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13/03/2022

THE ART OF THINKING IN SYSTEMS

Steven Schuster

The Elements of Systems Thinking अगर हिस्ट्री पर नजर डाले तो हम देख सकते है कि ज्यादातर लोग पिछली बातों से कोई सबक नहीं लेते क्योंकि वो इवेंट्स को सिस्टम के टर्म में देख नहीं पाते है. जैसे मान लो अगर कोई सिविलाईजेशन बर्बाद हो रही है तो लोग क्या करते है कि वो लीडर बदल देते हैं और एक नया लीडर चुन लेते हैं. लेकिन सिर्फ लीडर चेंज करने भर से आप एक नई और बैटर सोसाईटी नहीं बना सकते जब तक कि आप पुराने सिस्टम या पैटर्न को चेंज नहीं करते. अगर आपको वाकई में चेंज लाना है तो पहले सिस्टम और पैटर्न को बदलो. जिसे हम सिस्टम बोलते है, उसमे तीन इम्पोर्टेंट पार्ट होते है. पहला, elements है, ये वो वेरिएबल्स हैं जो एक सिस्टम बनाने में इम्पोर्टेंट रोल निभाते है. दूसरा, हर सिस्टम में इंटरकनेक्शन होते है, जो ऐसे रिलेशनशिप है जो अलग-अलग elements को कनेक्ट करते हैं. तीसरा, हमारा एक फंक्शन या पर्पज है जिसके लिए हर सिस्टम क्रिएट किया गया है.

जैसे अगर हम ह्यूमन बॉडी को एक सिस्टम की तरह ले तो हम देख सकते है कि इसके अलग-अलग organ जैसे ब्रेन, लंग्स और हार्ट वगैरह इसके element है. इंटरकनेक्शन वो कनेक्शन है जो हर ऑर्गन को दूसरे से जोड़ता है. ये कनेक्शन ब्लड या ऑक्सीजन का नेचुरल फ्लो हो सकता जब हम इन कनेक्शंस के फंक्शन की बात करे तो हमें पता चलेगा कि ब्लड और ऑक्सीजन का फ्लो बॉडी के हर पार्ट तक एनर्जी और न्यूट्रीशियन पहुंचाने का इम्पोटेंट रोल प्ले करते है.हम एक और एक्जाम्पल ले सकते है स्कूल का बात अगर स्कूल की हो तो हम नोटिस कर सकते है कि इसके element है स्टूडेंट्स, टीचर्स और स्टाफ मेंबर्स स्कूल के इंटरकनेक्शन वो रूल्स है जो इन सारे लोगों के बीच आपसी रिलेशनशिप को गाइड करते है. एक element को दूसरे element के साथ किस तरह कम्यूनिकेट करना चाहिए, यही ये रूल्स बताते हैं.

स्कूल सिस्टम के पर्पज के लिए हमें पता चलेगा कि स्कूल एक ऐसी ऑर्गेनाईजेशन है जो इसलिए बनाये गए है ताकि स्टूडेंट्स को वैल्यूएबल स्किल्स और नॉलेज दी जा सके और उन्हें फ्यूचर के अलग-अलग जॉब के लिए तैयार किया जा सके.

अगर आप किसी सिस्टम में बड़ा बदलाव चाहते हो तो आपको भी उसके इंटरकनेक्शंस को पहचानकर नया शेप देना होगा. elements को चेंज करना ईज़ी है क्योंकि ये दिखाई देते है और आसानी से बदले जा सकते है. कनेक्शंस को चेंज करना हालाँकि मुश्किल होता है क्योंकि कई बार डीप इंटरकनेक्शंस ढूंढना काफी मुश्किल होता है जिसे ढूँढने में बड़ी मेहनत लगती है.

किसी सिस्टम के पर्पज को बदलने से भी काफी बड़ा इम्पैक्ट पड़ सकता है. तो अगर आप भी किसी सिस्टम को बदलना चाहते हो तो सिर्फ elements को चेंज करने पर फ़ोकस मत करो बल्कि और गहराई में जाकर इंटरकनेक्शंस और सिस्टम के पर्पज को चेंज करने की कोशिश करो.

10/03/2022

THE ART OF THINKING IN SYSTEMS

Steven Schuster

इंट्रोडक्शन

क्या आप भी उन लोगों में से है जो हमेशा अपनी परेशानियों से निज़ात पाने के रास्ते ढूंढते है पर परेशानियां है कि कभी खत्म ही नहीं होती? क्या आपको लगता है कि लाइफ में इम्प्रूवमेंट लाने के लिए

अपनी सोच को बदलना भी जरूरी है?

वेल, अगर यही बात है तो हम आपको बता दें कि इस बुक के ऑथर स्टीवन शूस्टर भी अपनी पर्सनल लाइफ में यही प्रॉब्लम फेस कर चुके है इसलिए इस बुक में उन्होंने लाइफ • जुड़ी हर प्रॉब्लम का सोल्यूशन दिया है.

इसमें आप सीखोगे कि कैसे अपने सोचने के ट्रेडिशनल तरीके को चेंज करके एक बैटर सोचने के तरीके को अपनाया जाए ताकि आप अपनी लाइफ की प्रॉब्लम को पहले से बैटर और नए तरीके से सुलझा सके. आपकी नई मेंटलिटी आपको लाइफ को एक अलग नज़रिए से देखने में हेल्प करेगी, और आप लाइफ की हर प्रॉब्लम के लिए एक परमानेंट और बैटर सोल्यूशन ढूंढ पायेंगे और आप अपनी लाइफ के हर नेगेटिव पहलू को इम्प्रूव कर पाएंगे. आप 5 तरह की थिंकिंग के बारे में और बड़ी मुश्किलों को सोल्व करने के लिए ईवोल्व होने के बारे में सीखोगे. आपको एक चेकलिस्ट भी मिलेगी जिससे आप चेक कर सकते हो कि आपकी प्रॉब्लम कितनी बड़ी है.

