Govt. Sr. Teacher MATHS

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02/04/2023
05/10/2020

शिक्षकों की मांग:ग्रेड थर्ड, ग्रेड सैकंड शिक्षक, व्याख्याता, एचएम और प्रिंसिपल्स के प्रमोशन के लिए एक साल से इंतजार
सीकर

द्वितीय श्रेणी शिक्षकों से लेकर प्रधानाचार्य तक के तबादले करने के लिए आवेदन ले लिए हैं
शिक्षक संगठन छह माह से पहले प्रमोशन और फिर तबादले की मांग कर रहे हैं
मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, संयुक्त निदेशक के प्रमोशन करीब 15 से 20 दिन पहले ही किए गए हैं।

शिक्षा विभाग में गत दो वर्ष से तृतीय श्रेणी शिक्षकों से लेकर प्रधानाचार्यों तक के प्रमोशन व डीपीसी नहीं की गई है। द्वितीय श्रेणी शिक्षकों से लेकर प्रधानाचार्य तक के तबादले करने के लिए आवेदन ले लिए हैं। लेकिन बिना प्रमोशन के तबादले करने के चलते जब भी प्रमोशन होगा फिर से तबादले करने होंगे। तबादले नहीं किए गए तो स्कूलों में सभी श्रेणी के शिक्षक बढ़ जाएंगे और फिर सभी वर्गों के शिक्षकों का फिर से तबादला करना पड़ेगा।

प्रमोशन जून-जुलाई माह में होने थे लेकिन नहीं हुए। एक साल से ग्रेड थर्ड, सेकंड ग्रेड, व्याख्याता, प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्यों के तबादले नहीं किए गए हैं। जबकि शिक्षक संगठन लंबे समय से मांग कर रहे थे कि पहले प्रमोशन किए जाएं और उसके उपरांत ही तबादले खोले जाएं। राज्य सरकार ने प्रमोशन को लेकर कोई रणनीति नहीं बनाई है। हालांकि मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, संयुक्त निदेशक के प्रमोशन करीब 15 से 20 दिन पहले ही किए गए हैं।

डीईओ के स्वीकृत 462 पदों में से 300 पद खाली
जिला शिक्षा अधिकारी पदों पर पदोन्नतियां नहीं होने की वजह से, विभाग में जिला शिक्षा अधिकारियों की कमी हो गई है। राजस्थान लोक सेवा आयोग में पिछले करीब एक माह से नियमों में संशोधन किए जाने की पत्रावली अटकी हुई है। लोक सेवा आयोग ने भी एक बार तो इसे स्वीकृत कर दिया था। परन्तु इसी बीच सरकार ने प्रधानाचार्य पदों पर पदोन्नति में 80 प्रतिशत व्याख्याताओं से तथा 20 प्रतिशत पद प्रधानाध्यापक माध्यमिक से भरने का निर्णय ले लिया।

इस संशोधन को कर फिर से पत्रावली आयोग को भेजी गई। तभी से यह पत्रावली आयोग के पास लम्बित पड़ी है। जो अधिकारी इन पदों पर कार्यरत है उन्हें भी उच्च पदों पर पदोन्नतियां देने तथा कुछ अधिकारी सेवानिवृत होने से जिला शिक्षा अधिकारी स्तर के पद खाली होते जा रहे हैं। 462 पदों के विरूद्ध करीब 300 पद खाली हो गए हैं।

ये होना है संशोधन
पहले जिला शिक्षा अधिकारी पदों के आधे पद सीधी भर्ती से तथा आधे पद पदोन्नति से भरने थे। अब शत प्रतिशत पदोन्नतियों से भरनेे का प्रावधान किया है।
पदोन्नति का कार्य शिक्षकों के स्थानांतरण से पहले, इस माह में पूर्ण किया जाना चाहिए। जिससे नवम्बर में स्कूल खुलने के साथ ही रिक्त पद भी भर जा सकें।
उपेन्द्र शर्मा, प्रदेश महामंत्री, राजस्थान शिक्षक संघ (शेखावत)

03/10/2020

राज्य सरकार की गाइडलाइन:31 तक नहीं खुलेंगे स्कूल, सिलेबस में 40% कटौती की तैयारी, पूरी तरह स्कूल खोलने पर फैसला नवंबर में
सीकर

