DHYAN Academy Birsinghpur

DHYAN Academy Birsinghpur SSC,Railway, police, Patwari, Samvida & Vyapam

Recruiment Math, and Gk TeacherOffice Time 9am to 1pmAdress:-pagar rod petrol pump ke samne birsinghpur 6263680835
23/11/2021

Recruiment Math, and Gk Teacher
Office Time 9am to 1pm
Adress:-pagar rod petrol pump ke samne birsinghpur 6263680835

23/11/2021
29/10/2021

हुमायूँ एक मुगल शासक था। प्रथम मुग़ल सम्राट बाबर का पुत्र नसीरुद्दीन हुमायूँ (6 मार्च 1508 – 27 जनवरी, 1556) था। यद्यपि उन के पास साम्राज्य बहुत साल तक नही रहा, पर मुग़ल साम्राज्य की नींव में हुमायूँ का योगदान है।

नसीरुद्दीन मुहम्मद हुमायूँ
मुगल बादशाह
Humayun.jpg
शासनावधि
1530-1556
पूर्ववर्ती
बाबर
उत्तरवर्ती
अकबर
जन्म
मार्च 6, 1508
काबुल
निधन
जनवरी 1, 1556 (उम्र 47)
दिल्ली
समाधि
हुमायुं का मकबरा
जीवनसंगी
हमीदा बानु बेगम
बेगा बेगम
बिगेह बेगम
चाँद बीबी
हाजी बेगम
माह-चूचक
मिवेह-जान
शहज़ादी खानम
घराना
तिमुर मुगल
पिता
बाबर
बाबर की मृत्यु के पश्चात हुमायूँ ने 29 दिसम्बर 1530 में भारत की राजगद्दी संभाली और उसके सौतेले भाई कामरान मिर्ज़ा ने काबुल और लाहौर का शासन ले लिया। बाबर ने मरने से पहले ही इस तरह से राज्य को बाँटा ताकि आगे चल कर दोनों भाइयों में लड़ाई न हो। कामरान आगे जाकर हुमायूँ के कड़े प्रतिद्वंदी बने। हुमायूँ का शासन अफ़गानिस्तान, पाकिस्तान और उत्तर भारत के हिस्सों पर 1530-1540 और फिर 1555-1556 तक रहा।

भारत में उसे शेरशाह सूरी शेरशाह ने इसे बेलग्राम के युद्ध में पराजित कर दिया था तथा उससे बात से निर्वासित होना पड़ा उसने निर्वासन का कुछ समय काबुल सिंध अमरकोट में बिताया अंत में ईरान के शासक तहमास्य के पास शरण ली । ईरान के शासक की मदद से उसने काबुल कंधार में मध्य एशिया के क्षेत्रों को जीता। उसने 1555 ई० में शेरशाह के अधिकारियों को हराकर एक बार फिर दिल्ली आगरा पर अधिकार कर लिया। 1556 में उसकी मृत्यु दिनपनाह भवन की सीढ़ियों से गिरकर दिल्ली में हो गया इस के साथ ही, मुग़ल दरबार की संस्कृति भी मध्य एशियन से इरानी होती चली गयी।

हुमायूँ के बेटे का नाम जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर था। हिमायू की मृत्यु के समय उसका इकलौता पुत्र अकबर पंजाब के कलानौर में था। उसे वहीं पर शासक घोषित कर दिया गया 1556 में जब अकबर का राज्याभिषेक हुआ तो उसका साम्राज्य दिल्ली पंजाब आदि के क्षेत्रों तक ही सीमित था बिहार पर प्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं था अकबर के राज्याभिषेक के समय बिहार में अफगान के कररनी वंश का शासक था जिसके संस्थापक ताजखा कर्णानि थे अकबर के समय बिहार का प्रमुख सुलेमान खा कररणी थे जिसका अकबर के साथ मित्रवत व्यवहार था सुलेमान खा कररणी की मृत्यु के बाद बिहार के प्रमुख दाऊद खा कररणी बिहार के प्रमुख बने और इस ने अकबर के साथ मित्रवत व्यवहार नहीं रखा यह मुगल शासको के नाम से खुतवा पढ़ना बन्द करवा दिया 1574 में अकबर ने बिहार पर आक्रमण किया जिसमें दाऊद खा कररनी भाग गया बिहार का अंतिम अफगान दाऊद खा कररनी थे 1580 में अकबर ने बिहार को एक सूबा घोषित किया मुगल साम्राज्य में कुल 12 सूबा बने जिसमे बिहार भी एक था अकबर ने बिहार के पहले सूबेदार मिर्जाअजीजकोक को नियुक्त किया,,