ये समरी ना सिर्फ टेम्परेरी चेंज ऑफर करेगी बल्कि आपको ऐसे टिप्स भी देगी जो आपकी लाइफ को हमेशा के लिए बदल कर रख देगी.What Is Systems Thinking इससे पहले कि हम ये जाने कि सिस्टम्स थिंकिंग क्या है, ये जानना ज्यादा इम्पोर्टेंट है सिस्टम वर्ड का मतलब क्या है. सिस्टम का मतलब आपस में जुड़े हुए प्रोसीजर का एक सेट जो एक ख़ास पैटर्न फॉर्म करने के लिए मिलकर काम करता है. सिस्टम हमेशा एक ही रिजल्ट देते हैं. इसलिए अपने टास्क का सिस्टम चेंज करके आप रिजल्ट भी चेंज कर सकते हो. सिस्टम्स थिंकिंग एक कांसेप्ट है जिसे सबसे पहले 1987 में बैरी रिचमंड ने इंट्रोड्यूस किया था. ये एक आर्ट है उन सिस्टम्स को समझने के लिए जो हम किसी टास्क को करने के लिए फॉलो करते है. इन सिस्टम्स को समझकर ही हम बैटर रिजल्ट के लिए जरूरी चेंजेस ला सकते है.

सिस्टम्स थिंकिंग इम्पोर्टेंट है क्योंकि इससे हम अपनी कुछ प्रॉब्लम परमानेंटली सोल्व कर पायेंगे. अगर हम अपनी सोसाईटी के मुद्दों पर नज़र डाले, जैसे कि एडिक्टिशन यानी नशे की लत वगैरह तो हम नोटिस कर सकते है कि ये प्रॉब्लम हमारी लाइफ को किस हद तक अफेक्ट करते है. तो दुनिया को समझने के लिए एक न्यू नज़रिए को फॉलो करके हम सिस्टम की पहचान कर सकते हो. हम इन अलग-अलग कारणों और उसके इफेक्ट्स के बीच के कनेक्शन को स्टडी करके भी अपने कई प्रॉब्लम सोल्व कर सकते हैं.

किसी भी नई हैबिट की तरह सिस्टम्स थिंकिंग एक स्किल है जिसे टाइम के साथ डेवलप किया जा सकता है. जब भी आपके सामने कोई प्रॉब्लम आये तो इवेंट्स के बीच स्मार्ट और क्रिएटिव कनेक्शन बनाने के लिए आपको "what if यानी क्या होगा अगर" पूछने की आदत डालनी पड़ेगी. प्रॉब्लम सोल्व करने के लिए जो भी पहला सोल्यूशन तुरंत आपके माइंड में आये, उसे रोकने के लिए आपको ख़ुद conscious होकर प्रेक्टिस की जरूरत पड़ेगी. whatif गेम अलग-अलग प्रॉब्लम के आउट ऑफ़ द बॉक्स और क्रिएटिव सोल्यूशन निकालने के लिए काम आता है. चलिए हम कुछ एक्जाम्पल लेते है जिससे हम सिस्टम्स थिंकिंग को और बैटर वे में समझ सके. स्टीवन शूस्टर, जो इस बुक के ऑथर है, पहले एक टीचर हुआ करते थे. अपनी टीचिंग अप्रोच के लिए वो हमेशा ही लाइव डेमोस्ट्रेशन यूज़ किया करते थे ताकि वो अपने स्टूडेंट्स को न्यू कॉन्सेप्ट ईज़िली समझा सके.

एक दिन वो जब फिजिक्स की क्लास ले रहे थे तो स्टीवन ने डिसाइड किया कि वो अपने स्टूडेंट्स को समझाने के लिए बूमरैंग लेकर आयेंगे. बूमरैंग एक बॉक्स के अंदर रखा था, स्टीवन ने बूमरैंग हाथ में लेते ही तुरंत उसे फेंक दिया और वो वापस उनके पास लौट आया.

स्टीवन ने अपने स्टूडेंट्स से पूछा" बताओं बूमरैंग वापस क्यों आया? तो स्टूडेंट्स बोले" क्योंकि आपने उसे फेंक दिया था सर". इस पर स्टीवन ने बूमरैंग बॉक्स को उठा लिया और उसी फ़ोर्स और उसी टेक्नीक के साथ उसे भी फेंका लेकिन बॉक्स वापस नहीं आया बल्कि कुछ दूर जाकर जमीन पर गिर गया.

स्टीवन ने अब स्टूडेंट्स से पूछा" ये बॉक्स वापस क्यों नहीं

सआया, मैंने तो इसे बूमरैंग की तरह ही फेंका था?' स्टूडेंट्स जब इस सवाल का जवाब नहीं दे पाए तो स्टीवन ने एक्सप्लेन किया कि जिस तरीके से उन्होंने बूमरैंग और बॉक्स दोनों को फेंका था, उसका उनके हवा में उछलने से कोई लेना-देना नहीं था बल्कि उनके स्ट्रक्चर का फर्क था जिसकी वजह से बूमरैंग लौट कर आया था जबकि बॉक्स जमीन पर गिर गया था. बूमरैंग घुमावदार और फ्लैट शेप का है इसलिए हवा में फेंकते ही ये वापस आ गया था. सिस्टम्स थिंकिंग भी ऐसी ही है. स्ट्रक्चर कैसे काम करते है और चीज़े किस तरीके से बनी है, अगर हमने ये समझ लिया तो हम कुछ जरूरी चेंजेस ला सकते है जिससे कि हम उनके बिहेव करने के तरीकों पर कुछ हद तक कण्ट्रोल पा सकते hai

02/03/2022

Part 6
Superhuman By Habit- A Guide to Becoming the B... Tynan
Conclusion
सबसे पहले, आपने आदत के मतलब और उसकी ताकत के बारे में जाना। जब किसी काम को बार-बार किया जाता है तो वो आपकी आदत बन जाती है और ये आपके जीवन को देखने का नज़रिया बदल देती है। आदतों में इतनी ताकत होती है कि वे आपके जीवन को बदल सकती हैं।

दूसरा, इस समरी ने आपको अपने जीवन में बदलाव लाने की ताकत दिखाई और यह जीवन भर की आदत बनाने से होता है। आपने यह भी सीखा कि आपको आदतों को बार-बार अप्लाई क्यों करना चाहिए।

आपने यह भी जाना कि अगर आप अपनी आदत को 2 दिन के लिए भी छोड़ देते हैं तो आप अपनी स्पीड खो सकते हैं। स्पीड खोने से आप आदतों को आसानी से भूल जाएंगे।

तीसरा, आपने सीखा कि अपनी आदतों को बनाने और पहचानने के लिए किस तरह ईमानदारी और कॉन्फिडेंस इम्पोर्टेन्ट फैक्टर हैं। उनके बिना, आप कभी नहीं समझ पाएंगे कि आपको किन आदतों को बदलने की जरूरत है।

चौथा, आपने आदत बनाने में मोटिवेशन के महत्व के बारे में जाना। आपने सीखा कि चार सवालों के द्वारा अपनी मोटिवेशन को कैसे ढूंढे- अगर मैं इस आदत को अप्लाई करूं तो क्या-क्या अच्छा होगा? अगर मैं इस आदत को अप्लाई करूं तो क्या-क्या बुरा होगा? अगर मैं इस को अप्लाई नहीं करता तो क्या क्या अच्छी चीजें होंगी? अगर मैं इस आदत को अप्लाई नहीं करता तो क्या-क्या बुरी चीजें होंगी?