फिलहाल 9 से 12वीं के छात्र गाइडेंस के लिए स्कूल जा सकेंगे
राज्य सरकार ने अनलॉक-5 की गाइडलाइंस शुक्रवार को जारी कर दी। प्रदेश के स्कूल-कोचिंग 31 अक्टूबर तक के लिए बंद कर दिए गए हैं। कक्षा नौ से 12वीं तक के छात्र पहले की तरह पेरेंट्स की लिखित अनुमति से गाइडेंस लाने के लिए स्कूल जा सकेंगे। सरकार ने कहा है कि 31 अक्टूबर के बाद स्कूल संचालकों से चर्चा के बाद ही स्कूल किस तरह खोले जाए, इस पर फैसला होगा।

राज्य में मंदिर खोलने के लिए भी मंदिर पुजारियों व ट्रस्ट अध्यक्षों से बातचीत की गई थी। सूत्र बताते हैं कि नवंबर में भी स्कूल एक साथ नहीं खोले जाएंगे। कुछ कक्षाओं को पहले अनुमति मिलेगी। पूरे देश में सिर्फ उत्तरप्रदेश ऐसा राज्य है, जहां 16 अक्टूबर से स्कूल संचालन की अनुमति दी गई है।
ऐसे समझिए : नवंबर में किस तरह खोले जा सकते हैं स्कूल

1. पहले चरण में 9वीं से 12वीं की स्कूलें : नवंबर में भी स्कूल चरणबद्ध तरीके से ही खोले जाएंगे। सबसे पहले कक्षा नौ से 12वीं तक की क्लासें चलाने की ही अनुमति मिल सकती है। यह भी मुमकिन है कि दिवाली के बाद ही स्कूल संचालित किए जाए। 14 नवंबर को दिवाली है। दूसरे राज्यों के छात्र और उनके पेरेंट्स भी चाहेंगे कि दिवाली मनाने के बाद ही स्कूल शुरू किए जाए। तब तक कोरोना के मामलों में कमी भी आ सकती है।

2. मीटिंग : सरकार जल्द ही जिला प्रशासन के जरिए हर जिले में स्कूल संचालकों के साथ मीटिंग करेगी। इसमें सुझाव लिए जाएंगे कि वे कोरोना गाइडलाइंस की कैसे पालना करेंगे। हर जिले के हिसाब से अलग-अलग की गाइडलाइंस भी बन सकती है। 3. प्राइमरी : प्राइमरी क्लास के संचालन की अनुमति नवंबर में भी मिलने पर संशय है। क्योंकि-छोटे बच्चों में मास्क जैसी गाइडलाइंस की पालना करना चुनौती होगा। 4. पाठ्यक्रम : माध्यमिक शिक्षा बोर्ड भी जल्द ही शिक्षा संकुल जयपुर में उच्चस्तरीय मीटिंग बुलाकर पाठ्यक्रम कम करने का फैसला कर सकता है। पाठ्यक्रम में 40 प्रतिशत की कमी की जा सकती है।

उत्तरप्रदेश इकलौता राज्य जहां 16 अक्टूबर से खुलेंगे स्कूल
पश्चिम बंगाल : स्कूल खोलने का फैसला नवंबर मध्य तक बढ़ाया।
महाराष्ट्र : कोरोना के रिकॉर्ड मामले आने के बाद स्कूल 31 अक्टूबर तक बंद रखने का फैसला।
आंध्रप्रदेश : स्कूलों खोलने को 2 नवंबर तक टालने का निर्णय।
कर्नाटक : अभी तक स्कूलों के खोलने का निर्णय नहीं लिया है।
दिल्ली : स्कूलों को बंद रखने का फैसला 31 अक्टूबर तक बढ़ाया।
बाकी राज्य : असम, हरियाणा ने स्कूलों को पूरी तरह रिओपनिंग न करने का फैसला किया है

03/10/2020

रैंकिंग:सरकारी स्कूलों के विकास के लिए ज्ञान संपर्क पोर्टल में धनराशि दान करने में चूरू प्रदेश में प्रथम , सीकर 15वें और झुंझुनूं आठवें स्थान पर
चूरू

चूरू जिले ने 89 ट्रांजेक्शन कर 16.38 लाख रुपए जमा हुए, शिक्षानगरी कोटा अंतिम नंबर पर
सरकारी स्कूलों के विकास के लिए 2017 में शुरू हुए ज्ञान संपर्क पोर्टल में धनराशि दान करने में चूरू जिला सितंबर में प्रदेश में पहले नंबर पर रहा है। इससे पहले चूरू जिला प्रथम रैंकिंग के आसपास ही रहा है। डीईओ प्रा-मा. संपतराम बारूपाल का कहना है कि चूरू जिला अव्वल रहने का प्रमुख कारण प्रभावी मानीटरिंग ही है। चूरू जिले में केवल सितंबर महीने में भामाशाहों और दानदाताओं ने 89 ट्रांजेक्शन के माध्यम से 16.38 लाख जमा कराए। बता दें कि ज्ञान संपर्क पोर्टल में जमा राशि का उपयोग उनके द्वारा चिह्नित स्कूलों व उनके पढ़ने वाले बच्चों के लिए होता है।

