31/12/2020
Pawan Kamboj जी के बारे में वैसे तो इलाके के लोग जानते ही हैं, पर फिर भी जो नहीं जानते वो भी उनके बारे में जान कर प्रेरणा लेंगे, ऐसा मुझे लगता है | Pawan Kamboj 8th class तक चौबुर्जा गाँव के ही सरकारी स्कूल में पढ़ते थे | चौबुर्जा एक छोटा सा गाँव है, जहां उस समय सिर्फ 8th class तक ही सरकारी स्कूल था | यह गाँव माधोसिंघाना गाँव से 8 km दूर और सिरसा शहर से करीब 12 km दूर है |
मोडियाखेड़ा गाँव के श्री इकबाल जी, जो कि पवन कम्बोज के पापा के दोस्त और हमपेशा थे , ने बलदेव सर को बताया कि पवन कम्बोज बहुत ही काबिल बच्चा है, और अगर आप उसे अपने स्कूल में ले आओ तो वो आपके स्कूल का बहुत नाम रोशन करेगा | बलदेव सर पवन कम्बोज के पापा से मिले और उनको पवन कम्बोज का दाखिला हमारे स्कूल में करवाने के लिए कहा | कुछ दिन बाद फिर संत लाल सर और भारत भूषण सर पवन जी के घर गए उनको GPM स्कूल में एडमिशन लेने के लिए प्रेरित करने | पवन जी ने 9th क्लास में पहले तो सिरसा शहर के एक प्राइवेट स्कूल में दाखिला लिया, पर वहाँ करीबन 10 दिन पढ़ने के बाद उनको वो स्कूल पसंद नहीं आया | उसके बाद उन्होंने हमारे स्कूल में दाखिला लिया | वो रोज़ 8km साइकिल चला कर स्कूल आते, और 8km साइकिल चला कर घर जाते | 10th class में हरियाणा बोर्ड की परीक्षा में उन्होंने 87 % अंक हासिल करके पूरे सिरसा जिले में तीसरा स्थान प्राप्त किया | Physical Education के प्रैक्टिकल एग्जाम में 2003 - 2004 के सत्र में अधिकतम अंक 25 थे और 2004-2005 के सत्र में 30 | इसलिए गलती से उनकी पूरी class के प्रैक्टिकल में 25 या 25 से कम अंक लगा दिए गए थे , वरना शायद पवन जी का जिले में प्रथम स्थान होता | सिरसा जिले में प्रथम स्थान या तीसरा स्थान तो हर साल कोई न कोई प्राप्त करता ही है, परन्तु पवन जी के 87 % कई मायनो में ख़ास थे |
1 . 2004 - 05 का सत्र हमारा 10th class का छठा सत्र था , और इन 6 सत्रों में हमारे स्कूल के किसी छात्र के (मेरे इलावा) 87 % तो क्या 77 % भी पार नहीं हुए थे |
2 . पवन जी ने मुझसे 10th class में 7 % अंक(कुल 44 अंक) अधिक हासिल लिए थे, हिंदी विषय में मुझसे 25 अंक अधिक हासिल किये थे, और सामाजिक अध्ययन विषय में मुझसे 20 अंक अधिक हासिल लिए थे | इंग्लिश विषय में मुझसे 8 -9 अंक अधिक हासिल किये |
3. पवन जी ने अपनी class में second आने वाले student से 12 % अंक अधिक हासिल किए थे | The student second in his class got only 75% marks. मुझे लगता है कि पूरे सिरसा जिले में आज तक शायद ही किसी और स्कूल में ऐसा हुआ होगा कि 10th class में फर्स्ट आने वाला स्टूडेंट दुसरे स्थान पर आने वाले छात्र से 12 % अंक हासिल करे , और वो भी तब जब क्लास में 75 से ज्यादा students हों |
पवन ने 10th class के बाद शाह सतनाम सिंह जी बॉयज स्कूल, सिरसा में दाखिला लिया, जहाँ से मैंने भी 11th और 12th कक्षा पास की थी | पवन कम्बोज उस स्कूल में अपनी क्लास में दसवें स्थान पर रहता था और प्रथम स्थान पर आने वाले लड़के का नाम था सचिन यादव | मैं सचिन यादव को इसलिए जानता हूँ कि 12th के बाद पवन कोटा जाने से पहले मुझसे सलाह लेने आया था, और पवन ने बताया, उनका एक दोस्त सचिन यादव भी मुझसे मिलना चाहता है | फिर एक बार सचिन यादव और पवन दोनों कोटा जाने से पहले मेरी सलाह लेने आये | मैंने उनको कोटा के कोचिंग इंस्टीटूट्स के बारे में अपनी राय बताई थी और ये भी बताया था कि वहाँ सभी स्टूडेंट्स को उनकी रैंक के हिसाब से सेक्शन अलॉट होते हैं , और हर महीने होने वाले आंतरिक टेस्ट की रैंक जैसे जैसे बदलती है , वैसे वैसे उनके सेक्शन भी बदलते रहते हैं , और उन स्टूडेंट्स की IIT Entrance एग्जाम होने से पहले आंतरिक टेस्ट में जैसी रैंक आती है , वैसी ही रैंक बाद में IIT की प्रवेश परीक्षा में आती है |