आपको यह पक्का करने की ज़रूरत है कि आप अपने पर्सनल और प्रोफेशनल जीवन को बनाए रखते हुए अपनी आदत रख सकते हैं। इस तरह, जब आप अपनी आदत को बनाए नहीं रख पाएंगे, तो आप नेगेटिव सोचना बंद कर देंगे।

अंत में, आपको पता चला कि आदत कैसे शुरू करें। आपको अपने जीवन में ऐसे फैक्टर्स पर विचार करना चाहिए जो आपकी आदत की परफॉरमेंस पर असर डाल सकते हैं। इसीलिए आपको आसान और बार-बार शुरुआत करने की जरूरत है। ऐसे समय और रूटीन में शुरुआत करें जिसे आप मैनेज कर पायें। आप इसकी जितनी ज़्यादा प्रैक्टिस करेंगे, आपको इसकी उतनी ही आदत हो जाएगी। आपके लिए अपने पुराने जीवन से नए जीवन में जाना और भी आसान हो जाएगा।

याद रखें कि बदलाव रातों-रात नहीं होता है। बेहतर होना हर रोज का चुनाव है। आपमें किस चीज की कमी है इस बात पर फोकस करने के बजाय आपको इस बात पर ध्यान देने की कोशिश करनी चाहिए कि इसे अच्छा बनाने के लिए आप क्या कर सकते हैं। जब तक आप कोशिश कर रहे हैं, तब तक ऐसा कुछ भी नहीं है जो आप नहीं कर सकते।

27/02/2022

Part 5
Superhuman By Habit- A Guide to Becoming the B... Tynan
Start Easy and Often आदतें बनने में बहुत समय लगता है। यह रातों-रात या एक हफ्ते में नहीं बनाई जा सकती। इसे पूरा करने में कई हफ्ते, और यहां तक की महीने भी लग जाते हैं। हालांकि, इम्पोर्टेन्ट ये है कि यह लंबे समय तक बनी रहे। आप अपनी आदतों की जितनी ज़्यादा प्रैक्टिस करते हैं, उतने ही ज्यादा चांस है कि वह आदत जीवन भर आपके साथ बनी रहेगी। यह बात ध्यान रखनी जरूरी है कि आदतों को धीरे-धीरे और आसान तरीके से बनाया जाना चाहिए। ज्यादा अच्छा तो यह है कि आप अपने कामों को अच्छी तरह मैनेज करें और फिर अपने तरीके से शुरुआत करें। अगर शुरुआत में ऐसे गोल बना लिए जाते हैं जिनके साथ ढलने में बहुत ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है तो हो सकता है कि आपकी मोटिवेशन बीच में ही खो जाए यानी अगर हम आदत बनाने की शुरुआत बहुत मुश्किल रूटीन से करते हैं तो हम ज्यादा समय तक उस रूटीन को निभा नहीं पाएंगे।

आदत बनाने की चाबी यह नहीं है कि इसे बहुत ज़्यादा मेहनत के साथ किया जाए बल्कि आदत बनाने के लिए तो इसे बार-बार करना जरूरी है। भले ही आप छोटी शुरुआत करें, लेकिन जब तक आप इसे हर दिन करते हैं, तब तक आप आगे बढ़ने की दिशा में अच्छा कर रहे हैं।

यहां तक कि आदत बनाना अपने आप में एक आदत मानी जा सकती है। अपने ग्रोथ और इम्प्रूवमेंट के लिए लगातार खोज में लगे रहना भी एक आदत है। यानी आपको यह सोचने की आदत बनानी चाहिए कि आपकी ग्रोथ किन-किन तरीकों से हो सकती है और आप किस तरह खुद में सुधार कर सकते हैं।
आपको अपनी आदत बनाने की आदत को ज्यादा से ज्यादा बढ़ाना चाहिए। इसके लिए आपको उन चीजों को ध्यान में रखना चाहिए जो आपको मुश्किल लगती हैं। बदलाव करना कभी भी आसान नहीं होता। शुरुआत में तो ऐसा होगा कि आप अपनी सारी विल पावर अच्छी आदत बनाने में लगा देंगे।

कुछ भी गलत होने पर ज्यादातर लोग हार मान लेते हैं। लेकिन मुश्किल समय में आगे बढ़ना आपके लिए जरूरी है। अच्छी आदतें बनाना हमेशा मुश्किल होगा। मुश्किल चीज तब आसान बन जाती है जब आपको उसकी आदत हो जाती है।

जब आप कोई आदत शुरू करना चाहते हैं, तो इसे शांति से करना याद रखें। यानी आदत शुरू करते समय जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। टिफ़नी ने यह सबक तब सीखा जब उसने अपनी आदत बनाई थी।

टिफ़नी ने यूनिवर्सिटी में अपना पहला साल शुरू किया। वह कुछ नया करना चाहती थी और अपनी पढ़ाई की आदत में भी सुधार करना चाहती थी। इसके साथ ही वह अच्छी सेहत के लिए भी कोशिश करते रहना चाहती थी। वहां एक नए स्टूडेंट के लिए बहुत सारी एक्टिविटी थी । वो उन सब को आजमाना चाहती थी। टिफनी को लगता था कि उसे उसके कॉलेज के एक्सपीरियंस हमेशा याद रहेंगे और वह इनमें एक को भी छोड़ना नहीं चाहती थी। हालांकि वह पढ़ाई के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहती थी।

