01/11/2022
श्लेष अलंकार के उदाहरण
श्लेष अलंकार के 20 उदाहरण व्याख्या
1. चरण धरत चिंता करत चितवत चारोंहुँ ओर
सुवरन को खोजत फिरे, कवि, व्यभिचारी, चोर।। ‘सुवरन‘ के तीन अर्थ – सुवरन – अच्छे शब्द, सुवरन – स्वर्ण और सुवरन – सुन्दर स्त्री है।
2. जो रहीम गति दीप की, कुल कपूत गति सोय।
बारि उजियारे लागे, बढे अंधेरो होय।। बढे शब्द के दो चिपके हुए अर्थ – बढे – बड़ा होने पर, बढे – बुझने पर
3. मंगन को देख पट देत बार बार इस उदाहरण में ‘मंगन’ के दो अर्थ कपडे तथा दरवाजा है।
4. प्रियतम बतला दे लाल मेरा कहाँ है। ‘लाल’ का अर्थ बेटा या रत्न है।
5. माया महाठगनी हम जानी
त्रिगुण फ़ांस लिए कर डोले बोले मधुर वाणी।। त्रिगुण का अर्थ – सत, रज, तम
6. मधुवन की छाती को देखो, सूखी कितनी इसकी कलियाँ। ‘कलियाँ’ शब्द के चिपके हुए अर्थ – कलियाँ – फूल खिलने से पहले कली, कलियाँ – यौवन से पहले की अवस्था है।
7. रावण सर सरोज बनचारी।
चलि रघुबीर सिलीमुख धारी।। सिलीमुख – बाण, भ्रमर
8. रात कली एक ख्वाब में आई और गले का हार हुई।
9. सूली ऊपर सेज हमारी, किस विधि सोणा होय |
गगन मंडल पर सेज पिया की, किस विधि मिलना होय|| पिया शब्द के दो अर्थ है – पति और प्रियतम
आप कुछ भी कहें मैं तो इसे हरि की कृपा मानता हूँ|
10. हे प्रभु हमें दो जीवनदान।
11. चिर जीवो जोरी जुरै, क्यों न सनेह गंभीर|
को घटि ये बृषभानुजा, वे हलधर के वीर||
12. मेरी भव बाधा हरो राधा नागिन सोये
जा तन की छाई परे स्याम हरित दुत होये हरित शब्द के तीन अर्थ है – हर लेना, हर्षित होना, हरे रंग का होना
13. जो घनीभूत पीड़ा थी, मस्तिष्क में स्मृति सी छाई
दुर दिन में आंसू बनकर, आग बरसने आयी|
14. नर की अरु नलनीर की गति एकै कर जोय
जेतो नीचो हवै चले ततो ऊंचो हो।.