Vastu Vikalp - Rajiv Kapoor

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12/11/2024
26/04/2020
31/12/2018

सभी मित्रों को नववर्ष की बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएँ ...💐💐💐

नये साल में जो भी आपकी प्लानिंग है आपकी जो भी इच्छाएँ हैं उनको आप आसानी से मूर्त रूप दे सकें
इसके लिए नये वर्ष का स्वागत करते समय वास्तु के कुछ बैसिक नियमों को ध्यान रखा जाये तो आने वाला समय आपके लिए ज़्यादा शुभ और लाभदायक सिध्द हो सकता है

वास्तु के कुछ सरल उपायों द्वारा नववर्ष को बनाये समृद्धिदायक और शुभ :-
१. पुरे घर में साफ सफ़ाई रखें फालतु सामान रद्दी और अटाला हटा दें ,मन में नकारात्मक विचार ना लायें सोच को पोजिटीव रखें

२. पीले ,पिंक ,लाल ओरेंज या गोल्डन कलर के कपडे पहने , सफ़ेद नीले और काले रगं के कपडे नही पहने इन्है ज़्यादा शुभ नही माना जाता।

३. नववर्ष पर घर में कुछ मिठा अवश्य बनायें भगवान को भोग लगाकर प्रशाद सबको खिलायें व बडे लोगों के पैर छूकर आशिर्वाद लेना ना भूलें नववर्ष में सफलता आपको निश्चित रूप से मिलेगी।

४. नव वर्ष में घर में नया वृक्ष लगाना बहुत शुभ माना जाता है। अगर आपके घर में कोई पेड़ या पौधा सुख गया है तो उसकी जगह तुरन्त नया पौधा लाकर लगायें

५. नव वर्ष के पहले दिन सुबह जल्दी उठें उत्तर व पुर्व दिशा के खिड़की दरवाजे खोल दें जिससे शुभ ऊर्जा अधिक मात्रा में घर में प्रवेश कर सके, क्रोध बिल्कूल नही करें संयम और शांति बनाये रखें नव वर्ष में प्रथम दिन का बहुत बड़ा महत्व है इसलिए विशेष ध्यान रखें।

६. नव-वर्ष में आप जो करना चाहते हैं अपने लक्ष्य को स्वयं अपने हाथों से कागज पर लिख कर अपने घर के काम की मेज के ऊपर या सामने पुर्व दिशा की दीवार पर टांग लें साथ ही निश्चित समय सीमा भी बांध लें जिससे लक्ष्य पूरे करने की ऊर्जा मिलती रहे।

७. नव वर्ष को सादगी और पवित्रता से सेलिब्रिट करें
जुआ सट्टा लाटरी धूम्रपान नशा या अन्य किसी बुरी वस्तु से दुर रहें अगर आपके घर में ऐसा कोई सदस्य हो जिसे इस प्रकार की कोई बुरी आदत हो तो तुरन्त अपने घर की पश्चिम और नैऋत्य दिशा के दोष दुर करवायें पुर्व दिशा नीची खुली व स्वच्छ रखें तुरन्त लाभ होगा।

८. घर का मुख्य द्वार,वास्तु का मुख है खिड़कियाँ आँखें हैं व ब्रह्म स्थान पेट है अत: मुख्य द्वार भव्य व आकर्षक होना चाहिए द्वार के दोनों तरफ़ स्वास्तिक के चिन्ह बनायें खिड़कियों में सामान नही रखें व ब्रह्मस्थान पर कोई भारी वस्तु नही रखें नव वर्ष आपके लिए बहुत ही शुभ साबित होगा

९.नववर्ष का कैलेण्डर पुर्व दिशा की दीवार पर ही लगायें भूल कर भी इसे दक्षिण दिशा की दीवार पर नही लगायें नही तो क़दम क़दम पर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

१०.प्रात : उठते समय धरती को प्रणाम करें
सुर्य देव को नमस्कार करें जल पीते समय व भोजन करते समय इन्है प्रशाद मान कर ग्रहण करें
वृक्षों को प्रणाम करें जिस प्रकृति ने जन्म दिया है उसके के प्रति आदर व श्रद्धा भाव रखते हुए अपने घर की प्रत्येक वस्तु के प्रति प्रेम व आदर का भाव रखें इससे आपके घर के वास्तु दोषों का नकारात्मक प्रभाव तुरन्त खत्म हो जायेगा और अतिशीघ्र वास्तु सुधार की संभावना बढ जायेगी।

११. अगर आप नये साल में एक नई कार ख़रीदने की प्लानिंग कर रहें हैं तो आपको घर की उत्तर दिशा व अग्निकोण की वास्तु में कुछ सुधार करने चाहिए
उत्तर दिशा में जल स्रोत जैसे फव्वारा ,झरना ,छोटे कटोरे में पानी भरकर उसमें फूल डालकर रखें या फ़िश एक्वेरियम रख सकते हैं
अग्निकोण में हरे पौधों के गमले व जंगल के चित्र लगाने से भी इन दिशाओं की शुभ ऊर्जा को बढ़ाया जा सकता है।