वह पढ़ती थी, एक्सरसाइज़ करती थी और अपने दोस्तों के साथ बाहर जाती थी। लेकिन टिफनी ने गौर किया कि वह बहुत बार एक्सरसाइज़ छोड़कर बाहर चली जाती थी। यानी उसे एक्सरसाइज़ करने से ज़्यादा बाहर घूमना पसंद था। यूनिवर्सिटी में काम का बहुत बोझ था और वह इससे बहुत घबरा गई थी। पढ़ाई के साथ-साथ एक्सरसाइज़ करना उसे मुश्किल लगता था। तब टिफनी को एक्सरसाइज़ करने से थकान होने लगी। वह इतना थक जाती थी कि अपने असाइनमेंट भी पूरे नहीं कर पाती थी। उसने अपना जिम छोड़ने और एक्सरसाइज़ बंद करने का फैसला किया। हालाँकि, उसने दूसरे स्टूडेंट्स को देखा कि वे एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज के साथ-साथ अपनी आदतों का भी तालमेल बैठा रहे थे। यानी दूसरे स्टूडेंट्स पढ़ाई के साथ साथ दूसरी एक्टिविटीज को भी समय दे रहे थे।

टिफ़नी ने एक्सरसाइज़ करने का दोबारा फैसला किया। लेकिन इस बार उसने समय और अपनी ताकत को ध्यान में रखकर लिमिटेड एक्सरसाइज़ किया। टिफनी ने धीरे धीरे अपने स्टूडेंट जीवन के साथ तालमेल बैठाते हुए एक्सरसाइज़ करने का रूटीन बनाया। हालांकि यह एक बेहतरीन रूटीन नहीं था। फिर भी वह जैसे-तैसे इसे पूरा कर ही लेती थी। यानी वो अपनी एक्सरसाइज़ के लिए समय निकाल ही लेती थी। इस नई आदत को बनाने के शुरुआती दौर में उसने हद से ज़्यादा एक्सरसाइज़ नहीं की, वो उतना ही एक्सरसाइज़ करती थी जितना उसके पास समय और ताकत दोनों होते थे।

26/02/2022

Part 4
Superhuman By Habit- A Guide to Becoming the B... Tynan
Securing Your Motivation आपको क्या चीज आगे बढ़ाती है? आपके काम करने के पीछे क्या वजह होती है? बेशक वो मोटिवेशन ही है जो आपको आगे बढ़ाती है। आपके जीवन में हमेशा एक ऐसी पावर होती है जो आपको काम करने के लिए मोटीवेट करती है। आप जो भी काम करते हैं उन सब के पीछे कोई ना कोई वजह या मकसद जरुर होता है।

किसी आदत को बनाए रखने के लिए भी आपको मोटिवेशन की ज़रुरत होगी। इसमें आपको ज्यादा excitement की ज़रुरत नहीं है कि आप अपनी आदत पर किस तरह काम करेंगे। लेकिन इसे बनाए रखने के लिए मोटिवेशन का होना बेहद ज़रूरी है।

ऐसा इसलिए क्योंकि जब आपके सामने मुश्किलें आती है तो उस काम को करने के लिए आपका जोश बहुत जल्दी खत्म हो जाता है। लेकिन मुश्किलों के होते हुए भी मोटिवेशन आपको उस आदत को बनाए रखने के लिए पुश करती है।

इसीलिए अपनी मोटिवेशन को समझना और ढूंढ़ना जरूरी है। आखिर आप इसी आदत की ओर क्यों खिंच गए यानी बाकी सभी आदतों को छोड़कर आपको यही आदत क्यों पड़ी। अगर किसी आदत के लिए आपका इरादा पक्का नहीं हैं तो उसे शुरू न करना ही बेहतर है।

अगर आप नई आदतों को आजमाने के चक्कर में फंसेंगे तो उनमें आपका इंटरेस्ट खत्म हो जाएगा और तब इसे छोड़ते हुए आपको बुरा महसूस होगा। यह आपकी हिम्मत को इतना तोड़ देगी कि आप भविष्य में और नई चीजें आजमाना नहीं चाहेंगे । आपको ऐसा भी लग सकता है कि आप fail हो गए हैं। आपको इस बात से चिढ़ भी सकती है कि चीजें वैसे क्यों नहीं हो रही हैं जैसी आप चाहते हैं।
इसलिए ऐसे चक्कर से बचने के लिए खुद से ये सवाल पूछें। सबसे पहले तो ये, कि अगर मैं इस आदत को अप्लाई करता हूं तो क्या-क्या अच्छा होगा? दूसरा, अगर मैं इस आदत को अप्लाई करता हूं तो क्या-क्या बुरा होगा? तीसरा, अगर मैं इस आदत को अप्लाई नहीं करता तो कौन-कौन सी अच्छी चीजें होंगी? चौथा, अगर मैं इस आदत को अप्लाई नहीं करता तो कौन कौन सी बुरी चीजें होंगी?

आप इसे एक कागज पर लिख सकते हैं। इससे आपको अपनी मोटिवेशन को ढूंढने में मदद मिलेगी। आप हर उस पहलू के बारे में सोचें जो हो सकता है और फिर देखें कि क्या आप उसमें ढल सकते हैं। आप इस बात पर विचार करें कि क्या आपके जीवन में उथल-पुथल और दबाव के साथ भी आपकी मोटिवेशन बनी रहेगी यानी बुरी सिचुएशन में भी motivated रहेंगे। आप एक नोट बनाएं और उसमें लिखें कि आपने इस आदत को क्यों चुना है ताकि जब आप किसी मुसीबत में लड़खड़ाएं यानी जब आप कोई तकलीफ देखकर घबरा जाएं तब आप इस नोट को पढ़ें। यह नोट आपको याद दिलाएगा कि आपने इस आदत की शुरुआत क्यों की थी और आज भी इस आदत को बनाए रखना क्यों जरूरी है।

जब ल्यूकस अपने जीवन में बदलाव लाना चाहता था तो उसने बहुत सी आदतें आजमाई। उसने खुद में बदलाव लाने की कोशिश की क्योंकि उसके दोस्त ने उसे बताया कि वह मोटा था । ल्यूकस अपने दोस्त को गलत साबित करने के लिए excited था, और उसने एक्सरसाइज़ करना और डाइट कंट्रोल करना शुरू कर दिया। उसने एक्सरसाइज़ के लिए बहुत से रूटीन आजमाए लेकिन उनमें से किसी भी रूटीन ने उस पर काम नहीं किया। ऐसा इसलिए क्योंकि जब ल्यूकस के लिए उसका रूटीन बनाए रखना बहुत मुश्किल हो जाता था तो वह इसे छोड़ देता था। वह कुछ महीनों के लिए एक्सरसाइज़ करना करना बंद कर देता और फिर इसे दोबारा शुरू करता था। ऐसे समय पर ल्यूकस खुद को हारा हुआ महसूस करता था। वह खुद से पूछता रहता था कि उसके लिए कुछ भी काम क्यों नहीं कर रहा है यानी कोई भी तरकीब पतले होने में उसकी मदद क्यों नहीं कर रही थी ।

