Gramin Pragati Senior Secondary School, Madhosinghana

Gramin Pragati Senior Secondary School, Madhosinghana

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The school was founded by Mr. Baldev Dhayal and was earlier known as GPM school. The school has prod About Founder: Mr. It has more than 50 trees.

Baldev Dhayal founded this school on 2nd May, 1983. He secured first rank in then Hisar district(combination of current Sirsa, Fatehabad and Hisar district) in 5th class state board examination and got a diploma in Electrical engineering from Govt. Polytechnic, Sirsa (one out of only 4 engineering diploma colleges in Haryana at that time). He got 76% marks in his diploma (which is probably the hig

18/04/2022

बलदेव धायल सर, संस्थापक एवं चेयरमैन , ग्रामीण प्रगति सीनियर सेकेंडरी स्कूल, माधोसिंघाना का मोबाइल नंबर 9992360101 है |

Photos from Gramin Pragati Senior Secondary School, Madhosinghana's post 22/02/2021

क्या आप जानते हैं हिंदुस्तान में और खासकर हरियाणा के रुढ़िवादी जाट परिवारों में जहाँ लड़कियों के लिए घर से बाहर निकल कर कुछ बड़ा हासिल करना आज भी बहुत मुश्किल होता है , वहाँ लड़कियों की कुश्ती में भारत ने इतना नाम कैसे कमाया | भारतीय महिला कुश्ती में सफलता का पथप्रदर्शक कौन था ? आप में से बहुतों के दिमाग में आया होगा फोगाट बहनों के पिता श्री महावीर फोगाट , मैं कहूंगा गलत ज़वाब | भारतीय महिला कुश्ती में सफलता के पथप्रदर्शक थे मास्टर चन्दगी राम कालीरामण | मास्टर जी ने 1970 एशियाई खेलों में गोल्ड मैडल दिलाया ,1972 में ओलंपिक में गए । भारत के तो लगभग सभी खिताब जीते (हिन्द केसरी,भारत केसरी,महाभारत केसरी, भारत भीम,रुस्तम-ए-हिन्द) अर्जुन अवार्ड और पदमश्री।जाट रेजिमेंट में भी अपनी सेवा दी और उससे पहले आर्ट मास्टर होने की वजह से मास्टर चंदगीराम नाम से जाने गए। बड़े बेटे जगदीश कालीरमन वर्ष 2001 से लेकर 2004 तक लगातार भारत केसरी रहे। 2001 से 2003 तक लगातार नेशनल चैंपियन बने।अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में विभिन्न देशों में अपने भार वर्ग 120 किलो में भारत का प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 2004 में खेल कोटे से पुलिस में उप निरीक्षक बन गए, तो 2005 में मेडल लाने पर ऑउट ऑफ टर्न प्रमोशन पाकर इंस्पेक्टर बने और फिर 2016 में डिप्टी एसपी। पुरुष प्रधान खेल कुश्ती में महिला कुश्ती की नींव मास्टर जी ने 90 के दशक में रखी और अपनी बेटी सोनिका और दीपिका को लेकर मेट पर उतर गए साथ ही भारत में अनेक महिलाओं को कुश्ती के लिए तैयार किया। सोनिका ने 2002 दोहा एशियन गेम्स में भाग लिया लेकिन पदक नहीं जीत पाई हालांकि भारत की गीतिका जाखड़ एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने में कामयाब रही।
सोनिका एशियन वूमैन रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड जीत चुकी हैं,इसके अलावा वह 10 बार नेशनल रेसलिंग चैंपियन, 3 बार नेशनल गेम्स रेसलिंग चैंपियन और 9 बार भारत केसरी का खिताब अपने नाम कर चुकी हैं |

क्या आपके दिमाग में कभी आया है कि भारत देश में क्रिकेट का खेल इतना चाव से क्यों खेला और देखा जाता है, ICC प्लेयर रैंकिंग में विश्व के टॉप 2 बल्लेबाज़ ( विराट कोहली और रोहित शर्मा ) भारत के ही हैं | अमेरिका और चीन भले ही बहुत सारे मामलों में भारत से आगे हैं , पर क्रिकेट में हम से बहुत पीछे हैं | क्रिकेट का पथ - प्रदर्शक कौन था ? भारत को सचिन तेन्दुलकर जैसा महान खिलाड़ी कैसे मिला ? इसका कारण है 1983 में कपिल देव के नेतृत्व में भारत की टीम ने क्रिकेट का वर्ल्ड कप जीता था | 1983 की भारत की वर्ल्ड कप में जीत पर भारतीयों ने जो जश्न मनाया, उसी से सचिन तेंदुलकर को सचिन तेंदुलकर बनने की प्रेरणा मिली |

