पैगामे इस्लाम -- सभी हिन्दू ज़रूर पढ़ें
जीन दिनों भारत में लोकसभा चुनाव की तैयारी हो रही थी, उन्हीं दिनों पाकिस्तान के आतंकवादी हाफिज सईद की तरफ से गुप्त रूप से एक पत्र भारत के मुसलमानों के नाम भेजा गया था, जो खास तौर से यू पी के वहाबी मस्जिदों में वितरित किया गया था। चूँकि यह पत्र शिकस्ता उर्दू में था, जिसे सामान्य उर्दू जानने वाले नहीं पढ़ पाते थे। इसलिए मुल्ले इसे नमाज के बाद पढ़ कर सूना देते थे। लेकिन कुछ दिनों पहले उस पत्र की एक प्रति स्वामी रुपेश्वरानन्द जी ने हिंदी लिपि में लिखवा कर प्रकाशित किया है। हम उनका धन्यवाद देते हुए पुनः प्रकाशित कर रहे हैं, ताकि हर हिन्दू उस पत्र को पढ़े और लोगों को पढ़वा कर मुसलमानों की मंशा से सावधान हो जाएँ। पाकिस्तान से आये हुये इस पत्र जो की भारत की 3.5 लाख वहाबी मस्जिदों मे हर जुम्मे को पढ़ा जाता है। जो लोग सेकुलरिज्म के रोग से अंधे हो गए हैं। वह समझ लें कि मुसलमान कभी भी धोखा दे सकते हैं। इसलिए वह पत्र ज्यों का त्यों दिया जा रहा है।
"उर्दू पत्र की सत्यप्रति"
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- पैगाम इस्लाम -
आप सबको गुजारिश है कि हमने हिन्दुस्तान पर 800 साल हुकूमत की है। अब भी हमारी हुकूमत चलती है पर सीधी तरह से नहीं। सब पार्टियां और इनके काफिर नेता हमारे इशारे पर नाचते हैं। हमको आज मदरसों, मस्जिदों और हज के लिये पैसा मिलता है। 2004 और 2009 के चुनाव में हिन्दुओं की पार्टी भाजपा को मुंह की खानी पड़ी मगर हमारी पूरी हुकूमत तो तब मानी जायेगी जब पूरा हिन्दुस्तान इस्लाम के झण्डे के नीचे होगा। जल्द ही हमारे मुजाहिदीन लड़ाके सफ़ेद दाड़ी वाले गुजराती (मोदी) को मार देंगे फिर हिन्दुओं का अंतिम रहनुमा भी हमारे रास्ते से हट जायेगा। इसलिये हर मुसलमान का फर्ज है कि खाना जंगी के लिये तैयार रहें। इसके लिये हथियारों के अलावा बम बनाना सीखें और कुरान की 24 आयातें रोज पढ़ें और उसी के मुताबिक काफिरों के मारने, जलाने और धोखे से पकड़ने का काम सरंजाम दें और उनको लूट और उनकी औरतों को भगा कर शादी करें। वैसे तो ये सिलसिला 70 साल से चल रहा है। पर अब पूरा जोर तब लगायें जब खाना जंगी के लिये आईएसआई और इंडियन मुजाहिद्दीन के लिये हुकुम देंगे।
हर मुसलमान को दूसरा कलमा रोज पढ़ना चाहिये।
वो यह है-
हंस के लिये लिया है पाकिस्तान और लड़के लेंगे हिन्दुस्तान।
अगरचे मदरसा जैल बातों पर आप लोग चल रहे हो फिर भी तबज्जो दें।
1- बिजनौर यू0पी0 फार्मूलाः-
यहां पर मुस्लिम जवान लड़के हिन्दुओं से दोस्ती करके अपने घर बुलाकर मछली, मुर्गा खिलाते हैं और फिर काफिरों के घर उनकी औरतों से यारी करके फंसाते हैं। ये औरतें मुस्लिमों को माल भी खिलाती हैं और पैसा भी देती हैं। बहुत सी काफिर लड़कियों ने मुसलमानों से शादी कर ली है। वाह अल्ला तेरा शुक्र है।