सितंबर में इस पोर्टल में राशि दान करने में चूरू प्रथम, हनुमानगढ़ जिला 13.58 लाख एवं उदयपुर 2.92 लाख रुपए जमा कराकर तीसरे नंबर पर रहे। झुंझुनूं जिला 2.18 लाख के साथ 8वें नंबर एवं सीकर जिला 79412 रुपए के 15वें नंबर पर रहा, जबकि शिक्षा नगरी कोटा मात्र 6801 रुपए के साथ 33वें नंबर पर है। बतादें कि ज्ञान संपर्क पोर्टल में फंडिंग का उद्देश्य आने वाले गेप को कम करना है। इसका उद्घाटन 5 अगस्त 2017 को किया गया।
तीन प्रमुख कारण-इसलिए रहा चूरू प्रदेश में अव्वल

समसा एडीपीसी व सीबीईओ स्तर स्कूलों की प्रभावी मॉनीटरिंग के कारण मुख्यमंत्री जनसहभागिता योजना में अधिक से अधिक राशि जमा हुई।
समसा एडीपीसी द्वारा हर महीने पीईईओ के साथ होने वाली बैठक में सीधे जुड़ाव से स्कूलों के विकास में सहयोग को गति मिली।
इस पोर्टल में दान देने वाले को आयकर में छूट मिलती है। इसलिए लोगों का रुझान इस ओर बढ़ा।
सितंबर में सर्वाधिक दान ढाणी मौजी स्कूल में, जिले में 89 ट्रांजेक्शन में 47 इसी स्कूल में

सितंबर में सर्वाधिक धनराशि ढाणी मौजी स्कूल के विकास के लिए भामाशाहों दी। सितंबर में हुए कुल 89 दान के मदों में सर्वाधिक 47 इसी स्कूल के हैं। इस स्कूल क लिए भामाशाहों ने करीब 10 लाख रुपए पोर्टल में दान दिए। समसा के कार्यक्रम अधिकारी विजयपाल धुआं ने बताया कि जितनी राशि दान की जाती है, उसमें 60 फीसदी राज्य सरकार देती है।

प्रभावी मॉनीटरिंग से चूरू पहले स्थान पर रहा-एडीपीसी

ज्ञान संपर्क पोर्टल पर सर्वाधिक राशि चूरू जिले में दान होने का कारण यहां के सीबीईओ और पीईईओ के साथ विभाग की सीधी मॉनीटरिंग होना है। वे संबंधित स्कूलों के संस्था प्रधानों को भामाशाहों को प्रेरित करने के लिए प्रोत्साहित करने में जुटे रहते हैं। इससे चूरू जिला पहले नंबर पर पहुंचा है।
रमेशचंद्र पूनिया, समसा एडीपीसी

03/10/2020

राशनकार्ड में आधार का सत्यापन:बीएलओ घर-घर जाकर करेंगे राशनकार्ड में आधार का सत्यापन,31 अक्टूबर तक 5.92 लाख चयनितों का आधार से कार्ड जुड़ना बाकी
बीकानेर

भारत सरकार की वन नेशन वन राशन कार्ड याेजनांर्गत खाद्य सुरक्षा याेजना में सभी उचित मूल्य की दुकानाें काे ऑनलाइन किया जाना है। सभी लाभार्थियाें के आधार नंबर राशन कार्ड के साथ डी कर सत्यापन का कार्य बीएलओ काे 31 अक्टूबर तक पूरा करने के आदेश दिए हैं। अब बीएलओ राशन कार्डधारियाें के घर जाकर जिन व्यक्तियाें के आधार नंबर राशन कार्ड में नहीं है। उनकी आधार सीडिंग और सत्यापन का कार्य करवाएंगे ताकि यह काम 15 नवंबर तक कंपलीट हाे सके। बदले में बीएलओ काे दस रुपए प्रति राशन कार्ड के हिसाब से मानदेय दिया जाएगा।

बीएलओ के पास स्मार्टफाेन हाेना अनिवार्य है। डीएसओ यशवंत भाकर ने कहा कि बीएलओ प्रतिदिन 20 से 25 घराें में आधार सीडिंग व सत्यपान का कार्य करेंगे। बीकानेर जिले में 14 लाख 79 हजार 503 व्यक्ति खाद्य सुरक्षा में चयनित हैं। इसमें 8 लाख 87 हजार 442 का आधार कार्ड जुड़ा हुआ है। 5 लाख 92 हजार 61 चयनित सदस्याें का आधार कार्ड जुड़ना बाकी है। बीकानेर जिले में 966 और शहर में 281 राशन डीलर हैं

22/05/2020

आईआईटी गुवाहाटी की बड़ी खोज, अल्जाइमर की वजह से अब नहीं जाएगी याददाश्त

आईआईटी गुवाहाटी के चार सदस्य वाली टीम ने दिमाग में न्यूरोटॉक्सिक अणु को जमा होने से रोकने के तरीकों का पता लगाने के लिए अल्जाइमर के न्यूरोकेमिकल सिद्धांत का अध्ययन किया.