1983 से पहले जो स्थान आज भारत में क्रिकेट को हासिल है , वो हॉकी को हासिल था | 1970 के दशक तक स्कूल में बच्चे क्रिकेट से ज्यादा हॉकी खेलते थे | 1975 में भारत ने हॉकी का वर्ल्ड कप भी जीता | भारत में हॉकी की इस क़ामयाबी की वजह थे हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले भारत के महान खिलाड़ी मेजर ध्यान चंद जिन्होंने 1928 , 1932 और 1936 में olympics में गोल्ड मैडल जीते | ये मेजर ध्यान चंद का ही कमाल था कि 1928 से 1964 में होने वाले 8 में 7 olympic गेम्स भारत ने ही जीते |

1983 में बलदेव धायल सर ने सिरसा जिले के ग्रामीण क्षेत्र में पहला प्राइवेट स्कूल खोला | इस से पहले बलदेव सर की शैक्षणिक योग्यता का अंदाज़ा आप निम्नलिखित बातों से लगा सकते हो :
1. बलदेव सर पांचवीं कक्षा में हिसार जिले के टॉपर थे , उस समय सिरसा और फतेहाबाद हिसार जिले के ही हिस्से थे |
2. बलदेव सर ने दसवीं कक्षा में 1976-77 में गणित विषय में इतने अंक हासिल किये जितने 2001 में लगभग 24 साल बाद भी उनके बेटे विक्रम धायल हासिल नहीं कर पाए | क़ाबिले जिक्र है कि विक्रम धायल ने 12th क्लास की बोर्ड परीक्षा में 3 घंटे का गणित का पेपर सिर्फ 45 मिनट यानी एक चौथाई समय में पूरा कर लिया था, और बाद में कोटा के उस समय के सबसे मशहूर कोचिंग संस्थान bansal Classes में एक बार गणित के पेपर में दूसरी रैंक हासिल की | विक्रम धायल हमारे इलाके के और शाह सतनाम सिंह बॉयज स्कूल के पहले छात्र हैं जिनको IIT में दाखिला मिला | IIT Delhi से B.Tech. के बाद विक्रम धायल ने आईआईएम की प्रवेश परीक्षा CAT में भी 99.5 से अधिक Percentile हासिल की |
3. बलदेव सर ने दसवीं कक्षा में 1976-77 में गणित विषय में इतने अंक हासिल किये जितने 2005 में 28 साल बाद भी हमारे ही स्कूल के छात्र पवन कम्बोज हासिल नहीं कर पाए | क़ाबिले जिक्र है कि पवन कम्बोज ने 10th क्लास में अपनी क्लास में द्वितीय आने वाले छात्र से 12 % अंक अधिक पाकर पूरे सिरसा जिले में तीसरा स्थान हासिल किया था और बाद में IIT दिल्ली से Electrical Engineering में बी.टेक और M. Tech. के बाद IES (इंडियन इंजीनियरिंग सर्विसेज) में आल इंडिया रैंक 22 हासिल की| उसके बाद पवन कम्बोज UPSC की CSE परीक्षा पास करके IRS में Deputy Commissioner के पद पर पहुँच गए हैं |
4. बलदेव सर ने दसवीं कक्षा में 1976-77 में गणित विषय में इतने अंक हासिल किये जितने 31 साल बाद भी हमारे 2007-08 सत्र के टॉपर अमनदीप कम्बोज भी हासिल नहीं कर पाए | क़ाबिले जिक्र है कि अमनदीप कम्बोज गणित विषय में NET की परीक्षा 3 बार पास कर चुके हैं और एक बार Assistant Professor के पद के लिए HPSC की परीक्षा का स्क्रीनिंग Exam भी पास कर चुके हैं |
5. बलदेव सर ने दसवीं कक्षा में 1976-77 में गणित विषय में इतने अंक हासिल किये जितने हमारे 2019 -20 सत्र के 10th क्लॉस के 130 से अधिक छात्र -छात्राओं में से कोई भी हासिल नहीं कर पाया |
6. उन्होंने 1980 में Government Polytechnic College , Sirsa से Electric Engineering से Diploma में इतने अंक हासिल किये कि उनसे 25 साल बाद भी इंजीनियरिंग डिप्लोमा करने वाले हमारे स्कूल के ही topper उनसे लगभग 10 % अंक पीछे रह जाते थे |

