15/10/2023
सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्तिभूते सनातनि।
गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोऽस्तु ते।।
कुकर्मी कुसङ्गी कुबुद्धि: कुदासः, कुलाचारहीन: कदाचारलीन:।
कुदृष्टि: कुवाक्यप्रबन्धः सदाहं, गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि।।
आदिशक्ति, जगतजननी, पराम्बा, जगदम्बा, अष्टभुजा, अपराजिता, कल्याणी, त्रिभुवनसुन्दरी, पर्वतात्मजा, महाप्रकृति, महामाया, महायोगेश्वरी, वैष्णवी, शाम्भवी, शारदा, सर्वमङ्गला माता जगदम्बिके जिनके चरण कमलों को स्वयं त्रिपुंडधारी, कामारी, त्रिपुरारी, अविनाशी, देवाधिदेव महादेव अपने वक्ष स्थल पर धारण करते हैं वें महादेवी इस नवरात्रि आपको अभय, दीर्घायु, आरोग्य, ऐश्वर्य एवम समृद्धि का आशिर्वाद प्रदान करें तथा समस्त अमंगल, दोषों और तापों का शमन करें।
विक्रम संवत २०८० का यह शारदीय नवरात्र आप के लिए कल्याणकारी और मंगलमय हो। 🙏🏼