28/09/2025
भारत में कोचिंग केवल एक संस्था नहीं, बल्कि सपनों का सेतु और भविष्य की रोशनी है। चालीस साल पहले जब टॉप कॉलेजों, मेडिकल और IIT की राह सिर्फ़ बड़े शहरों और नामी-गिरामी स्कूलों तक सीमित थी, तब गाँव–कस्बे का बच्चा इन संस्थानों का नाम तो सुन सकता था, लेकिन वहाँ तक पहुँचने की कल्पना तक नहीं कर सकता था। कोचिंग के उदय ने यह तस्वीर बदल दी। इसने स्कूल–कॉलेज–यूनिवर्सिटी की अधूरी कड़ियों को पूरा किया और अमीर–गरीब, गाँव–शहर के बीच की खाई पाट दी। आज देश के सबसे वंचित परिवार का बच्चा भी किसी न किसी रूप में कोचिंग तक पहुँच पा रहा है और IIT, NEET तथा टॉप यूनिवर्सिटी का सपना देखने की हिम्मत जुटा रहा है। सच यह है कि अगर कोचिंग न होती तो ऐसे लाखों बच्चे कभी भारत की विकास गाथा का हिस्सा न बन पाते।
माता-पिता अपने बच्चों के सपनों के लिए अपना सबकुछ दांव पर लगाते हैं। कोई खेत बेचता है, कोई गहने गिरवी रखता है और कोई अपनी जरूरतों से समझौता करता है, सिर्फ़ इसलिए कि उसका बच्चा पढ़ सके और आगे बढ़ सके। ऐसे में कोचिंग केवल शिक्षा नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की नींव है। असल में, कोचिंग एक अनौपचारिक शैक्षणिक डिलीवरी सिस्टम है, जो किसी भी ब्यूरोक्रेसी या लालफीताशाही से बंधा नहीं है। यही इसकी ताकत है। यही वजह है कि खान एकेडमी हो, संदीप महेश्वरी हों, ध्रुव राठी हों या खान सर – जो भी कर रहे हैं, वह भी “कोचिंग” ही है।
फिर सवाल उठता है कि सरकार कोचिंग को नकारात्मक नज़रिये से क्यों देखती है? जब स्कूल की पढ़ाई पर जीएसटी 0% है, तो कोचिंग पर 18% क्यों लगाया गया है? क्या यहाँ पढ़ाए जाने वाले विषय बदल जाते हैं? क्या शिक्षक और विद्यार्थी का रिश्ता बदल जाता है? शिक्षा की कीमत स्थान देखकर क्यों तय होनी चाहिए? यह भेदभाव समझ से परे है।
आज भारत के आईटी प्रोफेशनल्स पूरी दुनिया में अपनी पहचान बना रहे हैं। अगर उनके प्रोफ़ाइल पर नज़र डालें, तो लगभग 90% किसी न किसी रूप में कोचिंग से गुज़रे हैं। यही लोग आज भारत की सॉफ्ट पावर का चेहरा हैं, यही लोग अरबों डॉलर का योगदान भारत की जीडीपी में कर रहे हैं और यही लोग ग्लोबल बोर्डरूम से लेकर सिलिकॉन वैली तक भारत का नाम रोशन कर रहे हैं। अगर कोचिंग न होती, तो क्या भारत आईटी सुपरपावर बन पाता?
किसान का ट्रैक्टर उसकी ज़मीन जोतता है और कोचिंग बच्चे का भविष्य गढ़ती है। एक पर राहत और दूसरे पर टैक्स – यह न्याय नहीं है। जीएसटी बचत उत्सव तभी सच्चा होगा, जब शिक्षा हर रूप में बोझ से मुक्त होगी। क्योंकि सपनों पर टैक्स नहीं, सहारा मिलना चाहिए। 🌱