क्षत्रीय राजपूतों की विरासत और संस्कृति

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क्षत्रीय राजपूतों की विरासत और संस्कृति वीर भोग्य वसुंधरा � क्षत्रीय धर्म सर्?

12/11/2025

सभी क्षत्रियों एवं ब्राह्मण भाइयों को ये वीडियो क्लिप देखकर समझना चाहिए 🙏🏻🙏🏻🙏🏻

15/11/2024

क्षत्रियों को यह विडियो अवश्य देखना चाहिए ,,,
समय का अभाव सोच इसे नजरअंदाज न करें,,,🙏 #पुस्पेंद्र_सिंह क्षत्रिय अस्तित्व न्याय मोर्चा संभाग अध्यक्ष संभाग शहडोल मध्य प्रदेश
🚩🚩🚩जय भवानी 🚩🚩🚩
पोस्ट में किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए क्षमा प्रार्थी हैं 🙏🙏
कॉमेंट में बताई जाय त्रुटि सुधार किया जाएगा।

16/07/2024
सिर कटे और धङ लङे रखा बरगाही शान!“"व्रजदेशा चन्दन वना, मेरुपहाडा शाही मान !     गरुड़ खंगा लंका गढा, वीरकुल बरगाही !!   ...
11/06/2024

सिर कटे और धङ लङे रखा बरगाही शान!
“"व्रजदेशा चन्दन वना, मेरुपहाडा शाही मान ! गरुड़ खंगा लंका गढा, वीरकुल बरगाही !! बलहट बँका देवड़ा, करतब बँका गौड़ ! हाडा बँका गाढ़ में, रण बँका बरगाही !!"”
जय माँ भवानी
मोर्चा मोर्चा घोडा नाचे,पंचम कहें पुकार पुकार | भाग ना जैहो कोई मोहरा ते,यारों राखिओ धरम हमार| खाट में सो के जो मर जैहो, डूबे सात पुश्त को नाम,रण में लड़ के जो मर जैहो, होवे जनम जनम तक नाम |
#पुस्पेंद्र_सिंह क्षत्रिय अस्तित्व न्याय मोर्चा संभाग अध्यक्ष संभाग शहडोल मध्य प्रदेश
🚩🚩🚩जय भवानी 🚩🚩🚩
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एक बार एक राजपूत के घर की एक स्त्री स्नान कर रही थी,तभी संयोग से वहाँ से एक राजा की सवारी निकल रही थी,हाथी पर बैठे राजा ...
30/05/2024

एक बार एक राजपूत के घर की एक स्त्री स्नान कर रही थी,
तभी संयोग से वहाँ से एक राजा की सवारी निकल रही थी,
हाथी पर बैठे राजा को अकस्मात स्त्री का चेहरा व गर्दन तक तन दिखा,
व राजपूत स्त्री से राजा की नज़र भी टकरा गयी,
तब तुरंत राजा हाथी से उतर गए और पैदल चलने लगे,
राजा के एक सुरक्षा-कर्मी ने राजा से पैदल चलने का कारण पूछा !!
तब राजा ने कहा: हाथी पर बैठने के कारण मैंने अनजाने में एक राजपूत स्त्री की हत्या कर दी इसलिए मैं अब से भविष्य में कभी हाथी की सवारी नहीं करूंगा".
और वास्तव में अगली सुबह खबर मिली की उक्त राजपूत घर की स्त्री ने अत्महत्या कर अपने प्राण त्याग दिये.....
मेरे भाइयों बहनों ऐसा रहा हैं राजपूतों की मर्यादित और गरिमामय जीवन और ऐसी होती थी नज़रों की लाज-शरम अतः मेरा आप से निवेदन हैं कि पुरखों की अर्जित की हुई महानता का को याद रखे, भले आज के दौर में आधुनिक बने पर अपने कुल-वंश की मर्यादा व गरिमा को कभी नज़रअंदाज़ ना करे एवं सदा गरिमामय मर्यादित क्षात्र-धर्म के सिद्धांतों का पालन करे।।
#पुस्पेंद्र_सिंह क्षत्रिय अस्तित्व न्याय मोर्चा संभाग अध्यक्ष संभाग शहडोल मध्य प्रदेश
🚩🚩🚩जय भवानी 🚩🚩🚩
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भारत के वीर योद्धा  #गोरा_बादल वीरता और शौर्य की अद्भुत कहानी,जिन्होंने अपनी वीरता से खिलजी को उसकी ओकात दिखाई थीगौरा और...
27/05/2024

