Laurel High Convent School
This school is located at Hailakandi road, N.S.Avenue, Silchar .
10/07/2025
05/06/2025
|| Maharana Pratap Jayanti 2025
महाराणा प्रताप का जन्म ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर हुआ था।इस साल 13 जून, 2021, रविवार को महाराणा प्रताप का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। महाराणा प्रताप का जन्म राजस्थान के कुंभलगढ़ में हुआ था। महाराणा प्रताप ने कई बार रणभूमि में मुगल शासक तो टक्कर दी थी।
महाराणा प्रताप ने अपनी मां से युद्ध कौशल की शिक्षा ग्रहण की थी।
महाराणा प्रताप ने हल्दीघाटी के युद्ध में अकबर को पूरी टक्कर दी थी। जबकि महाराणा प्रताप के पास केवल 20 हजार सैनिक थे और अकबर के पास करीबन 85 हजार सैनिकों की सेना थी। इसके बावजूद इस युद्ध को अकबर जीत नहीं पाया था।
महाराणा प्रताप के भाले का वजन 81 किलो और छाती के कवच का वजन 72 किलो था।
महाराणा प्रताप कभी भी मुगलों के सामने झुके नहीं। हर बार उन्होंने मुगलों को मुंह तोड़ जवाब दिया।
महाराणा प्रताप का सबसे प्रिय घोडे़ का नाम चेतक था। वह घोड़ा भी बहुत बहादुर था। हल्दी घाटी में आज भी चेतक की समाधि बनी हुई है। हल्दीघाटी के युद्ध के दौरान ही चेतक की मृत्यु हो गई थी।
26/10/2024
टॉर्च का आविष्कार :-🇮🇳
वामपंथी और अनपढ़ इतिहासकारों द्वारा हमें हमेशा यह बताया गया कि 🔦 टॉर्च का आविष्कार बाकी दुनिया के सभी अविष्कारों की तरह एक ब्रिटिश डेविड मिशेल ने 1899 में किया । अंग्रेज़ जिन्हे ढेले-पत्थर की जगह टिशु का इस्तेमाल भी भारत आने के बाद ही आ पाया।
यह तथ्य अब संदेह के घेरे में जाता दिख रहा है । वह इसलिए कि इसके 124 वर्ष पहले की कोटाशैली की 1775 ई. की हिंदुस्तान की एक पेंटिंग (The Walters Art Museum Baltimore USA) में रखी हुई मिली है, जिसमें एक शिकारी को हिरणों का शिकार करते हुए दिखाया गया है और एक स्त्री हिरणों पर टॉर्च पर प्रकाश फेंकते हुए शिकारी का मार्गदर्शन कर रही है।
हमारी धन-संपत्ति, शिक्षा और भविष्य के साथ इन विदेशियों ने हमारा ज्ञान-विज्ञान तकनीक आदि भी सब कुछ चुराया है।
और इससे भी अधिक प्राचीन प्रमाण वैदिक काल के मिस्र के इतिहास के है ।। यह 7000 वर्ष पूर्व हुई नक्काशी है, यह ठीक वैसी ही आकृति है, जो कभी टॉर्च 🔦 या बल्ब 💡 हुआ करती थी....!!
16/10/2024
🇮🇳कोंडाणा के किले में चढ़ने के लिए तानाजी ने यशवंती नामक गोह प्रजाति की छिपकली का प्रयोग किया था 🙏जिसको फ़िल्म में नही दिखाया गया
वर्णन है, चढ़ाई के लिए तानाजी ने अपने बक्से से यशवंती को निकाला, उसे कुमकुम और अक्षत से तिलक किया और किले की दीवार की तरफ उछाल दिया किन्तु यशवंती किले की दीवार पर पकड़ न बना पायी
फिर दूसरा प्रयास किया गया लेकिन यशवंती दुबारा नीचे आ गयी, भाई सूर्याजी व शेलार मामा ने इसे अपशकुन समझा, तब तानाजी ने कहा कि अगर यशवंती इस बार भी लौट आयी तो उसका वध कर देंगे और यह कहकर दुबारा उसे दुर्ग की तरफ उछाल दिया, इस बार यशवंती ने जबरदस्त पकड़ बनाई और उससे बंधी रस्सी से एक टुकड़ी दुर्ग पर चढ़ गई
अंत मे जब यशवंती को मुक्त करना चाहा तो पाया कि यशवंती भी भारी वजन के कारण वीरगति को प्राप्त हो चुकी थी किन्तु उसने अपनी पकड़ नही छोड़ी थी
तो हमारे देश मे होने को तो चेतक और यशवंती जैसे देशभक्त जानवर भी हुए है.
14/10/2024
पढ़िये सेंधा नमक की हकीकत.......🌹
"सेंधा नमक के साथ इन अंग्रेजो ने कैसे किया था खिलवाड़ "
भारत से कैसे गायब कर दिया गया... ??
आप सोच रहे होंगे की ये सेंधा नमक बनता कैसे है ??
