17/07/2020
भारत को मिली बड़ी सफलता, निमोनिया की स्वदेशी वैक्सीन तैयार
बाजार में उतारने की अनुमति
डीजीसीआई ने आंकड़ों की समीक्षा की और इसके बाद 'न्यूमोकोकल पॉलीस्काराइड कॉजुगेट टीके' को बाजार में उतारने की अनुमति दे दी.
यह टीका कैसे लगेगा
यह टीका इंजेक्शन की मदद से लगेगा. यह टीका इंट्रामस्कुलर यानी पेशियों में लगाए जाने वाला है. मंत्रालय ने बताया कि इस टीके का उपयोग निमोनिया से बचाव हेतु बड़े पैमाने पर किया जाएगा. सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने डीसीजीआई से टीके के पहले, दूसरे और तीसरे चरण का क्लिनिकल ट्रायल भारत में करने की मंजूरी ली. इसका ट्रायल गाम्बिया में भी हुआ है.
भारत को लाइसेंस पहली बार मिला
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार, निमोनिया के क्षेत्र में यह पहला स्वदेशी रूप से विकसित वैक्सीन है. इससे पहले इस तरह के टीके की मांग काफी हद तक पूरी हुई थी, लेकिन विदेशी कंपनियों ने ही वैक्सीन बनाई थी. देश में लाइसेंस प्राप्त कंपनी द्वारा ऐसा पहली बार हुआ है.
यह दवा कैसे काम करती है?
यह वैक्सीन फेफड़ों की सूजन बढ़ाने वाली स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया जीवाणु से लड़ने हेतु शरीर को ताकत देती है. यह आमतौर पर बच्चों को 2, 4, 6 और 12 से 15 साल की उम्र में लगाया जाता है.
निमोनिया क्या है?
निमोनिया सांस से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है, जिसमें फेफड़ों (लंग्स) में इन्फेक्शन हो जाता है. निमोनिया होने पर फेफड़ों में सूजन आ जाती है और कई बार पानी भी भर जाता है.
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