27/10/2021

बाबर
बाबर
बाबर
पूरा नाम ज़हिर उद-दिन मुहम्मद बाबर
अन्य नाम मुग़ल शाह, अल-सुल्तानु इ आज़म वा इ हकाम, पादशाह-ए-ग़ाज़ी
जन्म 14 फ़रवरी, सन् 1483 ई.
जन्म भूमि अन्दीना (फ़रग़ना राज्य की राजधानी)
मृत्यु तिथि 26 दिसम्बर, सन् 1530 ई.
मृत्यु स्थान आगरा
पिता/माता उमर शेख़ मिर्ज़ा, क़ुतलुगनिग़ार ख़ानम (यूनुस की पुत्री)
संतान पुत्र- हुमायूँ, कामरान, अस्करी, हिन्दाल, पुत्री- गुलबदन बेगम
उपाधि ग़ाज़ी (खानवा के युद्ध में विजय के बाद)
शासन काल सन 1526 से 1530 ई.
शा. अवधि 4 वर्ष
राज्याभिषेक 8 जून, सन् 494 ई. [1]
युद्ध पानीपत का प्रथम युद्ध[2], खानवा का युद्ध[3], चंदेरी का युद्ध[4], घाघरा का युद्ध[5]
निर्माण क़ाबुली बाग़ मस्जिद,[6], जामी मस्जिद [7], आगरा की मस्जिद [8], नूर अफ़ग़ान[9], बाबरी मस्जिद [10]
उत्तराधिकारी हुमायूँ
राजघराना चग़ताई वंश
वंश तैमूर [11] और चंग़ेज़ ख़ाँ का वंश [12]
मक़बरा क़ाबुल
भारत पर आक्रमण बाजौर एवं भीरा आक्रमण 1518 से 1519 ई., पेशावर आक्रमण 1519 ई., स्यालकोट, भीरा आक्रमण 1520 ई., सुल्तानपुर, लाहौर, दीपालपुर आक्रमण 1524 ई.
रचनाऐं बाबरनामा या तुज़ुक़-ए-बाबरी, दीवान [13], रिसाल-ए-उसज [14], मुबइयान [15]
ज़हिर उद-दिन मुहम्मद बाबर (अंग्रेज़ी: Babur, जन्म- 14 फ़रवरी, 1483 ई., फ़रग़ना; मृत्यु- 26 दिसम्बर, 1530 ई., आगरा) जो कि भारतीय इतिहास में बाबर के नाम से प्रसिद्ध है, मुग़ल शासक था। वह भारत में मुग़ल वंश का संस्थापक था। बाबर तैमूर लंग के परपोता था और विश्वास रखता था कि चंगेज़ ख़ान उसके वंश का पूर्वज था। 1526 ई. में पानीपत के प्रथम युद्ध में दिल्ली सल्तनत के अंतिम वंश (लोदी वंश) के सुल्तान इब्राहीम लोदी की पराजय के साथ ही भारत में मुग़ल वंश की स्थापना हो गई थी। इस वंश का संस्थापक ज़हिर उद-दिन मुहम्मद बाबर था। बाबर का पिता उमर शेख़ मिर्ज़ा, फ़रग़ना का शासक था, जिसकी मृत्यु के बाद बाबर राज्य का वास्तविक अधिकारी बना। पारिवारिक कठिनाईयों के कारण वह मध्य एशिया के अपने पैतृक राज्य पर शासन नहीं कर सका। उसने केवल 22 वर्ष की आयु में क़ाबुल पर अधिकार कर अफ़ग़ानिस्तान में राज्य क़ायम किया था। वह 22 वर्ष तक क़ाबुल का शासक रहा। उस काल में उसने अपने पूर्वजों के राज्य को वापिस पाने की कई बार कोशिश की, पर सफल नहीं हो सका।

