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16/02/2021

बसंत पंचमी आपके लिए शुभ हो
माँ सरस्वती जी की कृपा हम सभी पर बनी रहे 🙏

27/11/2020

•आचार्य रामचंद्र शुक्ल•

आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने 1929 ई. में 'हिंदी साहित्य का इतिहास' नामक ग्रंथ लिखा|

यह ग्रंथ पहले 'हिंदी शब्द सागर' की भूमिका के रूप में लिखा गया परन्तु बाद में इसे स्वतंत्र पुस्तक का रूप दे दिया गया|

इस ग्रंथ को हिंदी साहित्य के इतिहास का प्रस्थान बिंदु कहा गया है|

27/11/2020

•मिश्र बंधु•

मिश्र बंधु द्वारा रचित 'मिश्र बंधु विनोद' ग्रंथ हिंदी साहित्य के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है

•इसे गणेश बिहारी मिश्र,शुकदेव मिश्र तथा श्याम बिहारी मिश्र इन तीनों भाइयों ने लिखा था|

•मिश्र बंधु विनोद एक विशाल ग्रंथ है जिसमें 5000 कवियों के संबंध में विवरण दिया गया है|

•इस ग्रंथ में पहली बार काल विभाजन का समुचित प्रयास किया गया है|

27/11/2020

•सर जॉर्ज ग्रियर्सन•

~ 'द मॉडर्न वर्नाक्यूलर लिटरेचर ऑफ हिंदुस्तान' जॉर्ज ग्रियर्सन की कृति है

इसमें लगभग 952 कवियों की जीवनी तथा काव्य परिचय दिया गया है|

०जॉर्ज ग्रियर्सन ने भक्ति काल को हिंदी साहित्य का स्वर्ण युग माना है०

26/11/2020

•शिव सिंह सेंगर•

इतिहास लेखन परंपरा से जुड़ी दूसरी रचना 'शिवसिंह सरोज' है|

इसकी रचना शिव सिंह सेंगर ने 1883 ई. में की|

'शिव सिंह सरोज' में लगभग 1000 छोटे बड़े कवियों की रचनाएं व जन्मकाल दिया गया है|

26/11/2020

•गार्सा द तासी•

हिंदी साहित्य इतिहास लेखन की परंपरा की शुरुआत गार्सा द तासी ने की जो कि एक फ्रेंच विद्वान थे|

उनके द्वारा रचित ग्रन्थ 'इस्त्वार द ला लितरेत्यूर ऐन्दुई ऐन्दुस्तानी' है|

यह दो भागों में है -प्रथम भाग का प्रकाशन 1839 ई. व द्वितीय भाग का प्रकाशन 1847 ई. में हुआ|
इस ग्रंथ में निम्न बिंदुओं को समावेशित किया गया है-

•वर्णानुक्रम पद्धति का प्रयोग

•प्रथम भाग में कवियों का परिचय तथा दूसरे भाग में उनकी रचनाओं के उदाहरण फ्रैंच भाषा में अनुवादित किये हुए

•हिन्दी व उर्दू कवि एक साथ रखे हैं

• इसमें 783 कवियों/लेखकों का वर्णन है जिसमें से केवल 72 कवियों का संबंध हिन्दी से है

• 100 पृष्ठों की विस्तृत भूमिका

यद्यपि इस ग्रन्थ में अनेक त्रुटियाँ हैं; जैसे काल विभाजन का कोई प्रयास ना करना,कवियों का कालक्रम अनुसार वर्गीकरण ना करना,तथा युगीन परिस्थितियों की विवेचना ना करना,
तब भी इस ग्रंथ को हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन की परंपरा में प्रथम ग्रंथ होने का गौरव प्राप्त है

26/11/2020

हिंदी साहित्य के प्रमुख इतिहासग्रंथकार ~ (क्रमानुसार)

•गार्सा द तासी

•शिव सिंह सेंगर

•सर जॉर्ज ग्रियर्सन

•मिश्र बंधु

•आचार्य रामचंद्र शुक्ल

•डॉ० रामकुमार वर्मा

•हजारी प्रसाद द्विवेदी

•गणपतिचंद्र गुप्त

26/11/2020

साहित्य इतिहासकारों द्वारा दिए गए विभिन्न नामों के पश्चात जो सर्वमान्य नाम है वे निम्नलिखित हैं-

०आदिकाल (1000 ई. से 1350 ई. तक)

०भक्ति काल (1350 ई. से 1650 ई. तक)

०रीतिकाल (1650 ई. से 1850 ई.तक)

०आधुनिक काल (1850 ई. से अब तक )

उपर्युक्त नाम ही अब सर्वस्वीकृत हैं|इतिहास ग्रंथों में इन्हीं का प्रयोग होता है|

26/11/2020

आधुनिक काल के लिए विभिन्न साहित्य इतिहासकारों द्वारा सुझाए गए नाम निम्न हैं-

०वर्तमान काल -मिश्र बंधु

०गद्य काल -आचार्य रामचंद्र शुक्ल

०आधुनिक काल -हजारी प्रसाद द्विवेदी

26/11/2020

रीतिकाल के लिए साहित्य इतिहासकारों द्वारा सुझाए नाम निम्न है -

०अलंकृत काल -मिश्र बंधु

०रीतिकाल -आचार्य रामचंद्र शुक्ल,डॉ०रामकुमार वर्मा,हजारी प्रसाद द्विवेदी

०श्रृंगार काल -विश्वनाथ त्रिपाठी

० कलाकाल -डॉ० भागीरथ मिश्र

26/11/2020

भक्ति काल के साहित्य इतिहासकारों द्वारा सुझाए गए नाम -

०माध्यमिक काल -मिश्र बंधु

०भक्तिकाल -अाचार्य रामचंद्र शुक्ल, डॉ रामकुमार वर्मा ,हजारी प्रसाद द्विवेदी

०पूर्व मध्यकाल -डॉ गणपतिचंद्र गुप्त

26/11/2020

विभिन्न काल खंडों के नामकरण से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न -

०आदिकाल का नामकरण किसने किया?
-हजारी प्रसाद द्विवेदी

०आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने आदिकाल को क्या नाम दिया?
-वीरगाथा काल

०आदिकाल को चारण काल किसने कहा?
- डॉ० रामकुमार वर्मा

०आदिकाल को बीज वपन काल किसने कहा?
- महावीर प्रसाद द्विवेदी

०आदिकाल को सिद्ध सामंत युग किसने कहा?
- राहुल सांकृत्यायन

०आदिकाल को आरंभिक काल किसने कहा?
- मिश्र बंधु

०आदिकाल को प्रारंभिक काल किसने कहा?
- डॉ० गणपतिचंद्र गुप्त

०भक्ति काल को माध्यमिक काल किसने कहा?
-मिश्र बंधु

०भक्ति काल को पूर्व मध्यकाल किसने कहा?
- डॉ० गणपतिचंद्र गुप्त

०रीतिकाल को अलंकृत काल किसने कहा?
- मिश्र बंधु

०रीतिकाल को श्रृंगार काल किसने कहा?
-विश्वनाथ त्रिपाठी

०रीतिकाल को कलाकाल किसने कहा?
-डॉ० भगीरथ मिश्र

०आधुनिक काल को वर्तमान काल किसने कहा?
- मिश्र बंधु

०आधुनिक काल को गद्य काल किसने कहा?
-अाचार्य रामचंद्र शुक्ल

०आधुनिक काल का नामकरण किसने किया?
- हजारी प्रसाद द्विवेदी

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