14/09/2023
🙏🌹श्री शारदाय: नमः🌹🙏
🙏🌹विश्व हिन्दी दिवस की शुभकामनाएं🌹🙏
🙏 मैं हूँ, आदि भाषा हिन्दी, देव भाषा हिन्दी ।
प्रेम की भाषा हिन्दी, राष्ट्र की भाषा हिन्दी
हर शब्द का अपना वजूद लिये, कालांतर से चली आ रही हूँ ।
अरबी, फ़ारसी, ऊर्दू के साथ अपनी पुरातन विरासत को संजोकर, अब तो अंग्रेजी, जापानी, रूसी के साथ भी रिश्तेदारी निभा रही हूँ ।
पानी जैसा मेरा नेचर, जो आया घुल गया , घुल क्या गया मुझमें मिलकर एक नये संस्कारों को गढ गया ।
वर्णउत्पत्ति ध्वनि, लय, ताल के वैज्ञानिक संगीतमय आधार से होती हैं ।
फिर शब्दों की अपनी अद्वितीयता से मेरा बचपन कई खेल, गीत, कविता, हास्य का रंग सबमें भरता है ।
छोटों व बड़ों का लिहाज करना, कब किस शब्द पर कितना जोर लगाना, मैं बारहखड़ी से बच्चों को सिखाती हूँ ।
बारहखड़ी समझ के बाद,
दूसरों को सम्मान व आशीर्वाद देने का संस्कार खुद आधे होकर नीचे झुकना व ऊपर आकर सिर पर हाथ रखना भी बचपन में सीखा जाती हूँ ।
माता-पिता के बीच के बंधन से, बच्चों को हमारे समाज के सभी बंधनों का महत्व बताती हूँ ।
योग होकर कुछ नया सृजन तो मेरे क्ष,श्र, संयुक्ताक्षर भलीभाँति सीखा जाते हैं ।
विलोम,अनेक के लिए एक, एक के लिए अनेक सब मिलकर अनेकता में एकता का पर्याय बन जाते हैं ।
रस,संधि,समास, तो मजेदार है, ही कहावतें तो अपनी पूरी कहानी कुछ शब्दों के फेर में बयां कर जाते हैं ।
मुहावरे की तो बात ही छोड़ो, गणित, भूगोल, इतिहास, विज्ञान सभी विषयों को पढ़ा जाते हैं ।
अलंकार, दोहा, छप्पय, चौपाई के अपनी मात्रिकता के क्या कहने, बोलने व सुनने के भाव से ही शब्द शक्ति का अहसास दिलाते हैं ।
समानार्थी व पर्यायवाची शब्द भी कहाँ एक दूसरे को प्रतिस्थापित कर पाते हैं, जो जिसका कर्म व धर्म है, वही वहाँ आकर निभाते हैं ।
मेरा अनुभव कहता है यह हिन्दी भाषा, केवल विचार अभिव्यक्ति का माध्यम नही है, जीवन के सार्थकता की सच्ची परिभाषा व जीवन रस के आनन्द की अनुभूति भी करवाती है ।
आप सभी को 'विश्व हिन्दी दिवस' की अनंत शुभकामनाएं
🙏🌹🙏