12/09/2026
"शिक्षा वह शेरनी का दूध है, जो पिएगा वह दहाड़ेगा।"
भारत रत्न बोधिसत्व डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर केवल एक नाम नहीं, बल्कि समानता, स्वाभिमान और सामाजिक न्याय का वह विचार हैं जिसने करोड़ों शोषितों और वंचितों को सिर उठाकर जीने का अधिकार दिया।
बाबासाहेब का संपूर्ण जीवन इस बात का प्रमाण है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी विषम क्यों न हों, शिक्षा और आत्मबल की शक्ति से दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की दिशा और दशा बदली जा सकती है।
उन्होंने हमें केवल संविधान नहीं दिया, बल्कि:
हर नागरिक को समानता और बंधुत्व का मूल मंत्र दिया।
महिलाओं के हक, मजदूरों के अधिकार और शिक्षा के महत्व को सर्वोपरि रखा।
समाज को संदेश दिया— "शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो।"
आज आवश्यकता केवल उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करने की नहीं, बल्कि उनके प्रगतिशील विचारों को आत्मसात करने और एक प्रबुद्ध, समतामूलक समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभाने की है।
परम पूज्य बाबासाहेब के चरणों में कोटि-कोटि नमन।
जय भीम! नमो बुद्धाय! 💙