आइये आज हम आपको बताते है कि नमक मुख्यत: कितने प्रकार का होता है. एक होता है समुद्री नमक, दूसरा होता है सेंधा नमक "rock salt"सेंधा नमक बनता नहीं है पहले से ही बना बनाया है। पूरे उत्तर भारतीय उपमहाद्वीप में खनिज पत्थर के नमक को ‘सेंधा नमक’ या ‘सैन्धव नमक’, लाहोरी नमक आदि आदि नाम से जाना जाता है जिसका मतलब है ‘सिंध या सिन्धु के इलाक़े से आया हुआ’.
वहाँ नमक के बड़े बड़े पहाड़ है सुरंगे है । वहाँ से ये नमक आता है। मोटे मोटे टुकड़ो मे होता है आजकल पीसा हुआ भी आने लगा है यह ह्रदय के लिये उत्तम, दीपन और पाचन मे मदद रूप, त्रिदोष शामक, शीतवीर्य अर्थात ठंडी तासीर वाला, पचने मे हल्का है । इससे पाचक रस बढ़ते हैं। अतः: आप ये समुद्री नमक के चक्कर से बाहर निकले.
काला नमक, सेंधा नमक प्रयोग करे, क्यूंकि ये प्रकृति का बनाया है, भारत मे 1930 से पहले कोई भी समुद्री नमक नहीं खाता था विदेशी कंपनीयां भारत में नमक के व्यापार मे आज़ादी के पहले से उतरी हुई है , उनके कहने पर ही भारत के अँग्रेजी प्रशासन द्वारा भारत की भोली भाली जनता को आयोडिन मिलाकर समुद्री नमक खिलाया जा रहा है, हुआ ये कि जब ग्लोबलाईसेशन के बाद बहुत सी विदेशी कंपनियों अन्नपूर्णा,कैप्टन कुक ने नमक बेचना शुरू किया तब ये सारा खेल शुरू हुआ.
अब समझिए खेल क्या था ??
खेल ये था कि विदेशी कंपनियो को नमक बेचना है और बहुत मोटा लाभ कमाना है और लूट मचानी है तो पूरे भारत में एक नई बात फैलाई गई कि आयोडीन युक्त नामक खाओ , आयोडीन युक्त नमक खाओ ! आप सबको आयोडीन की कमी हो गई है। ये सेहत के लिए बहुत अच्छा है आदि आदि बातें पूरे देश में प्रायोजित ढंग से फैलाई गई । और जो नमक किसी जमाने में 2 से 3 रूपये किलो में बिकता था.
उसकी जगह आयोडीन नमक के नाम पर सीधा भाव पहुँच गया 8 रूपये प्रति किलो और आज तो 20 रूपये को भी पार कर गया है. दुनिया के 56 देशों ने अतिरिक्त आयोडीन युक्त नमक 40 साल पहले बैन कर दिया अमेरिका में नहीं है जर्मनी मे नहीं है फ्रांस में नहीं ,डेन्मार्क में नहीं, डेन्मार्क की सरकार ने 1956 में आयोडीन युक्त नमक बैन कर दिया क्यों ??
उनकी सरकार ने कहा हमने आयोडीन युक्त नमक खिलाया !(1940 से 1956 तक ) अधिकांश लोग नपुंसक हो गए ! जनसंख्या इतनी कम हो गई कि देश के खत्म होने का खतरा हो गया ! उनके वैज्ञानिकों ने कहा कि आयोडीन युक्त नमक बंद करवाओ तो उन्होने बैन लगाया। और शुरू के दिनों में जब हमारे देश में ये आयोडीन का खेल शुरू हुआ इस देश के बेशर्म नेताओं ने कानून बना दिया कि बिना आयोडीन युक्त नमक भारत में बिक नहीं सकता.
वो कुछ समय पूर्व किसी ने कोर्ट में मुकदमा दाखिल किया और ये बैन हटाया गया. आज से कुछ वर्ष पहले कोई भी समुद्री नमक नहीं खाता था सब सेंधा नमक ही खाते थे. सेंधा नमक के फ़ायदे:- सेंधा नमक के उपयोग से रक्तचाप और बहुत ही गंभीर बीमारियों पर नियन्त्रण रहता है क्योंकि ये अम्लीय नहीं ये क्षारीय है (alkaline) क्षारीय चीज जब अमल मे मिलती है तो वो न्यूटल हो जाता है और रक्त अमलता खत्म होते ही शरीर के 48 रोग ठीक हो जाते हैं.
ये नमक शरीर मे पूरी तरह से घुलनशील है और सेंधा नमक की शुद्धता के कारण आप एक और बात से पहचान सकते हैं कि उपवास ,व्रत में सब सेंधा नमक ही खाते है। तो आप सोचिए जो समुद्री नमक आपके उपवास को अपवित्र कर सकता है वो आपके शरीर के लिए कैसे लाभकारी हो सकता है ??
सेंधा नमक शरीर में 97 पोषक तत्वों की कमी को पूरा करता है ! इन पोषक तत्वों की कमी ना पूरी होने के कारण ही लकवे (paralysis) का अटैक आने का सबसे बडा जोखिम होता है सेंधा नमक के बारे में आयुर्वेद में बोला गया है कि यह आपको इसलिये खाना चाहिए क्योंकि सेंधा नमक वात, पित्त और कफ को दूर करता है.