१२. नव वर्ष में आपके लिए सबसे अच्छा रहेगा परिवार के सदस्यों में परस्पर प्रेम व सौहार्द बना रहें व आपसी सम्बन्धों में सुधार के लिए परिवार के वरिष्ठ लोगों की फ़ोटो घर की पुर्व दिशा में लगायें इससे बडे बुजुर्ग लोगो के प्रति आदर समान की भावना बढ़ेगी
पुरे परिवार के लोगो की एक साथ फ़ोटो लगानी हो तो पश्चिम दिशा में लगायें आपसी सम्बन्ध मजबुत बनेगें

१३. अगर आप अपनी पढ़ाई कैरियर या व्यवसाय को बढ़ाने की सोच रहें हैं तो उत्तर दिशा में धातु का कछुआ या फ़िश एक्वेरियम रखना सही रहेगा
उत्तर दिशा में अगर कोई खिड़की या दरवाज़ा हो तो उसे ज़्यादा से ज़्यादा खोलकर रखें क्यो की इस दिशा से आने वाली शुभ ऊर्जा से आपको सफलता शीघ्र मिलेगी।

१४. नव वर्ष में आपकी ख्याति व प्रतिष्ठा खुब बढ़े और आपको मान सम्मान मिले अगर आपका लक्ष्य यही है तो आप अपने घर के ड्राइंग रूम और कार्यालय की दक्षिण दिशा में लाल रंग का वाल पेपर ,ऊची बिल्डिगों के चित्र ,पहाड़ व पहले में मिले हुए ट्राफ़ी व मेडल को इस दिशा में

20/12/2018

सास बहु के उपाय - सास बहु के बीच अच्छे सम्बन्ध कैसे बने
1. हिन्दू धर्म शास्त्रों में पुत्र का बहुत महत्व है । पुत्र को अपने माता पिता अपने पितरों को नरक से बचाने वाला कहा गया है। हर माता पिता की यह हार्दिक इच्छा होती है कि उनके योग्य और वंश का नाम रौशन करने वाला पुत्र हो जिसके साथ वह अपना जीवन बिता सके।

2. हर व्यक्ति चाहता है कि उसके घर में सुख शान्ति हो लेकिन कई बार देखा जाता है कि परिवार में लड़के की शादी होने पर जब घर में बहु आती है तो परिवार के लोगो का उसके साथ सामंजस्य नहीं बैठ पाता है घर में कलह होनी शुरू हो जाती है । आज कल शादी के बाद अलग रहने का चलन बहुत ही ज्यादा बढ़ गया है इससे माँ बाप जिन्होंने अपने पुत्र को बढ़े ही लाड़ प्यार से पाला होता है की स्थिति बहुत ही विकट हो जाती है । पहले पुत्र को बुढ़ापे का सहारा कहा जाता था अब पुत्र जब पढ़ लिख कर कुछ करने लायक होता है बहुधा देखा जाता है कि शादी के बाद अपनी पूर्णतया अलग ही दुनिया बसा लेता है, या तो अलग हो जाता है या साथ रह कर भी ऐसी स्तिथि हो जाती है कि अलगाव ही बना रहता है । इसके बहुत से कारण हो सकते है ।

3. शादी के बाद एक लड़की अपना सब कुछ छोड़ कर एक नए घर, नए वातावरण में आती है वहाँ पर उसे अपना सबसे नजदीकी अपना पति ही लगता है जिसको वह अपना तन, मन, धन सब कुछ सौप देती है लेकिन उस घर में उसके पति के पहले से ही रिश्ते माता पिता, भाई भाभी, बहन बहनोई होते है जिनके साथ वह लम्बे समय से रह रहा होता है । इन रिश्तों से आपसी सामंजस्य बनाना बहु और परिवार के अन्य सदस्यों के लिए कई बार बहुत ही कठिन हो जाता है ।

4. इसके अतिरिक्त आज कल की संस्कृति, तेजी से बढ़ते टी वी , इन्टरनेट के चलन, बढ़ते भौतिकवाद के कारण भी नव दम्पति अपनी एक अलग ही रूमानी दुनिया का सृजन कर लेते है जिसके कारण भी कई बार टकराव होने लगता है।

5. याद रखिये साथ में रहने से परिवार और नव दम्पति दोनों को ही बहुत लाभ होते है । उस घर की आने वाली संताने सुशिक्षित और सुसंस्कृत होती है, परिवार में आर्थिक , सामाजिक और मानसिक सुरक्षा रहती है , बड़ी से बड़ी मुश्किलें भी आसानी से हल हो जाती है ।

