21/02/2022
सीतामढ़ी में रंगमंच की सूत्रधार संस्थान जन विकल्प रंगमंडल का तीन दिवसीय आयोजन रंग दे बसंती में विभिन्न नाटकों का मंचन कालिदास रंगालय, पटना में होने जा रहा है। इसका मंचन जन विकल्प के फेसबुक पेज से लाइव भी देखा जा सकेगा। ये आयोजन संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से आयोजित है।
आप सभी आमंत्रित हैं।
जन विकल्प का तीन दिवसीय आयोजन 'रंग दे बसंती'
संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सौजन्य से जन विकल्प, सीतामढ़ी अपने तीन दिवसीय नाट्य आयोजन रंग दे बसंती आगामी 24 - 26 फरवरी, 2022 को पटना स्थित कालिदास रंगालय में करने जा रही है। कोरोना से उपजे हालात की वजह से पिछले कई महीनों से ये आयोजन लंबित चल रही थी।
बहरहाल, कोरोना नियमों के अधीन इस आयोजन में तीन नाटकों की प्रस्तुति की जाएगी। पहले दिन पटना की नवगठित इकाई 'चित्राभिनय' द्वारा अनिल कुमार मुखर्जी के आलेख कठपुतली का मंचन किया जाएगा। दूसरे दिन रंग मार्च, पटना द्वारा प्रबोध जोशी के आलेख 'पागल' नाटक का मंचन भृगुरिषी कुमार के निर्देशन में किया जाएगा। अंतिम दिन मृत्युंजय शर्मा द्वारा लिखित जन विकल्प की लोकप्रिय प्रस्तुति 'एक और मोहरा' का मंचन राजन कुमार सिंह के निर्देशन में किया जाएगा। सर्वविदित है की भारत सरकार द्वारा आज़ादी का अमृत महोत्सव पूरे देश मे मनाया जा रहा है। इस संदर्भ को शामिल करते हुए हमारा ये आयोजन महिला सशक्तिकरण, बेरोजगार कलाकार और भगत सिंह के विचारों पर आधारित नाटकों का चयन कर मंचित करने जा रही है।
पटना के सभी साथियों से आग्रह है कि वो नाटक देखने जरूर आएं। वैसे नाटक का प्रसारण हमारे फेसबुक पेज से ऑनलाइन भी किया जाएगा। आप हमारे फेसबुक पेज से जुड़कर भी नाटक देख सकते हैं। आप आमंत्रित हैं।
06/02/2022
संगीत के एक स्वर्णिम युग का अंत हो गया। कला एवं संगीत को आजीविका के रूप में लेने वाले कलाकारों के लिये आप हमेशा प्रेरणास्रोत रही और रहेंगी। स्वर कोकिला भारत रत्न लता मंगेशकर की स्मृतियों को प्रणाम और विनम्र श्रद्धांजलि।
"तेरी आवाज़ ही पहचान है....!"
स्वर कोकिला, भारत रत्न लता मंगेशकर को संगीत विरासत में मिली। भारतीय संगीत जगत में साक्षात सरस्वती पुत्री लता जी उपलब्धियों पर गौर किया जाए तो ये हम भारतीयों के लिये गौरवशाली विरासत है। बीस से अधिक भारतीय भाषाओं में तीस हजार गीत गाने वाली दीदी का नाम 'गिनीज़ बुक रिकॉर्ड' में दर्ज है। भारत रत्न, पद्म विभूषण, पद्म भूषण, महाराष्ट्र सरकार पुरस्कार, महाराष्ट्र भूषण, राजीव गांधी पुरस्कार, एन. टी.आर. पुरस्कार, नूरजहां पुरस्कार, जी सिने, स्क्रीन, फ़िल्म फेयर, स्टारडस्ट, आई.आई.ए. एफ. सहित दादा साहेब लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड, 1972, 1975 और 1990 के लिये राष्ट्रीय पुरस्कार, 1958, 1962, 1965, 1969, 1993, 1994 का फ़िल्म फेयर पुरस्कार...! करीब 70 वर्ष से ज्यादा लंबी कैरियर की ये फेहरिस्त बहुत लंबी है।
उनके पिता दिनानाथ मंगेशकर शास्त्रीय गायक और रंगकर्मी थे। इनके परिवार से भाई हृदयनाथ मंगेशकर और बहनों उषा मंगेशकर, मीना मंगेशकर और आशा भोंसले सभी ने संगीत को ही अपनी आजीविका चुना। लता जी का जन्म इंदौर में हुआ था लेकिन उनकी परवरिश महाराष्ट्र मे हुई। वह बचपन से ही गायक ही बनना चाहती थीं। इनके गीत की चर्चा करना सूर्य को दीप दिखाने जैसा है। एक कलाकार के तौर पर लता जी की उपलब्धियाँ हम भारतीयों के लिये गौरव की बात है और ये हमारी विरासत है। भारत सरकार ने इनकी अंत्योष्टि राजकीय सम्मान के साथ किया।
रंग मार्च उनकी स्मृतियों को प्रणाम करती है और उनको विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करती है। नमन ! 💐
पेंटिंग रंग मार्च से सम्बद्ध कलाकार लक्ष्मी सिंह की है।
09/07/2021
राज कपूर, देव आनंद और दिलीप कुमार
अब सिर्फ यादें हैं ! 👌
06/02/2021
बंशी दा की स्मृतियों को प्रणाम एवं विनम्र श्रद्धांजलि ! 😢
देश के प्रतिष्ठित रंग निर्देशक पद्मश्री बंशी कौल का आज सुबह निधन हो गया है। एनएसडी से प्रशिक्षित रंग प्रशिक्षक और रंग विदूषक, भोपाल के संस्थापक-निर्देशक बंशी कौल की स्मृतियों को प्रणाम और जन विकल्प, सीतामढ़ी की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि !
