07/10/2025
मोबाइल फ़ोन 📱 आम जीवन और परीक्षाएँ
प्यारे बच्चो और अभिभावक गण नमस्कार 🙏!
एक बहुत ही साधारण सा मुद्दा जिसपर हम बात करते हैं
वो है मोबाइल फ़ोन और हमारी आदत और इसके साथ आम जीवन,
हम दैनिक दिनचर्या में मोबाइल को बहुत नजदीकी सपोर्ट के रूप में कम में लेते आए है
अब यह धीरे धीरे आदत और हमारी कमजोरी बनते जा रहा है
हमारे शरीर ,दिमाग और मैं कहूँगा रिस्तों की भी। यानी तमाम सारी जीवन की बुनियाद इस मोबाइल फ़ोन पर टिकी है ।
वो कुछ छोटे छोटे साधारण से किस्सो से पता चलता है
जैसे-
फाइल या चाबी खो गई तो उसे खोजते समय हमारा दिमाग़
रिकॉल या खोजने की जरूरी कोशिशे देर से शुरू करता है इससे पहले सोचता है की रिंग कर लेते हैं ।
स्टूडेंट्स या आम जीवन में जब भी किसी सवाल में अटके हैं दिमाग एक्सरसाइज कम और गूगल कर ले या AI से पूछ लेते है इस पर ज़्यादा और जल्दी फ़ोकस जाता है ।
मौसम का रूख जानना हो तो पौराणिक हवाओं की दिशा का ज्ञान लेने की कोशिश भी नहीं करते सीधा मोबाइल फ़ोन से पूछते हैं ।
रिश्ते टिके पड़े हैं कॉल्स मैसेज इन सब पर याद करके देखो ऐसा कोई रिश्ता आपका जो सालों से किसी भी वर्चुअल साईट पर कनेक्ट नहीं है दावे के साथ कह सकते है इस प्रकार के रिश्ते की पहचान तक भूलने लगते हैं ।
हाँ माना की टेक्नोलॉजी का सही और मैक्सिमम उपयोग हम कर रहे है करनी भी चाहिए अच्छी बात है
लेकिन इस बात को पल्ले बांधी जाये तो बेहतर होगा क जिंदगी जब भी इम्तिहान लेती है उस टाइम आप ऑफलाइन होते हैं
चाहे इम्तिहान कोई भी हो - हर एक इम्तिहान ऑफलाइन होगा
जैसे के आपकी कोई कीमती चीज खोजने में
आपको ऑफलाइन माइंड में ही रिकॉल करनी होगी कहा रखी थी कैसे रखी थी कहा हो सकती है ।😊
आपकी कोई भी अनौपचारिक या औपचारिक परीक्षा हो तो भी मोबाइल फ़ोन नहीं होता ।
आपके माइंड की एक्सक्रेसाइज़ ही काम आती है गूगल करने का माइंड सेट हमारे माइंड को अलसी बना रहा है
किसी तूफ़ान में फसना या मौसम की मार होते वक्त भी इंसान मोबाइल का ग़ुलाम हो रखा है
मौसम की तमाम विपदाओं के समय हम ऑफलाइन होते है
और इस से बचने के लिए कम से कम हमारे बुजुर्ग के जैसे हवाओ ऋतुओं और महीनों का ध्यान रखकर मौसम का अंदाज़ा लगाना सीखना चाइए प्रकृति को दिल और दिमाग से समझना जरूरी होगा ही एक दिन जीवन की सबसे महत्व पूर्ण परीक्षा रिस्तों की समझ और परख
इस समय और समझ के लिए हमे चाइए की हमारा दिमाग बेहतर समझकर रिस्तों को आगे और प्रगाढ़ बनाता जाए
पर मोबाइल फ़ोन की लत के कारण
महसूस करना कभी तमाम वो रिश्तेदार और दूर दराज़ के संबंधी या जानकार , उन सबको आप वहाँ तक जानते हो पहचानते हो जैसी आपको दिखाई जाती है
पहचान बनती जा रही है स्टेटस या स्टोरी अपडेट
जो समधी ऑफलाइन है वो रिश्ता हमे बर्षों तक याद नहीं आते चाहे कितने भी खास क्यों ना हो ।
सीधे और सरल से महसूस किए उदाहरणों से समझ कर येही समझ आई है के मोबाइल फ़ोन को जीवन में ज़्यादा गहराई ना ही दे तो बेहतर ह्यूमन बीइंग तैयार होने की संभावना है
Thankyou