01/10/2026
क्या सभी धर्मों की जड़ एक ही है?
अक्सर यह कहा जाता है कि दुनिया के अलग-अलग धर्मों की शुरुआत एक ही जगह से हुई थी। इस्लामी नज़रिये से देखें तो इंसान की हिदायत का असल संदेश शुरू से ही एक रहा है: सिर्फ एक अल्लाह की इबादत करना।
इस्लाम के मुताबिक, अल्लाह ने इंसानों की रहनुमाई के लिए अलग-अलग दौर में कई नबी भेजे। हज़रत आदम अलैहिस्सलाम से लेकर हज़रत नूह, हज़रत इब्राहीम, हज़रत मूसा और हज़रत ईसा अलैहिमुस्सलाम तक सभी नबियों ने लोगों को एक ही बुनियादी पैगाम दिया: अल्लाह को एक मानो और उसी की इबादत करो।
फिर अलग-अलग धर्म कैसे बने?
इस्लामी मान्यता के अनुसार, समय बीतने के साथ पिछली उम्मतों में उनकी किताबों और शिक्षाओं के साथ बदलाव आते गए। लोगों ने अपनी मान्यताएं और विचार भी उनमें शामिल कर दिए। इसी वजह से धीरे-धीरे अलग-अलग धार्मिक पहचान और मान्यताएं सामने आती चली गईं।
यहूदी और ईसाई परंपरा का क्या हुआ?
इस्लामी समझ के अनुसार, हज़रत मूसा और हज़रत ईसा अलैहिमुस्सलाम भी लोगों को अल्लाह की इबादत और उसकी आज्ञा मानने की शिक्षा देने आए थे। लेकिन बाद के दौर में उनकी शिक्षाओं और मान्यताओं में बदलाव आए और अलग धार्मिक परंपराएं विकसित होती गईं।
आख़िरी नबी और आख़िरी किताब
फिर हज़रत मुहम्मद ﷺ को आख़िरी नबी बनाकर भेजा गया। मुसलमानों का ईमान है कि आप ﷺ के बाद कोई नया नबी नहीं आएगा।
कुरआन को मुसलमान अल्लाह की आख़िरी किताब मानते हैं, जिसमें इंसानों के लिए जीवन के हर महत्वपूर्ण पहलू में रहनुमाई मौजूद है।
इस्लाम के अनुसार, सभी नबियों का मूल संदेश एक ही था और वह था तौहीद, यानी सिर्फ एक अल्लाह की इबादत।
इसी वजह से मुसलमान मानते हैं कि इस्लाम ही वह दीन है जो सभी नबियों के मूल संदेश को आगे बढ़ाता है और अपनी अंतिम व मुकम्मल शक्ल में मौजूद है।
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इल्म बाँटने से समझ बढ़ती है।
और आखिर में, अल्लाह ही सबसे बड़ा है और वही पूरी कायनात का मालिक है। 🤲