6. परिवार में टकराव , अनबन सबसे ज्यादा सास और बहु के बीच ही होती है , लेकिन इसका सबसे ज्यादा बुरा प्रभाव लड़के पर ही पड़ता है । यहाँ पर हम कुछ उपाय बता रहे है जिससे सास बहु के बीच कलह दूर रह सकती है ।

7. सास व बहू में आपसी संबंध में कटुता होने पर बहू या सास दोनों में कोई भी चांदी का चौकोर टुकड़ा अपने पास रखें, और ईश्वर से अपनी सास / बहु से सम्बन्ध अच्छे रहने की प्रार्थना करे । इससे दोनों के बीच में सम्बन्ध प्रगाढ़ होते है ।

8. सास या बहु में जो भी कोई सम्बन्ध सुधारने को इच्छुक हो वह शुक्ल पक्ष के प्रथम बृहस्पतिवार से माथे पर हल्दी या केसर की बिंदी लगाना शुरू करें।

9. सास-ससुर का कमरा सदैव दक्षिण-पश्चिम दिशा में ही होना चाहिए और बेटे-बहू का कमरा पश्चिमी या दक्षिण दिशा में। अगर बेटे-बहू का रूम दक्षिण-पश्चिम में होता है, तो उनका सास-ससुर से झगडा बना ही रहेगा, घर में आये दिन कलेश रहेगा । परिवार पर अपना नियंत्रण रखने के लिए इस दिशा में घर के बडों को ही रहना चाहिए।.

10. किचन कभी भी घर के ईशान कोण या मध्य में ना हो, यह आपसी संबंधों के लिए बेहद घातक है। घर की रसोई आग्नेय कोण यानी उत्तर-पूर्व में होनीं चाहिए , रसोई गलत जगह में होने पर सास-बहू के आपसी क्लेश, मनमुटाव बना ही रहेगा । अगर रसोई में दोष है तो उसके आग्नेय कोण में एक लाल रंग का बल्ब लगा दें , इसके अतिरिक्त अगर रसोई घर आग्नेय दिशा के स्थान पर किसी और दिशा में बनी हो तो उसकी दक्षिण और आग्नेय दिशा की दीवार को लाल रंग से रंगकर कर उसका दोष दूर किया जा सकता हैं।

11. जिस घर की स्त्रियां / बहु घर के वायव्य अर्थात उत्तर-पश्चिम कोण में शयन / निवास करती है वह अपना अलग से घर बसाने के सपने देखने लगती है। इसलिए इस दिशा में नई दुल्हन को तो बिलकुल भी नहीं रखे अन्यथा उसका परिवार के साथ अलग होना तय है । वास्तु शास्त्र के नियम अनुसार दक्षिण-पश्चिम कोण में सास को सोना चाहिए , उसके बाद बड़ी बहु को पश्चिम दिशा में और उससे छोटी बहु को पूर्व दिशा में शयन करना चाहिए। इससे घर की स्त्रियों में प्रेम बना रहेगा ।

12. सास बहु में कलेश होने पर जो चाहता है कि आपसी रिश्ते सुधरे उसे गले में चांदी की चेन धारण करनी चाहिए और यह भी ध्यान रहे कि कभी किसी से भी कोई सफेद वस्तु न लें।

13. मंगलवार को सूजी का हलवा बनाकर उसको मंदिर के बाहर बैठे गरीबों में स्वयं बाँटना चाहिए ।

14. अगर घर में सास बहु में सदैव कलह रहती हो तो घर के मुख्य द्वार पर बाहर की ओर श्वेतार्क (सफेद आक के गणेश) लगाये इससे घर में सुख-शांति बनी रहेगी।

15. घर में सुख शांति के लिए बहू को चाहिए की सूर्योदय से पहले घर में झाडू लगाकर कचड़े को घर के बाहर फेंके, यह किसी काम वाली बाई से भी करा सकते है ।

16. ग्रहस्थ जीवन में पत्नी को हमेशा पति के बायीं और ही शयन करना चाहिए इससे पति और पत्नी के मध्य प्रेम बना रहता है ।

17. यदि किसी महिला की सास या ससुर उससे नाराज रहता हो तो वह महिला प्रतिदिन जल में गुड़ मिलाकर सूर्यदेव को अध्र्य दे तो उसकी यह समस्या दूर हो जाती है।

18. यदि किसी परिवार में सास बहु में झगड़ा होता रहता हो तो बहु पूर्णिमा की रात में खीर बनाकर चंद्रमा की किरणों में रखे और फिर वह खीर अपनी सास को खिला दे। इससे सास-बहू में बनने लगेगी। ( यह उपाय अगर बहु ना करे तो सास भी कर सकती है । )

