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11/08/2026

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Batiye  yea ki  is bank ka naam hai...........
07/07/2026

Batiye yea ki is bank ka naam hai...........

20/06/2026

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जब एक कश्मीरी पंडित जागता है, तो दशकों का ब्रेनवॉश भी ताश के पत्तों की तरह ढह जाता है। आदित्य धर जैसे विजनरी ने सिनेमा क...
22/03/2026

जब एक कश्मीरी पंडित जागता है, तो दशकों का ब्रेनवॉश भी ताश के पत्तों की तरह ढह जाता है।

आदित्य धर जैसे विजनरी ने सिनेमा के जरिए जो राष्ट्रवाद की अलख जगाई है, उस पर हर भारतीय को गर्व है।

उर्दूवुड का झूठा नैरेटिव अब खत्म!

18/03/2026

कविता: “मेरे देश की इंसानियत को क्या हो गया?”मेरे हिंदुस्तान के लोगो…आज मैं तुमसे सवाल करने आया हूँ,दिल में आग लेकर…आँखो...
10/03/2026

कविता: “मेरे देश की इंसानियत को क्या हो गया?”
मेरे हिंदुस्तान के लोगो…
आज मैं तुमसे सवाल करने आया हूँ,
दिल में आग लेकर…
आँखों में आँसू लेकर…
बताओ —
मेरे देश की इंसानियत को क्या हो गया?
हर गली में शोर है,
हर चौक पर नारे हैं,
पर इन नारों में
अब भाईचारे की आवाज़ नहीं…
सिर्फ़ नफरत की आग है।
कोई चिल्लाता है — मैं हिंदू हूँ!
कोई चिल्लाता है — मैं मुसलमान हूँ!
पर कोई ये क्यों नहीं कहता —
मैं इंसान हूँ… और सामने वाला मेरा भाई है।
क्यों इतनी नफरत भर दी गई दिलों में?
किसने बोया ये ज़हर?
किसने सिखाया हमें
कि अपने ही देश के लोगों को
दुश्मन समझो?
कहाँ बिकती है ये नफरत?
कौन सा बाज़ार है ये
जहाँ बिना पैसे के हर दिल में नफरत बाँट दी जाती है?
मेरा दिल रोता है…
मेरा जिगर ज़ख्मी है…
जब मैं देखता हूँ —
होली के रंगों में खून बहता है,
और ईद के चाँद पर शक की परछाई पड़ जाती है।
अरे मेरे देशवासियो…
तुम भूल गए क्या?
कि यही धरती
हम सबकी माँ है…
यही हवा
हम सबकी साँस है…
और यही मिट्टी
हम सबकी पहचान है।
मैं भी भारत माँ का बेटा हूँ…
इस मिट्टी का कर्ज़दार हूँ…
जब मैं देखता हूँ
कि लोग धर्म के नाम पर एक-दूसरे का खून बहा रहे हैं,
तो मेरा सीना चीर जाता है।
क्या यही वो देश है
जिसने दुनिया को
अहिंसा का रास्ता दिखाया था?
क्या यही वो देश है
जहाँ कबीर ने कहा था —
“मस्जिद ढाए, मंदिर ढाए, ढाए जो कुछ होए
पर किसी का दिल न दुखाओ, इसमें खुदा बसोए।”
पर आज…
दिल ही सबसे सस्ता हो गया है।
लोग मंदिर-मस्जिद बचाने निकले हैं,
पर इंसान को बचाना भूल गए हैं।
सुनो मेरे देश के लोगो…
सच बहुत छोटा है,
पर बहुत गहरा है —
न हिंदू का खून अलग है,
न मुसलमान का खून अलग है।
जब जख्म लगता है
तो दोनों का खून लाल ही निकलता है।
फिर ये नफरत किसकी है?
ये आग किसकी है?
ये दीवारें किसने खड़ी की हैं
हमारे बीच?
याद रखो…
अगर आज भी हम नहीं जागे
तो आने वाली पीढ़ियाँ पूछेंगी —
“क्या सच में इस धरती पर
कभी इंसान भी रहते थे?”
और इतिहास रोते हुए लिखेगा —
कि इंसान बहुत थे…
पर इंसानियत मर चुकी थी।
आओ…
आज एक कसम लें —
न किसी का मंदिर जलेगा,
न किसी की मस्जिद टूटेगी,
न किसी माँ की गोद सूनी होगी,
न किसी बच्चे का बचपन छिनेगा।
हम फिर से
इस मिट्टी की कसम खाएँगे —
न हिंदू बनकर जियेंगे,
न मुसलमान बनकर मरेंगे,
हम सिर्फ़ इंसान बनकर
इस देश को जन्नत बनाएँगे।
क्योंकि अंत में…
न नाम रहेगा,
न मज़हब रहेगा…
सिर्फ़ यही पूछा जाएगा —
तुम इंसान थे या नहीं?
और उस दिन
अगर हम इंसान निकले
तो ये धरती गर्व से कहेगी —
“ये मेरे बच्चे हैं…
इन्होंने नफरत को हराया है।”
✊
आओ… इंसान बनें।

