Saraswati Vidya Niketan Malugram

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Saraswati Vidya Niketan Malugram

19/11/2022

যুগে যুগে ভারতের বুকে নারীর যে অসামান্য অবদান তাঁরই এক প্রতিমূর্তি ঝাঁসির রানী লক্ষ্মীবাঈ....রানী লক্ষ্মীবাঈ অসীম সাহসী হার না মানা দৃঢ় মানসিক শক্তির অধিকারী এক বীরাঙ্গনা ....
প্রত্যেক ভারতীয় নারীর প্রেরণার উৎস রানী লক্ষ্মীবাঈকে উনার জন্মজয়ন্তীতে জানাই সশ্রদ্ধ প্রণাম🙏

Photos from Saraswati Vidya Niketan Malugram's post 17/11/2022

❤️

Photos from Saraswati Vidya Niketan Malugram's post 04/11/2022

.V.N Malugram.....🙏
Awareness Week 2022
Organised by P.N.B Bank....
free India....

Photos from Saraswati Vidya Niketan Malugram's post 04/11/2022

আজ বিদ্যালয়ে "সাহায্যের হাত " সংস্থার পক্ষ থেকে বালিকাদের সচেতনতামূলক একটি প্রকল্প অভিযান হয়. সপ্তম শ্রেণী থেকে দশম শ্রেণীর ছাত্রীদের শারীরিক পরিবর্তন, বালিকাদের শারীরিক অসুবিধা সম্বন্ধে অবগত করানো হয় এবং সে বিষয়ে কি কি সতর্কতা অবলম্বন করা উচিত সে ব্যাপারে সবিস্তারে আলোচনা করা হয়. সংস্থার পক্ষ থেকে ছিলেন শ্রী মান অর্ণব গোস্বামী, শ্ৰীমতী দেবস্মিতা ভট্টাচার্য।
.V.N Malugram...🙏❤️

Photos from Saraswati Vidya Niketan Malugram's post 04/11/2022

বিদ্যা ভারতীর সংগঠন মন্ত্রী তথা সংঘ প্রচারক মাননীয় মহেশ ভাগবতজী বিদ্যালয়ের দশম শ্রেণীর বিদ্যার্থীদের সাথে পঠন পাঠন, বিদ্যার্থীদের সার্বিক উন্নয়ন এবং বিভিন্ন বিষয়ে আলোচনা করেন ও বিদ্যার্থীদের বিদ্যার্জনে প্রেরণা দেন .

.V.N Malugram ❤️

Photos from Saraswati Vidya Niketan Malugram's post 29/10/2022

স্বর্গে উলুধ্বনি
মর্ত্যে জোকার
না যাইও ভাই যম দুয়ারে
যম দুয়ারে দিয়া কাঁটা
বোন দিলো ভাইকে ফোঁটা ❤🙏❤🙏❤🙏❤

ভাই ফোঁটা ভারতীয় সংস্কৃতির পরম্পরাগত একটি পবিত্র মিলন উৎসব. উৎসবটিতে বোনেরা ভাইদের কপালে ঈশ্বরকে স্মরণ করে চন্দনের ফোঁটা প্রদান করে ভাইয়ের দীর্ঘায়ু ও মঙ্গল কামনা করে। ভাই ও বোনেদের সদা রক্ষা করার পণ নেয়. ভাই বোনের মিষ্টি মধুর সম্পর্ক চিরকাল অটুট থাকুক.
আমাদের বিদ্যালয়ে কচিকাঁচারা উৎসবটি খুবই উৎসাহ উদ্দীপনায় উদযাপন করে।বিদ্যালয়ে উপস্থিত ছিলেন বিদ্যা ভারতীর সংগঠন মন্ত্রী তথা সংঘ প্রচারক মাননীয় মহেশ ভাগবতজী।

24/10/2022

दीपोत्सव की शुभकामनाएं
शुभ दीपावली..... 🙏
🪔 🪔

06/10/2022

মালুগ্ৰাম সরস্বতী বিদ্যা নিকেতনের পক্ষ থেকে সবাইকে জানাই বিজয়া দশমীর প্রীতি ও শুভেচ্ছা🙏