19. कहते है जो सास अपनी बहु को अपनी बेटी मानती है , उसे अपनी बेटी की तरह ही लाड़ प्यार करती है उसकी स्वयं की बेटी का भी दाम्पत्य जीवन सदैव सुखमय रहता है। उससे देवता भी प्रसन्न रहते है , उसका और उस घर के बुजुर्गो का स्वास्थ्य ठीक बना रहता है। वह जीवन के अंतिम समय तक भी बिस्तर पर रोगी बनकर नहीं रहते है अर्थात उनका शरीर उनका साथ देता है।

20. इसी तरह जो बहु अपने सास ससुर की अपने माता पिता के तरह सेवा करती है उसके स्वयं के माता पिता को कोई भी कष्ट नहीं उठाना पड़ता है। उनका बुढ़ापा बहुत आसानी से हँस खेल कर कट जाता है ।

21. जो बहु अपने सास ससुर और ससुराल वालो के साथ मिल कर रहती है उनका ध्यान रखती है उनका दिल नहीं दुखाती है, अर्थात घर में प्रेम और हर्ष के बीज को लगाकर उसकी देखभाल करती है उसे पौधे और वृक्ष का रूप देती है उसके पति - बच्चो पर कोई भी आकस्मिक विपदा नहीं आती है, उस परिवार में धन की कोई भी कमी नहीं होती है और उस स्त्री और उसके पति से रोग दूर दूर ही रहते है। उस परिवार के बच्चे भी उस प्रेम और सदभाव के वृक्ष की छावं में बड़े होकर अपने माता पिता के आज्ञाकारी होते है, उनकी सेवा करते है, अंत तक उनके साथ रहते है और उन्हें कोई भी कष्ट नहीं होने देते है।

22. शास्त्रों के अनुसार जब सुहागिन स्त्री का निधन होता है तो उसकी सास और उसकी सास की सास ( वहाँ पर बहु के मायके से कोई भी नहीं होता है ) उसे वैतरणी नदी ( शास्त्रों के अनुसार वैतरणी नदी में बहुत भयानक जीव जंतु होते है जो मृतात्मा के शरीर को नोच नोच कर खाते है ) से पार कराने के लिए आती है और उस समय उस बहु के सारे कर्म वहीँ पर खुल कर सामने आते है। अगर बहु का व्यवहार अच्छा है तो वह अपनी सास और उनकी सास के साथ आसानी से वैतरणी को पार कर लेती है अन्यथा उसे घोर कष्ट मिलते है ।

23. अत: यह स्पष्ट है कि सास और बहु दोनों को ही आपस में मिलकर रहना चाहिए , एक दूसरे की कमियों को नहीं देखना चाहिए , गलतियाँ नहीं निकालनी चाहिए, अगर कोई परेशानी हो भी तो आपसे में मिलकर या यहाँ पर बताये हुए उपायों को चुपचाप करते हुए सम्बन्ध अच्छे बना कर रखना चाहिए ।

24. यदि सास और बहु में पटती नहीं है तो बहु सास को 12 लाल और 12 हरी काँच की चूड़ियाँ प्रसन्न मन से भेंट करें , इस उपाय से सास का मन बदल जायेगा और सास अपनी बहु की सहेली बन जाएगी।

25. अगर बहु को सास की तरफ से समस्या है तो बहु सास से मधुर सम्बन्ध बनाने के लिए एक भोज पत्र पर लाल चन्दन की स्याही से सास का नाम लिखकर उसे शहद में डिबो कर उसे रविवार को छोड़कर किसी भी दिन सूर्यास्त से पहले पीपल के पेड़ के नीचे गाड़ दें और पीपल देवता से अपनी सास से सम्बन्ध अच्छे हो जाने के लिए प्रार्थना करें। इस उपाय से आपकी सास आपकी तरफ प्रेम भाव रखने लगेगी ।

26. यदि किसी घर में सास बहु के बीच में झगड़ा बना रहता है तो बहु को माँ दुर्गा अथवा माँ गौरी को सुनहरी जरी वाली लाल साड़ी चढ़ा कर उसे अपनी सास को भेंट करना चाहिए , इससे दोनों के बीच सम्बन्ध मधुर होंगे । यह उपाय सास भी अपनी बहु से कर सकती है ।

'काम कोई भी हो, कैसा भी हो या कितना भी पुराना हो , यहाँ से ले समाधान ।'
।।सभी देशों में प्रसिद्ध
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05/11/2018

सरल उपाय लक्ष्मी प्राप्ति के लिए

दीपावली में हर व्यक्ति चाहता है की लक्ष्मी उस पर मेहरबान हो लक्ष्मी देवी को प्रसन्न करने और दीपावली पर धन पाने के कुछ अचूक उपाय बतलाये जा रहे है आशा है इनका प्रयोग कर पाठक गण इसका लाभ उठा सकेंगे ये उपाय इस प्रकार है:-