जन्म एवं अभिषेक
14 फ़रवरी, 1483 ई. को फ़रग़ना में 'ज़हीरुद्दीन मुहम्मद बाबर' का जन्म हुआ। बाबर अपने पिता की ओर से तैमूर का पाँचवा एवं माता की ओर से चंगेज़ ख़ाँ (मंगोल नेता) का चौदहवाँ वंशज था। उसका परिवार तुर्की जाति के 'चग़ताई वंश' के अन्तर्गत आता था। बाबर अपने पिता 'उमर शेख़ मिर्ज़ा' की मृत्यु के बाद 11 वर्ष की आयु में शासक बना। उसने अपना राज्याभिषेक अपनी दादी ‘ऐसान दौलत बेगम’ के सहयोग से करवाया। बाबर ने अपने फ़रग़ना के शासन काल में 1501 ई. में समरकन्द पर अधिकार किया, जो मात्र आठ महीने तक ही उसके क़ब्ज़े में रहा। 1504 ई. में क़ाबुल विजय के उपरांत बाबर ने अपने पूर्वजों द्वारा धारण की गई उपाधि ‘मिर्ज़ा’ का त्याग कर नई उपाधि ‘पादशाह’ धारण की।

टीका टिप्पणी और संदर्भ
11 वर्ष 4 महीने की उम्र में
1526 ई. में इब्राहीम लोदी एवं बाबर के मध्य
बाबर व राणा सांगा 1527 ई. में
1528 ई. में बाबर व मेदिनी राय
1529 ई. में बाबर व महमूद लोदी
पानीपत 1529 ई. में
रुहेलखंड
सोडी क़िले के अन्दर
आगरा में ज्यामितीय विधि पर आधारित एक उद्यान
सेनापति मीर बक़ी द्वारा निर्मित
पितृ पक्ष से तैमूर का पाँचवाँ वंशज
मातृ पक्ष से चंग़ेज़ ख़ाँ का चौदहवाँ वंशज
ग़ज़ल और रुबाइयाँ संग्रह
ख़त-ए-बाबरी
मुस्लिम क़ानून की पुस्तक

25/10/2021

अलाउद्दीन खिलजी


अलाउद्दीन खिलजी का जन्म
अलाउद्दीन खिलजी, खिलजी वंश के दूसरे शासक थे, अलाउद्दीन खिलजी का वास्तविक नाम अली गुरशास्प उर्फ़ जूना खान खिलजी था। 16 वीं-17 वीं शताब्दी के इतिहासकार हाजी-उद-दबीर के मुताबिक, अलाउद्दीन का जन्म कलात, ज़ाबुल प्रान्त, अफ़्ग़ानिस्तान में हुआ था।

ज़ाबुल प्रान्त अफ़्ग़ानिस्तान

अलाउद्दीन खिलजी एक साम्राज्यवादी शासक था, जिसने आक्रामकता के साथ साम्राज्य का विस्तार दक्षिण भारत के मदुरै तक किया, कहा जाता है कि खिलजी जितना बड़ा साम्राज्य किसी शासक ने अगले 300 सालों तक नहीं किया। अलाउद्दीन खिलजी को खिलजी वंश का सबसे ताकतवर शासक माना जाता है। अपनी महत्वकांक्षी के चलते उसे “सिकन्दर-ए-सनी” का ख़िताब मिला था जिसका अर्थ था “दूसरा सिकन्दर”। उसने अपने शासनकाल के दौरान शराब पर पूर्णत: प्रतिबन्ध लगा दिया था।

अपने चाचा की लड़की से विवाह
जलालुद्दीन खिलजी

अलाउद्दीन खिलजी के पिता का नाम शिहाबुद्दीन मसूद था। खिलजी वंश के प्रथम शासक जलालुद्दीन खिलजी उनके चाचा थे। अलाउद्दीन खिलजी के पिता की मृत्यु के बाद उनके चाचा जलालुद्दीन खिलजी ने अलाउद्दीन खिलजी का पालन-पोषण अपने बेटे की तरह किया था और अपनी बेटी का निकाह भी उससे करवाया, लेकिन वह जलालुद्दीन की बेटी से शादी कर के खुश नहीं थे, क्योंकी जलालुद्दीन के सुल्तान बनने के बाद उनकी पत्नी एक राजकुमारी बन गई थी, और उनके बर्ताव में अचानक से अभिमान आ गया था।