भारत के वीर योद्धा #गोरा_बादल
वीरता और शौर्य की अद्भुत कहानी,जिन्होंने अपनी वीरता से खिलजी को उसकी ओकात दिखाई थी
गौरा और बादल ऐसे ही दो शूरवीरों के नाम है,जिनके पराक्रम से राजस्थान की मिट्टी बलिदानी है.
जीवन परिचय और इतिहास :
गौरा ओर बदल दोनों चाचा भतीजे जालोर के चौहान वंश से सम्बन्ध रखते थे|
मेवाड़ की धरती की गौरवगाथा गोरा और बादल जैसे वीरों के नाम के बिना अधूरी है. हममें से बहुत से लोग होंगे, जिन्होंने इन शूरवीरों का नाम तक न सुना होगा !
मगर मेवाड़ की माटी में आज भी इनके रक्त की लालिमा झलकती है. मुहणोत नैणसी के प्रसिद्ध काव्य ‘मारवाड़ रा परगना री विगत’ में इन दो वीरों के बारे पुख्ता जानकारी मिलती है. इस काव्य की मानें तो रिश्ते में चाचा और भतीजा लगने वाले ये दो वीर जालौर के चौहान वंश से संबंध रखते थे, जो रानी पद्मिनी की विवाह के बाद चितौड़ के राजा रतन सिंह के राज्य का हिस्सा बन गए थे।
ये दोनों इतने पराक्रमी थे कि दुश्मन उनके नाम से ही कांपते थे. कहा जाता है कि एक तरफ जहां चाचा गोरा दुश्मनों के लिए काल के सामान थे, वहीं दूसरी तरफ उनका भतीजा बादल दुश्मनों के संहार के आगे मृत्यु तक को शून्य समझता था. यहीं कारण था कि मेवाड़ के राजा रतन सिंह ने उन्हें अपनी सेना की बागडोर दे रखी थी।
राणा रतनसिंह को खिलजी की
कैद से छुड़ाना :
खिलजी की नजर मेवाड़ की राज्य पर थी लेकिन वह युद्ध में राजपूतों को नहीं हरा सका तो उसने कुटनीतिक चाल चली , मित्रता का बहाना बनाकर रावल रतनसिंह को मिलने के लिए बुलाया और धोके से उनको बंदी बना लिया और वहीं से सन्देश भिजवाया कि रावल को तभी आजाद किया जायेगा,जब रानी पद्मिनी उसके पास भजी चली आएगी।
इस तरह के धोखे और सन्देश के बाद राजपूत क्रोधित हो उठे, लेकिन रानी पद्मिनी ने धीरज व चतुराई से काम लेने का आग्रह किया। रानी ने गोरा-बादल से मिलकर अलाउद्दीन को उसी तरह जबाब देने की रणनीति अपनाई जैसा अलाउद्दीन ने किया था। रणनीति के तहत खिलजी को सन्देश भिजवाया गया कि रानी आने को तैयार है, पर उसकी दासियाँ भी साथ आएगी।
खिलजी सुनकर आन्दित हो गया। रानी पद्मिनी की पालकियां आई, पर उनमें रानी की जगह वेश बदलकर गोरा बैठा था। दासियों की जगह पालकियों में चुने हुए वीर राजपूत थे। खिलजी के पास सूचना भिजवाई गई कि रानी पहले रावल रत्नसिंह से मिलेंगी। खिलजी ने बेफिक्र होकर अनुमति दे दी। रानी की पालकी जिसमें गोरा बैठा था, रावल रत्नसिंह के तम्बू में भेजी गई।
अलाउद्दीन खिलजी पर आक्रमण
गोरा ने रत्नसिंह को घोड़े पर बैठा तुरंत रवाना कर और पालकियों में बैठे राजपूत खिलजी के सैनिकों पर टूट पड़े। राजपूतों के इस अचानक हमले से खिलजी की सेना हक्की-बक्की रहा गई वो कुछ समझ आती उससे पहले ही राजपूतों ने रतनसिंह को सुरक्षित अपने दुर्ग पंहुचा दिया , हर तरफ कोहराम मच गया था गोरा और बादल काल की तरह दुश्मनों पर टूट पड़े थे , और अंत में दोनों वीरो की भांति लड़ते हुवे वीरगति को प्राप्त हुवे |
गोरा और बादल जैसे वीरों के कारण ही आज हमारा इतिहास गर्व से अभिभूत है. ऐसे वीर जिनके बलिदान पर हमारा सीना चौड़ा हो जाये, उन्हें कोटि-कोटि नमन | मेवाड़ के इतिहास में दोनों वीरों की वीरता स्वर्ण अक्षरों में अंकित है |
#पुस्पेंद्र_सिंह

01/03/2024

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