(1)- दीपावली पूजन हेतु अभिमंत्रित श्री यंत्र,कुबेर यंत्र,लक्ष्मी चरण पादुका,गोमती चक्र,कोड़िया, कमलगट्टे की माला आदि पूजा घर में स्थापित करें इससे महालक्ष्मी की कृपा सदा आपके ऊपर बनी रहेगी l कहते हैं यह चीजें जहां भी होती है वहां लक्ष्मी जी को आना ही पड़ता हैl

(2)- दीपावली के दिन अशोक वृक्ष की जड़ का पूजन करने से घर में धन-संपत्ति की वृद्धि होती है।

(3)- धनतेरस के दिन 2 पीतल के कछुए ले l जिनका पेट ऊपर से खुलता हो l एक में चने की दाल भरें एक में चावल भरें l दोनों को संभाल कर अलमारी में रखे इस उपाय से शीघ्र कर्जा उतरता हैं और घर में धन धान्य की कमी नहीं रहती l

(4)- धनतेरस के दिन हल्दी और चावल पीसकर उसके घोल से घर के मुख्य दरवाजे पर ऊँ बनाने से घर में लक्ष्मीजी (धन) का आगमन बना ही रहता है।

(5)- नरक चतुर्दशी छोटी दीपावली को प्रात:काल अगर हाथी मिल जाए तो उसे गन्ना या मीठा जरूर खिलाने से अनिष्ठों, जटिल मुसीबतों से मुक्ति मिलती है। अनहोनी से सदैव रक्षा होती है।

(6)- दीपावली के पूजन के बाद शंख और डमरू बजाने से घर की दरिद्रता दूर होती है और लक्ष्मीजी का आगमन बना रहता है।

(7)- दीपावली के दिन पति-पत्नी सुबह लक्ष्मी-नारायण विष्णु मंदिर जाएं और एक साथ लक्ष्मी-नारायणजी को वस्त्र अर्पण करने से कभी भी धन की कमी नहीं रहेगी। संतान दिन दूनी, रात चौगुनी तरक्की करेगी।

(8)- दीपावली के दिन इमली के पेड़ की छोटी टहनी लाकर अपनी तिजेरी या धन रखने के स्थान पर रखने से धन में दिनोंदिन वृद्धि होती है।

(9)- दीपावली के दिन काली हल्दी को सिंदूर और धूप दीप से पूजन करने के बाद 2 चाँदी के सिक्कों के साथ लाल कपड़े में लपेटकर धन स्थान पर रखने से आर्थिक समस्याएं कभी नहीं रहतीं।

(10)- दीपावली के अगले दिन गाय के गोबर का दीपक बनाकर उसमें पुराने गुड़ की एक डली और मीठा तेल डालकर दीपक जलाकर घर के मुख्य द्वार के बीचोंबीच रख दें। इससे घर में सुख-समृद्धि दिनों दिन बढ़ती रहेगी।

(12)- दीपावली के दिन नया झाड़ू खरीदकर लाएं। पूजा से पहले उससे पूजा स्थान की सफाई कर उसे छुपाकर एक तरफ रख दें। अगले दिन से उसका उपयोग करें, इससे दरिद्रता का नाश होगा और लक्ष्मीजी का आगमन बना रहेगा।

(13)- दीपावली के दिन एक चाँदी की बाँसुरी राधा-कृष्णजी के मंदिर में चढ़ाने के बाद 43 दिन लगातार भगवान श्रीकृष्णजी के कोई भी मंत्र का जाप करें। गाय को चारा खिलाएं और संतान प्राप्ति के लिए प्रार्थना करें। निश्चय ही भगवान श्रीकृष्णजी की कृपा से आपको संतान प्राप्ति अवश्य ही होगी।

(14)- दीपावली पर गणेश-लक्ष्मीजी की मूर्ति खरीदते समय यह अवश्य ही देखें कि गणेशजी की सूंड़ गणेशजी की दांयी भुजा की ओर जरूर मुड़ी हो। इनकी पूजा दीपावली में करने से घर में रिद्धि-सिद्धि धनसंपदा में बढ़ोत्तरी, संतान की प्रतिष्ठा दिनोंदिन बढ़ती है।

(15)- भाईदूज के एक दिन एक मुट्ठी साबुत बासमती चावल बहते हुए पानी में महालक्ष्मीजी का स्मरण करते हुए छोड़ने से धन-धान्य में दिन-प्रतिदिन वृद्धि होती है।

(16)- आंवले के फल में, गाय के गोबर में, शंख में, कमल में, सफेद वस्त्रों में लक्ष्मीजी का वास होता है इनका हमेशा ही प्रयोग करें। आंवला घर में या गल्ले में अवश्य ही रखें।

(17)- दीपावली के दिन हनुमान मंदिर में लाल पताका चढ़ाने से घर-परिवार की उन्नति के साथ ख्याति धन संपदा बढ़ाती है।