2-बोतल फार्मूला-
गरीब बस्तियों में काफिरों को ज्यादा शराब पिला कर नामर्द बनाओ और उनकी औरतों से ऐश करो। 9 करोड़ हिंदु तो मुसलमानों से मिल चुके हैं और उनकी औरतें तो आराम से मुसलमानों के बगल में आ जाती हैं।
3- चोरी डकैती-
काफिरों के घरों में धोखा देकर चोरियां करो उनके खेतों की फसल काटो और उनके जानवरों की भी चोरी करो।
4- शहरी फार्मूला-(1)
मुसलमान अकल से काम लें,अपने छोटे लड़कों को काफिरों के घर नौकर रखो और 25-25 बच्चे कैसे पालोगे, 8-10 साल के बाद आपके बच्चे जवान होकर घर की हिन्दू औरतों से दोस्ती करेंगे और ऐश के साथ-साथ पैसा भी खूब मारेंगे।
5- शहरी फार्मूला-(2)
मुसलमान जवान नौकर, ड्राइवर, खानसामा, रोटी पकाने वाला, माली, चौकीदार बन हिन्दू नामों से रहो और मौका मिलते ही उपर वाली बातों पर अमल करें। इसके अलावा उनकी गाड़ियों, स्कूटरों वगैरा भी चोरी कर सकते हैं। ये शहर के इमाम से हर तरह के उस्तादों का पता लग जायेगा। काफिरों को जब पता लगा अपनी औरतों के बारे में पता लगा तो उन्होंने नौकरी से निकालने की कोशिश की तो औरतें ही कहने लगी- अच्छा भला ईमानदारी से काम करता है इसे नौकरी से क्यों निकालते हो। कई बार औरतें मुसलमानों के साथ भाग गईं। कई मुसलमान निकाले जाने के बाद दिन में जब काफिर घर पर नहीं होते आकर ऐश, ईशरत करते हैं। माल खाते हैं और पैसे भी ले जाते हैं। या अल्ला तेरा शुकर है तूने किसलिये हिन्दू को अंधा बनाकर रखा है, जिसको पैसा कमाने के अलावा कुछ भी नजर नहीं आता। ये इस्लाम की जीत है।
6- जेहाद-
खाना जंगी के जेहाद में यदि मुसलमान शहीद होगा तो उसे जन्नत मिलेगी, अगर जिन्दा बचता है तो हिन्दुस्तान के काफिरों की सारी जायदादें मुसलमानों को मिलेंगी और सारी हिन्दू औरतें भी मिलेंगी तो यह भी जन्नत होगी। जैसे पाकिस्तान, कश्मीर और बांग्लादेश की सब कोठियां बंगले मुसलमानों को मिले थे। जेहाद के लिये 2 लाख सीमी के जवान 1 लाख अलकायदा के लिये मुसलमान तैयार हैं। अब हम 20 करोड़ हो गये हैं इसके अलावा 5 करोड़ बंग्लादेशी जिसमें 1 लाख मुजाहिद्दीन लड़ाके हैं। इसलिये घबराने की जरूरत नही है। हिन्दुस्तान की मिलिट्री में भी काफी मुसलमान हैं और बहुत से तो हिन्दू नामों से भर्ती हैं। पुलिस में भी काफी मुसलमान हैं और वक्त आने पर काफिरों को दोजख पहुचायेंगे। आम हिन्दू लोगों में मुसलमानों के लिए नरम रूख है, जिसकी वजह ऊपर बताई वजह हिन्दू औरतों से दोस्ती है। केरल, मद्रास और हैदराबाद में काफी असलाह पाकिस्तान और अरब मुल्कों से आ चुका है। बिहार में चीन और बांग्लादेश से 60 हजार एके-47 आ चुकी हैं। इसलिये लाल किला पर झण्डा जल्दी झूलेगा।