बलदेव सर के मार्गदर्शन में हमारे स्कूल से अब तक करीब 10 students IIT और 5 students NIT के B.Tech., M.Tech., M.Sc और PhD जैसे विभिन्न courses में दाखिला पा चुके हैं | हमारे स्कूल के क़रीब 10 छात्र अब तक बोर्ड परीक्षाओं में सिरसा जिले के टॉप 3 में स्थान पा चुके हैं | 2013-14 सत्र में हमारे छात्र अनूप पूनिया ने पूरे हरियाणा में 12th नॉन मेडिकल में तीसरा स्थान प्राप्त किया था |

बलदेव सर की इस सफलता में जिस इंसान ने पथप्रदर्शक की भूमिका निभायी आज इस पोस्ट के माध्यम से उनसे परिचय कराने की कोशिश है | वो इंसान हैं बलदेव सर के सबसे बड़े भाई स्वर्गीय श्री गिरधारी धायल | श्री गिरधारी लाल जी ग्रामीण प्रगति सीनियर सेकेंडरी स्कूल, माधोसिंघाना के संस्थापक बलदेव सर के सबसे बड़े भाई होने के साथ-साथ उनके दादा जी के सबसे बड़े पोते भी थे | उनका असर माधोसिंघाना में रहने वाले पूरे धायल परिवार पर है |

उनके चचेरे भाई श्री लालचंद धायल (ग्रामीण प्रगति SSS, भुरटवाला के संस्थापक और चेयरमैन ) ने भी M.Com. उन्ही के पास फरीदाबाद रह कर की थी , और लाल चंद जी धायल के बेटे अभिनव धायल का भी 2020 में भारत की सबसे पुरानी IIT , IIT खड़गपुर में दाखिला हुआ है | काबिले जिक्र है कि IIT खड़गपुर से दिल्ली के 3 बार मुख्यमंत्री चुने जा चुके श्री अरविन्द केजरीवाल जी और गूगल जैसे विश्व की टॉप कंपनी CEO सुंदर पिचाई जैसी महान हस्तियां पढ़ाई कर चुकी हैं|

श्री गिरधारी लाल धायल ने उस समय 10th क्लास में first division हासिल की थी जब नेहरू जी प्रधानमंत्री थे | उस जमाने में लोगों को पांचवी पास करके भी सरकारी नौकरी मिल जाती थी और 10th क्लास में फर्स्ट डिवीज़न आज के जमाने में 95 % हासिल करने से कहीं ज्यादा मुश्किल थी |

हरियाणा के टॉप 3 Engineering कॉलेज, NIT कुरुक्षेत्र (स्थापित 1963 ), YMCA फरीदाबाद (स्थापित 1969 ), DCRUST Murthal (स्थापित 1986 ) से तब तक कोई इंजीनियर नहीं निकला था | MDU रोहतक(1976) की स्थापना उनके 10th पास करने के 10 साल बाद भी नहीं हुई थी | हरियाणा में Engineering की सर्वोच्च पढाई इंजीनियरिंग का डिप्लोमा ही थी, और डिप्लोमा के 1975 में भी पूरे हरियाणा में 4 ही कॉलेज थे , जिनमें से एक सिरसा में था | उस समय का Engineering का डिप्लोमा आज की NIT या IIT से बी.टेक. के बराबर ही था |