यह पाचन में सहायक होता है और साथ ही इसमें पोटैशियम और मैग्नीशियम पाया जाता है जो हृदय के लिए लाभकारी होता है। यही नहीं आयुर्वेदिक औषधियों में जैसे लवण भास्कर, पाचन चूर्ण आदि में भी प्रयोग किया जाता है.
समुद्री नमक के भयंकर नुकसान :- ये जो समुद्री नमक है आयुर्वेद के अनुसार ये तो अपने आप में ही बहुत खतरनाक है! क्योंकि कंपनियाँ इसमें अतिरिक्त आयोडीन डाल रही है। अब आयोडीन भी दो तरह का होता है एक तो भगवान का बनाया हुआ जो पहले से नमक में होता है.
दूसरा होता है “industrial iodine” ये बहुत ही खतरनाक है। तो समुद्री नमक जो पहले से ही खतरनाक है उसमे कंपनिया अतिरिक्त industrial iodine डाल को पूरे देश को बेच रही है। जिससे बहुत सी गंभीर बीमरियां हम लोगों को आ रही है. ये नमक मानव द्वारा फ़ैक्टरियों में निर्मित है.
आम तौर से उपयोग मे लाये जाने वाले समुद्री नमक से उच्च रक्तचाप (high BP ) ,डाइबिटीज़, आदि गंभीर बीमारियो का भी कारण बनता है । इसका एक कारण ये है कि ये नमक अम्लीय (acidic) होता है । जिससे रक्त अम्लता बढ़ती है और रक्त अमलता बढ्ने से ये सब 48 रोग आते है । ये नमक पानी कभी पूरी तरह नहीं घुलता हीरे (diamond ) की तरह चमकता रहता है इसी प्रकार शरीर के अंदर जाकर भी नहीं घुलता और अंत इसी प्रकार किडनी से भी नहीं निकल पाता और पथरी का भी कारण बनता है.
रिफाइण्ड नमक में 98% सोडियम क्लोराइड ही है शरीर इसे विजातीय पदार्थ के रुप में रखता है। यह शरीर में घुलता नही है। इस नमक में आयोडीन को बनाये रखने के लिए Tricalcium Phosphate, Magnesium Carbonate, Sodium Alumino Silicate जैसे रसायन मिलाये जाते हैं जो सीमेंट बनाने में भी इस्तेमाल होते है। विज्ञान के अनुसार यह रसायन शरीर में रक्त वाहिनियों को कड़ा बनाते हैं, जिससे ब्लाक्स बनने की संभावना और आक्सीजन जाने में परेशानी होती है। जोड़ो का दर्द और गठिया, प्रोस्टेट आदि होती है.
आयोडीन नमक से पानी की जरुरत ज्यादा होती है, एक ग्राम नमक अपने से 23 गुना अधिक पानी खींचता है। यह पानी कोशिकाओं के पानी को कम करता है, इसी कारण हमें प्यास ज्यादा लगती है.
आप इस अतिरिक्त आयोडीन युक्त समुद्री नमक खाना छोड़िए और उसकी जगह सेंधा नमक खाइये !! सिर्फ आयोडीन के चक्कर में समुद्री नमक खाना समझदारी नहीं है, क्योंकि जैसा हमने ऊपर बताया आयोडीन हर नमक में होता है.
सेंधा नमक में भी आयोडीन होता है बस फर्क इतना है इस सेंधा नमक में प्रकृति के द्वारा बनाया आयोडीन होता है इसके इलावा आयोडीन हमें आलू, अरवी के साथ-साथ हरी सब्जियों से भी मिल जाता है.
13/10/2024
इतिहासकार अर्नाल्ड जे टायनबी ने कहा था कि, विश्व के इतिहास में अगर किसी देश के इतिहास के साथ सर्वाधिक छेड़ छाड़ की गयी है, तो वह भारत का इतिहास ही है।
भारतीय इतिहास का प्रारम्भ तथाकथित रूप से सिन्धु घाटी की सभ्यता से होता है, इसे हड़प्पा कालीन सभ्यता या सारस्वत सभ्यता भी कहा जाता है। बताया जाता है, कि वर्तमान सिन्धु नदी के तटों पर 3500 BC (ईसा पूर्व) में एक विशाल नगरीय सभ्यता विद्यमान थी। मोहनजोदारो, हड़प्पा, कालीबंगा, लोथल आदि इस सभ्यता के नगर थे।
पहले इस सभ्यता का विस्तार सिंध, पंजाब, राजस्थान और गुजरात आदि बताया जाता था, किन्तु अब इसका विस्तार समूचा भारत, तमिलनाडु से वैशाली बिहार तक, आज का पूरा पाकिस्तान एवं अफगानिस्तान तथा (पारस) ईरान का हिस्सा तक पाया जाता है। अब इसका समय 7000 BC से भी प्राचीन पाया गया है।
इस प्राचीन सभ्यता की सीलों, टेबलेट्स और बर्तनों पर जो लिखावट पाई जाती है उसे सिन्धु घाटी की लिपि कहा जाता है। इतिहासकारों का दावा है, कि यह लिपि अभी तक अज्ञात है, और पढ़ी नहीं जा सकी। जबकि सिन्धु घाटी की लिपि से समकक्ष और तथाकथित प्राचीन सभी लिपियां जैसे इजिप्ट, चीनी, फोनेशियाई, आर्मेनिक, सुमेरियाई, मेसोपोटामियाई आदि सब पढ़ ली गयी हैं।
आजकल कम्प्यूटरों की सहायता से अक्षरों की आवृत्ति का विश्लेषण कर मार्कोव विधि से प्राचीन भाषा को पढना सरल हो गया है।
सिन्धु घाटी की लिपि को जानबूझ कर नहीं पढ़ा गया और न ही इसको पढने के सार्थक प्रयास किये गए। भारतीय इतिहास अनुसन्धान परिषद (Indian Council of Historical Research) जिस पर पहले अंग्रेजो और फिर नकारात्मकता से ग्रस्त स्वयं सिद्ध इतिहासकारों का कब्ज़ा रहा, ने सिन्धु घाटी की लिपि को पढने की कोई भी विशेष योजना नहीं चलायी।
क्या था सिन्धु घाटी की लिपि में? अंग्रेज और स्वयं सिद्ध इतिहासकार क्यों नहीं चाहते थे, कि सिन्धु घाटी की लिपि को पढ़ा जाए?
