21/07/2024
गुरु पूर्णिमा के मंगल पर्व की शुभकामनाएं। गुरु के मार्गदर्शन से हमारी जीवन रूपी यात्रा का हर कठिन मार्ग सरल हो जाता है। शिष्य के जीवन को ज्ञान, विद्या व करुणा के अमृत से सींच कर उन्हें राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करने वाले सभी गुरुजनों के चरणों में मेरा प्रणाम।
भारतीय संस्कृति में गुरु को भगवान से भी ऊपर रखा गया है। जो अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाए, वह गुरु है।
संत कबीर ने अपनी वाणी में कहा था
"हरि रूठे गुरु ठौर है, गुरु रूठे नहीं ठौर।"
अर्थ है कि भगवान के अप्रसन्न होने पर गुरु की शरण रक्षा कर सकती है, किंतु गुरु के अप्रसन्न होने पर कहीं भी शरण मिलना संभव नहीं है। हमारे शास्त्रों ने गुरु की सेवा व आदर को मनुष्य का सर्वोत्तम धर्म कहा है।
महाभारत के शांतिपर्व में लिखा है,
"ऋषयश्च हि देवाश्च प्रीयंते पितृभिः सह।
पूज्यमानेषु गुरुषु तस्मात् पूज्यतमो गुरुः।।"
अर्थात, गुरु की पूजा करने पर देवता, पूर्वज और ऋषि सहित सब प्रसन्न होते हैं। अतः गुरु परम पूजनीय हैं। सदैव उनका आदर और सम्मान करना चाहिए।