अपने चाचा जलालुद्दीन के खिलाफ बगावत
वर्ष 1291 में, कारा के राज्यपाल मलिक छज्जू ने सुल्तान के राज्य में विद्रोह कर दिया था, इस समस्या को अलाउद्दीन ने बहुत अच्छे से संभाला, जिसके बाद उन्हें कारा का मुक्ति (राज्यपाल) बना दिया गया। मलिक छज्जू ने जलालुद्दीन को एक अप्रभावी शासक माना और दिल्ली के सिंहासन को हड़पने के लिए अलाउद्दीन को उकसाया। जलालुद्दीन के साथ विश्वासघात करना आसान काम नहीं था, क्योंकि इसके लिए उन्हें एक बड़ी सेना और हथियारों के लिए पैसे की आवश्यकता थी। इस योजन में लगने वाले धन की कमी को पूरा करने के लिए अलाउद्दीन ने आसपास के हिंदू साम्राज्यों में लूट-पाट शुरू कर दी। वर्ष

वर्ष 1293 में, अलाउद्दीन ने भिलसा (मालवा के परमार राज्य में एक अमीर शहर) में लूट-पाट की और सुल्तान का विश्वास जीतने के लिए, अलाउद्दीन ने पूरी लूट को जलालुद्दीन को सौंप दी। इसे खुश हो कर जलालुद्दीन ने उन्हें अरीज़-आई ममालिक (युद्ध सेनापति) नियुक्त किया और उन्हें सेना को मजबूत बनाने के लिए अधिक राजस्व बढ़ाने जैसे अन्य विशेषाधिकार भी दे दिए।

भिलसा में लूट की सफलता के बाद अलाउद्दीन ने अपनी अगली लूट 1296 में देवगिरी (जो कि दक्कन क्षेत्र स्थित दक्षिणी यादव साम्राज्य की राजधानी) में की, वहाँ से उन्होंने रत्नों, कीमती धातुओं, रेशम उत्पादों, घोड़ों, हाथियों और दासों सहित भारी मात्रा में धन की लूट-पाट की। इस बार भी जलालुद्दीन लूट का सारा सामान अलाउद्दीन द्वारा सौंपे जाने की उम्मीद कर रहे थे। हालांकि, दिल्ली लौटने के बजाय अलाउद्दीन लूट का सामान कारा लेकर चला गया। अलाउद्दीन ने जलालुद्दीन को एक पत्र लिखा और लूट के साथ दिल्ली वापस नहीं आने के कारण माफ़ी मांगी। इसके बाद जलालुद्दीन ने व्यक्तिगत रूप से अलाउद्दीन से मिलने के लिए कारा आने का फैसला किया। जब वह कारा के रास्ते पर थे, तब उन्होंने (जलालुद्दीन) करीब 1,000 सैनिकों की एक छोटी सी टुकड़ी के साथ गंगा नदी पार करने का फैसला किया।

अलाउद्दीन खिलजी अपने चाचा की हत्या कर बने सुल्तान
20 जुलाई 1296 को जब जलालुद्दीन ने गंगा नदी के किनारे अलाउद्दीन से मुलाकात की तब अलाउद्दीन ने जलालुद्दीन को गले लगाते समय उनकी पीठ पर चाकू से वार कर दिया और उनकी मृत्यु के बाद खुद को दिल्ली का नया सुल्तान घोषित कर दिया। जुलाई 1296 कारा में अलाउद्दीन ने अपने आप को औपचारिक रूप से ‘अलाउद्दीन उद-दीन मुहम्मद शाह-सुल्तान’ की उपाधि के रूप में नया सुल्तान घोषित किया। अलाउद्दीन ने अपने अधिकारियों को यथासंभव कई सैनिकों की भर्ती करने और उन्हें (अलाउद्दीन) एक उदार सुल्तान के रूप में पेश करने का आदेश दिया। इसके बाद उन्होंने कारा में अपने मुकुट के साथ-साथ 5 मन (लगभग 35 किलोग्राम) सोना वितरित किया। भरी बारिश और नदियों में बाढ़ की स्थिति के कारण, उन्होंने दिल्ली की ओर प्रस्थान किया। 21 अक्तूबर 1296 को अलाउद्दीन खिलजी ने औपचारिक रूप से खुद को दिल्ली का सुल्तान घोषित किया।

अलाउद्दीन खिलजी का साम्राज्य विस्तार
अलाउद्दीन खिलजी ने दिल्ली की गद्दी पर बैठते ही अपने राज्य की सीमाओं का विस्तार करना शुरू कर दिया। अलाउद्दीन खिलजी बहुत ही महत्वकांक्षी राजा थे और वह अपने आप को दूसरा सिकंदर कहते थे। उन्होंने “सिकंदर-ए- सानी” की उपाधि भी ग्रहण की थी।