26/09/2022

শত শত নমন 🙏

11/09/2022

स्वामी विवेकानंद ने अमेरिका के शिकागो में 11 सितंबर सन 1893 ई. को आयोजित विश्व धर्म संसद में जो भाषण दिया था, उसकी प्रतिध्वनि युगों युगों तक सुनाई देती रहेगी।

शिकागो में दिए भाषण के मुख्य अंश -
मेरे अमेरिकी भाइयों और बहनों,
आपने जिस सौहार्द और स्नेह के साथ हम लोगों का स्वागत किया है उसके प्रति आभार प्रकट करने के निमित्त खड़े होते समय मेरा हृदय अवर्णनीय हर्ष से पूर्ण हो रहा है। संसार में संन्यासियों की सबसे प्राचीन परंपरा की ओर से मैं आपको धन्यवाद देता हूं, धर्मों की माता की ओर से धन्यवाद देता हूं और एवं कोटि कोटि हिन्दुओं की ओर से भी धन्यवाद देता हूं।

मैं एक ऐसे धर्म का अनुयायी होने में गर्व का अनुभव करता हूं जिसने संसार को सहिष्णुता तथा सार्वभौम स्वीकृति दोनों की ही शिक्षा दी है, हम लोग सब धर्मों के प्रति केवल सहिष्णुता में ही विश्वास नहीं करते, वरन समस्त धर्मों को सच्चा मानकर स्वीकार करते हैं। मुझे ऐसे देश का व्यक्ति होने का अभिमान है जिसने इस पृथ्वी के समस्त धर्मों और देशों के उत्पीड़ितों और शरणार्थियों को आश्रय दिया है।
मुझे आपको यह बतलाते हुए गर्व होता है कि हमने अपने वक्ष में उन यहूदियों के विशुद्धतम अवशिष्ट को स्थान दिया था, जिन्होंने दक्षिण भारत आकर उसी वर्ष शरण ली थी जिस वर्ष उनका पवित्र मंदिर रोमन जाति के अत्याचार से धूल में मिला दिया गया था।

ऐसे धर्म का अनुयायी होने में मैं गर्व का अनुभव करता हूं जिसने महान जरथुष्ट्र जाति के अवशिष्ट अंश को शरण दी और जिसका पालन वह अब तक कर रहा है।

भाइयों, मैं आप लोगों को एक स्तोत्र की कुछ पंक्तियां सुनाता हूं जिसकी आवृत्ति मैं बचपन से कर रहा हूं और जिसकी आवृत्ति प्रतिदिन लाखों मनुष्य किया करते हैं -

रुचीनां वैचित्र्यादृजुकुटिलनानापथजुषाम।
नृणामेको गम्यस्त्वमसि पयसामर्णव इव।।

अर्थात् - जैसे विभिन्न नदियां भिन्न भिन्न स्रोतों से निकलकर समुद्र में मिल जाती हैं उसी प्रकार हे प्रभो! भिन्न-भिन्न रुचि के अनुसार विभिन्न टेढ़े मेढ़े अथवा सीधे रास्ते से जाने वाले लोग अंत में तुझमें ही आकर मिल जाते हैं।

यह सभा, जो अभी तक आयोजित सर्वश्रेष्ठ पवित्र सम्मेलनों में से एक है स्वत: ही गीता के इस अद्भुत उपदेश का प्रतिपादन एवं जगत के प्रति उसकी घोषणा करती है -

ये यथा मा प्रपद्यंते तांस्तथैव भजाम्यहम।
मम वत्मार्नुर्वतते मनुष्या: पार्थ सर्वश:।।

अर्थात - जो कोई मेरी ओर आता है - चाहे किसी प्रकार से हो, मैं उसको प्राप्त होता हूं। लोग भिन्न मार्ग द्वारा प्रयत्न करते हुए अंत में मेरी ही ओर आते हैं.

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