25/09/2026
# # # सम्पादकीय - UFBU की चुप्पी बनाम BMS की पहल
*शीर्षक: रविवार को बैंक खुलवाने का आदेश - कौन लड़ा और कौन झुका?*
जब सवाल आया कानून का, तो RBI ने 28 अगस्त 2023 को RTI में कहा - “हमें जानकारी नहीं है।” जब सवाल आया रविवार को बैंक खुलवाने का, तो 22 सितंबर 2026 को वही RBI बोली - “हमारी अनुमति है!” यह बैंकिंग व्यवस्था का अद्भुत अध्याय है।
और इस अध्याय में दो किरदार स्पष्ट हैं।
*पहला किरदार - UFBU की चुप्पी।*
वह संगठन जो खुद को बैंक कर्मियों का सबसे बड़ा मंच कहता है, जिसने दिसंबर 2023 में IBA के साथ 5 Day Banking पर MOU किया, वही 22 सितंबर 2026 को IBA-RBI के रविवार खोलने के आदेश पर मौन हो गया। न कोई विरोध पत्र, न कोई कानूनी नोटिस, न कोई हड़ताल का आह्वान। क्या यह विफलता नहीं? क्या यह नतमस्तक स्वीकारोक्ति नहीं? बैंक कर्मियों ने देखा कि कैसे उनके तथाकथित रहनुमा ने एक वैधानिक सार्वजनिक अवकाश (NI Act 1881 की धारा 25) को RBI की एक Permission से खत्म होते देखा और चुप रहे।
*दूसरा किरदार - BMS की पहल।*
24 सितंबर 2026 को NOBW, NOBO, AIGBWO, AIGBOO - भारतीय मजदूर संघ से जुड़े चारों संगठनों ने वित्तीय क्षेत्र प्रभारी श्री गिरीश चंद्र आर्य जी के नेतृत्व में DFS सचिव से मुलाकात की। उन्होंने स्पष्ट कहा - या तो आदेश वापस लो, या Compensatory Off के साथ Double Pay दो। DFS ने सकारात्मक आश्वासन दिया। यही फर्क है - एक ने ज्ञापन दिया, दूसरे ने समर्पण।
*तीन बड़े सवाल अभी भी अनुत्तरित हैं:*
1. क्या RBI की Permission से NI Act के तहत घोषित वैधानिक अवकाश समाप्त हो जाता है? नहीं, इसके लिए भारत सरकार के गजट नोटिफिकेशन की आवश्यकता है।
2. क्या DFS Industrial Disputes Act के तहत हड़ताल को रोक नहीं सकता था? रोक सकता था, पर उसने नहीं रोका, क्योंकि वह भी जानता है आदेश न्यायसंगत नहीं।
3. जब DFS सहित सभी विभाग, RBI, LIC, राज्य सरकारें 5 Day Working का लाभ ले रही हैं, तो बैंक में 5 Day Banking पर आपत्ति क्यों? और पेंशनरों का Pension Updation क्यों लटका है?
सच यह है कि DFS को Bank Customer की चिंता है, बैंक कर्मचारी और पेंशनर की नहीं। क्योंकि पेंशन फंड कर्मचारी के वेतन से बना है, पर सरकार उसे अपनी जागीर समझती है। UFBU की हठधर्मिता और DFS की जिद के बीच पिस रहा है तो केवल बैंक कर्मचारी - जिसका रविवार असुरक