04/02/2024
कितना अच्छा था बेचारा
कल सीढ़ी से फिसल गया
वो भी अच्छा था जिसको कल
भरा हुआ ट्रक कुचल गया
जीवन का एक लम्हा देखो
उम्र समूची निगल गया
अच्छे अच्छे दमदारों का
चुटकी में दम निकल गया
छड़भंगुर यह उजियारा है
किरणों का सत्कार करो
जाने कब छल जाए उमरिया
पल दो पल तो प्यार करो