हमारे स्कूल के सहसंस्थापक और बलदेव सर के चचेरे भाई श्री हंसराज धायल बताते हैं कि श्री गिरधारी लाल जी के 10th क्लास के इतने अधिक अंकों के बारे में सुन के उस समय के Govt Polytechnic कॉलेज, सिरसा के लेक्चरर खुद माधोसिंघाना में आये और उनको इंजीनियरिंग डिप्लोमा करने के लिए कहा | 1960 के दशक में श्री गिरधारी लाल जी धायल ने Government Polytechnic College से इंजीनियरिंग डिप्लोमा किया और JE की नौकरी से अपने कैरियर की शुरुआत की | 1970 के दशक में जब बलदेव सर स्कूल में पढ़ते थे , उस समय उनके बड़े भाई गिरधारी लाल जी फरीदाबाद से 300 -300 रूपए के मनीआर्डर भेजते थे | ये वो समय था जब फरीदाबाद हरियाणा का सबसे विकसित जिला था और वहाँ के सेक्टरों में 4 रुपए गज जमीन मिलती थी, दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि ये 300 रुपए का मनीआर्डर न भेज कर वो उस समय 300 रुपये में फ़रीदाबाद जैसे विकसित शहर के सेक्टर में ढ़ाई मरला का प्लॉट खरीद सकते थे | उन्ही के पदचिन्हों पर चलते हुए बाद में हमारे स्कूल के चेयरमैन और संस्थापक श्री बलदेव धायल ने भी सिरसा के Govt Polytechnic College से डिप्लोमा किया , और फिर ये स्कूल खोलने से पहले 3 साल बतौर इंजीनियर नौकरी भी की |

श्री गिरधारी लाल जी धायल के 2 बेटे और 2 बेटियाँ हैं। उनके बड़े बेटे श्री नरेंदर धायल इनकम टैक्स विभाग में Superintedent के पद पर हैं और उनके छोटे बेटे श्री देवेंदर धायल DCRUST मुरथल से BTech करने के बाद अमेरिका से कंप्यूटर साइंस में MS की पढ़ाई करके अमेरिका में ही एक करोड़ से ज्यादा की सालाना सैलरी पर काम कर रहे हैं। उनकी बड़ी पुत्रवधु सरकारी स्कूल में अध्यापक हैं और छोटी पुत्रवधु अमेरिका में ही श्री देवेंदर के ही बराबर पढ़ाई करके अमेरिका में ही जॉब कर रही हैं। श्री गिरधारी लाल जी की बड़ी बेटी सरिता धायल
अपने छात्रा काल में फरीदाबाद जिले के टॉप स्टूडेंट्स में गिनी जाती थी और अभी कई साल सेंट्रल स्कूल में बतौर केमिस्ट्री लेक्चरर काम करके अब प्रिंसिपल पद पर हैं। श्री गिरधारी लाल जी की छोटी बेटी ने Bachelor of Ayurvedic Medicine and Surgery (B.A.M.S.) की पढ़ाई की है।

आप के साथ स्वर्गीय श्री गिरधारी लाल जी की यादों के तौर पर उनकी और उनके द्वारा भेजे गए कुछ मनीआर्डरों की रसीद की तस्वीरें सांझी कर रहे हैं जिन पर उनके पूजनीय पिता जी स्वर्गीय श्री सही राम जी धायल के thumb impression हैं |

