30/03/2022
अभी ज्यादा दिन नहीं हुए हैं कोविड के दौरान डॉक्टरों ने अपनी जान दांव पर डालकर हमारी जीवन रक्षा की। यदि राजनीति और प्रशासन उन्हें आरोपित करने लगे तो वे इलाज कैसे करेंगे?
यह अमानवीयता ही सीमा लांघना है कि कर्तव्य पालन कर रही एक महिला चिकित्सक को प्रसूता की मौत का अपराधी साबित करने का प्रयास हुआ। एक गोल्ड मैडलिस्ट डॉक्टर को इतना प्रताड़ित किया गया है कि उसे आत्महत्या ही अपनी बेगुनाही का सबूत लगी।
डॉ. अर्चना शर्मा जी का सुसाइड नोट आंखें नम कर देनेवाला है। उन्होंने लिखा है “बेगुनाह डॉक्टरों को प्रताड़ित न करें”। वे ये भी लिखती हैं “मेरे बच्चों को मां की कमी महसूस न होने देना”।
गहलोतजी आपको ये सुसाइड नोट पढ़ना चाहिए और अपनी पार्टी और पुलिस प्रशासन का नहीं न्याय का पक्ष चुनना चाहिए। इस घटना के हरेक पहलू की स्पेशल कमेटी द्वारा बारीक जांच अनिवार्य है।
यह खुदकुशी जरूर है, मगर मैं इसे हत्या कहूंगा। अपरोक्ष रूप ये हत्या उन लोगों ने की है जिन्होंने सत्ता और प्रशासन का दुरूपयोग कर दुरूह परिस्थिति निर्मित की।
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