Divine Prem Kutir

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प्राकृतिक आध्य?

प्रकृति प्रेमी , मृदुभाषी Divine Prem Kutir   एवम Divine Public School के डॉयरेक्टर सर Prem Prakash Gupta   जी आपको जन्म...
10/04/2025

प्रकृति प्रेमी , मृदुभाषी Divine Prem Kutir एवम Divine Public School के डॉयरेक्टर
सर Prem Prakash Gupta जी आपको जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं एवम बधाई ....✍️✍️✍️✍️

Admission open 2024 - 2025
23/03/2024

Admission open 2024 - 2025

गिलहरी का रामसेतु बनाने में योगदान...माता सीता को वापस लाने के लिए रामसेतु बनाने का कार्य चल रहा था। भगवान राम को काफी द...
24/06/2023

गिलहरी का रामसेतु बनाने में योगदान...

माता सीता को वापस लाने के लिए रामसेतु बनाने का कार्य चल रहा था। भगवान राम को काफी देर तक एक ही दिशा में निहारते हुए देख लक्ष्मण जी ने पूछा भैया आप इतनी देर से क्या देख रहें हैं? भगवान राम ने इशारा करते हुए दिखाया कि वो देखो लक्ष्मण एक गिलहरी बार-बार समुद्र के किनारे जाती है और रेत पर लोटपोट करके रेत को अपने शरीर पर चिपका लेती है। जब रेत उसके शरीर पर चिपक जाता है फिर वह सेतु पर जाकर अपना सारा रेत सेतु पर झाड़ आती है। वह काफी देर से यही कार्य कर रही है।
लक्ष्मण जी बोले प्रभु वह समुन्द्र में क्रीड़ा का आनंद ले रही है और कुछ नहीं। भगवान राम ने कहा, नहीं लक्ष्मण तुम उस गिलहरी के भाव को समझने का प्रयास करो। चलो आओ उस गिलहरी से ही पूछ लेते हैं कि वह क्या कर रही है? दोनों भाई उस गिलहरी के निकट गए। भगवान राम ने गिलहरी से पूछा कि तुम क्या कर रही हो? गिलहरी ने जवाब दिया कि कुछ भी नहीं प्रभु बस इस पुण्य कार्य में थोड़ा बहुत योगदान दे रही हूँ। भगवान राम को उत्तर देकर गिलहरी फिर से अपने कार्य के लिए जाने लगी, तो भगवान राम ने उसे टोकते हुए कहा- तुम्हारे रेत के कुछ कण डालने से क्या होगा ?
गिलहरी बोली प्रभु आप सत्य कह रहे हैं। मै सृष्टि की इतनी लघु प्राणी होने के कारण इस महान कार्य हेतु कर भी क्या सकती हूँ? मेरे कार्य का मूल्यांकन भी क्या होगा? प्रभु में यह कार्य किसी आकांक्षा से नहीं कर रही। यह कार्य तो राष्ट्र कार्य है, धर्म की अधर्म पर जीत का कार्य है। राष्ट्र कार्य किसी एक व्यक्ति अथवा वर्ग का नहीं बल्कि योग्यता अनुसार सम्पूर्ण समाज का होता है। जितना कार्य वह कर सके नि:स्वार्थ भाव से समाज को राष्ट्र हित का कार्य करना चाहिए। मेरा यह कार्य आत्म संतुष्टि के लिए है प्रभु। हाँ मुझे इस बात का खेद अवश्य है कि मै सामर्थ्यवान एवं शक्तिशाली प्राणियों की भाँति सहयोग नहीं कर पा रही। भगवान राम गिलहरी की बात सुनकर भाव विभोर हो उठे। भगवान राम ने उस छोटी सी गिलहरी को अपनी हथेली पर बैठा लिया और उसके शरीर पर प्यार से हाथ फेरने लगे। भगवान राम का स्पर्श पाते ही गिलहरी का जीवन धन्य हो गया।

जय श्रीराम, जय गोविंदा ✨🙏💖🕉️

23/06/2023

23/06/2023

एक बार एक नन्हा बच्चा दोपहर में नंगे पैर फूल बेच रहा था। लोग मोलभाव कर उससे फूल ख़रीद रहे थे।

तभी अचानक एक सज्जन की नज़र उसके पैरों पर पड़ी।उसने पाया कि उस बच्चे के पैरों में जूते या चप्पल नहीं हैं। उसे बहुत दुःख हुआ। वह भागकर गया, नज़दीक की ही एक दुकान से एक जूता लेकर आया और कहा-लो बेटा... जूते पहन लो , तुम्हारे पांव जल रहे होंगे ।

लड़के ने फटाफट जूते पहने, बड़ा खुश हुआ और उस आदमी का हाथ पकड़ कर कहने लगा- दादा, आप भगवान हो न...सच सच बताना ??