Congratulations Team India To Europe India 💐💐💐💐🎆🎆🎆🎆💐💐
08/03/2026

Congratulations Team India To Europe
India 💐💐💐💐🎆🎆🎆🎆💐💐

02/03/2026
01/03/2026

अमेरिका-इजरायल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत हो चुकी है। साथ में उनकी बेटी, दामाद, नाती की भी मौत हुई है। ईरान की सेना इसके बाद भी लड़ने का दम दिखा रही है, लेकिन अब बहुत लड़ाई बची नहीं है। यह तय मानिये कि ईरान में सत्ता बदल रही है और अमेरिका-इजरायल के हितों का ध्यान रखने वाली नयी सरकार बनने जा रही है। जैसा सीरिया में हुआ, जैसा वेनेजुएला में हुआ, वैसा ही ईरान में होना तय है।

अमेरिका-इजरायल ने 24 घंटे भी नहीं लगने दिये और ईरान की सत्ता का शीर्ष समाप्त कर दिया। मतलब अमेरिका-इजरायल की तैयारी जबरदस्त थी। बहुत होमवर्क किया गया होगा और उसे अच्छे से जमीन पर उतारा गया होगा। लोग बता रहे हैं कि मोसाद ने ईरान में चलने वाले एक ऐप को हैक कर लिया, जिस ऐप पर लोग धार्मिक कार्यों के लिए निर्भर करते थे। उसे हैक कर लोगों को भ्रमित करने वाले नोटिफिकेशन भेजे गये। इससे पहले एक रिपोर्ट आयी थी, उसमें बताया गया था कि ईरान ने अपनी सरकार-सेना में मोसाद की घुसपैठ पकड़ने के लिए एक एलीट यूनिट बनायी। बाद में मालूम हुआ कि उस एलीट यूनिट में भी 20 से ऊपर लोग मोसाद के लिए काम कर रहे थे। सोच सकते हैं मोसाद ने कहाँ तक घुसपैठ की होगी! ईरान की मौजूदा व्यवस्था में गहरी पैठ के बिना इतनी जल्दी खामेनेई का पतन संभव नहीं था। मोसाद ने दुनिया भर की खुफिया एजेंसियों के लिए एक नया चैप्टर जोड़ दिया है। अब बैठकर सब पढ़ें इसे।

दुनिया में दो तरह के लीडर होते हैं। एक लीडर, जो अपने लोगों के बेहतर भविष्य के लिए समझौते करते हुए चलता है। संतुलन बनाते हुए अपने देश और अपने लोगों को मजबूत बनाता है। सबसे बढ़िया उदाहरण- देंग श्याओपिंग। इस भाई ने कन्फ्यूसियस के सिद्धांतों का पालन किया। चुप मारकर चीन को आर्थिक ताकत बनाया। बहुत समझौते किये इसके लिए। उसी का परिणाम है आज जिनपिंग को ट्रंप के सामने निहुरना नहीं पड़ता है। दूसरा लीडर स्वाभिमान से संचालित होता है। वह मिट जायेगा, लेकिन स्वाभिमान नहीं बेचेगा। ऐसे लीडर्स का अंत सुखद नहीं होता, लेकिन अंत के बाद भी सम्मान मिलता है। खामेनेई इसके ताजा उदाहरण। खामेनेई की उम्र 86 साल थी। सोच सकते हैं 86 साल का एक बुजुर्ग, सामने तय मौत देखकर भी लड़ने के जज्बे के साथ खड़ा था। इसके लिए इतिहास इस बुजुर्ग को सदा सम्मान ही देगा।

