यह वायुदाब (Air Pressure) और घनत्व (Density) में होने वाले बदलाव का एक बेहतरीन उदाहरण है।
यहाँ इस प्रयोग की सही वैज्ञानिक व्याख्या दी गई है:
1. दहन और निम्न दाब (Combustion and Low Pressure)
जब आप ग्लास के अंदर गैस (या मोमबत्ती) जलाते हैं, तो ग्लास के अंदर की हवा गर्म हो जाती है। गर्म हवा के अणु तेज़ी से फैलते हैं और दूर-दूर हो जाते हैं, जिससे ग्लास के अंदर की हवा का घनत्व (Density) कम हो जाता है।
2. वैक्यूम का निर्माण (Creation of Partial Vacuum)
जैसे ही ग्लास को उल्टा करके पानी में डाला जाता है, आग बुझ जाती है क्योंकि ऑक्सीजन खत्म हो जाती है। आग बुझते ही अंदर की हवा अचानक ठंडी होती है। ठंडी हवा सिकुड़ती है, जिससे ग्लास के अंदर एक आंशिक निर्वात (Partial Vacuum) पैदा हो जाता है और वायुदाब (Pressure) कम हो जाता है।
3. वायुमंडलीय दबाव का प्रभाव (Role of Atmospheric Pressure)
ग्लास के बाहर जो वातावरण है, उसका दबाव (Atmospheric Pressure) ग्लास के अंदर के दबाव से बहुत अधिक होता है। यह बाहरी दबाव रंगीन पानी को नीचे की ओर धकेलता है, और चूंकि पानी को कहीं और जाने की जगह नहीं मिलती, वह ग्लास के अंदर ऊपर की ओर चढ़ने लगता है जब तक कि अंदर और बाहर का दबाव बराबर न हो जाए।
संक्षेप में:
गर्म हवा: निम्न घनत्व और उच्च आयतन।
ठंडी हवा: उच्च घनत्व और कम आयतन (जिससे खिंचाव पैदा होता है)।
पानी का ऊपर चढ़ना: यह साबित करता है कि हवा हर चीज़ पर दबाव डालती है।
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Yaha nursery to twelve tak ki padayi hoti h
06/07/2025
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23/03/2025
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03/04/2024
हमें इतिहास क्यों पढ़ना चाहिए?
28/03/2024
09/03/2024
राम का पूरा जीवन ही त्रासदीपूर्ण रहा. इसके बावजूद लोग राम की पूजा करते हैं. भारतीय मानस में राम का महत्व इसलिए नहीं है, क्योंकि उन्होंने जीवन में इतनी मुश्किलें झेलीं; बल्कि उनका महत्व इसलिए है कि उन्होंने उन तमाम मुश्किलों का सामना बहुत ही शिष्टता पूर्वक किया. अपने सबसे मुश्किल क्षणों में भी उन्होंने खुद को बेहद गरिमा पूर्ण रखा।
अतः श्री राम जितने पूजनीय है उससे कही अधिक राम हमारे रोल मॉडल है।
BPSC तुम्हारी लीला अपरम्पार है।
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एक गुरु और एक शिक्षक (कोच, ट्रेनर या प्रशिक्षक नहीं) के बीच अंतर
एक शिक्षक आपके विकास की जिम्मेदारी लेता है।
एक गुरु आपको अपने विकास की जिम्मेदारी लेने लायक बनाता है, वह आपको विकास की शक्ति प्रदान करता है।
शिक्षक आपके लिए सूचना का प्रसंस्करण करता है, वह एक मार्गदर्शक भी है।
एक गुरु मुख्य रूप से सुधारक होने के साथ एक मार्गदर्शक भी है।
एक शिक्षक के अनुसार मछली पानी में रहती है और पानी का वातावरण कैसा होता है।
एक गुरु सिखाता है कि एक मछली की तरह पानी में कैसे तैरना चाहिए, कैसे धारा के विरुद्ध तैरना चाहिए।
एक शिक्षक की दुनिया उसकी व्यावहारिकता पर आधारित होती है।