वह आदमी घबराकर बोला - नहीं... नहीं... बेटा , मैं भगवान नहीं।

फिर लड़का बोला- तब जरूर आप भगवान के दोस्त होंगे, क्योंकि मै कई दिनों से लगातार भगवान जी से विनती कर रहा था कि भगवान जी, धूप में मेरे पैर बहुत जलते हैं। मेरे लिए एक जूते की व्यवस्था कर दो औऱ आख़िर उन्होंने मेरी फ़रियाद सुन ली ।

उस आदमी ने बड़े प्यार से नन्हें बच्चे के सिर पर अपना हाथ फेरा औऱ उससे बोला....बेटा ,शायद तुम सही कह रहे हो, संभवतः भगवान ने ही मुझें यहाँ भेजा होगा ।

वह आदमी अपनी आंखों में पानी लिये मुस्कराता हुआ वहाँ से चला गया, पर अब वो जान गया था कि भगवान का दोस्त बनना ज्यादा मुश्किल नहीं है।

कुदरत ने दो रास्ते बनाए हैं....देकर जाओ या फिर छोड़कर जाओ......साथ लेकर के जाने की कोई व्यवस्था नहीं।

कैची धाम के स्थापना दिवस के शुभ अवसर की सभी को शुभकामनायें 🙏🙏हे बाबा...❤तेरा हाथ जिसने पकड़ा, वो रहा न बेसहारा।दरिया में...
15/06/2023

कैची धाम के स्थापना दिवस के शुभ अवसर की सभी को शुभकामनायें 🙏🙏
हे बाबा...❤
तेरा हाथ जिसने पकड़ा, वो रहा न बेसहारा।
दरिया में डूबकर भी, उसे मिल गया किनारा।।

🙏🏻🚩 जय हो नीम करोली बाबा जी की🚩🙏🏻

09/06/2023

पशु पक्षी सेवा श्री हरी सेवा
28/05/2023

पशु पक्षी सेवा
श्री हरी सेवा

28/05/2023

एक नियम बना लो कि साल में एक बार सप्ताह-दस दिन के लिए किसी आश्रम या किसी तीर्थस्थान में जाना है। इससे वातावरण परिवर्तन होगा। हमारे ऋषि - मनीषी कहते थे कि तुम किसी ऐसी जगह जाओ जहाँ पर कुछ समय के लिए दूसरे वातावरण में रह सको। वह वातावरण तुम्हारे उत्थान का कारण बनना चाहिए। विदेशी लोग छुट्टियों में सैर करने, मौज उड़ाने जाते हैं, लेकिन भारतीय परम्परा में जब लोग घर से बाहर जाते थे तो तीर्थों या आश्रमों में जाते थे, क्योंकि वहाँ के भिन्न वातावरण में रहकर, भिन्न चिंतन में रहकर उनके दिमाग में बदलाव होता था, उनकी बैट्री रीचार्ज होती थी।
एक नियम हो जाना चाहिए। साल में एक बार कुछ दिनों के लिए किसी तीर्थ चले गये, वहाँ रहे, घूमे, थोड़ा चिंतन किया, थोड़ा अनुष्ठान किया, योग - जप किया, थोड़ा आराम किया, फिर वापिस आ गए। या किसी आश्रम में चले गये। भारत में तो अनेकों आश्रम हैं। अपनी सुविधानुसार किसी भी आश्रम में चले गए, वहाँ सत्संग में, स्वाध्याय में, साधना में, चिंतन में, सेवा में कुछ समय बिताया। फिर वापस आ गए। इससे बैट्री चार्ज होती है।

हमारे गुरुजी हमसे कहा करते थे कि निरंजन, मस्तिष्क और मन वास्तव में एक बैट्री है, टार्च लाईट की बैट्री की तरह। तुम टार्च लाईट का जितना उपयोग करोगे उतनी अधिक बैट्री खर्च होगी। वही हाल मन की बैट्री का भी है। जब मन की ऊर्जा समाप्त हो जाती है तब यह निष्क्रिय हो जाता है। इसकी रचनात्मकता और सकारात्मकता खत्म हो जाती है। जब यही स्थिति लम्बे समय तक कायम रहती है तब फिर मानसिक अवसाद का सामना करना पड़ता है। जीवन अंधकारपूर्ण, संघर्षपूर्ण, दुःखपूर्ण और नीरस दिखलाई देता है। इसलिए व्यक्ति को चाहिए कि समय - समय पर किसी आश्रम या किसी तीर्थ में रहकर अपनी बैट्री को एक साल के लिए चार्ज कर ले, और एक नयी प्रेरणा, नये चिंतन, नये विश्वास को लेकर अपने सांसारिक कार्य में संलग्न हो जाए॥ परम आदरणीय परम आदरणीय स्वामी यतींद्र नाथ जी के फेसबुक वॉल से साभार

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