15/08/2026
10 वर्षों की शिक्षा… और आज एक पुराने विद्यार्थी से हुई मुलाकात ने बहुत कुछ कह दिया।
आज 2024 बैच के Class 10th के एक विद्यार्थी से मुलाकात हुई। इसी वर्ष उसने 12वीं पास की है और NEET में 560 अंक प्राप्त करने के बाद अब दोबारा तैयारी के लिए पटना में Aakash से तैयारी कर रहा है।
दुर्भाग्य से हाल ही में एक सड़क दुर्घटना में उसका हाथ टूट गया। उसे इस हालत में देखकर दुख हुआ और लगा कि उसकी पढ़ाई भी कुछ समय के लिए प्रभावित होगी।
यह वही बच्चा है जो Clever Children के Pre-Foundation Batch में Class 8 के बीच में आया था। Class 9th पूरी तरह हमारे साथ पढ़ा और Class 10th के बीच में कुछ ऐसे संस्थानों के आकर्षक वादों के कारण वहाँ चला गया, जो उस समय अचानक “बरसाती मेंढक” की तरह दिखाई दिए थे।
आज उसने खुद कहा—
“सर, हमारी नासमझी थी… बहुत धोखा हुआ। वहाँ कुछ भी ठीक से नहीं पढ़ाया गया।”
मैंने उससे सिर्फ इतना कहा—
“इन बातों को मन में मत रखो। आगे बढ़ो और सफल बनो। ये सब छोटी बातें हैं, मैंने भी इन्हें मन में नहीं रखा।”
लेकिन उसकी अगली बात ने मुझे गर्व महसूस कराया।
उसने बताया कि आज Aakash में जब Physics और Chemistry के कुछ topics पढ़ाए जाते हैं तो वहाँ के शिक्षक उससे पूछते हैं—
“कहाँ से पढ़े हो?”
और जब वह Clever Children का नाम बताता है तो वहाँ के कई शिक्षक हमारे संस्थान को जानते हैं।
उसने बताया कि Atomic Structure, Light जैसे कुछ topics उसे दोबारा पढ़ने की जरूरत तक महसूस नहीं हुई, क्योंकि उनकी foundation पहले से मजबूत थी।
यही शिक्षा की असली ताकत है।
शिक्षा केवल एक showroom नहीं है।
पोस्टर लगाने, आकर्षक वादे करने और कुछ समय बाद गायब हो जाने का नाम शिक्षा नहीं है।
शिक्षा एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया और शोध है—
हर बच्चे की learning ability को समझना,
उसे पढ़ाने का सही तरीका तलाशना,
उसकी कमियों पर लगातार काम करना
और उसकी foundation को मजबूत बनाना।
इसलिए सभी अभिभावकों और विद्यार्थियों से मेरा विनम्र आग्रह है—
सिर्फ showroom देखकर, बड़े-बड़े प्रचार देखकर या कुछ समय के लिए दिखाई देने वाले “बरसाती मेंढकों” के आकर्षक वादों में आकर अपने बच्चे के भविष्य का निर्णय न लें।
हम यह बिल्कुल नहीं कहते कि केवल Clever Children ही लगातार काम कर रहा है। शिवहर में कई अच्छे शिक्षक और संस्थान हैं जो ईमानदारी से शिक्षा के क्षेत्र में प्रयास कर रहे हैं।
ऐसे संस्थानों का हिस्सा बनिए, जो वर्षों से लगातार बच्चों के साथ खड़े हैं।
क्योंकि…
**“प्रचार कुछ दिनों का हो सकता है,
लेकिन शिक्षा का परिणाम वर्षों