अंग्रेज और स्वयं सिद्ध इतिहासकारों की नज़रों में सिन्धु घाटी की लिपि को पढने में निम्नलिखित खतरे थे...
1. सिन्धु घाटी की लिपि को पढने के बाद उसकी प्राचीनता और अधिक पुरानी सिद्ध हो जायेगी। इजिप्ट, चीनी, रोमन, ग्रीक, आर्मेनिक, सुमेरियाई, मेसोपोटामियाई से भी पुरानी. जिससे पता चलेगा, कि यह विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यता है। भारत का महत्व बढेगा जो अंग्रेज और उन इतिहासकारों को बर्दाश्त नहीं होगा।
2. सिन्धु घाटी की लिपि को पढने से अगर वह वैदिक सभ्यता साबित हो गयी तो अंग्रेजो और स्वयं सिद्ध द्वारा फैलाये गए आर्य द्रविड़ युद्ध वाले प्रोपगंडा के ध्वस्त हो जाने का डर है।
3. अंग्रेज और स्वयं सिद्ध इतिहासकारों द्वारा दुष्प्रचारित ‘आर्य बाहर से आई हुई आक्रमणकारी जाति है और इसने यहाँ के मूल निवासियों अर्थात सिन्धु घाटी के लोगों को मार डाला व भगा दिया और उनकी महान सभ्यता नष्ट कर दी। वे लोग ही जंगलों में छुप गए, दक्षिण भारतीय (द्रविड़) बन गए, शूद्र व आदिवासी बन गए’, आदि आदि गलत साबित हो जायेगा।
कुछ इतिहासकार सिन्धु घाटी की लिपि को सुमेरियन भाषा से जोड़ कर पढने का प्रयास करते रहे तो कुछ इजिप्शियन भाषा से, कुछ चीनी भाषा से, कुछ इनको मुंडा आदिवासियों की भाषा, और तो और, कुछ इनको ईस्टर द्वीप के आदिवासियों की भाषा से जोड़ कर पढने का प्रयास करते रहे। ये सारे प्रयास असफल साबित हुए।
सिन्धु घाटी की लिपि को पढने में निम्लिखित समस्याए बताई जाती है...
सभी लिपियों में अक्षर कम होते है, जैसे अंग्रेजी में 26, देवनागरी में 52 आदि, मगर सिन्धु घाटी की लिपि में लगभग 400 अक्षर चिन्ह हैं। सिन्धु घाटी की लिपि को पढने में यह कठिनाई आती है, कि इसका काल 7000 BC से 1500 BC तक का है, जिसमे लिपि में अनेक परिवर्तन हुए साथ ही लिपि में स्टाइलिश वेरिएशन बहुत पाया जाता है। ये निष्कर्ष लोथल और कालीबंगा में सिन्धु घाटी व हड़प्पा कालीन अनेक पुरातात्विक साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद निकला।
भारत की प्राचीनतम लिपियों में से एक लिपि है जिसे ब्राह्मी लिपि कहा जाता है। इस लिपि से ही भारत की अन्य भाषाओँ की लिपियां बनी। यह लिपि वैदिक काल से गुप्त काल तक उत्तर पश्चिमी भारत में उपयोग की जाती थी। संस्कृत, पाली, प्राकृत के अनेक ग्रन्थ ब्राह्मी लिपि में प्राप्त होते है।
सम्राट अशोक ने अपने धम्म का प्रचार प्रसार करने के लिए ब्राह्मी लिपि को अपनाया। सम्राट अशोक के स्तम्भ और शिलालेख ब्राह्मी लिपि में संस्कृत आदि भाषाओं में लिखे गए और भारत में लगाये गए।
सिन्धु घाटी की लिपि और ब्राह्मी लिपि में अनेक आश्चर्यजनक समानताएं है। साथ ही ब्राह्मी और तमिल लिपि का भी पारस्परिक सम्बन्ध है। इस आधार पर सिन्धु घाटी की लिपि को पढने का सार्थक प्रयास सुभाष काक और इरावाथम महादेवन ने किया ।
सुभाष काक ने तो बहुत शोध पत्र तैयार किया एवम सिंधु घाटी की लिपि को लगभग हल कर लिया था, परंतु प्रकाशित करने के एक दिन पहले रहस्यमय मृत्यु हो गई। ये भी शास्त्री जी वाली कहानी थी।
सिन्धु घाटी की लिपि के लगभग 400 अक्षर के बारे में यह माना जाता है, कि इनमे कुछ वर्णमाला (स्वर व्यंजन मात्रा संख्या), कुछ यौगिक अक्षर और शेष चित्रलिपि हैं। अर्थात यह भाषा अक्षर और चित्रलिपि का संकलन समूह है। विश्व में कोई भी भाषा इतनी सशक्त और समृद्ध नहीं जितनी सिन्धु घाटी की भाषा।
बाएं लिखी जाती है, उसी प्रकार ब्राह्मी लिपि भी दाएं से बाएं लिखी जाती है। सिन्धु घाटी की लिपि के लगभग 3000 टेक्स्ट प्राप्त हैं।