15/02/2021

Today is the birthday of Gurtej Brar sir.
I would like to share a brief introduction of him as I know him.
I know Gurtej Sir since childhood. He has been a role model for me for his uprightness, intellectual capacity, and his teaching style. He lives at a place named Baruwali II, where people usually travel on foot or by their own vehicle like bicycle or motorbike for 8 km to get to my native village Madhsinghana to get a public transport bus to the district centre. He scored second highest marks in the district in his 10th class board exam. After completing his MA in English, he appeared for the state civil services exam. He qualified for the initial rounds of the exam, but, he was rejected in the final interview round for the top job of his state Haryana, as he denied to pay the bribe he was asked for. In India, such cases of corruption are common, and Gurtej Sir deserves a standing ovation for standing against these corrupt practices in my opinion.
He worked as gauge reader in Irrigation department at a place which was close to his home just after passing 10th class and completed the rest of his education up to M. A. English through correspondence only. After completing his MA in English, he started as a part-time teacher. He also started his own public school in Jamal village long back and helped many students in passing the board exams who had left any hope of passing.
Many a time, our school head (my father Mr Baldev Ram Dhayal) would extend our regular school timings, so that Gurtej Sir could teach us after his regular job hours. He has taught English in his free time at more than a dozen schools in our neighbouring villages and towns for around 25 years. He established himself as an authority on English subject during these years. His hard work, dedication, uprightness, willingness to learn more and spread knowledge are exemplary. He was selected as the best teacher for consecutive 6 years by the students at Shah Satnam Singh Ji Boys school, Sirsa ( a school having around 1400 students at that time).
Once some college professors were invited to Shah Satnam Singh Ji Boys school to help the school teachers improve their Knowledge of English language, but, (as our English teacher told us )those college professors ended up learning from Gurtej Singh sir.
He was famous among the teachers as a teacher who reads the most. He spends a significant amount of money every month on purchasing books and magazines. In my opinion, he was the most respected teacher among the teacher community as well in SSSJ Boys School, Sirsa.
His zeal to learn more is such that he completed his LLB in 2009 through evening classes at the age of about 50, and still got the second-highest marks in the university. He completed his LLM course with the highest marks in the university in 2014 at the age of about 55. Studying law at such age and getting degrees summa cm laude reveals his zeal to learn more and be able to serve society better.
He has written a novel in his native language Punjabi which is expected to be published soon.
After completing my bachelor’s degree from one of India’s best Engineering colleges, IIT Delhi, I appeared in the entrance exam called Common Admission Test (CAT) for the top MBA colleges in India and got 99.5+ percentile marks in CAT. This exam required me to have a good knowledge of English, and among all the English teachers I have studied from, Gurtej Sir played the most important role as a teacher. Earlier he was more famous as Comrade Gurtej Brar, now he is famous as Advocate Gurtej Brar and is currently practising as a lawyer in Sirsa court.
Thank you, sir, for being an inspiration for me and many other students of Sirsa district. And, wish you a very happy birthday and a long life full of great things you have always been doing.

30/01/2021
31/12/2020

Pawan Kamboj जी के बारे में वैसे तो इलाके के लोग जानते ही हैं, पर फिर भी जो नहीं जानते वो भी उनके बारे में जान कर प्रेरणा लेंगे, ऐसा मुझे लगता है | Pawan Kamboj 8th class तक चौबुर्जा गाँव के ही सरकारी स्कूल में पढ़ते थे | चौबुर्जा एक छोटा सा गाँव है, जहां उस समय सिर्फ 8th class तक ही सरकारी स्कूल था | यह गाँव माधोसिंघाना गाँव से 8 km दूर और सिरसा शहर से करीब 12 km दूर है |

मोडियाखेड़ा गाँव के श्री इकबाल जी, जो कि पवन कम्बोज के पापा के दोस्त और हमपेशा थे , ने बलदेव सर को बताया कि पवन कम्बोज बहुत ही काबिल बच्चा है, और अगर आप उसे अपने स्कूल में ले आओ तो वो आपके स्कूल का बहुत नाम रोशन करेगा | बलदेव सर पवन कम्बोज के पापा से मिले और उनको पवन कम्बोज का दाखिला हमारे स्कूल में करवाने के लिए कहा | कुछ दिन बाद फिर संत लाल सर और भारत भूषण सर पवन जी के घर गए उनको GPM स्कूल में एडमिशन लेने के लिए प्रेरित करने | पवन जी ने 9th क्लास में पहले तो सिरसा शहर के एक प्राइवेट स्कूल में दाखिला लिया, पर वहाँ करीबन 10 दिन पढ़ने के बाद उनको वो स्कूल पसंद नहीं आया | उसके बाद उन्होंने हमारे स्कूल में दाखिला लिया | वो रोज़ 8km साइकिल चला कर स्कूल आते, और 8km साइकिल चला कर घर जाते | 10th class में हरियाणा बोर्ड की परीक्षा में उन्होंने 87 % अंक हासिल करके पूरे सिरसा जिले में तीसरा स्थान प्राप्त किया | Physical Education के प्रैक्टिकल एग्जाम में 2003 - 2004 के सत्र में अधिकतम अंक 25 थे और 2004-2005 के सत्र में 30 | इसलिए गलती से उनकी पूरी class के प्रैक्टिकल में 25 या 25 से कम अंक लगा दिए गए थे , वरना शायद पवन जी का जिले में प्रथम स्थान होता | सिरसा जिले में प्रथम स्थान या तीसरा स्थान तो हर साल कोई न कोई प्राप्त करता ही है, परन्तु पवन जी के 87 % कई मायनो में ख़ास थे |