सचिन यादव इतना प्रतिभाशाली था कि पूरी क्लास को सचिन से उम्मीद थी कि वो पहले ही प्रयास में IIT की प्रवेश परीक्षा पास कर देगा | परन्तु ऐसा हुआ नहीं | सचिन यादव (रैंक 1 in 12th क्लास) और पवन कम्बोज ( रैंक 10 in 12th class) और उनके बीच के 8 और छात्रों ने Bansal Classes Kota में दाखिला ले लिया | पवन कम्बोज को बंसल क्लासेज के अंतिम सेक्शन में दाखिला मिला , और सचिन यादव को X1 यानी सबसे बढ़िया सेक्शन में | बंसल क्लासेज में होने वाले हर टेस्ट के साथ पवन कम्बोज की रैंक में सुधार हुआ और उनके सेक्शन भी बदलते गए, बंसल क्लासेज में पढ़ते हुए उनके सबसे अंतिम टेस्ट में जो रैंक आयी वो X1 सेक्शन के छात्रों के बराबर थी , फिर भी सचिन यादव की रैंक से खराब थी | IIT उन दिनों दो एग्जाम लेती थी , पहले एग्जाम को IIT Screening एग्जाम कहा जाता था, और IIT Screening exam में पास होने वाले 15000 -20000 छात्रों को IIT की मुख्य प्रवेश परीक्षा में बैठने का मौका मिलता था | पवन कम्बोज और उनके साथ शाह सतनाम सिंह जी स्कूल से गए 10 छात्रों में से सिर्फ Pawan Kamboj और सचिन यादव ने IIT Screening Exam Pass किया , पवन कम्बोज ने IIT Screening Exam में भी अपने साथ पढ़ने वाले 8 ऐसे बच्चों को पीछे छोड़ दिया था , जो स्कूल में भी उनसे आगे थे , और Bansal Classes , Kota की प्रवेश परीक्षा में भी | बाकी 8 बच्चों का IIT तो क्या NIT में भी एडमिशन नहीं हुआ | IIT की मुख्य प्रवेश परीक्षा का नतीजा और भी ज्यादा चौंका देने वाला था, पवन कम्बोज की रैंक सचिन यादव से भी बेहतर थी |
मेरे पापा 5th क्लास में पूरे हिसार जिले में प्रथम थे, 10th क्लास में उनके Math में उनके प्रतिशत अंक मुझ से भी ज्यादा थे और पवन कम्बोज से भी | 1980 में सिरसा के सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के डिप्लोमा में उनके इतने अंक थे कि उनसे 20 साल बाद जिन्होंने उनसे 10 प्रतिशत कम अंक के साथ भी डिप्लोमा लिया , वो भी आज बड़े बड़े सरकारी पदों पर हैं या प्राइवेट सेक्टर में 10 लाख से ज्यादा सालाना कमा रहे हैं | इसलिए मुझे विज्ञान, गणित और टेक्नोलॉजी में रूचि विरासत में मिली थी, मुझे गणित में Number Theory के कुछ ऐसे सिद्धांत 9 साल की उम्र में ही पता थे जो लोग IIT से B.Tech के बाद भी नहीं सीख पाते और विज्ञान में energy और electricity के कुछ सिद्धांत मैं 10th क्लास में ही सीख गया था , जो मेरे साथ पढ़ने वालों को 12th class में सीखने को मिले | परन्तु पवन कम्बोज के पिता जी दसवीं कक्षा तक स्कूल गए और माता जी 7th क्लास तक और जमीन जायदाद के नाम पर उनके पास एक एकड़ भी जमीन नहीं थी , इसलिए पवन कम्बोज के संघर्ष के कुछ पहलू मैं शायद कभी ढंग से समझ नहीं पाऊंगा | और इसीलिए उनका संघर्ष मेरे लिए और ज्यादा प्रेरणादायक है |
पवन कम्बोज ने IIT Delhi में Electrical Engineering में दाख़िला लिया, और IIT से Degree के बाद पहले IES की परीक्षा में All India Rank 22 हासिल करके IES officer बने, और फिर UPSE के Civil Service Exam को पास करके IRS officer बने | कल खबर मिली है कि माधोसिंघाना गाँव का ये बटेऊ डिप्टी कमिश्नर (DC ) प्रमोट हो गया है | पवन कम्बोज को इस प्रोमोशन की ढेरों बधाईयां |
पवन कम्बोज के बड़े भाई आजकल प्रीमियम म्यूजिक सिस्टम बना कर बेचते हैं, उनके द्वारा बनाये हुए म्यूजिकल सिस्टम आपको मल्लेकां और बकरियाँवाली गाँव में मिल जायेंगे, इन म्यूजिक सिस्टम्स में आपको पवन कम्बोज की IIT Delhi से सीखी हुयी Electrical इंजीनियरिंग की भी झलक देखने को मिलेगी | इसलिए म्यूजिक सिस्टम के शौक़ीन मेरे इलाके के लोगों से मेरा अनुरोध है कि एक बार मल्लेकां या बकरियाँवाली गाँव में एक बार उनकी दुकान पर जरूर जायें |
Pawan, you have been a huge inspiration for the students in our area. Thank you for being an inspiration.
✍️ Vikram Vidyarthi✍️