19/12/2022
We need to save them, giving everything in our life....
पहले कागज व गत्ते आमतौर पर गाँव में बहुत कम होते थे परन्तु फिर भी हर घर में इनसे बणे बोहिये/डालड़ी जरूर होते थे। आज हमारा लगभग हर सामान गत्ते या कागज में लिपटा हुआ आता है तथा कापी किताब व अखबार भी हर घर में है परन्तु ये बोहिये कहीं नहीं दिखाई देते।
इन बोहियों की सतह में सुराख (अतिसुक्ष्म छिद्र) होते हैं जो कि इसमें रखे जाने वाले खाद्य पदार्थों की नमी को सुरक्षित रखते हैं। इनके निर्माण में मेथी दाना भी प्रयोग में लाया जाता है जो कि चिकनाहट के साथ साथ किसी भी प्रकार के फफुंद या हानिकारक जीवाणुओं को उत्पन्न नहीं होने देता। इसीलिए इस में शादी में बणे लड्डू आदि भी दो तीन महीने तक तरोताजा रहते थे।
इनमें मुलतानी मिट्टी का मिश्रण होने के कारण शरीर को कैल्शियम अपने आप मिलता रहता है।
प्लास्टिक या किसी भी धातु के कटोरदान या एलुमिनियम फ्वाएल गुणवत्ता के मामले में इनके सामने कहीं नहीं टिकते।
अगर इसका विधिवत व्यवसाय किया जाये तो यह आज भी मिलियन डॉलर जॉब हो सकता है। वैदिक गाम में पढ़ेलिखों को इस प्रकार के बोहिये बणाणा सिखाणे का भी विचार है।
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चित्र साभार