1 . 2004 - 05 का सत्र हमारा 10th class का छठा सत्र था , और इन 6 सत्रों में हमारे स्कूल के किसी छात्र के (मेरे इलावा) 87 % तो क्या 77 % भी पार नहीं हुए थे |
2 . पवन जी ने मुझसे 10th class में 7 % अंक(कुल 44 अंक) अधिक हासिल लिए थे, हिंदी विषय में मुझसे 25 अंक अधिक हासिल किये थे, और सामाजिक अध्ययन विषय में मुझसे 20 अंक अधिक हासिल लिए थे | इंग्लिश विषय में मुझसे 8 -9 अंक अधिक हासिल किये |
3. पवन जी ने अपनी class में second आने वाले student से 12 % अंक अधिक हासिल किए थे | The student second in his class got only 75% marks. मुझे लगता है कि पूरे सिरसा जिले में आज तक शायद ही किसी और स्कूल में ऐसा हुआ होगा कि 10th class में फर्स्ट आने वाला स्टूडेंट दुसरे स्थान पर आने वाले छात्र से 12 % अंक हासिल करे , और वो भी तब जब क्लास में 75 से ज्यादा students हों |

पवन ने 10th class के बाद शाह सतनाम सिंह जी बॉयज स्कूल, सिरसा में दाखिला लिया, जहाँ से मैंने भी 11th और 12th कक्षा पास की थी | पवन कम्बोज उस स्कूल में अपनी क्लास में दसवें स्थान पर रहता था और प्रथम स्थान पर आने वाले लड़के का नाम था सचिन यादव | मैं सचिन यादव को इसलिए जानता हूँ कि 12th के बाद पवन कोटा जाने से पहले मुझसे सलाह लेने आया था, और पवन ने बताया, उनका एक दोस्त सचिन यादव भी मुझसे मिलना चाहता है | फिर एक बार सचिन यादव और पवन दोनों कोटा जाने से पहले मेरी सलाह लेने आये | मैंने उनको कोटा के कोचिंग इंस्टीटूट्स के बारे में अपनी राय बताई थी और ये भी बताया था कि वहाँ सभी स्टूडेंट्स को उनकी रैंक के हिसाब से सेक्शन अलॉट होते हैं , और हर महीने होने वाले आंतरिक टेस्ट की रैंक जैसे जैसे बदलती है , वैसे वैसे उनके सेक्शन भी बदलते रहते हैं , और उन स्टूडेंट्स की IIT Entrance एग्जाम होने से पहले आंतरिक टेस्ट में जैसी रैंक आती है , वैसी ही रैंक बाद में IIT की प्रवेश परीक्षा में आती है |

सचिन यादव इतना प्रतिभाशाली था कि पूरी क्लास को सचिन से उम्मीद थी कि वो पहले ही प्रयास में IIT की प्रवेश परीक्षा पास कर देगा | परन्तु ऐसा हुआ नहीं | सचिन यादव (रैंक 1 in 12th क्लास) और पवन कम्बोज ( रैंक 10 in 12th class) और उनके बीच के 8 और छात्रों ने Bansal Classes Kota में दाखिला ले लिया | पवन कम्बोज को बंसल क्लासेज के अंतिम सेक्शन में दाखिला मिला , और सचिन यादव को X1 यानी सबसे बढ़िया सेक्शन में | बंसल क्लासेज में होने वाले हर टेस्ट के साथ पवन कम्बोज की रैंक में सुधार हुआ और उनके सेक्शन भी बदलते गए, बंसल क्लासेज में पढ़ते हुए उनके सबसे अंतिम टेस्ट में जो रैंक आयी वो X1 सेक्शन के छात्रों के बराबर थी , फिर भी सचिन यादव की रैंक से खराब थी | IIT उन दिनों दो एग्जाम लेती थी , पहले एग्जाम को IIT Screening एग्जाम कहा जाता था, और IIT Screening exam में पास होने वाले 15000 -20000 छात्रों को IIT की मुख्य प्रवेश परीक्षा में बैठने का मौका मिलता था | पवन कम्बोज और उनके साथ शाह सतनाम सिंह जी स्कूल से गए 10 छात्रों में से सिर्फ Pawan Kamboj और सचिन यादव ने IIT Screening Exam Pass किया , पवन कम्बोज ने IIT Screening Exam में भी अपने साथ पढ़ने वाले 8 ऐसे बच्चों को पीछे छोड़ दिया था , जो स्कूल में भी उनसे आगे थे , और Bansal Classes , Kota की प्रवेश परीक्षा में भी | बाकी 8 बच्चों का IIT तो क्या NIT में भी एडमिशन नहीं हुआ | IIT की मुख्य प्रवेश परीक्षा का नतीजा और भी ज्यादा चौंका देने वाला था, पवन कम्बोज की रैंक सचिन यादव से भी बेहतर थी |