(18)- नरक चतुर्दशी की संध्या के समय घर की पश्चिम दिशा में खुले स्थान में या घर के पश्चिम में 14 दीपक पूर्वजों के नाम से जलाएं, इससे पितृ दोषों का नाश होता है तथा पितरों के आशीर्वाद से धन-समृद्धि में बढ़ोत्तरी होती है।

05/11/2018

Wishing you joy and prosperity this Diwali

22/09/2018

हल्दी के औषधीय महत्व तो जानते हैं अब जानिए 11 धार्मिक महत्व

हम सबकी रसोई में सभी मसाले औषधीय महत्व रखते हैं उनमें से भी हल्दी का एक अलग स्थान है वह जितनी सेहत के लिए लाभप्रद है उतना ही धार्मिक कार्यों में भी उसका महत्व है। यहां हम हल्दी के धार्मिक महत्व पर चर्चा करेंगे।

हल्दी विशेष प्रकार की औषधि है, जिसमें दैवीय गुण मौजूद होते हैं। विवाह में वर-वधु को हल्दी चढ़ाने के पीछे भी यही महत्व है कि उन्हें बाहरी बाधाओं से बचाया जाए साथ ही सेहत और सुंदरता के लाभ भी उन्हें मिले।

वास्तव में हल्दी का संबंध बृहस्पति ग्रह से है।

1. पूजा के समय कलाई में या गर्दन पर हल्दी का छोटा सा टीका लगाने पर बृहस्पति मजबूत होता है और वाणी में मजबूती आती है।

2.
हल्दी का दान करना शुभ माना जाता है। इससे कई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का अंत होता है। गुरु ग्रह में अनुकूलता आती है।

3. पूजा के बाद माथे पर हल्दी का तिलक लगाने से विवाह संबंधी कार्यों में सफलता मिलती है।

4. घर की बाउंड्री की दीवार पर अगर हल्दी की रेखा बना दी जाए तो घर में नकारात्मक शक्तियों का प्रवेश नहीं होता।
5. नहाते समय अगर नहाने के पानी में चुटकी भर हल्दी डालकर नहाया जाए तो यह शारीरिक और मानसिक शुद्धता देती है। करियर में सफलता के लिए भी यह प्रयोग अचूक है।

6. हल्दी की गांठ पर मौली लपेट कर सिरहाने रखा जाए तो बुरे सपने नहीं आते। बाहरी हवा से भी बचाव होता है।

7. प्रति गुरुवार श्री गणेश को मात्र एक चुटकी हल्दी चढ़ाई जाए तो विवाह संबंधी रुकावटें दूर होती हैं।
8. भगवान विष्णु और लक्ष्मी की प्रतिमा के पीछे हल्दी की पुड़िया छुपा कर रखने से अति शीघ्र विवाह के योग बनते हैं।

9. हल्दी के प्रयोग से जीवन में संपन्नता आती है। यह मानस की नकारात्मकता दूर करती है। इसीलिए इसे हवन में भी इस्तेमाल किया जाता है।

10. सूर्य को हल्दी मिला जल चढ़ाने से कन्या की शादी मनचाहे वर से होती है।

11. हल्दी की माला से कोई भी मंत्र जप किया जाए तो विलक्षण बुद्धि के स्वामी हो सकते हैं

22/09/2018

*श्राद्ध पक्ष*
नन्द किशोर कुलगुरु कौशल गौत्र पितृ दोष से मुक्ति पाने का सबसे सही समय होता है पितृपक्ष। इस दौरान किए गए श्राद्ध कर्म और दान-तर्पण से पितृों को तृप्ति मिलती है। वे खुश होकर अपने वंशजों को सुखी और संपन्न जीवन का आशीर्वाद देते हैं। पितृपक्ष में श्राद्ध कर्म करने की परंपरा हमारी सांस्कृतिक विरासत है। इस साल श्राद्ध 25 सितंबर से शुरू हो रहे हैं।
श्राद्ध करने के अपने नियम होते हैं। श्राद्ध पक्ष हिंदी कैलेंडर के अश्विन महीने के कृष्ण पक्ष में आता है। जिस तिथि में जिस परिजन की मृत्यु हुई हो, उसी तिथि में उनका श्राद्ध कर्म किया जाता है। श्राद्ध कर्म पूर्ण विश्वास, श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाना चाहिए। पितृों तक केवल हमारा दान ही नहीं बल्कि हमारे भाव भी पहुंचते हैं।
जिन लोगों की मृत्यु के दिन की सही-सही जानकारी न हो, उनका श्राद्ध अमावस्या तिथि को करना चाहिए। सांप काटने से मृत्यु और बीमारी में या अकाल मृत्यु होने पर भी अमावस्या तिथि को श्राद्ध किया जाता है। जिनकी आग से मृत्यु हुई हो या जिनका अंतिम संस्कार न किया जा सका हो, उनका श्राद्ध भी अमावस्या को करते हैं।
जिसने आत्महत्या की हो, जिसकी हत्या हुई हो, ऐसे लोगों का श्राद्ध चतुर्थी तिथि को किया जाता है। जिन लोगों की चतुर्थी तिथि में मृत्यु हुई है उनका तर्पण भी इसी तिथि को किए जाने का विधान है।
शास्त्रों के अनुसार, अपने पितृगणों का श्राद्ध कर्म करने के लिए एक साल में 96 अवसर मिलते हैं। इनमें साल के बारह महीनों की 12 अमावस्या तिथि को श्राद्ध किया जा सकता है। साल की 14 मन्वादि तिथियां, 12 व्यतिपात योग, 12 संक्रांति, 12 वैधृति योग और 15 महालय शामिल हैं। इनमें पितृपक्ष का श्राद्ध कर्म उत्तम माना गया है
: पूर्णिमा से अमावस्या के ये 15 दिन पितरों को कहे जाते हैं। इन 15 दिनों में पितरों को याद किया जाता है और उनका तर्पण किया जाता है। इस साल 24 से 8 अक्टूबर तक हैं। पितरों को खुश रहने के लिए श्राद्ध के दिनों में विशेष कार्य करना चाहिए वही इस दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है।