इनमे वैसे तो 400 अक्षर चिन्ह हैं, लेकिन 39 अक्षरों का प्रयोग 80 प्रतिशत बार हुआ है। और ब्राह्मी लिपि में 45 अक्षर है। अब हम इन 39 अक्षरों को ब्राह्मी लिपि के 45 अक्षरों के साथ समानता के आधार पर मैपिंग कर सकते हैं और उनकी ध्वनि पता लगा सकते हैं।
ब्राह्मी लिपि के आधार पर सिन्धु घाटी की लिपि पढने पर सभी संस्कृत के शब्द आते है जैसे; श्री, अगस्त्य, मृग, हस्ती, वरुण, क्षमा, कामदेव, महादेव, कामधेनु, मूषिका, पग, पंच मशक, पितृ, अग्नि, सिन्धु, पुरम, गृह, यज्ञ, इंद्र, मित्र आदि।
निष्कर्ष यह है कि...
1. सिन्धु घाटी की लिपि ब्राह्मी लिपि की पूर्वज लिपि है।
2. सिन्धु घाटी की लिपि को ब्राह्मी के आधार पर पढ़ा जा सकता है।
3. उस काल में संस्कृत भाषा थी जिसे सिन्धु घाटी की लिपि में लिखा गया था।
4. सिन्धु घाटी के लोग वैदिक धर्म और संस्कृति मानते थे।
5. वैदिक धर्म अत्यंत प्राचीन है।
वैदिक सभ्यता विश्व की सबसे प्राचीन व मूल सभ्यता है, यहां के लोगों का मूल निवास सप्त सैन्धव प्रदेश (सिन्धु सरस्वती क्षेत्र) था जिसका विस्तार ईरान से सम्पूर्ण भारत देश था।वैदिक धर्म को मानने वाले कहीं बाहर से नहीं आये थे और न ही वे आक्रमणकारी थे। आर्य द्रविड़ जैसी कोई भी दो पृथक जातियाँ नहीं थीं जिनमे परस्पर युद्ध हुआ हो।
08/09/2024
माता-पिता ने घर से निकाल दिया। छोटे कद का दुनिया ने मज़ाक बनाया। लेकिन इन्होंने हिम्मत नहीं हारी। जबकी आमतौर पर बहुत से लोग शारीरिक दुर्बलताओं का बहाना लेकर भीख भी मांना शुरू कर देते हैं। नाम है इनका पीटर डिंकलेज। अगर आपने गेम ऑफ थ्रोन्स देखा होगा तो आप भी इन्हें पहचानते ही होंगे।
Game of Thrones में इन्होंने जिस तरह का काम किया है उससे तो ये सारी दुनिया में पहचाने जाने लगे हैं। आज शायद ही कोई सोचेगा कि Tyrion Lannister का किरदार जितने शानदार तरीके से इन्होंने निभाया था वैसे कोई एक्टर भी निभा सकता था।
4 फीट 4 इंच की हाइट वाले इस दमदार एक्टर का जन्म हुआ था 11 जून सन 1969 को अमेरिका के न्यू जर्सी में। पीटर डिंकलेज के पापा एक इंश्योरेंस सेल्समैन थे और मां बच्चों के एक स्कूल में म्यूज़िक टीचर थीं।
जब मां-बाप ने पीटर डिंकलेज को घर से निकाल दिया
पीटर के परिवार में हर किसी की हाइट सही है, केवल इन्हें छोड़कर। और इसकी वजह है एकोंड्रोप्लेज़िया नाम की वो बीमारी, जिसके साथ ये पैदा हुए थे। इस बीमारी के शिकार लोगों के शरीर की ग्रोथ रुक जाती है और वो छोटे कद के रह जाते हैं। इनके मां-बाप इनसे बेहद प्यार करते थे।
उन्होंने इन्हें अच्छे से अच्छे स्कूल में पढ़ाया और ग्रेजुएशन पूरी करने तक इन्हें खूब प्यार दिया। लेकिन इनके मां-बाप ये भी चाहते थे कि पीटर इतने स्ट्रॉन्ग बनें कि अपनी ज़िम्मेदारी खुद उठा सकें। इसलिए ग्रेजुएशन पूरी होते ही मां-बाप ने पीटर को ये कहकर घर से निकला दिया कि अब से उन्हें अपनी देखभाल खुद करनी होगी।
दोस्तों ने भी पीटर डिंकलेज से मांग लिया किराया
खाली जेब अपना घर छोड़ने वाले पीटर के पास केवल एक ही चीज़ थी। और वो थी सर्वाइव करने की भूख। घर से निकाले जाने के बाद ना तो पीटर के पास रहने के लिए कोई जगह थी और ना ही किराए पर कोई घर लेने के लिए पैसा था। पीटर अपने कुछ दोस्तों के पास रहने के लिए चले गए। कुछ दिनों तक तो सब ठीक चलता रहा। लेकिन फिर दोस्तों ने भी किराया मांगना शुरू कर दिया।
फिर मिली मजबूरी वाली नौकरी