ल्यूकस का इंटरेस्ट खो गया था क्योंकि उसने पतले होने में कोई भी प्रोग्रेस नहीं की थी यानी वह बिल्कुल पतला नहीं हुआ था। वह ऐसी सिचुएशन में पहुंच गया था जहां उसने अपना वजन घटाने का सफर बंद कर दिया था। ल्यूकस ने अब और ज्यादा कोशिश करने का झंझट नहीं उठाया क्योंकि वह नई आदतों को बनाने के बारे में नेगेटिव सोचने लगा था. उसे लगने लगा था कि वह कभी अपना वजन कम नहीं कर पाएगा इसलिए उसने पतला होने के लिए कोशिश करना छोड़ दिया।

अगर ल्यूकस के पास सही मोटिवेशन होती, तो उसकी यह आदत जरूर कामयाब होती। उसकी मोटिवेशन का उसके जीवन जीने के तरीके पर बहुत ज्यादा असर पड़ता I example के तौर पर, वह अपनी सेहत के लिए वर्कआउट करना शुरू कर सकता था । वो यह भी सोच सकता था कि एक्सरसाइज़ करना उसे बीमार होने से रोक सकती है और वह ज्यादा समय तक जिंदा रह सकता है। इस बारे में सोचने से ल्यूकस को एक्सरसाइज़ के मुश्किल समय से गुजरने में मदद मिलती यानी अगर ल्यूकस सेहतमंद होने के फायदों के बारे में सोचता और पतले होने की बजाए अच्छी सेहत बनाने के बारे में सोचता तो तो उसकी सेहत पर जरूर पॉजिटिव असर पड़ता।

24/02/2022

Superhuman By Habit- A Guide to Becoming the B... Tynan

Being Honest ईमानदारी खुद को बदलने की चाबी है। खुद को बदलने के लिए ईमानदार होना जरूरी है। अगर आप खुद को बदलना चाहते हैं तो आपके लिए उन चीज़ों को जानना जरूरी है जिनमें आप को सुधार करने की जरूरत है। यानी खुद को बदलने के लिए आपको यह पता होना चाहिए कि आप अपनी किन आदतों को सुधारना चाहते हैं और ऐसा करने के लिए, आपको इस बारे में ईमानदार रहना होगा कि आपके पास किन गुणों की कमी है।

अपनी कमियों को जानने का काम इतना आसान नहीं है जितना कि यह लगता है और कभी कभी तो अपनी कमियों को स्वीकार करना बहुत मुश्किल हो सकता है। जब आप अपनी कमियों को देखते हैं तो एक बार आपके आत्म सम्मान को ठेस पहुँचती है यानी हो सकता है कि आपको उन चीजों के बारे में जानकर बहुत बुरा लगे । इस तरह, ईमानदार होने के लिए खुद पर विश्वास होना सबसे ज्यादा जरूरी बात है।

खुद पर विश्वास आपको आपकी कमियों की पहचान करवाता है । जिन लोगों को खुद के साथ ईमानदार होना मुश्किल लगता है वे दूसरी चीजों में इसकी भरपाई करते हैं। वे अपनी एनर्जी को अलग-अलग चीजों पर लगाते हैं और वहाँ कुछ ज्यादा करके अपनी कमियों को छुपाने की कोशिश करते हैं।

example के लिए, आप जानते हैं कि आप में काम को टालने की बुरी आदत है। आप खुद के प्रति ईमानदार नहीं हैं क्योंकि आप अपने समय को ठीक से मैनेज नहीं करते है। इसलिए जब काम की डेडलाइन पास आ जाती है तो आप बहुत ज्यादा थककर अपना काम जैसे तैसे पूरा करते हैं और इस तरह अपने काम को टालने की आदत की भरपाई करते हैं। यह आदत अच्छी नहीं है। आपको यह स्वीकार करने की जरूरत है कि आप अपने टाइम को खराब तरीके से मैनेज करते हैं।

शुरुआत में आप को ऐसा लग सकता है कि अपनी बुरी आदत को मानने से इन्कार करना बहुत असरदार है। लेकिन बाद में आपको इससे डील करना होगा। अगर आप अपनी बुरी आदतों से निपट लेते हैं तो लंबे समय में आपको इसके अच्छे रिजल्ट मिलेंगे। सिर्फ़ एक चीज जो आपको करने की जरूरत है, वह यह कि जिन बुरी आदतों को आपने पहचान लिया है उन्हें अच्छी आदतों में बदल लें ।

अपनी बुरी आदतों की पहचान करने के बाद, आपको यह सोचना होगा कि उन सारी बुरी आदतों में से सबसे बुरी आदत कौन सी है । इस काम में कोई भी फैसला सही या गलत नहीं होता और इस बात में तो कोई भी शक नहीं है कि आपको अपनी सारी बुरी आदतों को दूर करने की जरूरत है। अब सवाल यह उठता है कि सबसे पहले कौन सी बुरी आदत को दूर करना चाहिए।
[6:37 pm, 23/02/2022] vikesh kumar: आप बड़ी आदतों को अलग रख सकते हैं और छोटी आदतों से आगे बढ़ सकते हैं यानी सबसे पहले आप छोटी आदतों को दूर करने की कोशिश कर सकते हैं। बड़ी आदतों को आसानी से पहचाना जा सकता है। ये ऐसी चीजें होती हैं जो आपके जीवन पर नेगेटिव असर डालती हैं। जब कोई रूटीन आपकी डेली लाइफ पर असर डालना शुरू कर देता है, तो वही उस आदत को बदलने का सही समय है। याद रखिए कि आपको ऐसी आदतें बनानी है जो हमेशा टिकी रहें। ऐसी आदतों से आपको आगे चलकर मिलेगी।

आप छोटी आदत से भी शुरुआत कर सकते हैं और बड़ी आदतों तक अपना रास्ता बना सकते हैं। यानी जब आप अपनी छोटी आदतों को सुधार लेंगे तो बड़ी आदतों को सुधारने में ज्यादा मुश्किल नहीं होगी। ज्यादातर लोग इस तरीके को पसंद करते हैं क्योंकि इससे उनमें यह कॉन्फिडेंस आता है कि वे अपनी बुरी आदतों को सुधार सकते हैं। छोटे-छोटे कामों को पूरा करने से आपको ऊपर की ओर बढ़ने की मोटिवेशन मिल सकती है। आपकी खुद को बदलने की स्पीड आपको बड़ी बड़ी चीजें दिलाने में मदद करेगी। हर एक अचिवेमेंट के साथ आपको बदलने की मोटिवेशन मिलती है। आप आदत बदलने का जो भी तरीका चुनें, वह कुछ ऐसा होना चाहिए जो आपके ऊपर काम करे।