अलाउद्दीन खिलजी साम्राज्य

गुजरात पर फतेह
1298 ई. में अलाउद्दीन ने नुसरत खाँ की अगुवाई में 14 हजार घुड़सवारों और 20 हजार पैदल सैनिकों को गुजरात विजय के लिए भेजा। अहमदाबाद के पास बेघल के राजा कर्ण और खिलजी सेना में युद्ध, जिसमें राजा कर्ण पराजित हुआ और अपनी पुत्री देवल देवी के साथ भाग कर देवगिरि के शासक रामचन्द्र देव की शरण में पहुँच गया। राजा कर्ण की पत्नी कमला देवी को अलाउद्दीन ख़िलजी के पास भेज दिया गया, अलाउद्दीन ख़िलजी ने कमला देवी का जबरन धर्म परिवर्तन करवाया और उससे निकाह कर उसे शाही हरम में भेज दिया। गुजरात के विजय अभियान के समय नुसरत खाँ ने भयंकर कत्लेआम मचाया था तथा कई बड़े मंदिरों को तोड दिया था। इनमे से गुजरात का सोमनाथ मंदिर सबसे प्रमुख है।

जैसलमेर पर फतेह
जैसलमेर के शासक द्वारा अलाउद्दीन ख़िलजी की सेना के कुछ घोड़े छीन लेने के कारण सुल्तान ख़िलजी ने जैसलमेर के शासक दूदा एवं उसके सहयोगी तिलक सिंह को 1299 ई. में पराजित किया और जैसलमेर पर फतेह प्राप्त कि।

अलाउद्दीन खिलजी का मेवाड़ पर आक्रमण और रानी पद्मावती का जौहर
चित्तौड़ किले पर किया गया, आक्रमण अलाउद्दीन खिलजी के शासन काल में किए गए आक्रमणों में सबसे सुर्खियों में रहा। चूँकि चित्तौड़ का किला सामरिक दृष्टि से बेहद सुरक्षित स्थान पर बना हुआ था। इसलिए अलाउद्दीन ने चित्तौड़ पर आक्रमण किया और महाराजा रतन सिंह को हराया। हालाँकि इस पूरे हमले की वजह रानी पद्मावती की सुन्दरता भी बताई जाती है, जिसपर अलाउद्दीन मोहित हो गए थे। अन्ततः 28 जनवरी 1303 ई. को सुल्तान चित्तौड़ के क़िले पर अधिकार करने में सफल हुआ।

पद्मावती

राणा रतन सिंह युद्ध में शहीद हुऐ और उनकी पत्नी रानी पद्मावती ने अन्य स्त्रियों के साथ जौहर कर लिया, यह चर्चा का विषय है। अधिकतर इतिहासकार पद्मावती को काल्पनिक पात्र मानते हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि किले पर अधिकार के बाद सुल्तान ने लगभग 30,000 राजपूत वीरों की हत्या करवा दी थी।

सम्पूर्ण उत्तर भारत पर फतेह
उत्तर भारत में खिलजी सेना ने 1299 ई. में जैसलमेर पर जीत हासिल की तो वहीं 1301 ई. में रणथम्भौर पर, 1305-1308 ई. में मालवा पर और 1304 में जालौर में विजय हासिल की। उत्तर भारत की विजय के बाद अलाउद्दीन खिलजी ने दक्षिण भारत की और अपना रुख किया।

दक्षिण भारत में अलाउद्दीन खिलजी का साम्राज्य विस्तार
अलाउद्दीन के दक्षिण विजय का मुख्य श्रेय मलिक काफ़ूर को जाता है। मलिक काफ़ूर ने ही दक्षिण भारत के सभी विजय अभियानों की अगुवाई की थी।

1306 ई में अलाउद्दीन खिलजी ने मलिक काफ़ूर के नेतृत्व में एक बड़ी सेना को देवगिरि के राजा रामचन्द्र देव पर आक्रमण करने के लिए भेजा। युद्ध के बाद राजा रामचन्द्र ने आत्मसर्पण कर दिया।

1310 ई में जब मलिक काफ़ूर तेलंगाना राज्य के वारंगल पहुँचे तो वहां के राजा रुद्रदेव ने अपनी सोने की मूर्ति बनवाकर उसके गले में एक सोने की जंजीर डालकर आत्मसर्पण स्वरूप मलिक काफ़ूर के पास भेजा, साथ ही 100 हाथी, 700 घोड़े, अपार धन राशि और वार्षिक कर देने के वायदे के साथ अलाउद्दीन खिलजी की अधीनता स्वीकार कर ली।