अरब मुल्कों में हिन्दू औरतों को नर्स, आया,खाना बनाने वाली बनाकर ज्यादा से ज्यादा भेजें। अच्छी तनख्वाह के लालच में गरीब व दरम्यान घर की लड़कियां खुशी से जाती हैं और वहां जाकर रात को सारी की सारी अरबों के पास सो जाती हैं और मुसलमानों की आबादी बढ़ाने में काफी मददगार हैं।
7- हिन्दू लड़की से निकाह-
जो हिन्दू लड़की भगाकर लायी जाए उसे 2 दिन भूखा रखें फिर अच्छा-अच्छा खाना दें। उनकी सतत या खतना जरूर करायें। अगर उसके रिश्तेदार कोर्ट केस करें तो कोर्ट में ले जाने से पहले 50-60 बंदूकों के हथियार दिखायें और खबरदार करें। अगर हमारे खिलाफ बयान दिये तो तेरे भाई और खानदान को भून देंगे। ऐसी लड़की को वश में करने वाले ताबीज पहनाना न भूलें। ये भी कमाल का काम करता है।
8- हरियाणा के मुसलमानों का कमाल-
गांधी की मेहरबानी से मेवात के मुस्लिम पाकिस्तान नहीं गये थे। पिछले 15 सालों से 40 लाख मुस्लिम बिहार, यूपी, राजस्थान में आकर बस गये हैं। 70 फीसदी तो हिन्दू नामों से रह रहे हैं और ऊपर लिखी बाते अच्छी तरह सरंजाम दे रहे हैं। पंजाब में भी लाखों मुसलमान पहुंच चुका है। वक्त आने पर ये सब जेहाद के लिये कुरान के मुताबिक काफिरों को दोजख पहुचानें के लिये तैयार हैं। अल्ला हमारे साथ है।
9- काफिरों का बंटवारा-
वैसे तो हिन्दू जांत-पांत में बंटा है आप लोग इनके चमारों के दिमाग में हिन्दुओं के लिये खूब नफरत भरें कि हिन्दुओं ने इनके ऊपर सैकड़ों साल जुल्म ढाये। मुसलमानों शाबास।
10- आसाम और कश्मीर-
आसाम और कश्मीर पर तो मुसलमानों का कब्जा हो चुका है। सारे बुतखाने तोड़ दिये गये हैं। महलों व सड़कों का नाम बदलकर जिन्हा रोड व अली रोड कर दिये हैं। आसाम पर भी काफी हद तक मुसलमानों का कब्जा है। काफिरों का कत्ल करके दहशत फैला कर भगाया जा रहा है। इस तरह कश्मीर की तरह हिन्दुओं की जायदाद व औरतें अल्ला की फजल से हम मुसलमानों को मिल रही हैं। इन्शाह अल्लाह जल्दी ही सारे हिन्दुस्तान को इस्लाम के झंडे के नीचे आयेगा।
सन् 1947 में हमारे जवानों ने काफिरों के छोटे-छोटे बच्चे आसमान में उछाल कर नैजे व भाले पर लिये थे। इनकी औरतों के साथ 10-10 मुसलमानों ने जिन्हा किया था और अल्हादानी लोहे की नोहर गर्म करके लाल-लाल उनके थनों पर चिपकाई गई थी। कई औरतों के थन काट दिये थे। उनके बच्चों को मारकर पकाकर खिलाया भी था।
राजीव गांधी के राज में फार्मूला काश्मीर में आजमाया गया। नतीजा यह निकला कि साढ़े तीन लाख पण्डितों से कश्मीर 3 दिन में खाली हो गया और करोड़ों बल्कि अरबों रूपये की काफिरों की जायदाद पर मुसलमानों का कब्जा हो गया।
11- जेहाद में औरतों के लिये खास दस्ता-