आदतों के बारे में आपने जो कुछ सीखा है उसे अपने जीवन में अप्लाई करना भी जरूरी है। एनी एक कॉलेज स्टूडेंट है और उसने हाल ही में आदत की ताकत के बारे में जाना है।
[6:38 pm, 23/02/2022] vikesh kumar: अपने कॉलेज के पहले साल में उसके पास पढ़ने के लिए या तो बहुत कम मोटिवेशन थी या फिर बिल्कुल नहीं थी और इसका नतीजा यह हुआ की वह शराब पीने और पार्टी करने जैसे बुरे काम करने लगी। उसने सिगरेट पीने जैसी और बहुत सी बुराइयां अपना ली थी। एनी के लिए क्लास पर फोकस करना बहुत मुश्किल था।

एनी ने देखा कि उसका जीवन और attitude कितना ख़राब हो गया है लेकिन वह खुद को ठीक करने का कोई तरीका सोच नहीं पा रही थी यानी वह नहीं जानती थी कि वह अपना जीवन कैसे ठीक करे ।

बदलाव का पहला कदम है कि आप अपनी बुरी आदतों को स्वीकार करें। क्योंकि एनी जानती थी कि कुछ तो है जो सही नहीं है तो यह एक अच्छी शुरुआत थी। हालांकि एनी को खुद के साथ ईमानदार रहने की भी जरूरत थी। उसे उन आदतों पर खास ध्यान देने की जरूरत थी जिन्हें छोड़ना उसके लिए जरूरी था और अगर हम उन आदतों में से कुछ आदतों का नाम लें तो उसे पार्टी करना, शराब पीना और सिगरेट पीना छोड़ने की जरूरत थी।

अगला कदम उस आदत को पहचानने का है जिस पर एनी को सबसे पहले काम करना था। उसे अपनी सभी बुरी आदतों को बदलने की जरूरत थी लेकिन उसे उनमें से किसी एक को छांटकर शुरुआत करने की जरूरत थी। इस बार, एनी ने टॉप-डाउन अप्रोच को चुना। यानी उसने सोचा कि सबसे पहले सबसे ज्यादा बुरी आदत को छोड़ेगी और फिर धीरे-धीरे उससे कम बुरी आदतों को छोड़ती जाएगी। एनी ने देखा कि उसकी पार्टी करने की आदत सबसे बुरी आदत थी जिसे सबसे पहले बदलने की जरूरत थी। वह जानती थी कि उसे पार्टी करना बंद करना पड़ेगा और अपना समय और एनर्जी पढ़ाई पर लगानी पड़ेगी। एक बार जब उसने पार्टी करना बंद कर दिया तो उसकी शराब पीने और सिगरेट पीने की इच्छा भी ख़त्म होने लगी।

23/02/2022

Superhuman By Habit- A Guide to Becoming the B... Tynan

Think Very Long Term सक्सेस की शुरुआत छोटे-छोटे कदमों से होती है। वैसे ही आपका नीचे की ओर गिरना भी आपके छोटे-छोटे एक्शन से होता है। आपको ऐसा लग सकता है कि अभी आप जो कर रहे हैं वह दस साल बाद मायने नहीं रखेगा या आपके छोटे-छोटे एक्शन का कोई महत्व नहीं है। तो आप गलत हैं।

जब आप बार-बार कोई काम करते हैं तो वह आपकी आदत बन जाती है। ये काम कितने ही छोटे क्यों न हों, वे आपके जीवन के लिए इम्पोर्टेन्ट होते हैं और आपके जीवन पर बहुत असर डालते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि ये एक्शन इकट्ठा होते जाते हैं । आप बार-बार जो छोटी-छोटी चीजें करते हैं उनका वजन बढ़ता जाता है।

example के लिए, आप हर रोज़ एक डॉलर बचाते हैं। हो सकता है कि आज आप उस फ़र्क पर ध्यान ना दे पाएं जो इस 1 डॉलर से आपके जीवन पर पड़ रहा है। आपको एक डॉलर की कीमत कम लग रही होगी, लेकिन अगर आप रोज एक डॉलर बचाते रहे तो पांच सालों में आपके पास कुल 1,826 डॉलर होंगे।

इसलिए, आज को और आने वाले कल को देखना जरूरी है। दूर की यानी आगे की सोचने से आपको ऐसी आदतें बनाने में मदद मिलती है जो healthy यानी ज्यादा अच्छी होती हैं। इससे आपको यह चुनाव करने में मदद मिलेगी कि कौन सी आदतें बनाए रखी जाने लायक है।
एक बार जब आप यह पहचान लें कि कौन-कौन सी आदतें बनाने में आपका फायदा है, तो आपको खुद से पक्का वादा कर लेना चाहिए कि आप उन आदतों को बनाकर रखेंगे। आपको अपना दिमाग और दिल इसी में लगाना होगा। आपके जीवन भर की आदत आप पर सबसे ज्यादा असर डालते हैं।

हर रोज 30 मिनट एक्सरसाइज़ करने से आप हर साल थोड़ा ज्यादा सेहतमंद होते जाते हैं। अगर आप आने वाले जीवन में इसे लगातार करते रहते हैं, तो आपको बीमारियों का खतरा कम हो जाएगा। आपके जीवन की quality में भी सुधार होगा। हर दिन 30 मिनट एक्सरसाइज़ करनी चाहिए। इससे आपकी उम्र बढ़ सकती है। छोटी-छोटी आदतों का डोमिनोज़ इफेक्ट होता है यानी छोटी छोटी आदतों का हमारे आने वाले जीवन पर बहुत बड़ा असर पड़ता है।

अच्छी आदतें बनाने के साथ-साथ उनका जीवन में तालमेल भी बनाना चाहिए। यह आपके जीवन का हिस्सा बन जाती है। इसलिए अगर आप अपनी आदतों को बनाए रखना चाहते हैं तो आपको दो बातें हमेशा याद रखनी चाहिए।

