12/04/2026
निजी विद्यालयों पर आरोप या शिक्षा व्यवस्था पर प्रहार? सच को समझना ज़रूरी है।
वर्तमान समय में कुछ स्वयंभू समाजसुधारक निजी विद्यालयों, उनके शिक्षकों और संचालकों के प्रति अमर्यादित भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। यह न केवल अनुचित है, बल्कि हमारी शिक्षा व्यवस्था पर सीधा आघात भी है।
सोचने वाली बात यह है कि क्या किसी निजी विद्यालय ने अभिभावकों को जबरन अपने यहाँ नामांकन के लिए बाध्य किया है? क्या डर या दबाव के माध्यम से शिक्षा दी जा रही है? क्या प्रवेश के समय शुल्क और सुविधाओं की पूरी जानकारी नहीं दी जाती? यदि इन सभी प्रश्नों का उत्तर “नहीं” है, तो फिर यह विरोध और अपमान क्यों?
निजी विद्यालय केवल शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि अनुशासन, संस्कार और प्रतिस्पर्धात्मक माहौल भी प्रदान करते हैं। यदि किसी अभिभावक को शुल्क देने में कठिनाई होती है, तो सरकारी विद्यालयों का विकल्प हमेशा उपलब्ध है, जहाँ शिक्षा के साथ-साथ भोजन, पुस्तकें और अन्य सुविधाएँ निःशुल्क प्रदान की जाती हैं।
लेकिन जब कुछ अभिभावक पूरे सत्र की पढ़ाई के बाद भी शुल्क का भुगतान नहीं करते और शिक्षकों या विद्यालय प्रबंधन के साथ दुर्व्यवहार करते हैं, तब ये तथाकथित समाजसेवी चुप क्यों रहते हैं? यह दोहरा मापदंड समाज के लिए चिंताजनक है।
इसके अलावा, जब सरकारी व्यवस्थाओं—जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य या अन्य सेवाओं—में कमियाँ सामने आती हैं, तब ये आवाज़ें क्यों नहीं उठतीं? जब बाज़ार में पुस्तकों के दाम अनावश्यक रूप से बढ़ते हैं, तब इस पर सवाल क्यों नहीं किए जाते?
आज स्थिति यह है कि विद्यालय प्रबंधन, जो पहले छात्रों के विकास पर ध्यान केंद्रित करता था, अब अपना समय भ्रांतियों और आरोपों का जवाब देने में लगा रहा है। इसका सीधा असर विद्यार्थियों और अभिभावकों दोनों पर पड़ रहा है।
यदि इन लगातार आरोपों से आहत होकर निजी विद्यालय बंद होने लगें, तो क्या ये समाजसुधारक हजारों बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी लेंगे? क्या प्रशासन इतनी बड़ी जिम्मेदारी तुरंत संभाल पाएगा?
यह भी सत्य है कि निजी विद्यालयों के उत्कृष्ट परिणाम न केवल अभिभावकों, बल्कि पूरे क्षेत्र और प्रशासन का गौरव बढ़ाते हैं। शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अतः सभी अभिभावकों से विनम्र आग्रह है कि वे किसी के बहकावे में आकर अपने बच्चों के भविष्य के साथ समझौता न करें। तथ्यों को समझें, विवेकपूर्ण निर्णय लें और शिक्षा के हित में सही पक्ष का समर्थन करें।
आइए, मिलकर एक सकारात्मक, सम्मानजनक और मजबूत शैक्षिक वातावरण का निर्माण करें।
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