GOVT. Ups.School Pratappura SIKAR

GOVT. Ups.School Pratappura SIKAR Govt ups school Pratappura Sikar is located in a small village.it is a day boarding school.in this s

10/08/2023

हां जी हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी मिठाई का प्रबंधन श्रीमान सुरेंद्र जी शेषमा के द्वारा किया जाएगा स्वतंत्रता दिवस पर

13/06/2020

*सरकारी स्कूलों में आपका स्वागत है।*
💐💐💐💐💐
*लॉकडाउन* के कारण परिवारों की *परिस्थिति में बदलाव आया है।* निकट भविष्य में भी सुधार की गुंजाइश कम नजर आ रही है।

*अभिभावकों* से अनुरोध है वे *सरकारी स्कूल* में अपने बच्चों को *प्रवेश* दिलाएं।

8 वीं कक्षा तक कोई *प्रवेश* या *मासिक* फीस नहीं है ।
*उत्तम शिक्षण* है । *योग्य शिक्षक* उपलब्ध हैं ।
*सीबीएससी बेस्ड पाठ्यक्रम* , *अच्छे भवन* , *पर्याप्त फर्नीचर* , *निशुल्क पुस्तकें*, *साईकिल*, *छात्रवृति*, *मिड डे मील*, *ट्रांसपोर्ट भत्ता, स्वच्छ पेयजल RO , स्वच्छ शौचालय, विशाल खेल मैदान, पर्यावरण दृष्टि से शुद्ध प्रांगण -फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन *आपके घर के निकट* ही हैं

इसलिए कोई *वाहन शुल्क* नहीं।
(भीड़भाड़ वाले वाहन में नहीं बैठना)
आप *सरकारी स्कूल* में *डोनेशन* दे दें तो और *अधिक सुधार* आ जायेगा। 80 G में आयकर मुक्त।
एक बार *हम पर*, *सरकारी स्कूलों* पर *विश्वास* करके तो देखें। *पुरानी पीढ़ी* भी इन *सरकारी स्कूलों* में पढ़ी है । *क्या वह किसी से कम है?*

*अभिभावकगण* बेवजह सरकार पर दवाब बना रहे हैं कि निजी स्कूलों पर फीस कम करने को कहे । सरकार ने तो सबके सामने *सर्वसुविधायुक्त सरकारी स्कूलों* में प्रवेश का विकल्प दे रखा है ।

*शासकीय स्कूलों* में उनका *स्वागत* है । * हम* *बड़े -बड़े विज्ञापन अखबार* *में नहीं देते *। *अपनी प्रशंसा स्वयं नही करते। सरकारी स्कूलों का नेटवर्क देश के छोटे से छोटे गांव में है। पूरी पारदर्शिता है इसलिए हमारे स्कूलों की आलोचना कोई भी कर सकता है। अखबार के पन्नों में केवल हमारी बुराई ही छपती है पर आप केवल एक बार सेवा का अवसर दें तो आप हमारी अच्छाइयों से भी परिचित हो जाएंगे।*

*आज भी देश के करोड़ों बच्चे सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी हैं , जो निजी स्कूलों से अधिक ही हैं ।*
*नए सत्र से सरकारी स्कूल भी स्मार्ट क्लासें शुरू करने जा रहे हैं जिसकी शुरुआत SMILE, RADIO, TV पर हो चुकी है।*

निवेदक- समस्त राजकीय विधालय व शिक्षक

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हमारी संस्था के पूर्व शिक्षक श्रीमान राजेंद्र सिंह राठौड़ का  बहुत-बहुत आभार इन्होंने विद्यालय के छात्रों के लिए स्केच प...
26/05/2020

हमारी संस्था के पूर्व शिक्षक श्रीमान राजेंद्र सिंह राठौड़ का बहुत-बहुत आभार इन्होंने विद्यालय के छात्रों के लिए स्केच पेन बोर्ड उपलब्ध करवाया है.

हाल ही में आरपीएससी द्वारा घोषित द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षा 2018 की संस्कृत विषय की सूची में राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त किया है श्रीमान राठौड़ साहब ने समस्त विद्यालय परिवार एवं बच्चे इनकी आभारी है एवं इन पर गर्व अनुभूति महसूस कर रहे हैं

"अपनी माँ को हंसाने के लिए हजारों माताओं को नहीं रुला सकता" *अमर शहीद कुंवर प्रताप सिह बारैठ चारण के जन्म दिवस और शहादत ...
24/05/2020

"अपनी माँ को हंसाने के लिए हजारों माताओं को नहीं रुला सकता"

*अमर शहीद कुंवर प्रताप सिह बारैठ चारण के जन्म दिवस और शहादत दिवस पर दीप प्रज्वलित कर श्रद्धा सुमन अर्पित की*

*प्रतापसिंह बारहठ*

प्रतापसिंह बारहठ (२४ मई १८९३ - २७ मई १९१८) भारत के स्वतंत्रता संग्राम के एक महान क्रांतिवीर तथा केसरी सिंह बारहठ के पुत्र थे।

परिचय संपादित करें
उनका जन्म राजस्थान के उदयपुर में २४ मई १८९३ में हुआ था। वे क्रान्तिवीर ठा. केसरी सिंह बारहठ के पुत्र थे। प्रारंभिक शिक्षा कोटा, अजमेर और जयपुर में हुई। क्रांतिकारी मास्टर अमीरचंद से प्रेरणा लेकर देश को स्वतंत्र करवाने में जुट गए।

वे रासबिहारी बोस का अनुसरण करते हुए क्रांतिकारी आन्दोलन में सम्मिलित हुए। रास सिंह बिहारी बोस का प्रताप पर बहुत विश्वास था। २३ दिसम्बर १९१२ को लॉर्ड हर्डिंग्स पर बम फेंकने की योजना में वे भी सम्मिलित थे। उन्हें बनारस काण्ड के सन्दर्भ में गिरफ्तार किया गया और सन् १९१६ में ५ वर्ष के सश्रम कारावास की सजा हुई। बरेली के केंद्रीय कारागार में उन्हें अमानवीय यातनाएँ दी गयीं ताकि अपने सहयोगियों का नाम उनसे पता किया जा सके किन्तु उन्होने किसी का नाम नहीं लिया।

बरेली जेल में चार्ल्स क्लीवलैंड ने इन्हें घोर यातनाएं दी ओर कहा - "तुम्हारी माँ रोती है " तो इस वीर ने जबाब दिया - " में अपनी माँ को चुप कराने के लिए हजारों माँओं को नहीं रुला सकता। " और किसी भी साथी का नाम नहीं बताया।

२४ मई १९१८ को जेल में ही अंग्रेजों की कठोर यातनाओं से वे शहीद हो गये।

2019-20 Best memories
09/05/2020

2019-20 Best memories

कब तक द्वन्द सम्हाला जाए,युद्ध कहाँ तक टाला जाए ।वंशज है महाराणा का..चल फेंक जहाँ तक भाला जाए ।अब मनोकामना पूरी कर दो, र...
09/05/2020

कब तक द्वन्द सम्हाला जाए,
युद्ध कहाँ तक टाला जाए ।
वंशज है महाराणा का..
चल फेंक जहाँ तक भाला जाए ।

अब मनोकामना पूरी कर दो,
रक्त चटाकर तलवारों को..
महारुद्र को शीश नवाकर,
नव अश्वमेध कर डाला जाए।

निरीहों को जीवन देना,
परन्तु पृष्ठ-आघात अक्षम्य रहे।
प्रखर समर के बीचोबीच..
ऐसा रणघोष बजा डाला जाए।
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