पहली बात तो यह है कि अपनी आदत को बार-बार ना बदलें। इसे रियल बनाएँ यानी कुछ ऐसा जो असली जिंदगी में कर पाना मुमकिन हो और जिसे अचीव भी किया जा सके । दूसरी बात यह है की किसी आदत को भूल जाने की गलती से बचें। आपकी प्रोग्रेस जरूरी है क्योंकि अगर आप इसे छोड़ देते हैं, तो रूटीन बनाने से आपको अब तक जो फायदा हुआ है वह सब बेकार हो जाएगा। यह बात याद रखना जरूरी है की जब आप आदतों को

बनाए रखते हैं तो वे आपके जीवन में पॉजिटिव असर डालते है। आपको यह जान लेना चाहिए कि सभी आदतें पॉजिटिव नहीं होती हैं, कुछ आदतें नुकसानदायक भी होती हैं।

यह बात इस कहानी से भी देखी जा सकती है जिसमें जॉनी ने अपने फ्यूचर को ध्यान में रखा और कैसे सही आदतों का चुनाव किया । ऐसा करके उसने अपने जीवन को पॉजिटिव तरीके से बदला। जब जॉनी बड़ा हो रहा था तो उसे खाली समय में सिगरेट पीने की आदत पड़ गई। उसने सिगरेट पीना अपने पिता और दोस्तों से सीखा था। जब वह अपने टीनएज में पहुंचा तो खाली टाइम में या फिर कोई टेंशन होने पर सिगरेट पीना उसका रूटीन बन गया था।

जॉनी ने कभी नहीं सोचा था कि उसके सिगरेट पीने की आदत से कुछ बुरा भी हो सकता है। उसके साथ सारे दोस्तों की सेहत अच्छी थी। लेकिन एक दिन उसे पता चला कि उसके पिता को फेफड़ों का कैंसर हो गया था। यह बहुत गंभीर बीमारी थी ।

जॉनी इस बात से डर गया। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उसने सिगरेट का एक पैकेट पीया है या सिर्फ एक सिगरेट पी है क्योंकि इससे भी वो अपने शरीर को नुकसान पहुंचा रहा था। इस दुखद घटना ने जॉनी को अपनी आदत पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर कर दिया।

उसने सिगरेट छोड़ने और अपनी आदत बदलने का फैसला किया। जॉनी ने सोचा कि जैसे-जैसे वह बड़ा होगा, उसकी सेहत का क्या होगा। उसने अपनी सेहत पर ध्यान देना शुरू किया और लगातार ऐसे रूटीन को बनाए रखा जो उसकी सेहत के लिए अच्छा था। इस रुटीन में एक्सरसाइज़ और वर्कआउट करना शामिल था।
जॉनी ने कभी नहीं सोचा था कि उसके सिगरेट पीने की आदत से कुछ बुरा भी हो सकता है। उसके साथ सारे दोस्तों की सेहत अच्छी थी। लेकिन एक दिन उसे पता चला कि उसके पिता को फेफड़ों का कैंसर हो गया था। यह बहुत गंभीर बीमारी थी।

जॉनी इस बात से डर गया। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उसने सिगरेट का एक पैकेट पीया है या सिर्फ एक सिगरेट पी है क्योंकि इससे भी वो अपने शरीर को नुकसान पहुंचा रहा था। इस दुखद घटना ने जॉनी को अपनी आदत पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर कर दिया।

उसने सिगरेट छोड़ने और अपनी आदत बदलने का फैसला किया। जॉनी ने सोचा कि जैसे-जैसे वह बड़ा होगा, उसकी सेहत का क्या होगा। उसने अपनी सेहत पर ध्यान देना शुरू किया और लगातार ऐसे रूटीन को बनाए रखा जो उसकी सेहत के लिए अच्छा था। इस रुटीन में एक्सरसाइज़ और वर्कआउट करना शामिल था।

जॉनी ने इस आदत को धीरे-धीरे शुरू किया और तब तक करता रहा जब तक की ये उसकी आदत नहीं बन गई। उसने इसे एक दिन भी नहीं छोड़ा, और हर रोज एक्सरसाइज़ करता रहा। जॉनी ख़ुद देख पा रहा कि उसकी हेल्थ कितनी बेहतर हो गई थी. वो ज़्यादा अच्छा और स्ट्रोंग महसूस कर रहा था। उसके फिजिकल, मेंटल और इमोशनल हेल्थ में भी सुधार हुआ था।

21/02/2022

जो लोग अपना जीवन बदलना चाहते हैं। - जो लोग किसी आदत पर टिक नहीं सकते।

ऐसी दर्जनों किताबें हैं जो अच्छी आदतों के महत्व पर ज़ोर देती हैं। लेकिन वह कौन सा तरीका है जिससे आप किसी आदत को बनाए रखते हैं? आप हर दिन एक ही काम कैसे करते रहते हैं? यह समरी बताती है कि धीमी और आसान शुरुआत करना ही इसका जवाब है। आदतें बनाना मुश्किल नहीं है। आदतें बनाना आसान होता है जब आप दिन-ब-दिन इसकी प्रैक्टिस करते रहते हैं।

इस समरी से कौन- कौन सीखेगा?

• जो लोग अपना जीवन बदलना चाहते हैं। - जो लोग किसी आदत पर टिक नहीं सकते।

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जो बुरी आदतों के शिकार हैं।

ऑथर के बारे में

टायनैन एक जाने माने ऑथर, ब्लॉगर और ट्रैवलर हैं। उन्हें टाइम मैगज़ीन के टॉप 25 ब्लॉगर्स की लिस्ट में फीचर किया गया है, और उन्हें #1 बेस्ट सेलर का टाइटल भी मिला था। उनकी सात किताबों को कई भाषाओं में ट्रांसलेट किया जा चुका है।

Superhuman By Habit- A Guide to Becoming the B...Tynan

इंट्रोडक्शन

क्या आप अपने जीवन को बदलना चाहते हैं लेकिन नहीं जानते कि इसकी शुरुआत कहां से करें? क्या आपको ऐसा लगता है कि आप अटक गए हैं, लेकिन आप यह नहीं जानते कि आगे कैसे बढ़ें? क्या आप किसी काम को शुरू करना चाहते हैं, लेकिन डरते हैं कि हमेशा की तरह आगे चलकर उस काम में fail हो जाएंगे? क्या आप अपनी पुरानी आदतों को नई आदतों में बदलना चाहते हैं?