एक और बड़ी सीख है कि कोई भी सत्ता हो, उसे इस हद तक निरंकुश नहीं होना चाहिए, कि अपने लोगों को ही बल से चलाना अपरिहार्य हो जाये। सत्ता के लिए शक्ति का उपयोग अनिवार्य है, लेकिन उसकी एक हद होनी चाहिए। वर्ना आप जिनके लिए लड़ने-मरने को तैयार होंगे, वही ऐन मौके पर दुश्मन से मिल जायेंगे।

इस घटनाक्रम ने दो स्पष्ट निष्कर्ष भी निकाले हैं। चीन की आर्थिक ताकत असंदिग्ध है, लेकिन उसके हथियारों की ताकत शुद्ध संदिग्ध है। पहले दुनिया ने ऑपरेशन सिंदूर में चीनी हथियारों का हश्र देखा। वेनेजुएला में अमेरिकी सेना आयी और राष्ट्रपति को उठाकर ले गयी। चीनी एयर डिफेंस धरा रह गया। और अब ईरान में। अमेरिका-इजरायल आया, सुप्रीम लीडर को सपरिवार साफ कर गया, और चीनी एयर डिफेंस देखता रह गया। जो देश चीनी हथियारों के दम पर शेर बन रहे हैं, अब सभी आराम से बैठकर सोच-विचार करेंगे। खुद चीन भी। दूसरा निष्कर्ष है:- फिलहाल चचा की चौधर बरकरार है और रहने वाली है। पुतिन भी ढीले पढ़ रहे हैं। उधर से खबर आ रही है कि रूस अब अमेरिका की वह शर्त मानने को तैयार हो गया है, जिसमें यूक्रेन को सुरक्षा की गारंटी देने की बात है। मतलब जो शांति समझौता होगा, उसमें यूक्रेन को अमेरिका से सुरक्षा की गारंटी मिलेगी। रूस इस शर्त को सिरे से खारिज करते आया है, लेकिन अब स्वीकार करने के लिए तैयार हो रहा है।

भारत के लिए भी इसमें लेसन हैं। कल दुनिया ने कई अरब देशों में ईरानी ड्रोन और मिसाइलों को गिरते देखा। बहुतों को हवा में ही मार गिराया गया, लेकिन कई सारे निशाने तक पहुँचे। जबकि उन सभी देशों के पास अमेरिकी एयर डिफेंस है। ऑपरेशन सिंदूर में भारत पर पाकिस्तान ने सैकड़ों ड्रोन-मिसाइल छोड़े। एक भी ड्रोन-मिसाइल निशाने पर नहीं लगा। यह हमारी सेना की तैयारी और उनके कौशल का प्रमाण है। हमारे पास कोई दैवीय तकनीक या हथियार नहीं है, लेकिन हमारे पास सेना बहुत अनुशासित और काबिल है। भारत के लिए एक और लेसन यह है कि पुरानी पीढ़ी के शानदार योगदानों को याद करें, उनका धन्यवाद कहें। इंदिरा गाँधी से अटल बिहारी वाजपेयी तक और भाभा से कलाम तक, हमारे बुजुर्गों ने हमें परमाणु शक्ति संपन्न नहीं बनाया होता, तो हमारी स्थिति भी ईरान-वेनेजुएला जैसी ही होती।

🚨 ब्रेकिंग न्यूज: उस्मान तारीख पर ICC का बड़ा एक्शन! क्या बैन हो गया पाकिस्तानी स्पिनर? 🔥 चकिंग विवाद में फंस गया तारीख!...
12/02/2026

🚨 ब्रेकिंग न्यूज: उस्मान तारीख पर ICC का बड़ा एक्शन! क्या बैन हो गया पाकिस्तानी स्पिनर? 🔥 चकिंग विवाद में फंस गया तारीख! 😱
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