Ram Mohan

Ram Mohan विश्वास वह पक्षी है जो प्रभात के पूर्व अंधकार में ही प्रकाश का अनुभव करता है और गाने लगता है। -रवींद्रनाथ ठाकुर

11/05/2026
11/05/2026

Celebrating my 5th year on Facebook. Thank you for your continuing support. I could never have made it without you. 🙏🤗🎉

With Go With Sameer – I just got recognized as one of their top fans! 🎉
26/04/2026

With Go With Sameer – I just got recognized as one of their top fans! 🎉

20/04/2026

कहता रहे ज़माना गुनहगार ज़िंदगी
फ़रोग़ ज़ैदी
कहता रहे ज़माना गुनहगार ज़िंदगी
कुछ लोग जी रहे हैं मज़ेदार ज़िंदगी
किरदार अपना अपना निभाते हैं सब यहाँ
समझो न तुम किसी की है बे-कार ज़िंदगी
इक वक़्फ़ा-ए-अजल भी तो आता है दरमियाँ
चलती नहीं किसी की लगातार ज़िंदगी
आगे निकल चुके थे हम अपने वुजूद से
फिर भी हुई न कम तिरी रफ़्तार ज़िंदगी
रस्ते कई हसीन निकलते जहाँ से थे
लाई थी ऐसे मोड़ पे इक बार ज़िंदगी
है ज़िंदगी से शिकवा उन्हें भी बहुत 'फ़रोग़'
हिस्से में जिन के आई है गुलज़ार ज़िंदगी

18/04/2026

"सब मेरे बग़ैर मुतमइन हैं
मैं सब के बग़ैर जी रहा हूँ"
Jaun Elia

कभी-कभी ज़िंदगी हमें ऐसी जगह ले आती है
जहाँ ना किसी की कमी उन्हें महसूस होती है,
ना हम अपने अकेलेपन से बाहर आ पाते हैं…

कुछ रिश्ते ख़त्म नहीं होते,
बस ख़ामोशी में बदल जाते हैं।

10/04/2026

वो तो पत्थर पे भी गुज़रे न ख़ुदा होने तक,
जो सफ़र मैं ने न होने से किया होने तक

ज़िन्दगी इस से ज़्यादा तो नहीं उम्र तिरी,
बस किसी दोस्त के मिलने से जुदा होने तक

माँगना अपने ख़ुदा से भी है दरयुज़ा-गरी,
हाथ पथरा न गए दस्त ए दुआ होने तक

अब कोई फ़ैसला हो भी तो मुझे क्या लेना,
मैं तो उम्रों से हूँ मसलूब सज़ा होने तक

ऐ ख़ुदा तेरी मशिय्यत भी तो शामिल होगी,
एक अच्छे भले इंसाँ के बुरा होने तक

दश्त से क़ुल्ज़ुम ए ख़ूँ तक कि मसाफ़त है फ़राज़,
क़ैस से ग़ालिब ए आशुफ़्ता-नवा होने तक.

अहमद फ़राज़ साहब

14/03/2026

तू हिन्दू बनेगा न मुसलमान बनेगा
रचनाकार-साहिर लुधियानवी

तू हिन्दू बनेगा न मुसलमान बनेगा
इंसान की औलाद है इंसान बनेगा

अच्छा है अभी तक तेरा कुछ नाम नहीं है
तुझ को किसी मज़हब से कोई काम नहीं है

जिस इल्म ने इंसानों को तक़्सीम किया है
इस इल्म का तुझ पर कोई इल्ज़ाम नहीं है

तू बदले हुए वक़्त की पहचान बनेगा
इंसान की औलाद है इंसान बनेगा

मालिक ने हर इंसान को इंसान बनाया
हम ने इसे हिन्दू या मुसलमान बनाया

क़ुदरत ने तो बख़्शी थी हमें एक ही धरती
हम ने कहीं भारत कहीं ईरान बनाया

जो तोड़ दे हर बंद वो तूफ़ान बनेगा
इंसान की औलाद है इंसान बनेगा

नफ़रत जो सिखाए वो धरम तेरा नहीं है
इंसाँ को जो रौंदे वो क़दम तेरा नहीं है

क़ुरआन न हो जिस में वो मंदिर नहीं तेरा
गीता न हो जिस में वो हरम तेरा नहीं है

तू अम्न का और सुल्ह का अरमान बनेगा
इंसान की औलाद है इंसान बनेगा
स्रोत :
पुस्तक : Kulliyat-e-Sahir Ludhianvi (पृष्ठ 501) रचनाकार : SAHIR LUDHIANVI
प्रकाशन : Farid Book Depot (Pvt.) Ltd

Happy New Year 2026
01/01/2026

Happy New Year
2026

22/11/2025

मुफलिस जो अगर तन की क़बा बेच रहा है
वाइज भी मिम्बर पे दुआ बेच रहा है।
डोनो को है डर-पेश सवाल अपने शिकम का
एक अपनी खुदी, एक खुदा बेच रहा है।

Address

Village Bighapur Sithauli
Shahjahanpur
242221

Telephone

+919452137785

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Ram Mohan posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The School

Send a message to Ram Mohan:

Shortcuts

Share

Category