मुसलमान जवान का यह दस्ता स्कूटर कार छोटे ट्रक वगैरा पर हिन्दू देवताओं की फोटों चिपकाकर रखें। ड्राइवर व कंडक्टर हिन्दू वेश में हो। जब अफरा-तफरी फैले तो काफिरों को जिनमें औरतें ज्यादा हों मुसलमान मोहल्लों में भगाकर ले जायें। औरतें को वहां पहुंचा दी जायें। काफिर मर्द और बच्चे मारकर दोजख भेज दें। ये नुस्खा 40 साल पहले अहमदाबाद में आजमाया गया था, उस समय वाई वी चैहान होम मिनिस्टर थे। इसी दस्ते के लिये
12- जयपुर फार्मूला
कई साल पहले हमारे मुसलमान जवानों ने जयपुर में फसाद शुरू किये थे और हिन्दू घरों से व लड़कियों के स्कूलों से उठा ली थी। 6 माह बाद जब 2-3 लड़कियों ने अपने घर खबर भेजी तो खानदान के उन लोगों ने उन लड़कियों को वापस लेने से इन्कार कर दिया। 1948 में जब हिन्दू मिलिट्री, हिन्दू औरतों को निकालकर हिन्दुस्तान लाई तो उनके खानदान वालों ने लेने से इंकार कर दिया। इस वास्ते कुछ ने तो खुदकुशी कर ली। ये सब मुसलमानों के लिये अच्छा हुआ। इसके लिये हिन्दुओं की दाद देनी चाहिये।
13- मुसलमानों और हिन्दुओं के मरने की निस्बतः-(अनुपात )
जब पाकिस्तान बना तो एक मुसलमान शहीद हुआ था और 100 काफिर मारे गये थे अब तो बमों और एके 47 का जमाना है, अल्ला ने चाहा तो एक मुसलमान के मारे जाने पर 1000 हिन्दू मरेंगे अल्ला हमारे साथ है। मुसलमानों को अल्ला का शुक्रगुजार होना चाहिये कि वो सब भूल गयें अल्ला ने उसका दिमाग बड़ा कमजोर दिया है। इसलिये हमने 800 सालहुकूमत की और इन्शाह अल्ला फिर करेंगे। इस बात से साबित होता है कि अल्ला भी चाहता है कि मुसलमानों को हिन्दुस्तान की हुकूमत मिले और हिन्दुओं की औरतों के साथ मौज मस्ती मिले । चीन, पाकिस्तान और बंग्लादेश से हथियार व नकली नोट हम मुसलमानों की मदद के लिये अल्ला भिजवा रहा है। हिन्दू अफसर और पुलिस वाले इसी पैसे से अंधे बना दिये जाते हैं।
यह खत मस्जिदों में जुमे के रोज सब मुसलमानों को सुनाया जाये। खाना जंगी के वक्त पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश भी हमारी मदद के लिये हिन्दुस्तान पर हमला बोल देंगे। नेपाल में काफी मंदिर तोड़ दिये गये हैं और आईएसआई की मदद से काफी लोग मुसलमान हो गये हैं।
14- कलावा मोटर साईकिल-
मुसलमान जवानों को चाहिये अपने हाथ में कलावा बांध कर अपना नाम बदलकर हिन्दू नाम अपना लें। मोटरसाईकिल पर सवार होकर हिन्दू मोहल्ले में कालेजों और स्कूलों के पास खड़े होकर हिन्दू लड़कियों से इश्क लड़ायें। होटलों में भी खुद भी ऐश करें और उनसे काल गर्ल्स का काम लें। इस कमाई से कुछ हिस्सा हथियारों पर खर्च करें। कारों वाले भाई जान भी करें। अरब मुल्कों में इसके लिये काफी पैसा हम तक पहुंच रहा है जिसे हमने तुम्हारे मौलानाओं से तुम्हें काफिरों की लौडियों को फंसाने के बाद तुम्हें देने को कह दिया है। भाजपा का डर था कि वो कुरान की 24 आयतें कहीं छापकर नहीं बांटे मगर अल्ला की मेहरबानी से वो अंधे हो गये और नहीं बांट सके। अल्ला तेरा शुक्र है !