मेरे पापा 5th क्लास में पूरे हिसार जिले में प्रथम थे, 10th क्लास में उनके Math में उनके प्रतिशत अंक मुझ से भी ज्यादा थे और पवन कम्बोज से भी | 1980 में सिरसा के सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के डिप्लोमा में उनके इतने अंक थे कि उनसे 20 साल बाद जिन्होंने उनसे 10 प्रतिशत कम अंक के साथ भी डिप्लोमा लिया , वो भी आज बड़े बड़े सरकारी पदों पर हैं या प्राइवेट सेक्टर में 10 लाख से ज्यादा सालाना कमा रहे हैं | इसलिए मुझे विज्ञान, गणित और टेक्नोलॉजी में रूचि विरासत में मिली थी, मुझे गणित में Number Theory के कुछ ऐसे सिद्धांत 9 साल की उम्र में ही पता थे जो लोग IIT से B.Tech के बाद भी नहीं सीख पाते और विज्ञान में energy और electricity के कुछ सिद्धांत मैं 10th क्लास में ही सीख गया था , जो मेरे साथ पढ़ने वालों को 12th class में सीखने को मिले | परन्तु पवन कम्बोज के पिता जी दसवीं कक्षा तक स्कूल गए और माता जी 7th क्लास तक और जमीन जायदाद के नाम पर उनके पास एक एकड़ भी जमीन नहीं थी , इसलिए पवन कम्बोज के संघर्ष के कुछ पहलू मैं शायद कभी ढंग से समझ नहीं पाऊंगा | और इसीलिए उनका संघर्ष मेरे लिए और ज्यादा प्रेरणादायक है |

पवन कम्बोज ने IIT Delhi में Electrical Engineering में दाख़िला लिया, और IIT से Degree के बाद पहले IES की परीक्षा में All India Rank 22 हासिल करके IES officer बने, और फिर UPSE के Civil Service Exam को पास करके IRS officer बने | कल खबर मिली है कि माधोसिंघाना गाँव का ये बटेऊ डिप्टी कमिश्नर (DC ) प्रमोट हो गया है | पवन कम्बोज को इस प्रोमोशन की ढेरों बधाईयां |

पवन कम्बोज के बड़े भाई आजकल प्रीमियम म्यूजिक सिस्टम बना कर बेचते हैं, उनके द्वारा बनाये हुए म्यूजिकल सिस्टम आपको मल्लेकां और बकरियाँवाली गाँव में मिल जायेंगे, इन म्यूजिक सिस्टम्स में आपको पवन कम्बोज की IIT Delhi से सीखी हुयी Electrical इंजीनियरिंग की भी झलक देखने को मिलेगी | इसलिए म्यूजिक सिस्टम के शौक़ीन मेरे इलाके के लोगों से मेरा अनुरोध है कि एक बार मल्लेकां या बकरियाँवाली गाँव में एक बार उनकी दुकान पर जरूर जायें |

Pawan, you have been a huge inspiration for the students in our area. Thank you for being an inspiration.
✍️ Vikram Vidyarthi✍️