जन विकल्प, सीतामढ़ी के आगामी तीन दिवसीय आयोजन 'रंग-दे-बसन्ती' बंशी दा को समर्पित होगा। पुनः श्रद्धांजलि ! 💐
देश के प्रसिद्ध रंग निर्देशक पद्मश्री बंशी कौल का आज सुबह निधन।
भारतीय रंगमंच के सशक्त हस्ताक्षर पद्मश्री बंशी कौल का आज 6 फरवरी, 2021 की सुबह 8.46 बजे निधन हो गया। इसकी जानकारी उनकी पत्नी अंजना पूरी ने सोशल मीडिया के माध्यम से दी। पिछले कुछ वर्षों से वो बहुत बीमार चल रहे थे। स्वस्थ्य होने की ओर बढ़ रहे थे और आज सुबह उन्होंने अंतिम स्वास लिया। अंतिम पलों में भी वो अपने रचनात्मक कर्म में लीन थे। कहते हैं 'कृतस्य स जीवति' उनके रंगमंच की चमक अब भारतीय रंगमंच की विरासत है और जीवन पर्यंत रंगमंचीय परिवेश को पोषित करने का कार्य करती रहेगी।
23 अगस्त, 1949 को कश्मीरी पंडित परिवार में जन्में बंशी कौल भारतीय रंगमंच के चमकते सूर्य थे, जिसकी चमक से कई सितारें आज भी रंगमंच की चमक विखेर रहे हैं और बिखेरते रहेंगे। भारतीय रंगमंच में उनको भुलाना नामुमकिन होगा। सन 1973 में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से प्रशिक्षित होने के बाद कई वर्षों तक एनएसडी की रेपर्टरी में निर्देशक के तौर पर कार्यरत रहें। उसके बाद एनएसडी में ही कई वर्षों तक शिक्षक रहें और कई पीढ़ियों को रंगमंच का न सिर्फ प्रशिक्षण दिया बल्कि उनका सफल मार्गदर्शन भी किया। सन 1984 में भोपाल में उन्होंने 'रंग विदूषक' संस्थान का गठन कर कई महत्वपूर्ण नाटकों का निर्देशन किया। 'कहन कबीर' उनकी लोकप्रिय प्रस्तुति रही। भारतीय रंगमंच में लोक परंपराओं की विदूषक शैली को सम्मिलित कर राष्ट्रीय फलक पर बिल्कुल नए अंदाज में लाने का श्रेय भी बंशी कौल को जाता है। इनका रंगमंच हिंदी के अलावे पंजाबी, संस्कृत, तमिल सहित क्षेत्रीय भाषाओं तक विकेन्द्रित थी।
निर्देशन के लिये रंगमंच का सर्वश्रेष्ठ सम्मान 'संगीत नाटक अकादमी सम्मान' से इन्हें 1995 में सम्मानित किया गया। 2014 में भारत सरकार ने इनके रंगमंचीय योगदान के लिये चौथा सर्वश्रेष्ठ नागरिक पुरस्कार पद्मश्री से अलंकृत किया गया। 2016 में इन्हें 'राष्ट्रीय कालिदास सम्मान' के अलावे कई पुरस्कार प्राप्त बंशी दा भारतीय रंगमंच के बेहद लोकप्रिय रंगकर्मी, प्रशिक्षक और निर्देशक थे।
रंग मार्च, पटना उनकी स्मृतियों को प्रणाम करती है और उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करती है।
18/11/2020
मिनर्वा इंटरनेशनल ट्रस्ट के सौजन्य से प्रमुख ट्रस्टी राजन कुमार सिंह द्वारा मिनर्वा इंटरनेशनल स्कूल, गम्हरिया में हिंदुओ के पहापर्व छठ के शुभ अवसर पर छठ ब्रतियों को वस्त्र वितरित किया गया! चूँकि ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य समाजसेवा ही होता है मिनर्वा का उद्देश्य सीतामढ़ी जिले में गुणवत्तापूर्ण, सस्ती, रोजगारपरक,कलात्मक शिक्षा उपलब्ध कराना है। कोरोना के वहज से अभी विद्यालय खुल नही सकी! उम्मीद है आगामी सत्र से इसका संचालन प्रारम्भ हो जाएगा!
इसी कड़ी में समाजसेवा का ये छोटा का आगाज●●●