ज्ञान एक नजर में

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ज्ञान एक नजर में' में आपका स्वागत है – यहां आपको रोज़ाना सरल और संक्षिप्त ज्ञान का खजाना मिलेगा हम जटिल विचारों को आसान शब्दों में प्रस्तुत करते हैं मेरा नाम प्रकृति गुप्ता है आप लोगो का सपोर्ट चाहिए ।। अगर आप मुझे सपोर्ट करना चाहते है तो मुझे फॉलो करें।

14/09/2024

#सुविचार #अच्छीआदतें #ज्ञानएकनजरमें

05/09/2024

जिंदगी की जरूरी बातें ❣️🙏

01/09/2024

#योगवशिष्ठ #अच्छीआदतें
शास्त्रों में वर्णित ये कार्य ना करें ---
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१-- सूर्य उदय के बाद ना उठें।
२-- शैय्या पर भोजन ना करें।
३-- दक्षिण दिशा की और मुंह करके भोजन ना करें।
४--खडे होकर जल ना पीएं।
५--अग्नि- कन्या- ब्राह्मण - गांय को भूलकर पैर से ना छुंए।
६--जुआ ना खेलें।
७-- मदिरा ना पीएं।
८-- पर स्त्री समागम ना करें।
९--अधिक भोजन ना करें।
१०-- बासी दुर्गंध युक्त भोजन ना करें।
११--देहली पर ना बैठें।
१२-- दिन में स्त्री समागम ना करें।
१३-- मांसाहार ना करें।
१४--देर रात्रि भोजन ना करें।
१५--झूठ ना बोलें।
१६--शुभ कार्यों में विलम्ब ना करें।
१७--विवाह अधिक आयु में ना करें।
१८--भ्रूण हत्या ना करें।
१९-- कच्चे फल ना तोडें।
२०-- सूर्यास्त के बाद वृक्ष के पत्ते फल और टहनी ना तोडें।
२१--दूसरे का गेट और दीवार फांदकर ना जाएं।
२२--अग्निहोत्र को जल से ना बुझाएं।
२३-- नदियों को दूषित ना करें।
२४--नाखून ना चबाएं।
२५-- बे वजह सिर ना खुजलाएं।
२६--जल में मल - मूत्र त्याग ना करें और ना ही कुल्ला करें।
२७--उत्तर दिशा में सिर करके ना सोएं।
२८--अन्न की थाली को पैर ना मारें।
२९-- क्रोध की अवस्था में भोजन ना करें।
३०--भोजन करते समय बातें ना करें।
३१--बिना बताए भोजन के समय किसी के घर ना जाएं।
३२-- दीपक को फूंक मारकर ना बुझाएं।
३३--कन्या से अपने पैर ना दबवाएं।
३४--भोजन करने के बाद उछल कूद ना करें।
३५--नव प्रसूता गांय का दूध १० दिन तक ना पीएं।
३६--स्त्री पति से पहले भोजन ना करें।
३७-- बांझ स्त्री का तिरस्कार ना करें।
३८-- गर्भवती महिला को प्रताड़ित ना करें।
३९-- अपनी प्रशंसा ना करें।
४०-- अपनी कमजोरी दूसरों को ना बताएं।
४१-- बीमार होने पर मैथुन ना करें।
४२--अतिथियों का अपमान ना करें।
४३-- पूस - माघ - श्रावण - श्राद्ध - उपवास में स्त्री समागम ना करें।
४४--वृक्ष की जड और तने में मूत्र त्याग ना करें।
४५-- सोए हुए को लांघकर ना जाएं।
४६--गुरु पत्नी को कु दृष्टि से ना देखें।
४७--भोजन के लिए लडाई ना करें।
४८-- प्रसाद जब भी मिलें बांट कर ग्रहण करें।
४९-- भोजन करते समय कोई बगल में बैठा हो उसे भी भोजन के लिए अवश्य पूछें।
५० -- दूसरों से छिपा छिपाकर कोई वस्तु ना खाएं।
५१-- उत्तेजक गानों के आवेश में नृत्य ना करें।
५२--अन्न के तुरंत बाद अधिक जल‌ ना पीएं।
५३-- जो पैर छुए उसे आशीर्वाद और मंगल दें।
५४-- घर आए व्यक्ति को जल‌ अवश्य पूछें।
५५-- बिना सोचे विचारे वचन ना दें अथवा कसम आदि ना खाएं।
५६-- क्षमा मांगने में विलम्ब ना करें।
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योग वासिष्ठ पढें।
योग वासिष्ठ ही कल्याण और मुक्ति का शास्त्र है। कन्या को दहेज देने से अच्छा एसे संस्कार दें , जिससे वह दूसरे कुल का कल्याण कर सके !
कन्या नयी पीढ़ी को जन्म देती है
कन्या नयी पीढ़ी को शिक्षित करती है,
जिस कन्या के भीतर संस्कार नहीं होंगे उसकी संतान भटक जाएगी

