12/02/2025
चारों वेद करूं मैं खंडन, तब रविदास कहाऊ.....
ऐसा चाहूं राज में, जहां मिले सबन को अन्न l
छोट- बड़े सब सम बसे, रहे रविदास प्रसन्न ll
आज हम सब संत शिरोमणि रविदास जी की 648वीं जयन्ती का पर्व मना रहे हैं। यह अवसर मेरे लिए विशेष था क्योंकि मुझे उनके जन्म स्थान, जो कि शीर गोवर्धन स्थित बनारस (काशी) में है, पर जाकर उनकी जयन्ती का प्रत्यक्ष अनुभव करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस मौके पर वहां एक भव्य आयोजन हुआ, जिसमें न केवल आम लोग, बल्कि प्रमुख जन प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
इस कार्यक्रम में नागिना सांसद और आज़ाद पार्टी के अध्यक्ष माननीय चंद्रशेखर आज़ाद रावण जी का आगमन हुआ, जिनकी उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी महत्वपूर्ण बना दिया। यह आयोजन संत रविदास जी के योगदान और उनकी शिक्षाओं को प्रसारित करने के लिए आयोजित किया गया था।
संत रविदास जी का जीवन और उनके संदेश समाज के सभी वर्गों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। वे न तो सिख थे, न ही सिख धर्म के दसों गुरुओं में से एक थे, फिर भी उनके विचार और उपदेशों ने न केवल सिख समाज को बल्कि पूरे देश को समानता और प्रेम का संदेश दिया।
इस आयोजन की खास बात यह थी कि इसमें समाज के हर वर्ग के लोग बड़े उत्साह और अनुशासन के साथ शामिल हुए। आयोजन में अनुशासन और स्वच्छता का शानदार प्रबंधन किया गया था, जिससे यह कार्यक्रम बहुत ही व्यवस्थित और सफल रहा। अद्भुत यह था कि पूरे कार्यक्रम के दौरान ना तो पुलिस बल की कोई आवश्यकता पड़ी, ना ही किसी प्रकार की कोई अव्यवस्था हुई।
यह आयोजन इस बात का प्रतीक था कि अगर समाज में सच्ची श्रद्धा और एकता हो, तो किसी भी प्रकार की बाहरी सुरक्षा या निगरानी की आवश्यकता नहीं होती। संत रविदास जी के विचार और उनकी शिक्षा आज भी समाज में गहरी छाप छोड़ते हैं। उनके सिद्धांत हमें यह सिखाते हैं कि समाज में समानता, भाईचारे और प्रेम का संदेश फैलाना चाहिए, ताकि समाज में किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो।
संत रविदास जी की जयन्ती पर आयोजित इस कार्यक्रम ने यह सिद्ध कर दिया कि उनके संदेशों का प्रभाव आज भी लोगों के दिलों में जीवित है, और उनका योगदान कभी नहीं भूला जा सकता। यह आयोजन एक बेहतरीन उदाहरण था कि समाज की शक्ति और एकता के द्वारा हम किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं।
संत रविदास जी की जयन्ती के इस आयोजन को देखकर मन को शांति और संतोष की अनुभूति हुई। उनके आशीर्वाद से समाज में एक नई दिशा की शुरुआत हो, यही हमारी कामना है।
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