04/09/2016
प्रणाम मित्रों,
सर्वप्रथम तो क्षमाप्रार्थी हूँ कि आपकी कॉल्स/मैसेज/सोशल मीडिया पर पोस्ट का उत्तर नहीं दे पा रहा हूँ। वैसे मेरी आदत रही है कि अपनी पोस्ट पर आई प्रत्येक टिप्पणी का उत्तर अवश्य देता हूँ, परन्तु पिछले दिनों घोर व्यस्तता के कारण उत्तर नहीं दे पाया। ये मत समझिएगा कि ये व्यस्तता स्थानान्तरण के बाद कार्यमुक्ति/कार्यभार ग्रहण मात्र की ही थी। अपितु रामपुर जनपद से जाते-जाते एक पत्रिका के संपादन का सौभाग्य मिला है उस कारण भी थी। इस पत्रिका का विमोचन 5 सितम्बर को होना है और इसी में व्यस्त था। यदि स्थानान्तरण नहीं होता तो भी इन दिनों मैं व्यस्त ही रहता। मैं टिप्पणियाँ भले ही न कर पा रहा हूँ परन्तु दृष्टि प्रत्येक।गतिविधि पर है। आज कुछ समय मिल पाया है तो आप लोगों से कुछ बात कर पा रहा हूँ।
सर्वप्रथम तो उन सभी को बधाई जिनका स्थानान्तरण हो गया है। ऐसे कई भाई-बन्धु आजकल फेसबुक/व्हाट्सएप्प पर अपनी प्रसन्नता प्रदर्शित कर रहे हैं। वो बात अलग है कि उनकी प्रसन्नता में उनके नियुक्ति जनपद और गाँव का नाम आ जाता है जहाँ विदाई और धन्यवाद की बाढ़ होती है फिर वो लोग सीधे अपने गृह जनपद का जिक्र कर देते हैं। बीच में से गायब हो जाता है तो PSPSA और उसके प्रयास। फिर भी हमें गर्व है उन साथियों पर जो PSPSA का आभार जताते हैं और अभी तक हमें भूले नहीं हैं। कुछ साथियों के जब फोन आते हैं कि सर हम PSPSA से आगे भी जुड़े रहना।चाहते हैं तो मन गदगद हो जाता है।
खैर अब बात करते हैं बचे हुए लगभग 5000 लोगों के स्थानान्तरण की। मेरे विचार से बात प्रश्नोत्तरी शैली में अच्छी रहेगी।
प्रश्न 1- PSPSA बचे हुए लोगों के सम्बन्ध में चुप्पी क्यों साधे है?
उत्तर- मैं कहना चाहूँगा कि सोशल मीडिया पर लगातार बयानबाजी से ही स्थानान्तरण नहीं होते। आशुतोष मिश्र जी कुछ दिन पूर्व आपको अवगत करा चुके हैं कि 10 सितम्बर के बाद द्वितीय सूची अवश्य आएगी। प्रत्यावेदन की सूची तैयार हो रही है। वो सूची शासन के पास भेजी जाएगी, शासन जो भी निर्णय लेगा उसके अनुसार सूची आएगी। एक बात और यही सूचना बार-बार प्रतिदिन विनय जी, आशुतोष जी या मैं नहीं लिखेंगे। एक बार आपको सूचना दी जा चुकी है तो 10 सितम्बर तक के लिए यही सूचना है।
प्रश्न 2- द्वितीय सूची के लिए धरना क्यों नहीं लगाया जा रहा?