एक गुरु विश्व के सभी पहलुओं सृजनात्मकता, व्यावहारिकता, विद्वता सभी पर ध्यान आकर्षित करता है।
एक शिक्षक आपको वे चीजें देता है जिसकी आपको आवश्यकता होती है।
एक गुरु आपको उस सभी ऐसी चीजों से दूर ले जाता है जिसकी आवश्यकता नहीं है।
एक शिक्षक आपके सवालों का जवाब देता है और आपके संदेहों को दूर करता है।
एक गुरु आपके सवाल पर सवाल करता है, वह संदेह पैदा करता है, फिर वह इसे हल करने में या इसका उत्तर खोजने में मदद करता है।
एक शिक्षक आपको दुविधाओं से या भूलभुलैया से बाहर निकलने में उस समय मदद करता है।
एक गुरु उन दुविधाओं को या भूलभुलैया को हमेशा के लिए नष्ट कर देता है।
एक शिक्षक अपने विद्यार्थी से अत्यधिक आज्ञाकारिता और अनुशासन की अपेक्षा रखता है।
एक गुरु उससे विश्वास और विनम्रता की अपेक्षा रखता है, उसे एक भिक्षुक की तरह देखता है जो ज्ञान और विद्वता की भीख के लिए हाथ फैलाये रहता है।
एक शिक्षक आपको कपड़े की तरह तैयार कराता है।
एक गुरु आपको नग्न कर देता है और यह एहसास दिलाता है कि सुंदर और आकर्षक आपका शरीर, शारीरिक भाषा और आपकी अभिव्यक्ति है न कि कपड़े, और इस आपके अंदर की यात्रा कराता है।
एक शिक्षक आपके रास्ते का मार्गदर्शक है।
एक गुरु इस रास्ते के पहचान विंदु का सूचक है।
एक शिक्षक आपको सफलता के रास्ते पर भेजता है।
एक गुरु स्वतंत्रता, सच्चे निर्वाण और सुंदरता के रास्ते पर भेजता है।
एक शिक्षक आपकी प्रतिभा देखता है।
एक गुरु आपको आपकी खुद की प्रतिभा की पहचान करने में मदद करता है, वह आपको आत्मनिरीक्षण के लिए मजबूर कर देता है।
एक शिक्षक के लिए सफलता का अर्थ एक विशिष्ट कार्य में पारंगत होना है।
एक गुरु के लिए सफलता का अर्थ एक ही है—जिंदगी ऐसे जीना, जैसे जीने की इच्छा है।
एक शिक्षक आपको सिखाता है कि कैसे किसी परिवेश में खुद को तत्काल अनुकूलित किया जा सकता है।
एक गुरु सिखाता है कि कैसे मानव जाति की भलाई के लिए अपने परिवेश को अपने अनुकूल ढाला जा सकता है।
एक शिक्षक एक स्थान के हिसाब से तैयार करता है कि आप दुनिया में कैसे स्थापित हो सकते हैं।
एक गुरु आपको दुनिया में कैसे संबन्ध स्थापित होंगे इसके बारे में बताता है ताकि आप दुनिया के किसी भी हिस्से में खुद को स्थापित करने में सक्षम हों।
एक शिक्षक आपको सूचनावान बनाता है जिससे आपके अहं में वृद्धि हो सकती है।
एक गुरु आपको सिर्फ सूचना से दूर विद्वता की ओर ले जाता है ताकि आपके अहंकार में कमी आ सके।
एक शिक्षक आपको निर्देशित करता है।
एक गुरु आपका विनिर्माण करता है।
एक शिक्षक आपके दिमाग में पैनापन लाता है।
एक गुरु आपके दिमाग को खोलता है। आपको जिज्ञासु बनाता है।
एक शिक्षक आपकी समृद्धि के लिए रास्ता दिखाता है।
एक गुरु आपकी भविष्यनिधि का रास्ता दिखाता है।
एक शिक्षक आपके दिमाग तक पहुँचता है।
एक गुरु आपकी आत्मा को छू लेता है।
एक शिक्षक आपको ज्ञान देता है।
एक गुरु आपको बुद्धिमान बनाता है।
एक शिक्षक आपको परिपक्व बनाता है।
एक गुरु आपको सरलता की ओर लौटाता है और बताता है कि किसी भी स्वरूप में सरलता मनुष्य की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
