Yayawar Zindagi

Yayawar Zindagi Yayawar zindagi ka ,
koi na thikana hai.. kahan se chala tha main ,
ka

'yayavar zindagi' is the book of my songs and my freeworse poems.these freeworse poems i have written during my student life & afterwards (between1974-1998).

11/10/2015

कौन पहिचाने

शब्द की अभिव्यंजनाएं,
भाव की ये भंगिमाएं,
कौन पहिचाने.

हर सुरीला राग हमसे कह रहा है,
एक झरना गीत का,जो बह रहा है,
आत्मा को आज उसकी , कौन जाने ?
बांसुरी फिर कह रही होकर मुखर,
और कितने युद्ध होंगे शंख ध्वनि पर,
शांति का सन्देश लेकिन , कौन माने ?
ज़िंदगी का गीत इक चंचल नदी सा,
यदि ठहरता है कहीं ,लगता सदी सा,
इक ज़रा सा झूठ और , कितने बहाने, ?

11/10/2015

यायावर ज़िन्दगी
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यायावर ज़िन्दगी का कोई न ठिकाना है,
कहाँ से चला था मैं,कहँ मुझे जाना है .
अंतहीन यात्रा में कहीं मुझे धुप मिली,
कहीं कहीं छाँव घनी ,ममता की बांह मिली.
खोज़ने को आतुर मन स्वयं का ठिकाना है,
कहाँ से चला था मैं----------
अनबूझे प्रश्न लिए जीवन ने सदा छला,
किसका समर्पण है,कौन मेरे संग चला.
गहरा तम है जग में,उजियारा पाना है,
कहाँ से चला था मैं---------------
मन ने सौ बार बुने सपने जो टूट गए,
कुछ दूर चलकर ही ,अपने सब छूट गए,
रह गया अकेला मन ,बहुत दूर जाना है,
कहाँ से चला था मैं ---------------
मूक रहा दर्पण भी ,कुछ भी न बोल सका,
भेद मेरे मन के वह ,कुछ भी न खोल सका,
अंत समय सपनों को यहीं छोड़ जाना है,
कहाँ से चला था मैं कहाँ मुझे जाना है.
डॉ हरि

22/07/2014

कितना तरसा चाँद रात भर मधुरस छलकाने,
सूनेपन का गीत बावरी रात लगी गाने

तारों ने उसाँस भरी है
नई सुबह की बात चली है
कौन कर गया जादू उन पर,
वही राम जाने .............
अपनी पीड़ाएँ हैं अनगिन
मन में बल खाती है नागिन,
कितने सारे जतन कर लिए
मन को बहलाने..............
मौसम को कोयल गाती है
साजन की याद सताती है
आने वाला आज न आया,
किधर गया जाने...............
कितना तरसा चाँद रात भर मधुरस छलकाने.,

22/07/2014

बरसो सावन के घन अब तो ,धरती ताल तलैया वाली कर दो
धार नदी की सूख चली है ,इसकी छटा निराली कर दो
सोयाबीन उदास खड़ा है ,ज्वार-बाज़रा सूखा,
तपता बदन होंठ पथराए, है किसान का कुनबा भूखा,
प्यासी आँखें देखें सपने,सपनों में हरियाली भर दो |

सरसों सरस न पायी अब तक,मकई खड़ी पछताती,
रोती है फूटी किस्मत पर याद उसे सावन की आती ,
इतने निष्ठुर बनो न अब तुम,खेत-खेत खुशहाली भर दो|

मूंगफली सुकुडी -सुकुडी है,बेचैनी में चना खड़ा है,
हरा-भरा जो खेत कभी था,ऊसर और वीरान पड़ा है,
बेचैनी को चैन दिला दो,धरती को मतवाली कर दो |

बरसो सावन के घन अब तो,धरती ताल-तलैया वाली कर दो |

22/10/2013

शरद की चांदनी जाने को है ,अब प्यार की बातें करें .
रजत सी यामिनी जाने को है ,इकरार की बातें करें

वर्जना की रेख तुमने खींच ली जो हर तरफ ,
चलो उसको मिटा कर इक नए संसार की बातें करें.

कुछ घडी ही यामिनी ,ये चांदनी और प्यास है,
अब न यूँ रूठे रहें ,मनुहार की बातें करें .

साथ तुम हो राह भी कट जाएगी हँसते हुए ,
क्यों किनारे पर खड़े मझधार की बातें करें,

क्या बचेगा शेष जब हम तुम सभी मिट जायेंगे ,
क्यों भला फिर जीत की और हार की बातें करें.
डॉ,हरि

14/09/2013

जब भी जी चाहा कहीं भी सो लिया ,
दर्द को सपना समझ कर ढो लिया
कोशिशें कीं अश्रु ना छलकें कभी ,
आदमी हूँ इसलिए मैं रो लिया .

इस जहाँ से यूँ गुज़र कर जायेंगे ,
गीत अपने गुनगुनाकर जायेंगे ,
एक अपने गीत की तासीर ऐसी ,
कल इसे सब लोग भी दोहराएंगे
डॉ ,हरि

13/08/2013

आओ हम मिल सभी ऐसा गीत गायें
जिसे गा सकें हवाएं जिसे सुन सकें दिशाएं .
करुणा हो प्रेम हो ,मन में विश्वास हो /
स्वप्न भले हों अलग ,पर एक ही आकाश हो ,
गंध भरी पांखुरी भी झूम -झूम जाएँ
ऐसा गीत गायें.

13/08/2013

चाहा है मन ने कई बार
किसी की
काली सी अलकों में
उलझ -उलझ जाना /
अलसाये नयनों में ,
डूब -डूब जाना /
किसी की झुकी हुई पलकों पर
बिखर -बिखर जाना.

01/08/2013

जीवन के जलते प्रश्नों की मन मैं आग लिए फिरता हूँ .
मंजिल तक पहुचुँगा कैसे ,फूटे भाग लिए फिरता हूँ '
कौन यहाँ से क्या ले जाये ,जीवन तो बस आना -जाना
वक़्त सदा से गाता आया ,भटके मन का यही तराना.
कैसे निर्मलता छलकेगी मन में राग लिए फिरता हूँ.
जीवन के जलते प्रश्नों की .........

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