उत्तर- 04 मार्च को 5000 लोग धरने में पहुँचे थे और 21 अगस्त को 15000 के स्थानान्तरण हुए यानि कि 300% सफलता। ऐसे में क्या अब सरकार के विरुद्ध धरना लगाना सही है? आप सोचकर देखिए कि ये धन्यवाद का समय है या फिर विरोध का? सपा सरकार ने 2012 से अब तक लगभग 50000 अन्तर्जनपदीय स्थानान्तरण किए हैं। मुझे नहीं लगता कि इतिहास में इतनी बड़ी संख्या में अब तक स्थानान्तरण हुए होंगे। PSPSA ने 20 अगस्त को जो नोटिस सचिवालय से लेकर डीएम, एसएसपी आदि को रिसीव कराया था उसमें स्पष्ट उल्लेख था कि यदि 28 तक सूची नहीं आई तो 29 अगस्त को धरना होगा, यदि आ गई तो नहीं होगा। सूची अगले ही दिन 21 अगस्त को आ गई। ऐसे में धरने का कोई अर्थ नहीं रह जाता। PSPSA का कार्य मात्र शासनादेश निकलवाना और तत्पश्चात सूची निकलवाना था। अब सभी के स्थानान्तरण करवा पाना तो सम्भव नहीं। क्योंकि ये शासन पर निर्भर है। यदि PSPSA के हस्ताक्षर से सूची निकल रही होती तो पहले ही सभी के स्थानान्तरण कर दिए गए होते।
प्रश्न 3- यदि PSPSA धरना नहीं लगा रहा है तो स्पष्ट करे हम दूसरे संगठन के धरने में जाएँगे।
उत्तर- आप निःसन्देह किसी भी संगठन के धरने में जाइए। यदि ऐसा करने से आपका स्थानान्तरण होता है तो हमें बहुत प्रसन्नता होगी। परन्तु ध्यान रखिएगा कि बचे हुए 5000 में लगभग 1500 लखनऊ के, 1000 गाजियाबाद के और बाकि कई आवेदन ऐसे जनपदों के हैं जहाँ रिक्तियाँ ही नहीं हैं। ऐसे में लगभग 2000 की संख्या में कितने लोग धरने में पहुँचेंगे इसका अनुमान लगा लीजिए। PSPSA अन्तर्जनपदीय स्थानान्तरण के लिए कोई धरना इस वर्ष नहीं लगाएगा। आप लोग किसी भी धरने में जाने से पहले सोच लीजिएगा कि चूँकि 15000 स्थानान्तरण हो चुके हैं इसलिए संभव है कि अबकि पुलिस भी रहम न करे। साथ ही धरने से मंत्री जी नाराज होकर आगे की प्रक्रिया न बन्द कर दें। PSPSA धरना तो नहीं करेगा परन्तु वार्त्ताओं का क्रम जारी रहेगा। PSPSA अभी भी प्रयासरत है कि बचे हुए स्थानान्तरण भी हो जाएँ।
प्रश्न 4- मैं तो 04 मार्च और 10 जून के धरने में आया था, 2013 के धरने में भी आया था। 7 वर्ष हो गए नौकरी के पर मेरा स्थानान्तरण नहीं हुआ। मैं बहुत अवसादग्रस्त हूँ, समझ नहीं आ रहा कि मैं क्या करूँ?
उत्तर- आप तो मात्र धरने में आए थे पर PSPSA के महामंत्री आशुतोष मिश्र जी तो धरने के आयोजकों में से थे। परंतु उनका स्थानान्तरण 2011, 2013 और 2016 में आवेदन करने के बाद भी आज तक नहीं हुआ। कुछ अन्य पदाधिकारियों का भी नहीं हुआ। आप लोग जो पीड़ा आज झेल रहे हैं वो पीड़ा स्वयं मैंने 2013 में झेली है। मेरे कई मित्रों का स्थानान्तरण हो गया। जो मेरी बाइक पर मेरे साथ जाते थे जिनके साथ जाने के लिए हम बसें छोड़ दिया करते थे, उनका स्थानान्तरण हो गया था और मैं उसी जनपद में रह गया था। पर ऐसा होने से जीवन समाप्त नहीं होता। साढ़े चार लाख लोगों ने प्राइमरी का टीईटी निकाला था पर वैकेंसी आईं मात्र 72825 यानि कि 72826 नम्बर पर खड़ा अभ्यर्थी नौकरी नहीं पा पाया। आप लोगों के पास कम से कम नौकरी तो है। मैंने भी इन 3 वर्षों में पीड़ा उठाई पर संघर्ष के लिए तैयार होता रहा और अंततः आज अपने गृह जनपद में हूँ। आपका भी समय अवश्य आएगा, धैर्य रखिए। झुंझलाने से या जिन साथियों का स्थानान्तरण हो गया है उन पर आक्रोश दिखाने से कुछ नहीं होगा। हमारे महामंत्री जी औरों की प्रसन्नता में प्रसन्न हैं। प्रयास करिए और अपने आक्रोश को अगले वर्ष के लिए बचाकर रखिए, हम आपको अवश्य बुलाएँगे। PSPSA का ध्येय सबका स्थानान्तरण है।
अंततः यही कहना चाहूँगा कि PSPSA शांत नहीं बैठा है वो द्वितीय सूची के लिए प्रयासरत है। परंतु ये प्रयास धरने से नहीं अपितु वार्त्ता के माध्यम से रहेगा। जिन लोगों का स्थानान्तरण नहीं हुआ है वो PSPSA से जुड़े रहें, PSPSA सही समय पर उनका आवाह्न अवश्य करेगी। जो लोग स्थानान्तरण लेकर गृह जनपद जा चुके हैं वो अपने जनपद में संगठन को मजबूत करेंगे क्योंकि मुद्दे स्थानान्तरण पर ही समाप्त नहीं होते। अभी तो कई लड़ाईयाँ जीतनी हैं।
जय शिक्षक
जय PSPSA