इस समरी से आप यह समझेंगे की आदत में कितनी ताकत होती है, और यह भी जानेंगे कि कोई आदत आपकी डेली लाइफ पर कैसे असर डालती है। आप यह भी सीखेंगे की अपनी पुरानी आदतों को कैसे छोड़ा जाए।

यह समरी आपको सावधान करेगी कि आपकी बुरी आदतों के लंबे समय के बाद क्या नतीजे हो सकते हैं। अगर हम किसी आदत को अपनाना चाहते हैं तो हमें पूरे विश्वास के साथ लगातार उस पर काम करना होगा।

इस समरी में ऑथर आपको बताएंगे कि आप अपनी मोटिवेशन को कैसे ढूंढें और उसे कैसे समझें। आदत पर प्रैक्टिस बनाए रखने में मोटिवेशन आपकी बहुत मदद करेगी. आप इस रहस्य को भी जान लेंगे कि आपकी बार-बार रूटीन को बदलने की आदत कितनी unhealthy होती है तो उससे बाहर कैसे निकला जाए।

आप अपनी प्रैक्टिस किस तरह शुरू करते हैं, यह बात बहुत मायने रखती है। इस समरी से आप यह सीखेंगे कि ऐसा रूटीन कैसे बनाएं जो आपके लाइफ स्टाइल के लिए फ़िट हो। आपको इसकी शुरुआत धीरे-धीरे करनी चाहिए और बाद में अपनी प्रैक्टिस बढ़ानी होगी। अगर हम अच्छी आदत डेवलप करना चाहते हैं तो हमें उस आदत पर धीरे-धीरे करके अपनी प्रैक्टिस बढ़ाते जाना चाहिए, एक साथ बहुत जयादा प्रैक्टिस हमें थका देगी और हम उस आदत को अपना नहीं पाएंगे।

आपके जीवन को बदलना उतना ही आसान हो सकता है जितना कि पूरी नींद लेना और सुबह सैर पर जाना। जब कुछ काम लंबे समय तक किए जाते हैं तो उनका बहुत बड़ा असर पड़ता है। हमारी आदतें एक सुखी और संतुष्ट जीवन जीने का सीक्रेट होती हैं।

What is a Habit, and Why Are Habits So Important? आदत एक ऐसा काम है जिसे कोई आदमी बार-बार करता है और उसमें उसे बहुत कम मेहनत लगानी पड़ती है। आदतें खुद के एक्सपीरियंस से भी बनाई जा सकती हैं। आदत में बहुत ताकत होती है क्योंकि यह बहुत कम मेहनत में आपके जीवन को बदल सकती है। लेकिन आदत बनाने का मुश्किल हिस्सा तो आदत की शुरुआत से ही शुरू होता है। अच्छी आदतों से आप बहुत बड़े-बड़े काम कर सकते हैं। यह आपके जीवन की quality में सुधार ला सकती हैं। अच्छी आदतें बनाने की पहली स्टेज आपको मुश्किल लग सकती है। लेकिन अगर आप इन आदतों को बनाए रखते हैं, तो ये आपको फायदा जरूर पहुंचाती हैं।

ज्यादातर आदतें भावनाओं को दिखाती हैं। अच्छी आदतें पॉजिटिव भावनाएं ला सकती हैं। अगर हम अच्छी और बुरी आदतों की तुलना करें तो पाएंगे कि बुरी आदतें नेगेटिव भावनाओं को बुलावा दे सकती हैं। अच्छी आदतें बनाने के लिए पक्के इरादे और इच्छा शक्ति यानी विल पावर की जरूरत होती है।

ग्रेसी एक कॉलेज स्टूडेंट थी। उसने आदतों की ताकत को महसूस किया। उसने यह भी महसूस किया कि उन आदतों ने कैसे उसका जीवन बदल दिया था।

जब ग्रेसी अपने कॉलेज के पहले साल में थी तो वह अपने असाइनमेंट और प्रोजेक्ट करने के लिए पूरी रात जागती थी। वह डेडलाइन से एक दिन पहले सारा काम पूरा करती थी। लेकिन लगभग हर रोज, ग्रेसी थका हुआ महसूस करती थी।

जब उसने आदत की ताकत को जाना, तो उसने डेडलाइन से एक हफ्ते पहले अपना होमवर्क करने की कोशिश की। उसने क्लास से तीन दिन पहले अपने लेसन को पढ़ने की आदत भी बना ली। अपने नए रूटीन से ग्रेसी बहुत अच्छा महसूस करने लगी। उसने ठीक से अपने टाइम को मैनेज किया और आठ घंटे की नींद लेने लगी।

ग्रेसी की सिचुएशन से पता चलता है कि उसके जीवन पर आदतों का कितना असर पड़ रहा था। यह उसके मूड, एनर्जी और नजरिए पर असर डाल रहा था । अच्छी आदतों से पॉजिटिव एनर्जी मिलती है। दूसरे केस में, हम जेसन की बात करेंगे। वह न्यूयॉर्क में एक लॉ फर्म में एसोसिएट का काम करता है। जेसन में एक बुरी आदत है । वह काम को टालता रहता है। अपनी बुरी आदत के कारण, जेसन को ऑफिस में डांट पड़ती रहती है।

उसका बॉस हमेशा गुस्से में रहता है क्योंकि वह आलसी है। जेसन के साथ काम करने वाले भी उसे ज्यादा पसंद नहीं करते। वे उसके पीछे से उसकी बुराई करते हैं क्योंकि वह हमेशा आखिरी मिनट में अपना काम पूरा करता है। जेसन को ये बुरा लगता है, वह सोचता है कि वह सारे काम गलत करता है।

इस सिचुएशन में आप देख सकते हैं कि जेसन की इस बुरी आदत के बहुत से गलत नतीजे निकले हैं। उसके काम टालने की आदत ने उसके पर्सनल और प्रोफेशनल दोनों जीवन पर गलत असर डाला है। जेसन को अपनी बुरी आदतों को बदलने की जरूरत है और वह इन्हें टाइम मैनेजमेंट के तरीकों से बदल सकता है। इस तरह अगर वह अपनी बुरी आदत को बदल देता है तो, उसे अपने बॉस और साथ काम करने वालों से तारीफ मिलेगी।

अंत में, यह उसके मूड को भी अच्छा करेगा और वह खुद के बारे में ज्यादा काँफिडेंट महसूस करेगा।

इस चैप्टर का हर example आदत की ताकत को दिखाता है। आदतों के बारे में अच्छी सोच डवेलप करना जरूरी है। आपको यह समझना होगा की नई आदतों को बनाने के लिए आप शुरुआत में जो त्याग करते हैं उनका अंत में बहुत अच्छा नतीजा निकलता है।

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