Agrawal institute of Commerce & tally

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27/06/2024

प्रवीण भारती नाम के एक अध्यापक थे। वह प्राइमरी के बच्चों को पढ़ाते थे, उनका विद्यालय गाँव से 7 किलोमीटर दूरी पर था। विद्यालय के आसपास की जगह एकदम सुनसान और वीरानी थी।

उनके गाँव से विद्यालय तक पहुँचने का साधन यदा कदा ही मिलता था, तो वह अध्यापक अक्सर लिफ्ट मांग के ही काम चलाते थे और कभी लिफ्ट ना मिले तो "प्रभु के दिये दो पैर, भला किस दिन काम आएँगे" यह सोचकर निकल पड़ते।

प्रवीण जी रोज परेशान होकर जब लिफ्ट माँगने के लिए खड़े होते थे, तब यह सोचा करते कि "कैसे उजड्ड वीराने में विद्यालय खोल रखा है सरकार ने, इससे भला तो चुंगी पर परचून की दुकान खोल लेता।"

रोज की परेशानी से छुटकारा पाने के लिए प्रवीण जी ने थोड़े-थोड़े पैसे इकट्ठे कर चेतक कंपनी का एक नया चमचमाता स्कूटर खरीदा। बिना वाहन के खुद ने इतनी परेशानी उठाई थी, इस वजह से प्रवीण जी ने एक प्रण लिया कि वह कभी किसी को लिफ्ट के लिए मना नहीं करेंगे।

आखिर वह जानते थे कि जब कोई लिफ्ट के लिए मना करता है तो, कितनी शर्मिंदगी महसूस होती है। अब प्रवीण जी रोज अपने चमचमाते स्कूटर से विद्यालय जाते और रास्ते मैं रोज कोई न कोई उनसे लिफ्ट मांगता और उनके साथ जाता। लौटते वक्त भी कोई न कोई उन्हें मिल ही जाता।

एक दिन जब प्रवीण जी विद्यालय से लौट रहे थे, रास्ते में एक व्यक्ति परेशान-सा लिफ्ट के लिये हाथ फैला रहा था, और अपनी आदत के अनुसार प्रवीण जी ने स्कूटर रोक दिया। वह व्यक्ति बिना कुछ बोले उनके स्कूटर के पीछे बैठ गया। थोड़ा आगे चलते ही उस व्यक्ति ने छुरा निकाला और प्रवीण जी की पीठ पर लगा कर बोला "जितना रुपया है वह और ये स्कूटर मेरे हवाले कर दो।"

यह धमकी भरी बात सुनकर प्रवीण जी की सिट्टी पिट्टी गुम हो गई। डर के मारे बेचारे प्रवीण जी ने स्कूटर रोक दिया। पैसे तो उनके पास ज्यादा थे नहीं, परंतु प्राणों से प्यारा, पाई-पाई जोड़ कर खरीदा स्कूटर था। स्कूटर की चाबी देते हुए प्रवीण जी बोले, "एक निवेदन है।"

वह व्यक्ति गुस्से में बोला, "क्या?"

प्रवीण जी ने विनती करते हुए कहा कि, "तुम कभी किसी को ये मत बताना कि यह स्कूटर तुमने कहाँ से और कैसे चोरी किया है, विश्वास मानो मैं भी रिपोर्ट नहीं लिखाउँगा।"

वह व्यक्ति बड़ी हैरानी से उनसे पूछने लगा "क्यों?"

मन के अंदर डर और चेहरे पर उदासी के साथ प्रवीण जी बोले, "यह रास्ता बहुत उजड्ड है, निरा वीरान है। सवारी मिलती नहीं, उस पर ऐसे हादसे होने लगे तो आदमी बिचारा लिफ्ट देना ही छोड़ देगा।"

प्रवीण जी की भावुक बातें सुनकर उस व्यक्ति का दिल पिघलने लगा। उसे प्रवीण जी भले मानुष प्रतीत हुए, पर पेट तो पेट होता है। "ठीक है" कहकर वह व्यक्ति स्कूटर लेकर वहाँ से चला गया।

अगले दिन जब प्रवीण जी सुबह-सुबह अखबार उठाने दरवाजे पर आए, दरवाजा खोला, तो क्या देखते हैं, स्कूटर सामने खड़ा था। प्रवीण जी की खुशी का तो ठिकाना न रहा, दौड़ कर गए और अपने स्कूटर को बच्चे जैसा प्यार करने और सहलाने लगे, देखा तो उसमें एक कागज भी लगा था।

कागज उठा के प्रवीण जी ने देखा तो उसमें लिखा था कि " मास्साब, यह मत समझना कि तुम्हारी बातें सुन मेरा हृदय पिघल गया।

कल मैं तुम्हारा स्कूटर लूट कर उसे गाँव ले गया, सोचा भंगार वाले के पास बेच दूँगा। जैसे ही भंगार वाले ने उस स्कूटर को देखा। इससे पहले कि मैं कुछ कहता वह एकदम से बोल उठा, "अरे ये तो मास्साब का स्कूटर है।"

अपने आप को बचाने के चक्कर में मैंने उस भंगारी से कहा, "अरे, मास्साब ने मुझे बाज़ार कुछ काम से भेजा है।" शायद उस व्यक्ति को मुझ पर शक-सा हो गया था।

वहाँ से बचकर निकलने के बाद फिर मैं एक हलवाई की दुकान गया, जोरदार भूख लगी थी तो सोचा कुछ सामान ले लिया जाए। जैसे ही हलवाई की नजर स्कूटर पर पड़ी एकदम से बोल उठा, "अरे ये तो मास्साब का स्कूटर है।" यह सुनकर मैं घबरा गया और हड़बड़ाहट में बोल उठा, "हाँ, उन्हीं के लिये तो ये सामान ले रहा हूँ, घर में कुछ मेहमान आये हुए हैं।" जैसे तैसे वहाँ से भी बच निकला।

फिर मैंने सोचा की गाँव से बाहर जाकर कहीं इसे बेच आता हूँ। अभी थोड़ी दूर निकला ही था कि शहर के नाके पर एक पुलिस वाले ने मुझे पकड़ लिया और गुस्से में मुझसे पूछने लगा कि "कहाँ, जा रहे हो? और ये मास्साब का स्कूटर तुम्हारे पास कैसे आया?" किसी तरह उससे भी बहाना बनाया और वहाँ से भाग निकला।

भागते भागते मैं अब थक चुका हूँ।

मास्साब तुम्हारा यह स्कूटर है या आमिताभ बच्चन। सब इसे पहचानते हैं। आपकी यह अमानत मैं आपके हवाले कर रहा हूँ, इसे बेचने की न मुझमें शक्ति बची है, न हौसला। आपको जो तकलीफ हुई उसके लिए मुझे क्षमा कर दीजिएगा और तकलीफ देने के एवज में मैंने स्कूटर का टैंक फुल करा दिया है। "

यह पत्र पढ़, आखरी में प्रवीण जी मुस्कुरा दिए और बोले, "कर भला तो हो भला।

"यदि आप नेक दिल हैं तो आपके आस-पास के लोग अवश्य ही आनंद का अनुभव करेंगे।"

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02/08/2023

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