01/06/2026
परम आदरणीय श्री घनश्याम जी पारीक : सेवा, साधना और समाज निर्माण की प्रेरक गाथा
कुछ व्यक्तित्व केवल अपना जीवन नहीं जीते, बल्कि अपने जीवन को समाज के लिए एक आदर्श बना देते हैं। परम आदरणीय श्री घनश्याम जी पारीक ऐसे ही विरले व्यक्तित्वों में से एक थे, जिनका संपूर्ण जीवन सेवा, साधना, संस्कार और समाज उत्थान को समर्पित रहा। लगभग नौ दशकों तक फैले उनके जीवन ने अनगिनत लोगों को प्रेरणा, दिशा और ऊर्जा प्रदान की।
श्री घनश्याम जी पारीक ने मात्र 21 वर्ष की आयु में राजकीय शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएँ प्रारम्भ कीं। अपने कर्तव्यनिष्ठ, अनुशासित एवं कर्मयोगी स्वभाव के कारण उन्होंने शिक्षा विभाग में निरन्तर प्रगति करते हुए पदोन्नति प्राप्त की और निरीक्षक पद तक पहुँचकर शिक्षा एवं प्रशासन के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान दिया। उन्होंने अपने दायित्वों का निर्वहन केवल एक सरकारी कर्मचारी के रूप में नहीं, बल्कि समाज निर्माता के रूप में किया। शिक्षा के माध्यम से व्यक्तित्व निर्माण और सामाजिक जागरूकता उनके कार्यों की प्रमुख विशेषता रही।
सरकारी सेवा के साथ-साथ उनका मन आध्यात्मिक चेतना और मानव सेवा की ओर निरन्तर अग्रसर रहा। युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य को अपना गुरु मानते हुए उन्होंने शांतिकुंज, हरिद्वार से प्राप्त जीवन मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात किया। गुरुदेव के विचारों से प्रेरित होकर उन्होंने स्वयं को समाज सेवा और आध्यात्मिक जागरण के कार्यों में पूर्णतः समर्पित कर दिया।
उन्होंने यज्ञ, हवन, संस्कार एवं नैतिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार को जन-जागरण का माध्यम बनाया। गाँव-गाँव और घर-घर पहुँचकर लोगों को आध्यात्मिक जीवन, सदाचार और भारतीय संस्कृति के प्रति जागरूक किया। उनका मानना था कि व्यक्ति का वास्तविक विकास केवल भौतिक उन्नति से नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जागरण और चरित्र निर्माण से संभव है।
अजीतगढ़ क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए आध्यात्मिक कार्यों को स्थायित्व प्रदान करने के उद्देश्य से उन्होंने गायत्री मंदिर की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह मंदिर आज केवल एक उपासना स्थल नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गतिविधियों का प्रेरणा केन्द्र बन चुका है। उनके संरक्षण और मार्गदर्शन में गायत्री परिवार, अजीतगढ़ ने समाज में संस्कार, सद्भाव और सेवा की अनेक ज्योतियाँ प्रज्वलित कीं।
समाज सुधार के क्षेत्र में उनका एक अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान नशा मुक्ति आन्दोलन रहा। उन्होंने नशे को समाज की अनेक समस्याओं की जड़ मानते हुए इसके विरुद्ध आजीवन संघर्ष किया। जन-जागरण अभियानों, प्रेरक संवादों और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से उन्होंने अनेक लोगों को नशे की बुराइयों से मुक्त होकर सकारात्मक जीवन अपनाने की प्रेरणा दी। उनका यह प्रयास केवल एक आन्दोलन नहीं, बल्कि समाज को स्वस्थ और संस्कारित बनाने का सतत अभियान था।
सैंट एस. एन. पब्लिक स्कूल, अजीतगढ़ के संरक्षक के रूप में भी उनका मार्गदर्शन अमूल्य रहा। उन्होंने शिक्षा को केवल रोजगार प्राप्ति का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का आधार माना। उनके स्नेह, आशीर्वाद और मार्गदर्शन ने विद्यालय को संस्कारयुक्त शिक्षा प्रदान करने की दिशा में निरन्तर प्रेरित किया।
श्री घनश्याम जी पारीक का सम्पूर्ण जीवन हमें यह संदेश देता है कि सच्ची सफलता पद, प्रतिष्ठा और उपलब्धियों में नहीं, बल्कि समाज के लिए किए गए कार्यों और मानवता की सेवा में निहित है। आज वे भले ही हमारे बीच शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं हैं, किन्तु उनके विचार, उनके संस्कार, उनकी शिक्षाएँ और उनके द्वारा स्थापित संस्थाएँ सदैव समाज का मार्गदर्शन करती रहेंगी।
उनकी पुण्य स्मृति को विनम्र नमन।
“व्यक्ति चला जाता है, किन्तु उसके आदर्श युगों तक समाज का पथ आलोकित करते रहते हैं।”
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः। 🙏🏻🌹
Saint Shree Narayana Group Of Education, Ajeetgarh
Aarohana Career Institute, Ajeetgarh
Dr Kamlesh Kaanwar
Sunehari Kaanwar