ऐसे में पीटर ने एक म्यूज़िक इंस्ट्रूमेंट शॉप में इंस्ट्रूमेंट साफ करने की नौकरी पकड़ ली। और अगले दो साल तक पीटर ऐसी ही छोटी-मोटी नौकरियां करते रहे। फिर दो साल बाद पीटर को एक कंपनी में डेटा प्रोसेसिंग की जॉब मिली जिसमें उन्हें सैलेरी भी ठीक-ठाक मिलने लगी। पीटर ने पूरे छह सालों तक ये नौकरी की। पीटर इस नौकरी को ज़रा भी पसंद नहीं करते थे। लेकिन पैसे कमाने की मजबूरी में वो इतने सालों तक इस नौकरी पर टिके रहे।
ऐसे Peter Dinklage आए एक्टिंग की दुनिया में
अब आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि आखिर कैसे पीटर एक्टिंग की दुनिया में आए। तो जान लीजिए कि पीटर जिस स्कूल में पढ़ने जाया करते थे वहां एक्टिंग की भी क्लासेज़ चला करती थी। पीटर उन क्लासेज़ को अटैंड किया करते थे। इसके अलावा जब पीटर ग्रैजुएशन कर रहे थे तो उन्होंने साथ ही साथ ड्रामा डिग्री भी की थी।
भाई से थे बेहद प्रेरित
पीटर बचपन से ही अपने भाई जॉनाथन डिंकलेज के साथ म्यूज़िकल पपेट शोज़ किया करते थे। इनके भाई एक प्रॉफेशनल वॉयलिन प्लेयर हैं। पीटर अपने भाई से काफी इंप्रैस्ड थे। बचपन से ही उनके दिमाग के किसी कोने में एक्टर बनने की ख्वाहिश जमी हुई थी। 29 साल की उम्र में पीटर ने जब अपनी नौकरी छोड़ी थी तो यही फैसला करके छोड़ी थी कि अब वो एक एक्टर की ज़िंदगी ही जिएंगे।
और मिला ये छोटा सा मौका
पीटर ने नौकरी छोड़कर एक्टिंग में आने के लिए मेहनत शुरू कर दी। काफी ज़्यादा स्ट्रगल करने के बाद पीटर को इमपरफेक्ट लव नाम के एक प्ले में काम करने के लिए एक थिएटर ने सिलेक्ट कर लिया। उन्हें बेहद कम पैसे इस नाटक को करने के लिए मिले थे। लेकिन पीटर खुश थे कि उन्हें एक मौका मिला।
ऐसे बदल गई किस्मत
पीटर की किस्मत अब बदलनी शुरू हो चुकी थी। उनका यही प्ले एक मूवी में कन्वर्ट हुआ और प्ले वाला रोल मूवी में करने के लिए भी इन्हें ही चुना गया। इसके बाद से ही पीटर को एक्टिंग के ऑफर्स आने लगे। और आखिरकार वो दिन भी आया जब पीटर की किस्मत हमेशा-हमेशा के लिए बदल गई।
GOT ने बदल दी ज़िंदगी
5 मई 2009. यही वो तारीख थी जब पीटर को HBO ने गेम ऑफ थ्रोन्स में टिरियन लैनिस्टर के रोल के लिए फाइनल किया। पीटर ही वो शख्स थे जो गेम ऑफ थ्रोन्स के लिए सिलेक्ट हुए सबसे पहले एक्टर थे। यही वो शो बना जिसने पीटर को दुनियाभर में मशहूर कर दिया। दौलत और शोहरत अब पीटर के कदम चूमने लगी। इस शो में इनके काम के लिए इन्हें ढेर सारे अवॉर्ड्स भी मिले।
ये है पीटर डिंकलेज का सफलता मंत्र
पीटर कहते हैं कि अक्सर लोग फेलियर से डरते हैं। लेकिन खुद को फेल होने की परमिशन हर किसी को देनी चाहिए। रिस्क हर किसी को लेना चाहिए। और अब आखिर में एक और इंटरेस्टिंग बात। आपने द क्रॉनिकल्स ऑफ नार्निया सीरीज़ तो देखी ही होगी। इसकी दूसरी फिल्म यानि प्रिंस कैस्पियन में भी पीटर ने काम किया था। मिराज के आदमियों से जिस बौने को पीटर बचाते हैं वो पीटर डिंकलेज ही थे।
और अब आखिर में
तो दोस्तों पीटर डिंकलेज की कहानी होती है यहीं पर खत्म। और हमें यकीन है कि इनकी कहानी से आप इतना तो जान ही गए होंगे कि ये ज़रूरी नहीं है कि आप कैसे दिखते हैं। अगर आपके अंदर कुछ कर गुज़रने का जज़्बा है तो आप अपने सारे सपने पूरे कर सकते हैं। किस्सा टीवी पर भारतीय कलाकारों के किस्से-कहानियां तो आप पढ़ते ही हैं। कभी-कभार हॉलीवुड के कलाकारों के किस्से भी अब से आपके लिए आते रहेंगे। आपके फीडबैक का इंतज़ार रहेगा। कमेंट करके बताइएगा कि आप इस तरह के किस्से कहानियां पसंद करते हैं कि नहीं। और आखिर में, लाइक शेयर करना मत भूलिएगा अगर पसंद आया हो पीटर डिंकलेज का ये किस्सा।