भूल कर भी सिखों को न छेड़ें। ये जालिम होते हैं बल्कि चक्कर चलाकर उनको हिन्दुओं से दूर रखें। हिन्दुओं के बाद इनसे भी निबट लेंगे !
ये खत किसी हिन्दू को ना दिखायें।
आपका खादिम
(हाफिज सईद)
तनाराए तकबीर अल्लाह हो अकबर ''
नोट - इस लेख को ध्यान से पढ़िए और मित्रों को पढवाईए, क्योंकि इस से आपको पता चल जायेगा कि देश में होने वाले दंगे, हिन्दू लड़कियों का अपहरण, लेवजिहाद, बलात्कार, चोरी डकैती, आसाम में मुस्लिमों की बढ़ती हुई आबादी बंगलादेशियों की घुसपैठ, पाक द्वारा बार बार सीमा पार से कश्मीर में गोलाबारी और आतंकवाद की घटनाएँ क्यों होती रहती हैं? और क्या कारण है कि तथाकथित सेकुलर इन घटनाओं पर कुछ भी खुल कर नहीं बोलते और सरकारें कठोर कार्यवाही करने से क्यों डरती है?
और मुसलमान वास्तव में क्या चाहते हैं?
इस लेख में आपको ऐसे सभी प्रश्नों के उत्तर मिल जाएंगे।
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मेरा घर मेरा है और तुम्हारा घर भी मेरा है ।( इस्लामिक सूत्र )
इस्लाम में, एक बात वास्तव में बहुत ही चकित करती है! मुसलमानों का किसी भी अच्छी चीज का श्रेय लेना । और वो सब चीज़ों जो शर्मिंदा करती हैं की उनकी उत्पत्ती और प्रसार के लिए दूसरे को जिम्मेदार ठहराना । इस्लामवादी अक्सर दावा करते हैं कि वे अमरीका में कई चीजों को मानते हैं जो मूल में इस्लामिक हैं। उनमें से कुछ एक कदम आगे भी जाते हैं और कहते हैं, “अमेरिका कई मुस्लिम देशो से अधिक इस्लामिक है । – ” जब पूछा, “कैसे ?” वे लोगों के बीच और अमेरिकी प्रशासन में कुछ अच्छी चीजों का हवाला देते हैं। जैसे कि, कुछ भी अच्छा इस्लाम का उत्पाद है ऐसी स्थिति में-इस्लामवादियों ने हमेशा अपने सार्वभौमिक इस्लामी सूत्र का उपयोग करने की कोशिश की: “मेरा घर मेरा है, तुम्हारा घर भी मेरा है!” किस इस्लामिक साम्राज्य में कब और कौन सी चीज अच्छी हुई? उनके बारे में कोई सुराग नहीं है कि वे किस बारे में बात कर रहे हैं और कोई कारण भी नहीं है पर फिर भी मुँह खोला और बोल दिया !