**जय श्री राम**

30/08/2024

#गौतम बुद्ध के उपदेशों ने लाखों लोगों को जीवन के सत्य और शांति की ओर मार्गदर्शन किया। उनके कुछ प्रमुख उपदेश इस प्रकार हैं:

1.चार आर्य सत्य (Four Noble Truths)

**दुःख**: जीवन में दुःख अनिवार्य है। जन्म, मृत्यु, बुढ़ापा, और बिछड़ने का दुःख सभी का सामना करना पड़ता है।
*दुःख का कारण**: हमारे इच्छाएँ और आसक्ति (Attachment) दुःख का कारण हैं। **दुःख का निवारण**: इच्छाओं और आसक्तियों को त्याग कर दुःख से मुक्ति पाई जा सकती है।
**दुःख के निवारण का मार्ग**: दुःख से मुक्ति पाने का मार्ग अष्टांगिक मार्ग (Noble Eightfold Path

2. **अष्टांगिक मार्ग (Noble Eightfold Path)**:
- **सम्यक दृष्टि**: सही दृष्टिकोण रखना।
- **सम्यक संकल्प**: सही इरादे रखना।
- **सम्यक वाणी**: सत्य और प्रिय वाणी बोलना।
- **सम्यक कर्म**: सही आचरण करना।
- **सम्यक आजीविका**: सही तरीके से जीविका कमाना।
- **सम्यक प्रयास**: सही प्रयास करना।
- **सम्यक स्मृति**: सही स्मृति रखना।
- **सम्यक समाधि**: ध्यान द्वारा मन की शुद्धि करना।

3.अनित्यता (Impermanence)

सभी वस्तुएं और अवस्थाएँ अनित्य हैं। हर चीज़ का अंत होता है, चाहे वह जीवन हो, सुख हो, या दुःख हो। इस सत्य को स्वीकार कर जीवन में संतुलन बनाए रखना चाहिए।

4.अनात्म (No-Self)**:

कोई स्थायी आत्मा नहीं होती। शरीर, मन, और व्यक्तित्व लगातार बदलते रहते हैं। इस समझ से अहंकार और स्वार्थ का त्याग किया जा सकता है।

5.मध्यम मार्ग (Middle Way)

अत्यधिक विलासिता और कठोर तपस्या दोनों ही दुःख का कारण हैं। बुद्ध ने मध्यम मार्ग अपनाने का सुझाव दिया, जो संतुलन और संयम का मार्ग है।

6. करुणा और अहिंसा

सभी प्राणियों के प्रति करुणा और अहिंसा का पालन करना चाहिए। किसी को भी दुख या हानि पहुंचाना गलत है।

7. समता (Equanimity)

सुख-दुःख, सफलता-असफलता, और लाभ-हानि के बीच समता रखना चाहिए। समानता और संतुलन से जीवन में शांति आती है।

बुद्ध के ये उपदेश जीवन में शांति, संतोष, और मुक्ति पाने के लिए मार्गदर्शक हैं। इनका पालन करके व्यक्ति आत्मज्ञान और निर्वाण की प्राप्ति कर सकता है।

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