वारंगल के बाद 1311 ई में मलिक काफ़ूर ने कर्नाटक के होयसल के शासक वीर बल्लाल तृतीय को आत्मसर्पण करने पर मज़बूर किया। मलिक काफ़ूर ने दक्षिण भारत के बड़े हिस्से को जीता लिया और कत्लेआम अथवा लूट-पाट की। उसने भारत के कई प्रसिद्ध मंदिरों (रामेश्वरम) को भी तुड़वा दिया।

मंगोलों को किया परास्त
अलाउद्दीन ने मंगोल को जालंधर (1298), किली (1299), अमरोहा (1305) और रवि (1306) की लड़ाइयों में हराया। जब मंगोल सैनिकों में से कुछ एक ने विद्रोह किया, तो अलाउद्दीन के प्रशासन ने विद्रोहियों को क्रूर दंड दिया, उनके परिवारों और उनके बच्चों की हत्या उनकी माताओं के सामने कर दी गई।

27/08/2021
05/08/2021

Copatetive class like, police, ssc, railwey, si etc.

01/08/2021

🏜 भारतीय कला एवं संस्कृति 🏜

🕌 कोणार्क मंदिर 🕌

🔸 कोणार्क सूर्य मंदिर पूर्वी ओडिशा के पवित्र शहर पुरी के पास स्थित है।

🔹 इसका निर्माण राजा नरसिंहदेव प्रथम द्वारा 13वीं शताब्दी ((1238-1264 ई) में किया गया था। यह गंग वंश के वैभव, स्थापत्य, मज़बूती और स्थिरता के साथ-साथ ऐतिहासिक परिवेश का प्रतिनिधित्व भी करता है।

🔸 मंदिर को एक विशाल रथ के आकार में बनाया गया है। यह सूर्य भगवान को समर्पित है। इस अर्थ में यह सीधे भौतिक रूप से ब्राह्मणवाद और तांत्रिक विश्वास प्रणालियों से जुड़ा हुआ है।

🔹 कोणार्क के मंदिर न केवल अपनी स्थापत्य की भव्यता के लिये बल्कि मूर्तिकला कार्य की गहनता और प्रवीणता के लिये भी जाना जाता है।

🔸 यह कलिंग वास्तुकला की उपलब्धि का सर्वोच्च बिंदु है जो अनुग्रह, खुशी और जीवन की लय को दर्शाता है।

🔹 इसे वर्ष 1984 में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था।

🔸 कोणार्क सूर्य मंदिर के दोनों ओर 12 पहियों की दो पंक्तियाँ हैं। कुछ लोगों का मत है कि 24 पहिये दिन के 24 घंटों के प्रतीक हैं, जबकि अन्य का कहना है कि 12-12 अश्वों की दो कतारें वर्ष के 12 माह की प्रतीक हैं।

🔹 सात घोड़ों को सप्ताह के सातों दिनों का प्रतीक माना जाता है।

🔸 समुद्री यात्रा करने वाले लोग एक समय में इसे 'ब्लैक पगोडा' कहते थे, क्योंकि ऐसा माना जाता था कि यह जहाज़ों को किनारे की ओर आकर्षित करता है और उनको नष्ट कर देता है।

🔹 कोणार्क ‘सूर्य पंथ’ के प्रसार के इतिहास की अमूल्य कड़ी है, जिसका उदय 8वीं शताब्दी के दौरान कश्मीर में हुआ, अंततः पूर्वी भारत के तटों पर पहुँच गया।

21/07/2021

Math teacher for competitive exam like, polic e, ssc,,

21/07/2021

प्रिय
छात्र/छात्राओं,
शासन के निर्देशानुसार
आपकी आफलाइन कक्षाओं के लिए रजिस्ट्रेशन 26 जुलाई से प्रारंभ हो रहा है, कक्षाएं नियमित रूप से 1अगस्त से प्रारंभ होगी| शासनादेशानुसार किसी भी विद्यार्थी या शिक्षक के वैक्सीन नही लगी है तो कक्षा में प्रवेश वर्जित है,अतःजो वैक्सीन भी वैक्सीन नहीं लगवाये है तो जल्द से जल्द वैक्सीन लगवाए, क्लास में प्रवेश ले, और अपने लक्ष्य की प्राप्ति करे|
धन्यवाद
ध्यान एकेडमी बिरसिंहपुर6263680835

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