वे दावा करते हैं कि – अल्लाह केवल धर्म की तरह विश्व के सभी नबी मुसलमान थे, और इस्लामवादियों ने मुहम्मद से पहले सभी नबियों का सम्मान किया है। कोई बात नहीं, आम तौर पर इस्लामवादियों ने किसी भी नबी के अनुयायियों का सम्मान नहीं किया। उनके लिए, केवल पैगंबर मुहम्मद (मुस्लिम) के अनुयायी अच्छे इंसान हैं। मुसलमान ईसाइयों को पसंद नहीं करेंगे- पैगंबर यीशु के अनुयायी; पैगंबर मूसा के अनुयायी यहूदी को पसंद नही करेगे । हिंदुओं को नहीं पसंद करेंगे- राम( विष्णु के अवतार) के अनुयायी । इसके बावजूद, मुस्लिम विष्णु, शिव, और मा काली या दुर्गा के हिंदू अवतार को छोड़कर उन सभी उपरोक्त भविष्यवक्ताओं का सम्मान करेंगे।
कनान की पवित्र भूमि में, वर्तमान में इजरायलियों और फिलीस्तीनियों द्वारा कब्ज़ा कर लिया गया , कई नबियो और कई राजाओं को जन्म दिया। राजा दाऊद और उसका बेटा राजा सुलैमान बस यहूदियों का राजा था, और यहूदियों और ईसाइयों के अनुसार, वे कभी नबी नहीं थे हैरानी की बात है, इस्लाम उन्हें इस्लाम के नबी कहता हैं। पाठकों ने स्पष्ट रूप से बंगाली, पाकिस्तानी, और भारतीय मौलानाओ के मुह से कई बार नबी सुलेमान और नबी दाऊद के नामों के बारे में सुना होगा। ये दो यहूदी किंग्स इस्लाम में सबसे अधिक अंधविश्वासी कहानियों का केंद्र बन गया है। कुरान ने इन दोनों तथाकथित भविष्यद्वक्ताओं के बारे में कई चमत्कारी कहानियां बताईं खासकर, नबी सुलेमान (वास्तव में राजा सुलैमान) इस्लाम के सबसे जादूगर नबी थे इस्लाम के इस तथाकथित नबी (जिसे सुलेमान पौगंबर के नाम से जाना जाता है) सभी जानवरों के साथ बात करने में सक्षम था और सभी जानवरों की भाषाओं (कुरान के अनुसार) को चींटी सहित समझने में सक्षम था। इस मामले की सच्चाई यह थी कि ये यहूदी राजा थे, न कि मुस्लिम राजा भी, और कभी नबी नहीं था। बाइबल (यहूदियों और ईसाई) के अनुसार, राजा सुलैमान को अपने मन की अदभुत खुफिया और तीक्ष्णता के आधार पर “बुद्धिमान राजा” के नाम से जाना जाता था। तो फिर वे मुस्लिम और भविष्यद्वक्ता कैसे बन जाते हैं जो कि काफी रहस्य की बात है। मुसलमानों ने शायद सार्वभौमिक इस्लामिक फार्मूला का इस्तेमाल किया “मेरा घर मेरा है और तुम्हारा घर भी मेरा है।”
अमेरिका में, एक दिन एक भारतीय ने एक मुल्ला के साथ एक बातचीत की थी जो पश्चिमी संस्कृति, विशेष रूप से अमेरिकी संस्कृति की कड़ी आलोचना कर रहा था। वे पश्चिम की बुरी संस्कृतियों द्वारा मुस्लिम मूल की अपनी और दूसरी पीढ़ी के संदूषण के बारे में बहुत चिंतित थे। जब भारतीय ने कहा, हम इस देश में आप्रवासी अतिथि हैं और हमें उनकी संस्कृति की आलोचना और हमारे मूल्यों को लागू करने के बजाय उनके संस्कृति के साथ सामन्जस्य करना सीखना होगा या तो बेहतर होगा हम इस देश को छोड़ दें और अपने ही देश में बस जाए। उसने तुरंत कहा, “यह पृथ्वी अल्लाह के द्वारा बनाई गई थी और यह अमेरिका भी अल्लाह का था। मुसलमान अल्लाह के सच्चे अनुयायी हैं, इसलिए वे इस