1. श्राद्ध करने के लिए ब्रह्मवैवर्त पुराण जैसे शास्त्रों में बताया गया है कि दिवंगत पितरों के परिवार में या तो ज्येष्ठ पुत्र या कनिष्ठ पुत्र और अगर पुत्र न हो तो नाती, भतीजा, भांजा या शिष्य ही तिलांजलि और पिंडदान देने के पात्र होते हैं।
पितरों के निमित्त सारी क्रियाएं गले में दाये कंधे मे जनेउ डाल कर और दक्षिण की ओर मुख करके की जाती है।

3. कई ऐसे पितर भी होते है जिनके पुत्र संतान नहीं होती है या फिर जो संतान हीन होते हैं। ऐसे पितरों के प्रति आदर पूर्वक अगर उनके भाई भतीजे, भांजे या अन्य चाचा ताउ के परिवार के पुरूष सदस्य पितृपक्ष में श्रद्धापूर्वक व्रत रखकर पिंडदान, अन्नदान और वस्त्रदान करके ब्राह्मणों से विधिपूर्वक श्राद्ध कराते है तो पितर की आत्मा को मोक्ष मिलता है।

4. श्राद्ध के दिन लहसुन, प्याज रहित सात्विक भोजन ही घर की रसोई में बनना चाहिए। जिसमें उड़द की दाल, बडे, चावल, दूध, घी से बने पकवान, खीर, मौसमी सब्जी जैसे तोरई, लौकी, सीतफल, भिण्डी कच्चे केले की सब्जी ही भोजन में मान्य है। आलू, मूली, बैंगन, अरबी तथा जमीन के नीचे पैदा होने वाली सब्जियां पितरों को नहीं चढ़ती है।

5. श्राद्ध का समय हमेशा जब सूर्य की छाया पैरो पर पड़ने लग जाए यानी दोपहर के बाद ही शास्त्र सम्मत है। सुबह-सुबह अथवा 12 बजे से पहले किया गया श्राद्ध पितरों तक नहीं पहुंचता है।
24 सितंबर 2018 को पूर्णिमा श्राद्ध
25 सितंबर 2018 प्रतिपदा श्राद्ध
26 सितंबर 2018 द्वितीय श्राद्ध
27 सितंबर 2018 तृतिया श्राद्ध
28 सितंबर 2018 चतुर्थी श्राद्ध
29 सितंबर 2018 पंचमी श्राद्ध
30 सितंबर 2018 षष्ठी श्राद्ध
1 अक्टूबर 2018 सप्तमी श्राद्ध
2 अक्टूबर 2018 अष्टमी श्राद्ध
3 अक्टूबर 2018 नवमी श्राद्ध
4 अक्टूबर 2018 दशमी श्राद्ध
5 अक्टूबर 2018 एकादशी श्राद्ध
6 अक्टूबर 2018 द्वादशी श्राद्ध
7 अक्टूबर 2018 त्रयोदशी श्राद्ध, चतुर्दशी श्राद्ध
8 अक्टूबर 2018 सर्वपितृ अमावस्या

20/09/2018

ज्योतिष व Science के अनुसार नौ आदते आपके जीवन में अवशय होनी चाईए – पढ़े और सभी को बताए

१)::
अगर आपको कहीं पर भी थूकने की आदत है तो यह निश्चित है
कि आपको यश, सम्मान अगर मुश्किल से मिल भी जाता है तो कभी टिकेगा ही नहीं . wash basin में ही यह काम कर आया करें ! यश,मान-सम्मान में अभिवृध्दि होगी।