14/09/2020

2016 में ग्रामीण प्रगति सीनियर सेकेंडरी स्कूल , माधोसिंघाना के पाँचवी और उस से सीनियर सभी कक्षाओं का एक सर्वे किया गया , सभी छात्र- छात्राओं से एक सवाल पूछा गया - "आप को आज तक इस क्लास में इस स्कूल में या इस से पहले जिन क्लासेज में आप पढ़े हो , इस स्कूल में या किसी और स्कूल में, आप को जो टीचर अच्छे लगे हों, उनका नाम बताओ ". कुछ स्टूडेंट ने सिर्फ एक टीचर का नाम , और कुछ ने 7 -8 टीचर्स के नाम बताये | सबसे ज्यादा students ने सरबजीत कौर मैडम का नाम बताया , और उसके बाद सबसे ज्यादा बच्चों द्वारा पसंद किये गए टीचर थे सचिन धायल सर | और बच्चों में तीसरे सबसे ज्यादा मशहूर टीचर थे कुलवंत कम्बोज सर | सुभाष कम्बोज सर, भारत भूषण धायल सर और Gudiakhera वाले विक्रम सर ये तीन नाम भी चौथे से छठे स्थान पर बच्चों की पसंद थे |

इसके एक- डेढ़ साल बाद वैसा है सर्वे दोबारा किया गया , तब तक सचिन धायल सर बच्चों की पहली पसंद बन चुके थे , और कुलवंत कम्बोज सर स्कूल छोड़ कर जा चुके थे फिर भी चौथे सबसे पॉपुलर टीचर थे | सुभाष कम्बोज सर तीसरे स्थान पर बच्चों की पसंद बन चुके थे | गुडियाखेड़ा वाले विक्रम सर और भारत भूषण सर पाँचवे और छठे स्थान पर बच्चों की पसंद थे |

ये बच्चों के 6 सबसे ज्यादा पंसदीदा अध्यापक आजकल क्या कर रहे हैं , इसका ब्यौरा कुछ दिन बाद में |

12/09/2020

जमाल के सरकारी स्कूल के एक छात्र शेखर पुत्र श्री फूल सिंह को JEE Main की परीक्षा में All India Rank 51774 हासिल हुई है | शेखर को बधाई हो, उसके माता पिता को भी, और उन सभी माता पिता को भी, जिन्होंने अपने बच्चों को जमाल के सरकारी स्कूल में भेजने का फैसला लिया |

05/09/2020

आप सभी को टीचर डे की हार्दिक शुभकामनाये।
आज टीचर डे के दिन कुछ लिखी गयी चंद लाइनें जो कि मेरे टीचर और मेरे स्कूल के लिए ।और आशा है इन लाइनों के जरिये आप सभी अपने टीचर और स्कूल को याद करेंगे ।।

ना वो दिन रहे ना वो बात रही
हमेशा आती है याद मास्टर की बात कही
पीठ पर बैग मन में रामलाल डंडे का डर
बहुत याद आती है मास्टर की बात कही

वो डंडे भी क्या डंडे थे
डंडो में भी अजीब सा स्वाद था
आज भी वो दिन याद आये
स्कूल जाने का अलग ही अंदाज था

टीचर से छुप छुप कर करनी मस्ती
आज पता लगा कितनी सस्ती थी वो मस्ती

वो टीचर भी क्या टीचर थे
कुछ नरम कुछ सख्त थे
मनुष्य में दौड़ते समान रक्त थे
स्कूल में गुजारे अलग ही वक्त थे

आज एक टीचर की याद आयी
कुछ पछताया कुछ हंसी भी आई
बड़ी पिटाई होती जब होता था कसूर
उगाड़ में लजा के पिटूगा
ये डॉयलोक उनका बड़ा होता था मशहूर

ये लाइनें महज लाइनें नही
यादों को धागे में पिरो रहा हु
देवता समान लोगो को भूलना मत
शब्दों के जरिये टीचर याद दिला रहा हु

जिंदगी की वो सीढ़ी चढ़ना सिखाये
हर मोड़ के लिए काबिल बनाये
हर कदम पर आपको बढ़ना सिखाये
एक पहचान से अच्छी सख्शियत बनाये

आज के दिन हर वो टीचर याद आये
आज के दिन हर वो टीचर याद आये
Written by: ✍️ कुलदीप मिरोक✍️

21/08/2020

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