंध में एक आदेश CBSE को माननीय सर्वोच्च अदालत द्वारा दिया गया था इस तरह प्रत्येक अभ्यर्थी को उत्तर प्रति अवश्य मिलनी चाहिए।
3. नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया विवादित और अन्याय पूर्ण है।
किसी भी प्रकार से एक अभ्यार्थी के अंकों को कम या ज्यादा करना न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता।
प्रश्न पत्र का स्तर बोर्ड के द्वारा निर्धारित किया जाता है ऐसे में अच्छी तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया का सामना करना पड़ता है।
उपरोक्त सभी बातों को लेकर शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे अधिवक्ता श्री अशोक अग्रवाल जी से बात की गई है।
*आपकी इस विषय पर क्या राय है अवश्य बताइएगा।*