२)::
जिन लोगों को अपनी जूठी थाली या बर्तन वहीं उसी जगह पर छोड़ने की आदत होती है उनको सफलता कभी भी स्थायी रूप से नहीं मिलती.!
बहुत मेहनत करनी पड़ती है और ऐसे लोग अच्छा नाम नहीं कमा पाते.! अगर आप अपने जूठे बर्तनों को उठाकर उनकी सही जगह पर रख आते हैं तो चन्द्रमा और शनि का आप सम्मान करते हैं ! इससे मानसिक शांति बढ़ कर अड़चनें दूर होती हैं।

३)::
जब भी हमारे घर पर कोई भी बाहर से आये, चाहे मेहमान हो या कोई काम करने वाला, उसे स्वच्छ पानी ज़रुर पिलाएं !
ऐसा करने से हम राहु का सम्मान करते हैं.!
जो लोग बाहर से आने वाले लोगों को हमेशा स्वच्छ पानी पिलाते हैं उनके घर में कभी भी राहु का दुष्प्रभाव नहीं पड़ता.! अचानक आ पड़ने वाले कष्ट-संकट नहीं आते।

४)::
घर के पौधे आपके अपने परिवार के सदस्यों जैसे ही होते हैं, उन्हें भी प्यार और थोड़ी देखभाल की जरुरत होती है.!
जिस घर में सुबह-शाम पौधों को पानी दिया जाता है तो हम बुध, सूर्य और चन्द्रमा का सम्मान करते हुए परेशानियों का डटकर सामना कर पाने का सामर्थ्य आ पाता है ! परेशानियां दूर होकर सुकून आता है।
जो लोग नियमित रूप से पौधों को पानी देते हैं, उन लोगों को depression, anxiety जैसी परेशानियाँ नहीं पकड़ पातीं.!

५)::
जो लोग बाहर से आकर अपने चप्पल, जूते, मोज़े इधर-उधर फैंक देते हैं, उन्हें उनके शत्रु बड़ा परेशान करते हैं.!
इससे बचने के लिए अपने चप्पल-जूते करीने से लगाकर रखें, आपकी प्रतिष्ठा बनी रहेगी।

६)::
उन लोगों का राहु और शनि खराब होगा, जो लोग जब भी अपना बिस्तर छोड़ेंगे तो उनका बिस्तर हमेशा फैला हुआ होगा, सिलवटें ज्यादा होंगी, चादर कहीं, तकिया कहीं, कम्बल कहीं ?
उसपर ऐसे लोग अपने पुराने पहने हुए कपडे़ तक फैला कर रखते हैं ! ऐसे लोगों की पूरी दिनचर्या कभी भी व्यवस्थित नहीं रहती, जिसकी वजह से वे खुद भी परेशान रहते हैं और दूसरों को भी परेशान करते हैं.!
इससे बचने के लिए उठते ही स्वयं अपना बिस्तर समेट दें.! जीवन आश्चर्यजनक रूप से सुंदर होता चला जायेगा।

७)::
पैरों की सफाई पर हम लोगों को हर वक्त ख़ास ध्यान देना चाहिए, जो कि हम में से बहुत सारे लोग भूल जाते हैं ! नहाते समय अपने पैरों को अच्छी तरह से धोयें, कभी भी बाहर से आयें तो पांच मिनट रुक कर मुँह और पैर धोयें.!
आप खुद यह पाएंगे कि आपका चिड़चिड़ापन कम होगा, दिमाग की शक्ति बढे़गी और क्रोध
धीरे-धीरे कम होने लगेगा.! आनंद बढ़ेगा।

८)::
रोज़ खाली हाथ घर लौटने पर धीरे-धीरे उस घर से लक्ष्मी चली जाती है और उस घर के सदस्यों में नकारात्मक या निराशा के भाव आने लगते हैं.!
इसके विपरीत घर लौटते समय कुछ न कुछ वस्तु लेकर आएं तो उससे घर में बरकत बनी रहती है.!
उस घर में लक्ष्मी का वास होता जाता है.! हर रोज घर में कुछ न कुछ लेकर आना वृद्धि का सूचक माना गया है.!
ऐसे घर में सुख, समृद्धि और धन हमेशा बढ़ता जाता है और घर में रहने वाले सदस्यों की भी तरक्की होती है.!

९)..
जूठन बिल्कुल न छोड़ें । ठान लें । एकदम तय कर लें। पैसों की कभी कमी नहीं होगी।
अन्यथा नौ के नौ गृहों के खराब होने का खतरा सदैव मंडराता रहेगा। कभी कुछ कभी कुछ । करने के काम पड़े रह जायेंगे और समय व पैसा कहां जायेगा पता ही नहीं चलेगा।

अच्छी बातें बाँटने से दोगुनी तो होती ही हैं
– अच्छी बातों का महत्त्व समझने वालों में आपकी इज़्जत भी बढ़ेगी.

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