11/10/2015
कौन पहिचाने
शब्द की अभिव्यंजनाएं,
भाव की ये भंगिमाएं,
कौन पहिचाने.
हर सुरीला राग हमसे कह रहा है,
एक झरना गीत का,जो बह रहा है,
आत्मा को आज उसकी , कौन जाने ?
बांसुरी फिर कह रही होकर मुखर,
और कितने युद्ध होंगे शंख ध्वनि पर,
शांति का सन्देश लेकिन , कौन माने ?
ज़िंदगी का गीत इक चंचल नदी सा,
यदि ठहरता है कहीं ,लगता सदी सा,
इक ज़रा सा झूठ और , कितने बहाने, ?