आईआईटी गुवाहाटी के अनुसंधानकर्ताओं ने अल्जाइमर की वजह से थोड़े समय के लिए जाने वाली याददाश्त को रोकने या कम करने हेतु नए तरीके विकसित करने का दावा किया है. आईआईटी गुवाहाटी के अनुसंधानकर्ताओं ने दावा किया है कि उनके अनुसंधान में एक अलग तरीका मिला है, जो अल्जाइमर की बीमारी टाल सकता है.

आईआईटी गुवाहाटी के चार सदस्य वाली टीम ने दिमाग में न्यूरोटॉक्सिक अणु को जमा होने से रोकने के तरीकों का पता लगाने के लिए अल्जाइमर के न्यूरोकेमिकल सिद्धांत का अध्ययन किया. अल्जाइमर भूलने की बीमारी है. इसके लक्षणों में याददाश्त की कमी होना, निर्णय न ले पाना, बोलने में दिक्कत आना आदि शामिल हैं.

भारत में अल्जाइमर

संस्थान के जीव विज्ञान विभाग के प्रो. विपिन रामाकृष्णन ने बताया कि अल्जाइमर की बीमारी का इलाज महत्वपूर्ण है. खासकर भारत के लिए जहां चीन और अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा अल्जाइमर के मरीज हैं. भारत में 40 लाख से ज्यादा लोगों को अल्जाइमर के कारण याददाश्त जाने की सामना करना पड़ता है. इसका उपलब्ध इलाज सिर्फ कुछ लक्षणों को धीमा करता है. अभी तक अल्जाइमर के लिए जिम्मेदार कारकों पर काम नहीं किया गया है. अभी तक ऐसा चिकित्सीय दृष्टिकोण नहीं है जो अल्जाइमर के अंतर्निहित कारणों का इलाज कर सके.

याददाश्त जाने का कारण

संस्थान के जीव विज्ञान विभाग के प्रो. विपिन रामाकृष्णन ने कहा कि अल्जाइमर रोग के उपचार के लिए लगभग सौ संभावित दवाएं साल 1998 और साल 2011 के बीच विफल रही हैं जो समस्या की गंभीरता को दिखाती है. हमने दिमाग में न्यूरोटॉक्सिक अणुओं को रोकने के लिए निम्न-वॉलटेज इलेक्ट्रिक क्षेत्र और ट्रोजन पेप्टाइड्स" के इस्तेमाल जैसे कुछ दिलचस्प तरीकों पर काम किया है.

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर हर्षल नेमाडे के अनुसार, टीम ने पाया कि निम्न-वोल्टेज और सुरक्षित इलेक्ट्रिकल क्षेत्र का इस्तेमाल जहरीले न्यूरोडीजेनेरेटिव अणु को बनने और जमा होने से रोक सकता है जो अल्जाइमर की बीमारी में अल्प अवधि के लिए याददाश्त जाने का कारण बनता है.

अल्जाइमर क्या है?

अल्जाइमर भूलने की एक बीमारी है. इसके लक्षणों में याददाश्त की कमी होना, निर्णय न ले पाना, बोलने में समस्या आना आदि शामिल हैं. रक्तचाप, मधुमेह, आधुनिक जीवनशैली और सिर में चोट लग जाने से इस बीमारी के होने की आशंका बढ़ जाती है. इस बीमारी का फिलहाल कोई स्थाई इलाज नहीं है.

अल्जाइमर के कई कारण होते हैं. इसमें सबसे बड़ा रिस्क ऐसे लोगों को होता है जिन्हें पहले से ही डायबिटीज, हाइपरटेंशन, थायराइड और किसी भी तरह की क्रॉनिक डिजीज हो. हालाँकि बीमारी के शुरूआती दौर में नियमित जाँच और इलाज से इस पर काबू पाया जा सकता है.मस्तिष्क के स्नायुओं के क्षरण से रोगियों की बौद्धिक क्षमता और व्यावहारिक लक्षणों पर भी असर पड़ता है.

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