सम्बन्धों में हानि लाभ नहीं देखा जाता।
विनोद हाईवे पर गाड़ी चला रहा था।
सड़क के किनारे उसे एक 12-13 साल की लड़की तरबूज बेचती दिखाई दी। विनोद ने गाड़ी रोक कर पूछा "तरबूज की क्या रेट है बेटा? " लड़की बोली " 50 रुपये का एक तरबूज है साहब।"
पीछे की सीट पर बैठी विनोद की पत्नी बोली " इतना महंगा तरबूज नही लेना जी। चलो यहाँ से। "विनोद बोला "महंगा कहाँ है इसके पास जितने तरबूज है कोई भी पांच किलो के कम का नही होगा। 50 रुपये का एक दे रही है तो 10 रुपये किलो पड़ेगा हमें। बाजार से तो तू बीस रुपये किलो भी ले आती है। "
विनोद की पत्नी ने कहा तुम रुको मुझे मोल भाव करने दो।” फिर वह लड़की से बोली "30 रुपये का एक देना है तो दो वरना रहने दो। " लड़की बोली " 40 रुपये का एक तरबूज तो मै खरीद कर लाती हूँ आंटी। आप 45 रुपये का एक ले लो। इससे सस्ता मै नही दे पाऊँगी।"
विनोद की पत्नी बोली" झूठ मत बोलो बेटा। सही रेट लगाओ देखो ये तुम्हारा छोटा भाई है न? इसी के लिए थोड़ा सस्ता कर दो।" उसने खिड़की से झाँक रहे अपने चार वर्षीय बेटे की तरफ इशारा करते हुए कहा।
सुंदर से बच्चे को देख कर लड़की एक तरबूज हाथों मे उठाते हुए गाड़ी के करीब आ गई। फिर लड़के के गालों पर हाथ फेर कर बोली " सचमुच मेरा भाई तो बहुत सुंदर है आँटी।" विनोद की पत्नी बच्चे से बोली "दीदी को नमस्ते बोलो बेटा। " बच्चा प्यार से बोला "नमस्ते दीदी। लड़की ने गाड़ी की खिड़की खोल कर बच्चे को बाहर निकाल लिया फिर बोली " "तुम्हारा नाम क्या भैया? "
लड़का बोला " मेरा नाम गोलू है दीदी। " बेटे को बाहर निकालने के कारण विनोद की पत्नी कुछ असहज हो गई। तुरंत बोली "अरे बेटा इसे वापस अंदर भेजो। इसे डस्ट से एलर्जी है।"लड़की उसकी आवाज पर ध्यान न देते हुए लड़के से बोली "तु तो सचमुच गोल मटोल है रे भाई। तरबूज खाएगा? "लड़के ने हाँ मे गर्दन हिलाई तो लड़की ने तरबूज उसके हाथों मे थमा दिया।
पाँच किलो का तरबूज गोलू नही संभाल पाया। तरबूज फिसल कर उसके हाथ से नीचे गिर गया और फूट कर तीन चार टुकड़ों मे बंट गया। तरबूज के गिर कर फुट जाने से लड़का रोने लगा।
लड़की उसे पुचकारते हुए बोली अरे भाई रो मत। मै दूसरा लाती हूँ। फिर वह दौड़कर गई और एक और बड़ा सा तरबूज उठा लाई।
जब तक वह तरबूज उठा कर लाई इतनी देर मे विनोद की पत्नी ने बच्चे को अंदर गाड़ी मे खींच कर खिड़की बन्द कर ली। लड़की खुले हुए शीशे से तरबूज अंदर देते हुए बोली "ले भाई ये बहुत मिठा निकलेगा।” विनोद चुपचाप बैठा लड़की की हरकतें देख रहा था।
विनोद की पत्नी बोली "जो तरबूज फूटा है मै उसके पैसे नही दूँगी। वह तुम्हारी गलती से फूटा है। "लड़की मुस्कराते हुए बोली "उसको छोड़ो आंटी। आप इस तरबूज के पैसे भी मत देना। ये मैने अपने भाई के लिए दिया है। "
इतना सुनते ही विनोद और उसकी पत्नी दोनों एक साथ चौंक पड़े। विनोद बोला " नही बिटिया तुम अपने दोनों तरबूज के पैसे लो।" फिर सौ का नोट उस लड़की की तरफ बढ़ा दिया। लड़की हाथ के इशारे से मना करते हुए वहाँ से हट गई। औ अपने बाकी बचे तरबुजों के पास जाकर खड़ी हो गई।
विनोद भी गाड़ी से निकल कर वहाँ आ गया था। आते ही बोला "पैसे ले लो बेटा वरना तुम्हारा बहुत बड़ा नुकसान हो जाएगा।" लड़की बोली "माँ कहती है जब बात सम्बन्धों की हो तो हानि लाभ नही देखा जाता। आपने गोलू को मेरा भाई बताया मुझे बहुत अच्छा लगा। मेरा भी एक छोटा सा भाई था मगर.."