दुनिया या पृथ्वी के सच्चे और वैध मालिक हैं। , यह अमेरिका भी मुसलमानों का था। ” यहां भी सूत्र है: “मेरा घर मेरा और आपका घर भी मेरा है!” यहां मुल्ला ने शायद अल्लाह के इस ग्रह को दो में विभाजित करने के लिए कुरान के सूत्र का प्रयोग किया: दारुल इस्लाम (इस्लाम के घर) और दारुल हरब (काफिरों का घर)। उनके अनुसार, अमेरिका, दारुल हरब है, जिसे आप्रवासी मुसलमानों द्वारा दारुल इस्लाम में बदला जाना चाहिए, अर्थात सभी मुसलमानों को अमेरिका (दारूल हार्ब) को दरुल इस्लाम में बदलने के लिए उसी फार्मूले से संघर्ष करना चाहिए, जिसके बारे में मैं बात कर रहा हूं।
मक्का: मक्का या बाका के प्राचीन शहर में, काबा चौकोर घर एक महत्वपूर्ण मंदिर था जो पैगंबर मुहम्मद के दिनों से पहले ही अस्तित्व में था। इसमें अरब देवी और देवताओ की कई प्रतिमाएं थी मक्का पगान अरब ने इसके भीतर कई मूर्तियों, “अल्लाह की बेटियों” को निहित किया था। प्रागैतिहासिक काल में, अरबों के युद्धरत जनजातियों के बीच हर साल एक चार महीने की युद्ध विराम संधि का आयोजन किया जाता था, और विभिन्न जनजातियों और कस्बों के लोग एक घनाकार इमारत काबा के चारों ओर सात बार चला करते थे ,अल सफा और अल मारवाह नामक पहाड़ियों के बीच आगे और पीछे चलते थे ,काले स्वर्गीय भेजा पत्थर का चुंबन, आदि क्रियाए करते थे। पैगंबर मुहम्मद ने क’आबा पर कब्जा कर लिया, सभी मूर्तियों को हटा दिया, और इसे इस्लाम के पवित्रतम मंदिर बना दिया आज प्रेत्यक मुसलमान का परम कर्तव्य है कि वो हज करने जाए जहा कि वो काबा के चारों ओर वामावर्त सात बार चलता है जो कि मुस्लिमों के लिए प्रार्थना की दिशा है, अल सफा और अल मारवाह नामक पहाड़ियों के बीच आगे और पीछे चलता है, ज़मज़म के कुएं से पानी पीता है, चौकसी में खड़ा होने के लिए अराफात पर्वत के मैदानों में जाता है और एक शैतान को पत्थर मारने की रस्म पूरा करने के लिए पत्थर फेंकता है। पूरा पेगन ताम झाम जो वो सदियो से कर रहे थे। फिर, इस्लाम ने दूसरे लोगों के घर को अपने स्वयं के पवित्र घर में पुराने इस्लामिक सूत्र के अनुसार बना दिया: “मेरा घर मेरा है और तुम्हारा घर भी मेरा है।”
अल्लाह: क्या आप जानते हैं कि अल्लाह कौन था? अल्लाह वास्तव में काबा में 360 देवताओं का प्रमुख था। अल्लाह एक ईश्वर का नाम था, जिसे अरब मुहम्मद का जन्म के कई सदियो पहले से पूज रहे थे। बुतपरस्त अरबों में यह शब्द “अल्लाह” अपने देवता के देवता प्रमुख देवता के लिए उपयोग होता था । Allah शब्द al-ilah से व्युत्पन्न हुआ था। कई विद्वानों और शिक्षाविदों का सोचना है कि। अरब बेडौइन और पेगन पहले से ही मक्का में काबा में अल्लाह की पूजा कर रहे थे। इस प्रकार, इस्लाम को “अल्लाह” शब्द बुतपरस्त अरबों से मिला है ।