एक शिक्षक किसी समस्या को कैसे हल किया जाय, यह बताता है।
एक गुरु आपको कैसे मुद्दों को हल किया जाय, यह बताता है।
एक शिक्षक एक लीक में विचारों के विशेषीकरण में मदद करता है।
एक गुरु विचारों के समन्वय, उनमें आत्मनिर्भरता, अंतर्संबंधों को बनाने की सीख देता है।
एक शिक्षक आपको छड़ी के साथ दंडित कर सकता है।
एक गुरु आपको दयावान होकर आपको दंड का एहसास दिलाएगा।
एक शिक्षक छात्र के लिए क्या ऐसा हो सकता है जैसे पिता के लिए पुत्र।
एक गुरु शिष्य के लिए ऐसा हो सकता है जैसे बच्चे के लिए माँ।
आप एक शिक्षक को कहीं भी पा सकते हैं।
लेकिन एक गुरु की खोज कर उसे समर्पित करते हैं तदुपरान्त गुरु आपको खुद को खोजने में मदद करता है और तब आपको स्वीकारता है ।
एक शिक्षक आपको हाथ पकड़कर अंत तक ले जाता है।
एक गुरु खुद आपको इतना स्वतंत्र बना देता है कि आप खुद अंधकार में भी अपना रास्ता खोज पाएं।
जब एक शिक्षक के साथ आप अपना कार्य पूरा करते हैं तो खुश होते हैं।
जब गुरु के साथ अपना कार्य पूरा करते हैं तो आपका जीवन खुशियों से भर जाता है।
आप जब शिक्षक के साथ अपना पाठ्यक्रम पूरा करता है तो आप आभार व्यक्त करते हैं।
गुरु के साथ आपका अपना पाठ्यक्रम कभी पूरा नहीं होता, लेकिन जब वह समाप्त करते हैं तो आप महानता, गरिमा, लावण्य और बौद्धिकता की अनुभूति करते हैं।
18/07/2021
कादम्बिनी गांगुली भारत की पहली स्नातक और फ़िजीशियन महिला थीं। कादम्बिनी गांगुली पहली दक्षिण एशियाई महिला थीं, जिन्होंने यूरोपियन मेडिसिन में प्रशिक्षण लिया था।
जन्म की तारीख और समय: 18 जुलाई 1861, भागलपुर
मृत्यु की जगह और तारीख: 3 अक्तूबर 1923, कोलकाता
पति: द्वारकानाथ गांगुली (विवा. 1883–1898)
माता-पिता: ब्रजा किशोर बासु
बच्चे: ज्योतिर्मयी गंगोपाध्याय, प्रभात चन्द्र
शिक्षा: बेठुने कॉलेज, मेडिकल कॉलेज & हॉस्पिटल, कोलकाता
कादम्बिनी गांगुली का जन्म ब्रिटिशकालीन भारत में 18 जुलाई 1861 ई. में भागलपुर, बिहार में हुआ था। उनका परिवार चन्दसी (बारीसाल, अब बांग्लादेश में) से था। इनके पिता का नाम बृजकिशोर बासु था। उदार विचारों के धनी कादम्बिनी के पिता बृजकिशोर ने पुत्री की शिक्षा पर पूरा ध्यान दिया। कादम्बिनी ने 1882 में 'कोलकाता विश्वविद्यालय' से बी.ए. की परीक्षा उत्तीर्ण की थी।
'कोलकाता विश्वविद्यालय' से 1886 में चिकित्सा शास्त्र की डिग्री लेने वाली भी वे पहली महिला थीं। इसके बाद वे विदेश गई और ग्लासगो और ऐडिनबर्ग विश्वविद्यालयों से चिकित्सा की उच्च डिग्रियाँ प्राप्त कीं। देश में भले ही महिलाओं को उच्चतर शिक्षा पाने के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ा हो, लेकिन कादम्बिनी गांगुली के रूप में भारत को पहली महिला डॉक्टर 19वीं सदी में ही मिल गई थी। कादम्बिनी गांगुली को न सिर्फ भारत की पहला महिला फ़िजीशियन बनने का गौरव हासिल हुआ, बल्कि वे पहली साउथ एशियन महिला थीं, जिन्होंने यूरोपियन मेडिसिन में प्रशिक्षण लिया था।
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01/09/2023