विनोद बोला "क्या हुआ तुम्हारे भाई को? "
वह बोली "जब वह दो साल का था तब उसे रात मे बुखार हुआ था। सुबह माँ हॉस्पिटल मे ले जा पाती उससे पहले ही उसने दम तौड़ दिया था। मुझे मेरे भाई की बहुत याद आती है। उससे एक साल पहले पापा भी ऐसे ही हमे छोड़ कर गुजर गए थे।
विनोद की पत्नी बोली "ले बिटिया अपने पैसे ले ले। " लड़की बोली "पैसे नही लुंगी आंटी।"
विनोद की पत्नी गाड़ी मे गई फिर अपने बैग से एक पाजेब की जोड़ी निकाली। जो उसने अपनी आठ वर्षीय बेटी के लिए आज ही तीन हजार मे खरीदी थी। लड़की को देते हुए बोली। तुमने गोलू को भाई माना तो मै तुम्हारी माँ जैसी हुई ना। अब तू ये लेने से मना नही कर सकती।
लड़की ने हाथ नही बढ़ाया तो उसने जबरदस्ती लड़की की गोद मे पाजेब रखते हुए कहा "रख ले। जब भी पहनेगी तुझे हम सब की याद आयेगी। "इतना कहकर वह वापस गाड़ी मे जाकर बैठ गई।
फिर विनोद ने गाड़ी स्टार्ट की और लड़की को बाय बोलते हुए वे चले पड़े। विनोद गाड़ी चलाते हुए सोच रहा था कि भावुकता भी क्या चीज है। कुछ देर पहले उसकी पत्नी दस बीस रुपये बचाने के लिए हथकण्डे अपना रही थी।कुछ देर मे ही इतनी बदल गई जो तीन हजार की
पाजेब दे आई।
फिर अचानक विनोद को लड़की की एक बात याद आई "सम्बन्धों में हानि लाभ में नही देखा जाता।"
विनोद का प्रॉपर्टी के विवाद को लेकर अपने ही बड़े भाई से कोर्ट मे मुकदमा चल रहा था।।
उसने तुरंत अपने बड़े भाई को फोन मिलाया। फोन उठाते ही बोला " भैया मै विनोद बोल रहा हूँ। "
भाई बोला "फोन क्यों किया? " विनोद बोला "भैया आप वो मैन मार्केट वाली दुकान ले लो। मेरे लिए मंडी वाली छोड़ दो। और वो बड़े वाला प्लॉट भी आप ले लो। मै छोटे वाला ले लूंगा। मै कल ही मुकदमा वापस ले रहा हूँ। " सामने से काफी देर तक आवाज नही आई।
फिर उसके बड़े भाई ने कहा "इससे तो तुम्हे बहुत नुकसान हो जाएगा छोटे? "विनोद बोला " भैया आज मुझे समझ मे आ गया है सम्बन्धों में हानि लाभ नही देखा जाता। एक दूसरे की खुशी देखी जाती है। उधर से फिर खानोशी छा गई। फिर विनोद को बड़े भाई की रोने की आवाज सुनाई दी।
विनोद बोला "रो रहे हो क्या भैया?" बड़ा भाई बोला " इतने प्यार से पहले बात करता तो सब कुछ मै तुझे दे देता रे। अब घर आ जा। दोनों प्रेम से बैठ कर बंटवारा करेंगे। इतनी बड़ी कड़वाहट कुछ मीठे बोल बोलते ही न जाने कहाँ चली गई थी। कल जो एक एक इंच जमीन के लिए लड़ रहे थे वे आज भाई को सब कुछ देने के लिए तैयार हो गए थे।
कहानी का मोरल:-
त्याग की भावना रखिये। अगर हमेशा देने को तत्पर रहोगे तो लेने वाले का भी हृदय परिवर्तन हो जाएगा।
याद रखें सम्बंधों में हानि लाभ नही देखा जाता।
अपनो को निकट रखने के लिए अपना अधिकार भी छोड़ना पड़ता है ।
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