पैगंबर मुहम्मद ने अरबो को यह विश्वास दिलाया कि वही अल्लाह (जिसकी वे पूजा करते हैं ) हिरा या हेरा पर्वत के गुफा में उसके साथ बात कर रहे थे (जो वास्तव में एक पर्वत नहीं है!)। उन्होंने उनसे कहा कि केवल अल्लाह (एक ईश्वर) की पूजा करें और शेष देवताओं को काबा में त्याग दें। इस प्रकार, इस्लाम ने बुतपरस्त अरबों के अल्लाह को अपने ही देवता के रूप अपना लिया या कह सकते हैं कि हथिया लिया । उसी इस्लामिक सूत्र के तहत : “मेरा घर मेरा है और तुम्हारा घर भी मेरा है।”
यरूशलेम: ये प्राचीन शहर jebusites और कनान जनजाति (अरब या यहूदीयो द्वारा नहीं) द्वारा बनाया गया था। बाद में, प्रसिद्ध यहूदी राजा दाऊद ने इस शहर का विकास किया और अभी भी यहूदियों और ईसाइयों के लिए बेहद पवित्र है। इस्लाम कभी इस शहर में किसी भी इमारत का दावा नहीं कर सकता है। 7 वीं शताब्दी में, खलीफा उमर ने इस शहर पर इस्लामिक अरब वंश के विस्तार की प्रक्रिया में कब्जा कर लिया। इसके बाद, मुस्लिम ने अल-अक्सा मस्जिद का निर्माण किया और यरूशलेम को इस्लाम का पवित्र शहर घोषित किया। वही पुराना इस्लामी सूत्र के “मेरा घर मेरा है , और तुम्हारा घर भी मेरा है।”
कुरान: पवित्र कुरान को ओल्ड टेस्टामेंट से नकल करके ज्यादातर बनाया गया था। इन दोनों पवित्र पुस्तकों में समानता से आपको सुखद आश्चर्य होगा फिर भी, एक मुसलमान इसको स्वीकार नहीं करेंगे। कुरान की कई आयते ओल्ड टैस्टमैंट में वापस देखे जा सकते हैं कई अरब विधर्म-लोककथाओं की कहानियों और मिथकों को कुरान में शामिल किया गया था।पारसी धर्म की किताब से कई आयते मिल सकती हैं जब उनसे पूछा गया कि कुरान में बाइबल और पारसी किताब की कहानियां किस प्रकार आती हैं, तो आम जवाब हैं – “नहीं, नहीं, इस्लाम ने दूसरों से काँपी नहीं किया। वास्तव में, बाइबल, पारसी की पुस्तक भी उसी अल्लाह से मिली थी। यहूदियों, ईसाईयों और अन्य लोगों ने मूल शास्त्रों को अल्लाह द्वारा भेजा है, इसलिए अल्लाह ने उन्हें फिर से (ताजा) भेजा है, पैगंबर मुहम्मद के माध्यम से मुख्य दूत जिब्राइल है । वह पुस्तक कुरान है। इसलिए केवल कुरान प्रामाणिक पवित्र पुस्तक है । अन्य सभी पवित्र पुस्तकों को विकृत कर दिया गया है और उन्हें सभी तरीकों से त्याग दिया जाना चाहिए। ” इस प्रकार, इस्लाम ने कुरान को अल्लाह से अंतिम पुस्तक को विभिन्न मौजूदा धार्मिक पुस्तकों से संश्लेषित करके और उन सभी लोककथाओं, कहानियों और अरब मिथकों को शामिल करके बनाया। यहां भी इस्लाम ने अन्य लोगों की पवित्र पुस्तक को एक ही इस्लामिक सूत्र के द्वारा अपनी पवित्र पुस्तक के रूप में बनाया।
10/08/2019
03/08/2019
नेशनल शूटर तारा शाहदेव प्रकरण में जज समेत पांच पर आरोप तय ‘अगर तू इस्लाम कबूल नहीं करती है तो तेरा बिस्तर तो यही रहेगा लेकिन आदमी बदलता रहेगा।' यह बातें तारा शाहदेव की सास कौ...
01/08/2019
आखिर कब तक हमारे देश में यह सब होता रहेगा आखिर कब तक यह लोग हमें मारते रहेंगे आखिर कब तक हम यह सब सहते रहेंगे अब आपकी बारी है आवाज उठाइए इन सब के खिलाफ और उन सब के खिलाफ जो आपकी बहू बेटी बहन आदि पर बुरी नजर रखते हैं
23/04/2019
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